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करूँ कभी #अभिषेक लाडली...🙏 आँखों से बहते झरनों का...😭 मुझे दे दो भरोसा चरणों का...🙇 ॐ स्वस्ति श्री नीलकंठाय नमः “श्रीरामचरितमानस” केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार है। भगवान श्रीराम के मर्यादित आचरण और अन्य पात्रों के माध्यम से यह मनुष्य को धर्मानुसार अनुशासित जीवन जीने का संदेश देता है ! बाबा तुलसी ने “श्रीरामचरितमानस” के रूप में भारतीय साहित्य को एक ऐसी मणि सौंपी है जिसकी एकल आभा जटिल सांसारिकता से लेकर गहन आध्यात्मिकता तक के समस्त पथ को प्रशस्त करने में सक्षम है ! रामकथा केवल पारलौकिक जगत में सहारा बनने वाले पुण्य-कर्मों का संचय ही सुनिश्चित नहीं करती बल्कि इस कथा-धारा में मनुष्यता का वह संजीवनी तत्व शामिल है, जिसके बल पर लौकिक जगत में एक अत्यंत सुंदर एवं सौहार्दपूर्ण समाज की परिकल्पना अत्यंत सरलता से साकार की जा सकती है। 🙏 भगवान कृष्ण मेरे आराध्य, विश्वास मेरी ऊर्जा, संस्कार मेरे शस्त्र, 🇮🇳 माँ, मातृभूमि, मातृभाषा मेरे लिए सर्वोपरि 🙏 For any Issues / Copyright discussions contact AbhishekVssct@gmail.com

"Safety in Hazardous Area"

Safety in Hazardous Area — खतरनाक क्षेत्र (Hazardous Area) में इलेक्ट्रिकल सुरक्षा (Hindi Notes)
SAFETY, HEALTH AND ENVIRONMENT — Chapter 16

खतरनाक क्षेत्र (Hazardous Area) में इलेक्ट्रिकल सुरक्षा
(Safety in Hazardous Area)

पूरी किताब के पेज 264 से 274 तक की जानकारी — आसान हिन्दी में, Point-wise और Bihar Board स्टूडेंट्स के लिए बिल्कुल सरल भाषा में।

👉 यह नोट्स उन फैक्ट्री और प्लांट्स की जानकारी देते हैं जहाँ ज्वलनशील (आग पकड़ने वाली) गैस, धूल या लिक्विड मौजूद रहती हैं — जैसे केमिकल प्लांट, माइंस, रिफाइनरी आदि। इनमें इस्तेमाल होने वाले खास सुरक्षित इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट (Flameproof, Increased Safety, Intrinsically Safe आदि) और स्पार्क, फॉल्ट व फ्लैशओवर से जुड़ी पूरी जानकारी दी गई है। हर टॉपिक को छोटे-छोटे पॉइंट्स में लिखा गया है ताकि परीक्षा के लिए याद करना आसान हो।

16.1 परिचय (Introduction)1

  • इंडस्ट्रियल प्लांट में कुछ जगहें ऐसी होती हैं जहाँ नीचे दी गई चीज़ें मौजूद होती हैं — इन्हें हैज़र्डस लोकेशन (खतरनाक जगह) कहा जाता है:
तेज़ ज्वलनशील गैस (Highly Inflammable Gases) ज्वलनशील लिक्विड धूल (Dust) ज्वलनशील रेशे हवा में उड़ते हुए (Combustible Fibres) हाई प्रेशर स्टोरेज
  • पेट्रोल, नाफ्था, बेंज़ीन, एसीटोन, ईथर जैसे ज्वलनशील लिक्विड्स जब हवा में उड़ते हैं, तो ये आग पकड़ने वाला (Explosive) मिश्रण बना सकते हैं।
  • हवा और ज्वलनशील गैस का मिश्रण इलेक्ट्रिक स्पार्क या आर्क मिलते ही विस्फोट (Explosion) कर सकता है।

16.2 एक्सप्लोज़न-प्रूफ इक्विपमेंट (Explosion-Proof Equipment)2

  • ऐसी जगहों पर लगे इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट/एनक्लोज़र को एक्सप्लोज़न-प्रूफ बनाया जाता है, ताकि अंदर हुआ स्पार्क या धमाका बाहर न फैले।
  • इसके लिए 4 मुख्य बातें ध्यान में रखी जाती हैं:
  • (1) इक्विपमेंट को जितना हो सके, हैज़र्डस लोकेशन से दूर रखा जाए।
  • (2) एनक्लोज़र (Enclosure) इतना मज़बूत बनाया जाए कि अंदर हुए विस्फोट के प्रेशर को झेल सके
  • (3) एनक्लोज़र को इतना टाइट (कसा हुआ) बनाया जाए कि अंदर की फ्लेम या स्पार्क बाहर न निकल सके।
  • (4) फ्लेम-प्रूफ इक्विपमेंट/इंस्टालेशन उसी जगह लगाया जाए जहाँ विस्फोटक गैस न के बराबर (Absent) हो, और उसे तय कोड्स/स्टैंडर्ड्स के हिसाब से बनाया जाए।

