इंडस्ट्रियल सेफ्टी एनालिसिस
(Industrial Safety Analysis — Fault Tree, FMEA, THERP)
पूरे चैप्टर 17 (पेज 275 से 291 तक) की जानकारी — आसान हिन्दी में, Point-wise और Bihar Board स्टूडेंट्स के लिए बिल्कुल सरल भाषा में।
👉 यह नोट्स सिस्टम सेफ्टी एनालिसिस, फॉल्ट ट्री एनालिसिस (FTA), फेल्योर मोड्स एंड इफेक्ट्स एनालिसिस (FMEA), THERP, PERT/CPM और रिस्क टॉलरेबिलिटी जैसी तकनीकों को समझाते हैं, जो इंडस्ट्री में हादसों (Hazards) को पहचानने और रोकने के लिए इस्तेमाल होती हैं। हर टॉपिक को छोटे-छोटे पॉइंट्स में लिखा गया है ताकि परीक्षा के लिए याद करना आसान हो।
📑 इस नोट्स में क्या-क्या है
- 17.1 परिचय (Introduction)
- 17.2 सिस्टम एनालिसिस में होमोजेनिटी
- 17.3 इंजरी सोर्स को लोकेट व डिफाइन करना
- 17.4 डाटा के स्रोत
- 17.5–17.8 चोट के कारण, जानकारी व जाँच
- 17.9–17.11 बाइनरी नंबर व कंप्यूटर लॉजिक
- 17.12 फॉल्ट ट्री एनालिसिस — गेट्स व सिंबल
- 17.13 फॉल्ट ट्री कैलकुलेशन (Boolean Algebra)
- 17.14 फॉल्ट ट्री की सीमाएँ
- 17.15 THERP
- 17.16 FMEA
- 17.17 PERT और CPM
- 17.18–17.19 रिस्क टॉलरेबिलिटी व 10-पॉइंट स्केल
- सारांश और अभ्यास प्रश्न
17.1 परिचय (Introduction)1
- सिस्टमैटिक एनालिसिस खतरनाक (Hazardous) प्रोसेस और ऑपरेशन के लिए सेफ्टी स्पेशलिस्ट का ज़रूरी काम है।
- इसका मकसद है — ज़रूरी जानकारी देना ताकि सेफ्टी प्रोसीजर को समझा और लागू किया जा सके।
- कई एनालिटिकल तकनीकों के इम्प्लीमेंटेशन, फायदे, नुकसान और लिमिटेशन पर चर्चा की जाती है।
- सिस्टम्स सेफ्टी एनालिसिस हर उस परिस्थिति की कल्पना (Imaginative Construction) करने की माँग करती है, जिसमें सिस्टम का कोई हिस्सा फेल हो सकता है।
- इसमें सिस्टम के फेल होने और उसके इफेक्ट (असर) को लाइफ एक्सपेक्टेंसी के दौरान अध्ययन करना होता है, और इसकी जाँच आक्रामक (Aggressive) तरीके से होनी चाहिए।
- सिस्टम एनालिसिस की शुरुआत सिंबॉलिक मोड या डायग्राम से होती है, जिससे सिस्टम को समझा जा सके।
- मॉडलिंग से सिस्टम की असली स्थिति (Facsimile) बनती है जिसे जाँचा जाता है — मॉडल हार्डवेयर और नॉन-हार्डवेयर, दोनों तरह के प्रभावों को दिखा सकता है।
- उदाहरण के लिए: एक OR गेट और AND गेट सर्किट, जिसमें स्विच A, B, C जुड़े होते हैं — जब कोई भी स्विच बंद हो तो लैंप जल जाता है (OR गेट), और जब दोनों स्विच बंद हों तभी लैंप जले (AND गेट)।
17.2 सिस्टम एनालिसिस में होमोजेनिटी (समरूपता)2
- सभी सिस्टम एनालिसिस, मिशन की सफलता को ऑप्टिमाइज़ करने की चिंता से जुड़ी होती हैं — यह एक सफलता की उपलब्धि है।
