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करूँ कभी #अभिषेक लाडली...🙏 आँखों से बहते झरनों का...😭 मुझे दे दो भरोसा चरणों का...🙇 “श्रीरामचरितमानस” केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार है। भगवान श्रीराम के मर्यादित आचरण और अन्य पात्रों के माध्यम से यह मनुष्य को धर्मानुसार अनुशासित जीवन जीने का संदेश देता है ! बाबा तुलसी ने “श्रीरामचरितमानस” के रूप में भारतीय साहित्य को एक ऐसी मणि सौंपी है जिसकी एकल आभा जटिल सांसारिकता से लेकर गहन आध्यात्मिकता तक के समस्त पथ को प्रशस्त करने में सक्षम है ! रामकथा केवल पारलौकिक जगत में सहारा बनने वाले पुण्य-कर्मों का संचय ही सुनिश्चित नहीं करती बल्कि इस कथा-धारा में मनुष्यता का वह संजीवनी तत्व शामिल है, जिसके बल पर लौकिक जगत में एक अत्यंत सुंदर एवं सौहार्दपूर्ण समाज की परिकल्पना अत्यंत सरलता से साकार की जा सकती है। 🙏 भगवान कृष्ण मेरे आराध्य, विश्वास मेरी ऊर्जा, संस्कार मेरे शस्त्र, 🇮🇳 माँ, मातृभूमि, मातृभाषा मेरे लिए सर्वोपरि 🙏 For any Issues / Copyright discussions contact AbhishekVssct@gmail.com
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श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, मोक्षसंन्यासयोग- नामक अठारहवाँ अध्याय (श्रीगीताजी का माहात्म्य)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, मोक्षसंन्यासयोग- नामक अठारहवाँ अध्याय (भक्ति सहित कर्मयोग का विषय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, मोक्षसंन्यासयोग- नामक अठारहवाँ अध्याय (ज्ञाननिष्ठा का विषय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, मोक्षसंन्यासयोग- नामक अठारहवाँ अध्याय (फल सहित वर्ण धर्म का विषय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, मोक्षसंन्यासयोग- नामक अठारहवाँ अध्याय (तीनों गुणों के अनुसार ज्ञान, कर्म, कर्ता, बुद्धि, धृति और सुख के पृथक-पृथक भेद)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, मोक्षसंन्यासयोग- नामक अठारहवाँ अध्याय (कर्मों के होने में सांख्यसिद्धांत का कथन)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, मोक्षसंन्यासयोग- नामक अठारहवाँ अध्याय (त्याग का विषय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, श्रद्धात्रयविभागयोग- नामक सत्रहवाँ अध्याय (ॐ तत्सत्‌ के प्रयोग की व्याख्या)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, श्रद्धात्रयविभागयोग- नामक सत्रहवाँ अध्याय (आहार, यज्ञ, तप और दान के पृथक-पृथक भेद)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, श्रद्धात्रयविभागयोग- नामक सत्रहवाँ अध्याय (श्रद्धा का और शास्त्रविपरीत घोर तप करने वालों का विषय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, दैवासुरसम्पद्विभागयोग- नामक सोलहवाँ अध्याय (शास्त्रविपरीत आचरणों को त्यागने और शास्त्रानुकूल आचरणों के लिए प्रेरणा)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, दैवासुरसम्पद्विभागयोग- नामक सोलहवाँ अध्याय (आसुरी संपदा वालों के लक्षण और उनकी अधोगति का कथन)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, दैवासुरसम्पद्विभागयोग- नामक सोलहवाँ अध्याय (फलसहित दैवी और आसुरी संपदा का कथन)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, पुरुषोत्तमयोग- नामक पंद्रहवाँ अध्याय (क्षर, अक्षर, पुरुषोत्तम का विषय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, पुरुषोत्तमयोग- नामक पंद्रहवाँ अध्याय (प्रभाव सहित परमेश्वर के स्वरूप का विषय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, पुरुषोत्तमयोग- नामक पंद्रहवाँ अध्याय (जीवात्मा का विषय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, पुरुषोत्तमयोग- नामक पंद्रहवाँ अध्याय (संसार वृक्ष का कथन और भगवत्प्राप्ति का उपाय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, गुणत्रयविभागयोग- नामक चौदहवाँ अध्याय (भगवत्प्राप्ति का उपाय और गुणातीत पुरुष के लक्षण)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, गुणत्रयविभागयोग- नामक चौदहवाँ अध्याय (सत्‌, रज, तम- तीनों गुणों का विषय)
श्रीमद्‍भगवद्‍गीता, गुणत्रयविभागयोग- नामक चौदहवाँ अध्याय (ज्ञान की महिमा और प्रकृति-पुरुष से जगत्‌ की उत्पत्ति)