16.3 हैज़र्डस इंडस्ट्रियल ज़ोन क्लास 0, 1 और 23

  • माइंस, केमिकल प्लांट, फर्टिलाइज़र प्लांट, रिफाइनरी, थर्मल पावर स्टेशन (कोयला/हाइड्रोजन गैस के इस्तेमाल की वजह से) — इन जगहों पर हैज़र्डस ज़ोन बनते हैं।
  • बहुत सी इंडस्ट्रीज़ बर्नर, फर्नेस ऑयल स्टोरेज के लिए फर्नेस ऑयल इस्तेमाल करती हैं। कई जगह फ्लैमेबल गैस/लिक्विड को पाइपलाइन/टैंकर से हैज़र्डस ज़ोन तक ले जाया जाता है।
  • ऐसी जगहों पर हैज़र्डस ज़ोन की डिग्री, IS: 5572 Part 1 – 1970 के अनुसार Zone-0, Zone-1 और Zone-2 में बाँटी जाती है।

🔵 Zone 0

  • यह वह ज़ोन है जहाँ ज्वलनशील गैस लगातार (Continuously) मौजूद रहती है और वहाँ आग पकड़ने की हमेशा संभावना रहती है।
  • इसलिए इस ज़ोन में इलेक्ट्रिकल स्पार्क या ओवरहीटिंग पैदा करने वाले उपकरण का चुनाव बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। जहाँ तक हो सके, इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण इंट्रिन्सिकली सेफ होना चाहिए।

🟠 Zone 1

  • यह वह ज़ोन है जहाँ ज्वलनशील वातावरण सामान्य ऑपरेशन के दौरान कभी-कभी (Sometime) मौजूद हो सकता है, लेकिन हमेशा नहीं।

🟡 Zone 2

  • इस ज़ोन में हैज़र्ड सिर्फ असामान्य परिस्थिति (Abnormal Condition) में होता है — जैसे किसी उपकरण की प्रेशराइज़ेशन फेल होने पर या पाइप/सिलेंडर से गैस लीक होने पर।
  • यह छोटी अवधि के लिए ही होता है, इसलिए इन जगहों पर लगे इक्विपमेंट में अगर स्पार्किंग सिस्टम फेल हो जाए, तो अलग से सेफ्टी सिस्टम/ऑटोमैटिक स्विचिंग ऑफ या बढ़ी हुई सावधानी बरती जानी चाहिए।

16.4 गैसों और वाष्पों (Gases & Vapours) का वर्गीकरण4

  • फ्लेम-प्रूफ इक्विपमेंट को बनाने के लिए एनक्लोज़र के फ्लांज (Flange) की गैप-लेंथ और गैप-ब्रेडथ तय करनी पड़ती है — यह इस पर निर्भर करता है कि आसपास कौन-सी गैस मौजूद है।
  • इसलिए इलेक्ट्रिकल इंस्टालेशन में इस्तेमाल होने वाली इंडस्ट्रियल गैसों/वाष्पों को IS: 2148 – 1968 के अनुसार 4 ग्रुप्स में बाँटा गया है — Group I, IIA, IIB, IIC
Classगैस/वाष्प के उदाहरण
Iमीथेन (Firedamp)
IIAअमोनिया, इंडस्ट्रियल मीथेन, ब्लास्ट फर्नेस गैस, कार्बन मोनोऑक्साइड, ऐसीटोन, एथिल मिथाइल कीटोन, n-प्रोपाइल एसीटेट, एमाइल एसीटेट, क्लोरोइथाइलीन, मेथेनॉल, इथेनॉल, ब्यूटेन, प्रोपेन, पेंटेन, हेक्सेन, n-ब्यूटेनॉल, आइसो-ब्यूटेनॉल, आइसो-ऑक्टेन, हेप्टेन, एमाइल एल्कोहॉल, एमाइल नाइट्राइट, मिथाइल एसीटेट, एथिल एसीटेट, बेंज़ीन, डेकेन, आइसो-ऑक्टेन, साइक्लो हेक्सेन, ज़ाइलीन
IIB1,3-ब्यूटाडाइन, एथिलीन ऑक्साइड, टाउन गैस, कोक-ओवन गैस
IICहाइड्रोजन, एथिलीन, डाइएथिल ईथर
💡 ध्यान दें: हाइड्रोजन, अमोनिया, मीथेन, ब्यूटेन, एसीटीलीन, एथेनॉल जैसी गैस/वाष्प — केमिकल प्लांट्स, माइंस और इलेक्ट्रिकल पावर प्लांट्स में आम तौर पर मौजूद रहती हैं (Table 16.2)।

16.5 इक्विपमेंट/एनक्लोज़र का वर्गीकरण (Type d, e, n, p, i, o, s)5

  • हैज़र्डस लोकेशन के लिए इक्विपमेंट का चुनाव 2 चीज़ों पर निर्भर करता है — (1) वातावरण में मौजूद गैस/वाष्प की क्लास (I, IIA, IIB, IIC) और (2) इक्विपमेंट/मशीन के एनक्लोज़र का टाइप।
Class (Type)नाम
Type dफ्लेमप्रूफ (Flameproof)
Type eइंक्रीज़्ड सेफ्टी (Increased Safety)
Type nनॉन स्पार्किंग (Non Sparking)
Type pप्रेशराइज़्ड (Pressurised)
Type iइंट्रिन्सिकली सेफ (Intrinsically Safe)
Type oऑयल-इमर्स्ड (Oil Immersed)
Type sसैंड फिल्ड (Sand Filled)

🛡️ 16.5.1 फ्लेमप्रूफ इक्विपमेंट/एनक्लोज़र (Type d)