- यह उपलब्धि ऑर्डरली इन्वेस्टिगेशन के ज़रिए होती है, जिसमें सिस्टम कॉम्पोनेंट्स में एक कॉमन मेथडोलॉजी होती है।
- पिछले कुछ सालों में कई स्पेशलाइज़्ड सिस्टम एनालिसिस तकनीकें सामने आई हैं।
- जैसे: PERT, फॉल्ट ट्री — क्रिटिकल पाथ, फेल्योर मोड, दोनों का असर देखते हैं और अलग-अलग तरीके से आपातकालीन घटनाओं (Probable Failures) को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।
- फेल्योर पॉइंट्स यानी वे प्वाइंट जिनमें टेक्निकल सिस्टम्स की निगरानी करने वाली तकनीकें प्रोग्राम में क्रिटिकल पॉइंट्स पर उभरती हैं, वे नेटवर्क के दबाव में और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
- इफेक्टिव मॉनिटरिंग का मतलब है — फेल्योर के इंतज़ार में बैठे बिना, इंटॉलरेबल परिणाम पैदा होने से पहले ही चेतावनी वाली स्थितियाँ ढूँढ लेना।
- सिस्टम्स एनालिसिस टेक्नीक की जेनेसिस और ऑब्जेक्टिव्स विभिन्न विशेष तकनीकों की प्रेरणा देते हैं — ये यूनीक मेथड्स आमतौर पर सुझाए जाते हैं ताकि आवश्यकताओं की समझ में मदद मिले।
- सिस्टम, एक्सीडेंट्स के लिए तब कमज़ोर बन जाता है जब वह Definitive Information (परिभाषित जानकारी) के अभाव में, इंडिविजुअल इंटरेस्ट्स के मैनेजमेंट के लिए उपयुक्त हो जाता है।
- System Application (मान लीजिए) — कंसल्टेंट्स, रिलायबिलिटी इंजीनियर्स, डाटा प्रोसेसिंग स्पेशलिस्ट्स और दूसरे लोग सिस्टम एनालिसिस या सेफ्टी इंजीनियर की पोज़िशन को इस काम में स्पेशलाइज़ेशन के तौर पर पहचान सकते हैं।
17.3 इंजरी सोर्स को लोकेट व डिफाइन करना3
- हैज़र्ड फैक्टर्स को पहचानने की तकनीक अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सभी में ऑर्गनाइज़्ड डाटा इकट्ठा करने का तरीका (Repeating Factors and Glaring Errors को इंगित करने के लिए) होता है, ताकि ऑपरेशनल हैज़र्ड्स का विश्लेषण हो सके।
- यह प्रोसेस यह तय करता है कि क्या फैक्टर्स सबसे ज़्यादा चैलेंज करते हैं — सेफ्टी स्पेशलिस्ट को यह पता लगाना होता है कि कौन-से अनरिकग्नाइज़्ड हैज़र्ड्स हैं जिनके कारण ये सेफ्टी इवेंट्स होते हैं।
- डेफिनिटिव इंफॉर्मेशन, अपघातों (Accidents) के विश्लेषण के लिए उपयुक्त होती है, जब सिस्टम टर्बिड (गड़बड़) हो जाए।
- सिस्टम एनालिसिस, रिलायबिलिटी इंजीनियर्स, डाटा प्रोसेसिंग स्पेशलिस्ट्स और दूसरों के इंटरेस्ट्स को मैनेजमेंट में शामिल करता है, ताकि सीन में मौजूद बाकी लोगों की पोज़िशन को पहचाना जा सके।
- फॉल्ट ट्री जैसे यूनीक मेथड्स, अलग-अलग स्पेशल टेक्निक्स की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बनाई गई हैं और यह इस काम में जनरल एड (मदद) के तौर पर उपयोगी है।
17.4 डाटा के स्रोत (Sources of Data)4
- कंपेरिज़न (तुलना) के लिए इस्तेमाल होने वाला डाटा भरोसेमंद (Reliable) होना चाहिए। इंजरी की जानकारी को यथासंभव अच्छे से जुटाया जाना चाहिए, ज़्यादातर मामलों में हर घटना की जानकारी सावधानी से इकट्ठा करके, विस्तार से (Detail) डेवलप की जानी चाहिए।
- करेक्शन की ज़रूरत: जब भी सुधार (Corrections) की ज़रूरत हो, इंजरी के कारणों को पहचानने और उन पर हमला (Attack) करने के लिए कोशिश करनी चाहिए, ताकि तुलना और आदान-प्रदान (Comparisons and Exchange) आसान हो सके।
- इंजरी डाटा हासिल करने का मकसद यह है कि जिस समस्या से डील किया जा रहा है, उसके सभी कारकों (Factors) को समझा जाए — ताकि उनसे बचने के समाधान (Solutions to Prevent Them) खोजे जा सकें।
- सेफ्टी स्पेशलिस्ट को यह चैलेंज करना होता है कि अनरिकग्नाइज़्ड सेफ्टी हैज़र्ड्स को पहचानने और सांख्यिकीय रूप से इन घटनाओं के कारक तत्वों का विश्लेषण करने का काम सबसे बड़ा है।
17.5–17.8 चोट के कारण, जानकारी, तथ्य व इन्वेस्टिगेशन5-8
17.5 चोट के कारणों की पहचान (Identify the Causes of Injury)
- चोट (Injury) का कारण एक से ज़्यादा फैक्टर्स से मिलकर बनता है। इसमें आमतौर पर असुरक्षित पर्सनल फॉल्टी कंडीशन और असुरक्षित पर्सनल एक्ट्स शामिल होते हैं, जिनका ज़िम्मा दोनों में से किसी एक या दोनों पर हो सकता है।
- प्लांट के इंडस्ट्रियल रिकॉर्ड्स के ज़रिए इंजरी फैक्ट्स को सुरक्षित रखा जाता है, जहाँ इंजरी हुई हो — डिपार्टमेंट इन रिपोर्ट्स के ज़रिए यह पहचानता है कि कर्मचारी को चोट कैसे और मशीन से क्या नुकसान हुआ। डिटेल्ड रिपोर्ट्स चोटों (Injuries) की, आवश्यकतानुसार सुरक्षित (Secured) की जाती हैं (जैसे OSHA रिकॉर्डेबल इंजरीज़)।
- असुरक्षित फिज़िकल कंडीशन, फॉल्टी सेफ्टी रिक्वायरमेंट के कारण होती हैं, जिनके होने की वजह डिफेक्ट्स की मौजूदगी हो सकती है, जिसे क्लासिफिकेशन मॉडल इस्तेमाल करके परखा जाता है।
- असुरक्षित पर्सनल एक्ट्स, वे व्यवहार (Behaviour) हैं जो सुरक्षित कामकाजी माहौल (Safe Working Environment) से हटकर होते हैं — जैसे: सामान्य असुरक्षित काम करना, सेफ्टी डिवाइस हटाना, फॉल्टी प्लानिंग या ज़रूरी सेफ्टी रिक्वायरमेंट का न होना, जो चोटों (Injuries) की ओर ले जाता है।
17.6 पहचान के लिए जानकारी (Information for Identification)
- यह विश्लेषण (Analysis) कारणों की जानकारी देने में मददगार है, जो इंश्योरेंस डिपार्टमेंट को कंपनसेशन तय करने के लिए ज़रूरी होती है।
- इंजरी रिपोर्ट में यह जानकारी देनी चाहिए:
(a) चोट का समय (घंटा, दिन, महीना, साल) (b) खास जगह (कस्बा, प्लांट, डिपार्टमेंट) (c) घायल व्यक्ति का नाम, पहचान (कार्ड) नंबर (d) चोट की जगह (सिर या अन्य) (e) चोट की गंभीरता (भारी खून बहना, अंग कटना आदि) (f) गवाहों (Witnesses) के नाम