  • सिम्बल: Ex.d   |   स्टैंडर्ड: IS: 2148—1968
  • हैज़र्डस ज़ोन: Zone 1 और Zone 2
  • किन इक्विपमेंट में इस्तेमाल: जनरेटर, मोटर, ट्रांसफार्मर, स्विचगियर, कंट्रोल गियर, रेसिस्टर, लाइटिंग फिटिंग्स
  • खासियत (Characteristics): मज़बूत (Robust), मेंटेन करने योग्य (Maintainable)
  • कमियाँ (Limitations): साइज़ में बड़ा, कीमत ज़्यादा, बड़ी मोटर/जनरेटर के लिए इस्तेमाल करना व्यवहारिक नहीं है।
  • डिज़ाइन खासियत: फ्लांज के बीच बहुत छोटा गैप और बहुत लंबी चौड़ाई, मज़बूत बनावट (Construction)।

⚡ 16.5.2 इंक्रीज़्ड सेफ्टी इक्विपमेंट/एनक्लोज़र (Type e)

  • सिम्बल: Ex.e   |   स्टैंडर्ड: IS: 6381—1972
  • हैज़र्डस ज़ोन: Zone 2
  • किन इक्विपमेंट में इस्तेमाल: केज मोटर, लाइटिंग फिटिंग्स, इंस्ट्रूमेंट्स, इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर (CT, PT), हेड लैंप्स, टॉर्च
  • परिभाषा: इसमें ऐसे एक्स्ट्रा मैकेनिकल/इलेक्ट्रिकल/थर्मल सुरक्षा उपाय जोड़े जाते हैं, जिससे मशीन में ज़्यादा टेम्परेचर, आर्क और स्पार्क होने की संभावना कम हो जाए।
  • टाइप e उपकरणों में एक्स्ट्रा फीचर दिए जाते हैं ताकि स्पार्क, आर्क, हॉट स्पॉट और ज़्यादा टेम्परेचर से इग्निशन (आग लगने) की संभावना कम हो जाए।

⚖️ फ्लेमप्रूफ (d) बनाम इंक्रीज़्ड सेफ्टी (e) — तुलना

Flameproof (d)Increased Safety (e)
महँगा (Costlier)सस्ता (Cheaper)
अंदर इग्निशन की अनुमति हैअंदर इग्निशन खत्म कर दी गई है
750 kW से ऊपर की मोटर के लिए व्यवहारिक नहींमोटर के लिए कोई साइज़ लिमिट नहीं
  • Increased Safety (e) कॉन्सेप्ट जर्मनी (German) मूल का है। यह कोल माइनिंग और केमिकल/पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्रीज़ की मोटरों में यूरोप भर में इस्तेमाल होता है।
  • 'Type e' मोटर की कीमत, उतनी ही आउटपुट वाली फ्लेमप्रूफ मोटर से काफी कम होती है। साथ ही, Increased Safety का फायदा यह है कि यह किसी भी साइज़ की मशीन पर लगाया जा सकता है — क्योंकि 750 kW से ऊपर फ्लेमप्रूफ एनक्लोज़र इस्तेमाल करना व्यवहारिक नहीं रहता।

16.6–16.7 इंक्रीज़्ड सेफ्टी की डिज़ाइन खासियत व नॉन-स्पार्किंग इक्विपमेंट6

🔧 16.6 इंक्रीज़्ड सेफ्टी इक्विपमेंट की डिज़ाइन खासियत

  • IS: 6381—1972 के अनुसार Type e इक्विपमेंट में ये डिज़ाइन फीचर होने चाहिए:
  • धूल, नमी और पानी को रोकने के लिए न्यूनतम प्रोटेक्शन डिग्री IP-54 (IS: 4691—1968 के अनुसार)।
  • सभी टर्मिनल में एंटी-लूज़निंग डिवाइस होना चाहिए, ताकि तापमान बदलने और वाइब्रेशन के बावजूद टर्मिनल कसे हुए रहें।
  • चलने वाले (Moving) और स्थिर (Fixed) पुर्जों के बीच मैकेनिकल क्लीयरेंस तय की गई मिनिमम दूरी से कम नहीं होनी चाहिए (जैसे फैन कवर और फैन ब्लेड के बीच, स्टेटर और रोटर के बीच)।
  • इंसुलेशन क्लास ऐसी होनी चाहिए कि वह सामान्य मशीन से 10°C ज़्यादा तापमान झेल सके।
  • क्रीपेज (Creepages) और क्लीयरेंस (Clearances) स्टैंडर्ड में तय न्यूनतम से ज़्यादा होने चाहिए।
  • हैज़र्डस लोकेशन में इस्तेमाल होने वाली गैसों को उनके इग्निशन टेम्परेचर के आधार पर T1 से T6 क्लास में बाँटा गया है।
  • Increased Safety मशीनों का अधिकतम हॉट स्पॉट टेम्परेचर (फुल-लोड कंडीशन में, और साथ ही सेकंड लॉक्ड-रोटर कंडीशन में भी) उस गैस के T1 से T6 क्लास के हिसाब से तय अधिकतम तापमान से कम होना चाहिए।

✨ 16.7 नॉन-स्पार्किंग इक्विपमेंट/एनक्लोज़र (Type n)

  • सिम्बल: n   |   स्पेसिफिकेशन: BS 5000 Part 16   |   हैज़र्डस ज़ोन: Zone 2
  • किन इक्विपमेंट में इस्तेमाल: मोटर, लाइटिंग फिटिंग्स

16.8–16.9 प्रेशराइज़्ड इक्विपमेंट (Type p)7

🚀 16.8 इंस्टालेशन में अतिरिक्त प्रावधान

  • सेफ स्टार्टिंग डिवाइस: ये डिवाइस इसलिए लगाए जाते हैं ताकि जब तक शुरुआती वातावरण से खतरनाक गैस पूरी तरह न हट जाए, तब तक एनक्लोज़र के अंदर कोई भी उपकरण (Apparatus) एनर्जाइज़ न हो।
  • प्रोटेक्टिव और स्विचिंग डिवाइस: ये डिवाइस मोटर को सप्लाई और लोड से जुड़ी असामान्य (Abnormal) स्थितियों से सुरक्षा देते हैं, जब तक कि केसिंग पूरी तरह से डिस्प्लेस (हट) न जाए।

💨 16.9.1 Type 'p' इंस्टालेशन का सिद्धांत

  • सिम्बल: Ex.p   |   स्टैंडर्ड: IS: 7389—1974   |   हैज़र्डस ज़ोन: Zone 1 और Zone 2
  • प्रेशराइज़ेशन एक ऐसी तकनीक है जिसमें अंदर के इलेक्ट्रिकल पुर्जों को एनक्लोज़र के अंदर बंद किया जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी विस्फोटक गैस अंदर घुस न पाए।
  • एनक्लोज़र के अंदर की गैस को शुरुआत में ड्राई एयर या नाइट्रोजन गैस से पर्ज (Purge) किया जाता है, जिससे अंदर मौजूद खतरनाक गैस बाहर निकल जाती है।
  • एनक्लोज़र के अंदर बाहरी वातावरण से थोड़ा ज़्यादा प्रेशर बनाए रखा जाता है, जिससे बाहरी विस्फोटक गैस के दोबारा अंदर घुसने से पहले ही बाहर की ओर धकेल दिया जाता है।
  • बड़ी मशीनों के लिए, एनक्लोज़र के अंदर एक पूरी तरह बंद (Totally Enclosed) दोहरे (Dual) सर्किट प्रकार का सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें आमतौर पर एनक्लोज़र में 5 मीटर पानी के गेज (Water Gauge) से ज़्यादा प्रेशर बनाए रखा जाता है।
  • छह या पाँच बार वॉल्यूम के हिसाब से गैस टाइट एनक्लोज़र को ड्राई एयर या नाइट्रोजन से पर्ज किया जाता है, ताकि इंटीरियर पूरी तरह कंट्रोल्ड और मॉनिटर हो सके, इससे पहले कि मोटर हवा के आउटलेट पोर्ट को शुरू करे।

🟢 16.9.2 नाइट्रोजन फिल्ड इक्विपमेंट

  • ऐसे इक्विपमेंट में नाइट्रोजन को इनर्ट गैस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और यह दहन (Combustion) को सपोर्ट नहीं करती। ड्राई ट्रांसफार्मर, सर्ज अरेस्टर, पोर्सिलेन एनक्लोज़्ड इक्विपमेंट, वाल्व इत्यादि इसके उदाहरण हैं।
  • इक्विपमेंट को हाई-प्रेशर नाइट्रोजन गैस सिलेंडरों से भरा जाता है (नाइट्रोजन प्रेशर 2 बार)। नाइट्रोजन गैस का यह पॉज़िटिव प्रेशर, इक्विपमेंट के अंदर नमी, ज़हरीली/ऑक्सीजन गैसों को घुसने से रोकता है। इससे इक्विपमेंट को नमी, संक्षारण (Deterioration) और विस्फोट से सुरक्षा मिलती है।

🌀 16.9.3 सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF₆) गैस इंसुलेटेड सब-स्टेशन और इक्विपमेंट

  • SF₆ गैस इंसुलेटेड इलेक्ट्रिकल प्लांट्स और इक्विपमेंट, एक बुझाने वाली (Extinguishing), नॉन-एक्सप्लोसिव प्रॉपर्टी वाली गैस का इस्तेमाल करते हैं जिसमें बेहतरीन इंसुलेटिंग और आर्क-बुझाने की क्षमता होती है।
  • SF₆ सब-स्टेशन में सभी कंडक्टिंग पार्ट्स, इंसुलेटर, एनक्लोज़र आदि इपॉक्सी इंसुलेटर पर सपोर्टेड होते हैं और सील बंद एनक्लोज़र में SF₆ गैस से भरे होते हैं। ये आपस में एक बंद सिस्टम में जुड़े होते हैं, इसलिए बाहरी नमी, धूल, नमी और डिस्चार्ज इनमें प्रवेश नहीं कर पाते।
  • SF₆ गैस के प्रेशर की वजह से इंसुलेटर आर्क, हीट डिस्चार्ज आदि से मुक्त रहते हैं। एनक्लोज़र की इलेक्ट्रिकल स्ट्रेंथ SF₆ गैस की डाई-इलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ के 3 बार के क्रम में होती है।

16.10–16.11 इंट्रिन्सिकली सेफ व ऑयल इमर्स्ड इक्विपमेंट8

🔒 16.10 इंट्रिन्सिकली सेफ इक्विपमेंट (Type i)

  • सिम्बल: Ex.i   |   स्टैंडर्ड: IS: 5790—1970   |   हैज़र्डस ज़ोन: Zone 0, Zone 1 और Zone 2
  • किन इक्विपमेंट में इस्तेमाल: इलेक्ट्रॉनिक और कम करंट वाले उपकरण, कंट्रोल रूम अप्पेरेटस, इंस्ट्रूमेंटेशन, कंट्रोल रिले पैनल इत्यादि।
  • परिभाषा: जब सर्किट का कोई भी हिस्सा नॉर्मल या फॉल्ट कंडीशन में स्पार्क या थर्मल इफेक्ट (गर्मी) पैदा करता है (जैसे किसी सर्किट को खोलना, बंद करना, शॉर्ट सर्किट करना, या अर्थ फॉल्ट होना), तो वह इतनी कम ऊर्जा में होता है कि यह किसी टेस्ट में तय किए गए कंडीशन के तहत गैस या वाष्प को इग्नाइट (आग) नहीं कर सकता
  • यानी यह सर्किट अपनी बनावट से ही इतना कम पावर/लो एनर्जी होता है कि इससे विस्फोट होने की गुंजाइश ही नहीं रहती।