17.7 सहायक तथ्य (Subsidiary Facts)
- ये तथ्य क्लेम सेटल करते समय, चोट को घेरने वाली परिस्थितियों (Surrounding Circumstances) की पूरी तस्वीर देने में मददगार हैं। इनमें ऐसी जानकारी शामिल हो सकती है, जैसे: घायल व्यक्ति उस काम पर कब तक रहा; फोरमैन की जानकारी जैसे मशीन की पिछली दुर्घटना का रिकॉर्ड; और वह लंबाई (Length of Time) जिसके लिए घायल व्यक्ति काम पर नहीं आ पाएगा — ये सब मशीन के इंवॉल्वमेंट को दर्ज़ करने और चोट के कारण होने वाले खर्च तय करने में मदद करती हैं।
17.8 इंजरी इन्वेस्टिगेशन (Injury Investigation)
- "किसी भी चीज़ को तब तक फैक्ट मानकर स्वीकार न करें, जब तक वह साबित न हो जाए।" जांच शुरू करने के लिए यह प्रैक्टिकल है और इसे इस्तेमाल करना चाहिए।
- चोट के समय जितना संभव हो, उतने सही तथ्य जुटाना ज़रूरी है, और यह विश्लेषण करना चाहिए:
1. वर्कर जांच शुरू करने से पहले क्या कर रहा था? 2. इंजरी के समय जितने ज़्यादा तथ्य सुरक्षित रखे जाएँ 3. फिज़िकल माहौल — जितना समय गुज़रे, उतने भरोसेमंद तथ्य 4. इंजरी के लिए ज़िम्मेदार कैज़ुअल फैक्टर्स
17.9–17.11 बाइनरी नंबर सिस्टम व कंप्यूटर लॉजिक9-11
17.9 मेथोडिकल एनालिसिस का विकास (Evolution of Methodical Analyses)
- वैज्ञानिक और गणितज्ञ (Mathematicians) सदियों से डिज़ाइन एनालिसिस के तरीकों पर काम कर रहे हैं — साइंटिफिक मेथड, जो क्रिश्चियन युग (Christian Era) से पहले शुरू हुआ, सिस्टेमैटिक प्रोसीजर्स और सिद्धांतों (Principles) के अनुशासन (Discipline) पर आधारित है।
- पुराने इंजीनियरिंग अचीवमेंट्स के अवशेष (Relics) शुरुआती एनालिटिकल प्रयासों के सबसे स्पष्ट उदाहरण हो सकते हैं।
- ऑर्डरली एग्ज़ामिनेशन से इसका सिस्टेमैटिक तरीका शुरू हुआ, और ऑपरेशन के फ्लो को ट्रैक करने की तकनीक धीरे-धीरे सोफिस्टिकेटेड होती गई।
- शुरुआत में सिंबल्स का इस्तेमाल किया गया ताकि नेटवर्क में हर स्टेशन पर एक्टिविटी का डायग्राम बनाया जा सके — यह अभी भी सिस्टम एनालिसिस तकनीकों में महत्वपूर्ण है।
17.10 बाइनरी नंबर सिस्टम (Binary Number System)
- बूलियन अलजेब्रा (Boolean Algebra) के सिस्टम को दर्शाने के लिए एक सुविधाजनक तरीका है बाइनरी नंबर सिस्टम, जो सिर्फ दो अंकों — 0 और 1 — का इस्तेमाल करता है।
- डिजिट 0, ज़ीरो या ऑफ-करंट स्टेट का सिंबल है; डिजिट 1, ऑन-करंट स्टेट को दर्शाता है — यानी ट्रू-या-फॉल्स डिटरमिनेशन को बाइनरी वन से सिंबॉलाइज़ किया जा सकता है।
- कंप्यूटर, हाई-स्पीड इलेक्ट्रॉनिक स्विचिंग अरेज़ (Arrays) से बना होता है, जिसमें बाइनरी अरिथमेटिक, ज़ीरो (Pulse की अनुपस्थिति) के साथ काम को अंजाम देता है।