🛢️ 16.11 ऑयल इमर्स्ड इक्विपमेंट (Type o)

  • सिम्बल: Ex.o   |   स्टैंडर्ड: IS: 7693—1975
  • किन इक्विपमेंट में इस्तेमाल: ट्रांसफार्मर, CT, VT, ऑयल सर्किट ब्रेकर, ऑयल-फिल्ड केबल्स
  • ध्यान देने वाली बात (Remarks): ट्रांसफार्मर में इस्तेमाल होने वाला डाइइलेक्ट्रिक ऑयल IEC-296, IS: 335-1983 और BS: 148-1972 के अनुसार होना चाहिए। ट्रांसफार्मर ऑयल के लिए ज़रूरी स्पेसिफिकेशन नीचे दी गई है।
  • जब ऑयल इमर्स्ड इक्विपमेंट में हॉट स्पॉट टेम्परेचर 85°C से ज़्यादा हो जाता है, तो ऑयल में ज्वलनशील गैसें (Combustible Gases) निकलने लगती हैं।

16.12 परमिसिबल हॉट स्पॉट टेम्परेचर व फ्लैश पॉइंट9

  • ट्रांसफार्मर या दूसरे ऑयल इमर्स्ड इक्विपमेंट में हॉट स्पॉट टेम्परेचर उस सिस्टम के सबसे कमज़ोर बिंदु (Weakest Point) पर होता है।
  • अगर हॉट स्पॉट टेम्परेचर 85°C से ज़्यादा हो जाए, तो ऑयल तेज़ी से वेपोराइज़ होना शुरू कर देता है, कूलिंग सिस्टम की डिज़ाइन और लोडिंग ऐसी होनी चाहिए कि हॉट स्पॉट टेम्परेचर 80°C से ज़्यादा न हो।
  • ऑयल इमर्शन का सिद्धांत — इंसुलेटिंग मटेरियल (90°C for Class V और 130°C for Class B) की स्टैंड टेम्परेचर के मुकाबले, कंडक्टर और इंसुलेशन सिस्टम की हॉट स्पॉट टेम्परेचर सीमा तय होती है; इस लिमिट से कंडक्टर्स की कोई विशेष चिंता नहीं होती, बल्कि इंसुलेटिंग मटेरियल द्वारा उपलब्ध कराई गई ज्वलनशील गैसों की लिमिट होती है।

🔥 फ्लैश पॉइंट (Flash Point) — 140°C

  • फ्लैश पॉइंट वह तापमान है जिस पर ज्वलनशील गैसें इतनी सघनता (Concentration) से निकलती हैं कि वे इग्नाइट (आग पकड़) कर सकती हैं।
  • फ्लैश पॉइंट कम्बस्टिबल गैसों के भाप बनने की प्रवृत्ति (Tendency to Evaporate) दर्शाता है। ट्रांसफार्मर के डिज़ाइन के लिए, फ्लैश पॉइंट का अधिक होना (Higher) बेहतर माना जाता है, क्योंकि कम फ्लैश पॉइंट (140°C) वाला ऑयल हॉट स्पॉट टेम्परेचर पर तेज़ी से वेपोराइज़ हो जाता है, जिससे ऑयल की चिपचिपाहट (Viscosity) कम हो जाती है और तेल का कुल आयतन बढ़ जाता है।

16.13 सैंड फिल्ड इंस्टालेशन (Type s)10

  • सिम्बल: Ex.s   |   स्टैंडर्ड: IBC 79—5
  • हैज़र्डस लोकेशन में केबल ट्रेंच (गड्ढे) को रेत (Sand) से भरा जाता है और उसे पत्थर के स्लैब या RCC स्लैब से ढका जाता है।

📋 Table 16.5 — विभिन्न प्रकार के इक्विपमेंट/एनक्लोज़र का सारांश

सिम्बलटाइप स्टैंडर्डहैज़र्डस ज़ोनकिसके लिए
dफ्लेम प्रूफ, IS: 2148—1968Zone 1, Zone 2मोटर, जनरेटर, ट्रांसफार्मर, स्विच-गियर, कंट्रोल गियर, रेसिस्टर, हीटर, लाइटिंग फिटिंग्स
eइंक्रीज़्ड सेफ्टी, IS: 6381—1972Zone 2केज मोटर, लाइटिंग फिटिंग्स, इंस्ट्रूमेंट्स, इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर, हेड लैंप्स, टॉर्च
Nनॉन-स्पार्किंग, BS 5000 Pt. 16Zone 2मोटर, लाइटिंग फिटिंग्स
pप्रेशराइज़्ड, IS: 7389—1974Zone 1, Zone 2ज़्यादातर इक्विपमेंट, खासकर इंस्ट्रूमेंटेशन
iइंट्रिन्सिक सेफ्टी, IS: 5790—1970Zone 0, Zone 1, Zone 2लो करंट इक्विपमेंट, लाइट करंट इंस्ट्रूमेंटेशन
oऑयल इमर्सर्स, IS: 7693—1975Zone 1, Zone 2स्विचगियर, कंट्रोल गियर, ट्रांसफार्मर
sसैंड फिल्ड, IS: 879—5Zone 1, Zone 2इलेक्ट्रिकल अप्पेरेटस सामान्य रूप से

16.14 स्पार्क, फ्लैशओवर और कोरोना डिस्चार्ज11

  • हर इलेक्ट्रिकल प्लांट/इक्विपमेंट में करंट कैरी करने वाले कंडक्टर और उनके इंसुलेशन सिस्टम होते हैं। प्लांट में मेन पावर सर्किट और लो वोल्टेज सर्किट के लिए मॉनिटरिंग व प्रोटेक्शन दोनों होते हैं।
  • हर बार स्विचिंग ऑपरेशन (करंट कैरी करने वाले सर्किट को खोलना/बंद करना) एक स्पार्क-आर्क के साथ होता है, जो करंट कैरी करने वाले कॉन्टैक्ट्स के बीच होता है जब आइसोलेटर स्विच खोलते या बंद करते वक्त फ्लैश-ओवर पैदा करता है, जबकि आइसोलेटर पोल के कॉन्टैक्ट्स करीब बंद हो रहे होते हैं।

⚡ फ्लैशओवर (Flashover)

  • हाई डाइइलेक्ट्रिक स्ट्रेस के प्रभाव में करंट कैरी करने वाले कंडक्टर की सतह पर या किसी कंडक्टर के तेज़ कोनों (Sharp Corners) पर स्पेस में फ्लैशओवर हो सकता है।
  • करंट कैरी करने वाले कंडक्टर की सतह पर गंदे (Dirty) डाइइलेक्ट्रिक स्ट्रेस की वजह से भी फ्लैशओवर हो सकता है, फेज़ से अर्थ या फेज़ से फेज़ के बीच स्विचिंग सर्ज के दौरान।

🌀 कोरोना डिस्चार्ज (Corona Discharge)

  • कोरोना डिस्चार्ज तब होता है जब कंडक्टर की सतह के कुछ बिंदुओं पर वोल्टेज स्ट्रेस, हवा की क्रिटिकल विदस्टैंड स्ट्रेंथ (सहनशक्ति) से ज़्यादा हो जाती है। कोरोना, हैज़र्डस ज़ोन में विस्फोट शुरू कर सकता है।

💥 स्पार्क और लूज़ कॉन्टैक्ट्स

  • करंट कैरी करने वाले कंडक्टर में स्पार्क और आर्क, तब पैदा होते हैं जब इंसुलेशन फेल हो जाती है — मैकेनिकल/थर्मल लोड के जंप होने की वजह से, या उम्र बढ़ने, नमी, संक्षारण या ओवरवोल्टेज की वजह से।
  • लूज़ कॉन्टैक्ट्स (Loose Contacts) करंट कैरी करने वाले सर्किट में स्पार्क पैदा करते हैं, अगर स्विचिंग सर्ज या बिजली गिरने के दौरान फेज़ से अर्थ या फेज़ से फेज़ के बीच में उछाल आ जाए।

📋 Table 16.6 — इलेक्ट्रिकल प्लांट्स/मशीनों में स्पार्क व फ्लैशओवर के कारण

कारण (Cause)असर (Effect)
1. लूज़ कॉन्टैक्टस्पार्किंग, ओवरहीटिंग, मेल्टिंग — हाई रेसिस्टेंस, लूज़ कॉन्टैक्ट पर आर्किंग, पास की एक्सप्लोसिव गैसों में आग लगना
2. स्विचिंग ऑपरेशन (खोलना/बंद करना)करंट के जंप होने की वजह से कॉन्टैक्ट्स के बीच स्पार्किंग — स्विच बंद होने पर, स्विच खोलने पर, लूज़ कॉन्टैक्ट पर
3. ब्रश और कमुटेटर/स्लिप रिंग के बीच स्लाइडिंग कॉन्टैक्टब्रश और कमुटेटर/स्लिप रिंग के बीच स्पार्किंग — हाई करंट डेंसिटी, हवा के गैप में आयनीकरण, हाई लोकल टेम्परेचर, खराब कॉन्टैक्ट
4. कंडक्टर की सतह पर हाई वोल्टेज स्ट्रेसब्लूइश, ऑडिबल ग्लो डिस्चार्ज के रूप में कोरोना डिस्चार्ज
5. कम एयर-गैप के साथ हाई वोल्टेजओवर वोल्टेज सर्ज या खराब मौसम में स्पार्क/आर्क डिस्चार्ज
6. कंडक्टर की सतह पर तेज़ कोनेस्पार्क डिस्चार्ज, कोरोना
7. मूविंग मेटिंग सतहों के बीच अत्यधिक घर्षणथर्मल स्पार्क्स — गरम मेटल पार्टिकल्स के अलग होने और जलने से
8. करंट कैरी करने वाले कंडक्टर का टूटनाकरंट फ्लो में रुकावट से आर्क बनता है — करंट सबसे कम रेसिस्टेंस वाले रास्ते से जंप करता है
9. ओवरहीटेड रेसिस्टर/कंडक्टर/करंट कैरी करने वाली कॉइलकंडक्टर/रेसिस्टर/कॉइल रेड-हॉट होकर फेल हो जाता है और स्पार्क बनाता है — इंसुलेटिंग मटेरियल में जलन और विस्फोट

16.15 इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट में फॉल्ट (Faults)12

  • इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट में फॉल्ट (फेल्योर), इक्विपमेंट की कमज़ोरी की वजह से होते हैं — यह थर्मल, डाइइलेक्ट्रिक, मैकेनिकल और दूसरे स्ट्रेस को झेलने की क्षमता में कमी, और नैचुरल एजिंग प्रोसेस की वजह से होता है।
  • अच्छे प्रिवेंटिव मेंटेनेंस से फॉल्ट कम करने में मदद मिलती है। लेकिन फॉल्ट को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। फॉल्ट कम करने का उद्देश्य यह है कि सही सुधारात्मक (Corrective) कदमों से भविष्य में इसी तरह के फॉल्ट न हों और सुरक्षा सुनिश्चित हो।