- दशमलव (Decimal) सिस्टम में 10 अंक (0-9) होते हैं, जबकि बाइनरी में केवल 2 अंक होते हैं — बाइनरी सिस्टम आधुनिक हाई-स्पीड डिजिटल कंप्यूटर्स के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया है।
0 = 0 | 1 = 1 | 2 = 10 | 3 = 11 | 4 = 100 | 5 = 101 | 8 = 1000 | 10 = 1010 | 11 = 1011
17.11 कंप्यूटर लॉजिक (Computer Logic)
- जिस भारी मात्रा में इंफॉर्मेशन को एक कंप्यूटर हैंडल करता है, वह लॉजिक गेट्स, मेमोरी एलिमेंट्स और टाइमिंग एलिमेंट्स से मिलकर बनता है — इन्हें कलेक्टिवली "कंप्यूटर लॉजिक" कहा जाता है।
- ये तीन बेसिक टाइप के एलिमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक स्विच होते हैं जो पल्स पैटर्न के अनुसार बाइनरी फंक्शन (0 या 1) को अंजाम देते हैं।
- लॉजिक गेट्स सिस्टम्स के डेवलपमेंट में सबसे ज़्यादा दिलचस्पी रखते हैं, क्योंकि इनकी एनालॉजी सिस्टम्स एनालिसिस मेथोडोलॉजी के लिए महत्वपूर्ण है — जैसे "लॉजिक गेट-इलेक्ट्रॉन स्विच" डायग्राम, नेटवर्क में कॉम्पोनेंट्स के बीच इंटरएक्शन को दिखाता है।
- इंटरफेस एक या ज़्यादा कॉम्पोनेंट्स के बीच होता है — जहाँ एक कॉम्पोनेंट का आउटपुट यूनिलैटरली (एकतरफा) दूसरे कॉम्पोनेंट या पूरे सिस्टम की एक्शन को तय करता है।
17.12 फॉल्ट ट्री एनालिसिस — सेफ्टी एनालिसिस तकनीक12
- सर्किट (Circuit) के ज़रिए एनालिसिस करते हुए, अगले कॉम्पोनेंट तक — या हो सकता है एक साथ कई कॉम्पोनेंट्स तक — जो इफेक्ट पहुँचता है, अगर वह सही ढंग से या गलत ढंग से इस्तेमाल हो, तो एनालिसिस के तहत आता है।
- AND लॉजिक फंक्शन यह बताता है कि आउटपुट कंडीशन तभी होगी जब कंपोनेंट में हर एक इनपुट (यानी "ट्रू") एक साथ मौजूद हो — इसका उदाहरण है स्विच A, B, C जुड़े होने पर लैंप L का जलना।
- OR गेट सिंबल — जब स्विच A, B और C पैरेलल में जुड़े हों, तो कोई भी एक स्विच बंद (Closed) होने पर लैंप L जल जाएगा।
- सिस्टेमिक सेफ्टी एनालिसिस के लिए "इमैजिनेटिव कंस्ट्रक्शन" ज़रूरी है, हर उस परिस्थिति का जो सिस्टम के किसी कॉम्पोनेंट के भीतर पैदा हो सकती है, जिसकी वजह से सिस्टम की लाइफ एक्सपेक्टेंसी के दौरान इफेक्ट्स दिख सकते हैं।
🔣 टेबल 17.2 — फॉल्ट ट्री सिंबल्स
Events (इवेंट्स):
Gates (गेट्स):
Transfer Symbols (ट्रांसफर सिंबल): एक इवेंट्स की सीरीज़ को दूसरे फॉल्ट ट्री तक आगे भेजने के लिए इस्तेमाल होता है — यह एक ट्रांसफर्ड सीक्वेंस दिखाता है, जिसकी संख्या अलग हो सकती है।
17.13 फॉल्ट ट्री कैलकुलेशन (Boolean Algebra)13