16.16–16.17 फॉल्ट के खतरे व जाँच रिपोर्ट13

⚠️ 16.16 इलेक्ट्रिकल फॉल्ट का सेफ्टी हैज़र्ड

  • आमतौर पर इलेक्ट्रिक फॉल्ट को प्रोटेक्शन सिस्टम द्वारा पहचाना (सेंस किया) जाता है और उस ज़ोन के सर्किट ब्रेकर खोलकर फॉल्टी हिस्सा अपने आप डिस्कनेक्ट कर दिया जाता है, जिससे बड़ा नुकसान टल जाता है।
  • अगर प्रोटेक्टिव सिस्टम फेल हो जाए, सर्किट ब्रेकर फॉल्ट करंट क्लियर करने में नाकाम रहे, बिना किसी हस्तक्षेप के अचानक फ्लैशओवर हो जाए, या प्रोटेक्टिव कवरेज से परे कोई असामान्य स्थिति बने — तो नीचे दिए गए हादसे हो सकते हैं:
  • पोर्सिलेन इंक्लोज़्ड इक्विपमेंट का फटना: लंबे समय तक अंदर आर्किंग होने से पोर्सिलेन के टुकड़े अलग-अलग दिशाओं में उड़ते हैं, आसपास के इक्विपमेंट और आस-पास के कर्मचारियों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  • ऑयल फिल्ड इक्विपमेंट का फटना: लंबे समय तक अंदर आर्किंग और प्रेशर बनने से ट्रांसफार्मर टैंक फट सकता है। टुकड़े उड़ते हैं और आसपास के इक्विपमेंट को नुकसान पहुँचाते हैं। तेल बाहर निकल कर आग पकड़ लेता है, केबल ट्रेंच से बहता है और केबल्स नष्ट हो जाती हैं।
  • इनडोर ट्रांसफार्मर ऑयल से निकलने वाली ज़हरीली गैसें और धुआँ, वेंटिलेशन डक्ट्स के ज़रिए प्लांट और बिल्डिंग के अलग-अलग हिस्सों में फैल जाते हैं।
  • फॉल्ट के आसपास मौजूद ज्वलनशील मटेरियल में आग लग जाती है। धुआँ दूर-दूर तक फैल कर जान-माल का बड़ा नुकसान करता है।
💡 फॉल्ट जाँच का उद्देश्य: फॉल्ट के कारणों का विश्लेषण करना और ऐसे सुधारात्मक कदम सुझाना, ताकि भविष्य में वैसे और दूसरे फॉल्ट दोबारा न हों और सुरक्षा सुनिश्चित रहे।

📋 16.17 Table 16.7 — फॉल्ट जाँच की चेक-लिस्ट

क्र.सं.विवरण (Description)
1फेल हुए इक्विपमेंट की विज़ुअल जाँच
2फॉल्ट से पहले की घटनाओं की समीक्षा — लॉग बुक, इवेंट्स रिकॉर्डर रिकॉर्ड्स, ऑपरेटिंग ड्यूटी
3रिले ऑपरेशन का रिकॉर्ड, टाइमिंग्स, ब्रेकर ऑपरेटिंग्स, फॉल्ट रिकॉर्डर रिपोर्ट
4लेआउट और ऑपरेटिंग ड्यूटी का अध्ययन, क्रिटिकल रिपोर्ट्स से जुड़े ऑब्ज़र्वेशन
5फेल हुए इक्विपमेंट के कॉम्पोनेंट्स, इंसुलेशन, करंट कैरी करने वाले पार्ट्स, कूलिंग सिस्टम, मैकेनिकल ऑपरेशन की जाँच
6संभावित कारणों और उनकी प्रतिशत संभावना (Percentage Possibility) की लिस्ट
7लॉजिकल डिडक्शन के आधार पर संभावनाओं को खत्म करना
8फॉल्ट के कारण/कारणों पर निष्कर्ष (Conclusion)
9मूल कारणों (Root Causes) को खत्म करने के लिए सुधारात्मक कदमों की सिफारिशें
  • फॉल्ट जाँच रिपोर्ट में फेल्योर के कारण, भविष्य में इसी तरह के और दूसरे फॉल्ट रोकने के लिए किए जाने वाले सुधारात्मक कदम शामिल होते हैं।

16.18 सेफ्टी एश्योरेंस के लिए एक्सपर्ट सिस्टम्स14

  • असरदार और सुरक्षित प्लांट ऑपरेशन के लिए, कंट्रोल रूम इंजीनियर, मेंटेनेंस इंजीनियर और सेफ्टी इंजीनियर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एक्सपर्ट सिस्टम्स (ES) का इस्तेमाल बढ़ती संख्या में कर रहे हैं।
  • पारंपरिक तरीके (Traditional Method) में अनुभवी इंजीनियर अपनी ऑब्ज़र्वेशन, जजमेंट और मेमोरी का इस्तेमाल करते हुए समस्या का पहले से अंदाज़ा लगाकर, अनुभव और योजना के आधार पर प्रिवेंटिव कदम उठाते हैं।
  • AI और ES के तरीकों में, नॉलेज बेस को कंप्यूटर प्रोग्राम के रूप में तैयार किया जाता है, जिन्हें सभी संबंधित लोग इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे प्रोग्राम या तो खुद डेवलप किए जा सकते हैं या खरीदे जा सकते हैं।

🧠 16.18.1 एक्सपर्ट सिस्टम्स

  • मॉडर्न एक्सपर्ट सिस्टम, AI-भाषा पर आधारित "IF, THEN" रूल्स वाले प्रोग्राम्स को शामिल करता है।
  • यह सिस्टम संभावित समस्याओं और उनके समाधान की एक लिस्ट देता है, साथ में % संभावना (Possibility) भी बताता है।
  • यह लिस्ट इंजीनियरों के लिए बिना समय गँवाए समाधान खोजने और सुधारात्मक कदम उठाने में उपयोगी होती है।

🛠️ 16.18.2 मेंटेनेंस और ट्रबल शूटिंग के लिए एक्सपर्ट सिस्टम्स

  • प्लांट इंस्पेक्शन सिस्टम: यह मेंटेनेंस इंजीनियर को प्लांट और इक्विपमेंट के इंस्पेक्शन में मदद करता है — पीरियोडिक इंस्पेक्शन और प्रिडिक्टिव फेल्योर व प्रिवेंटिव मेंटेनेंस के लिए गाइडलाइन देता है।

📡 16.18.3 ऑन-लाइन मॉनिटरिंग एक्सपर्ट सिस्टम्स

  • ऐसे सिस्टम समय-समय पर ऑन-लाइन डेटा प्राप्त करते हैं। एक्सपर्ट सिस्टम इस डेटा का विश्लेषण करके पहले से फेल्योर की संभावना का अनुमान लगाता है और मेंटेनेंस स्टाफ को गंभीर परेशानी से बचने के लिए प्रिवेंटिव उपाय सुझाता है — जैसे ट्रांसफार्मर के ओवरहीटिंग के मामले में।

📝 सारांश (Summary)

हैज़र्डस एरिया को Zone-0, Zone-1 और Zone-2 में बाँटा जाता है (Table 16.1)। इलेक्ट्रिक स्पार्क, शॉर्ट सर्किट, फ्लैशओवर आदि हैज़र्डस ज़ोन में इसलिए वर्जित हैं क्योंकि ये विस्फोट और आग लगा सकते हैं। स्विच के खुलने-बंद होने के दौरान होने वाले स्पार्क भी हैज़र्डस ज़ोन में इस्तेमाल नहीं किए जाते। इसलिए इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और इंस्टालेशन को फ्लेम-प्रूफ बनाया जाता है। फ्लेम-प्रूफ इक्विपमेंट लंबे फ्लांज और बहुत छोटे गैप-लेंथ के साथ बनाया जाता है, ताकि अंदर हुआ स्पार्क या विस्फोट बाहर के ज़ोन में न फैले। इक्विपमेंट को अंदर होने वाले विस्फोट के प्रेशर को झेलने के लिए मज़बूती से बनाया जाता है। हैज़र्डस एरिया में खास तरह की सुरक्षा वाली इलेक्ट्रिकल इंस्टालेशन की ज़रूरत होती है।

सॉल्व्ड प्रश्न (Solved Questions)Q

Q. 16.1 — हैज़र्डस वेस्ट मैनेज करने की तकनीकें क्या हैं?

  • हैज़र्डस वेस्ट को हैंडल करने के 5 सबसे लोकप्रिय तरीके हैं:
  • 1. सेक्योर लैंडफिल  2. वेस्ट ट्रीटमेंट  3. डीप वेल इंजेक्शन  4. इंसिनरेशन (जलाना)  5. रिकवरी/रीसाइकल

Q. 16.2 — इंडस्ट्रियल हाइजीन हैज़र्ड्स क्या हैं?

  • इंडस्ट्रियल हाइजीन, वर्कप्लेस में मौजूद उन एनवायरनमेंटल हैज़र्ड्स की पहचान और मूल्यांकन करती है जो बीमारी, बिगड़ी हुई सेहत, असुविधा और अकुशलता पैदा कर सकते हैं, और उन्हें नियंत्रित/खत्म करने के तरीके बताती है। अलग-अलग हैज़र्ड्स:
  • केमिकल हैज़र्ड्स: पार्टिकुलेट्स, वाष्प, गैसें, मिस्ट, केमिकल सॉल्वेंट
  • फिज़िकल हैज़र्ड्स: तापमान, प्रेशर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक व आयनाइज़िंग रेडिएशन, शोर (Noise)
  • अर्गोनॉमिक हैज़र्ड्स: गलत टूल्स, उठाना (Lifting), बार-बार होने वाली हरकतें, अजीब पोज़िशन में काम करना
  • बायोलॉजिकल हैज़र्ड्स: कीड़े-मकोड़े, फंगी, बैक्टीरियल कंटैमिनेशन, सैनिटेशन, पर्सनल हाइजीन, सीवेज, हैज़र्डस इंडस्ट्रियल वेस्ट

❓ अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

  1. अलग-अलग संभव हैज़र्डस लोकेशन बताएँ।
  2. फ्लेम-प्रूफ इक्विपमेंट के डिज़ाइन और कंस्ट्रक्शन का सिद्धांत समझाएँ।
  3. हैज़र्डस ज़ोन के लिए साधारण (Ordinary) स्विच क्यों उपयुक्त नहीं है — समझाएँ।
  4. Zone-0, Zone-1 और Zone-2 हैज़र्डस एरिया में फर्क बताएँ।
  5. क्लास d फ्लेम-प्रूफ इक्विपमेंट की डिज़ाइन खासियत बताएँ। ऐसे इक्विपमेंट किस ज़ोन में इस्तेमाल के लिए सुझाए जाते हैं?
📘 Notes prepared for easy Hindi-medium exam revision — Chapter 16: Safety in Hazardous Area

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