- फॉल्ट ट्री कैलकुलेशन को हाथ से या कंप्यूटर से समझने के लिए, पहले वाले (Earlier) स्टेटमेंट्स को गणितीय (Mathematical) स्टेटमेंट में बदला जाता है, बूलियन उदाहरणों (Boolean Examples) के ज़रिए।
- वेरिएबल x, किसी स्विच X को दर्शाता है — जिससे इन प्रोसीडिंग एग्ज़ामपल्स के गणितीय स्टेटमेंट्स को रीकॉल किया जाता है। बूलियन अलजेब्रा के पॉइंट ऑफ व्यू से, यह स्टेटमेंट "स्विच X खुला है" (या बंद) — या तो सही (True, x = 1) या गलत (False, x = 0) होना चाहिए।
| Function (फंक्शन) | Symbol (सिंबल) | Arithmetic Analog | Descriptive Equivalent |
|---|---|---|---|
| AND | ⌒ (AND gate) | Multiplication | Z = 1 केवल तभी अगर (X = Y = 1) |
| OR | ∪ (OR gate) | Addition | Z = 1 अगर X(Z=1) या Y(Y=1) या दोनों |
| NOT (Complement) | X̄ = (1-X) | — | अगर X(X=1), X̄(X=0) — यानी उल्टा (opposite) |
17.14 फॉल्ट ट्री की सीमाएँ (Limitations)14
- फॉल्ट ट्री मेथड में एक क्लियर पाथ (स्पष्ट रास्ता) होता है, ताकि उस सिस्टम में वल्नरेबल (कमज़ोर) पॉइंट्स को रूटीनाइज़ ट्रेसिंग करने की क्षमता मिले।
- इस सिस्टम को एनालाइज़्ड किया जाता है, जिसमें डिसीज़न्स "स्ट्रेंथनिंग" के मीन्स से संबंधित रहते हैं, ज़्यादा ड्यूरेबल सब्स्टीट्यूट्स के साथ, जो प्रोबेबली रिप्लेसमेंट से इन्वॉल्व होते हैं।
- OR रिडंडेंट डिवाइसेज़, फेल्योर फ्रीक्वेंसी को कम करने के साथ-साथ, प्रीवेंटिव मेंटेनेंस शेड्यूल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
- किसी भी केस में, फॉल्ट ट्री का पूरा होना, सिस्टम पर कंट्रोल के संबंध में दूसरे विचारों (Other Considerations) को शुरू करता है — ह्यूमन एरर इफेक्ट्स रिलेटिव टू कंट्रोल ऑफ द सिस्टम, यह हैंडल करने के लिए बाकी रह जाता है।
17.15 THERP15
- THERP (Technique for Human Error Rate Prediction) ह्यूमन एरर के लिए एक ऐक्रोनिम (Technique) है, जिसका प्रीमाइस यह है कि नॉनरिपिटीटिव और इनफ्रीक्वेंट एक्शन को भी प्रोडक्शन प्रोसेस में उतनी ही दोहराई गई एक्ट्स की तरह परफॉर्म किया जा सकता है।
- THERP, चयनित टास्क्स के लिए बेसिक एरर रेट (BER) तय करता है, गैदरिंग और सांख्यिकीय (Statistical) प्रोसेस के ज़रिए, ताकि यूज़फुल लेवल ऑफ वैलिडिटी हासिल की जा सके।
- BER यूनिट — प्रति मिलियन ऑपरेशन में एरर की दर (Error Rate)।
- सैंडिया कॉर्पोरेशन ने एक मेथड विकसित किया है, ह्यूमन ऑपरेटिंग एरर्स की प्रोबेबिलिटी की गणना (Quantifying) करने के लिए, जिसे मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस में इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि किसी ह्यूमन एरर की प्रोबेबिलिटी का अनुमान (Estimate) लगाया जा सके, जो कुछ बदलाव (Modification) के साथ अनवांटेड इवेंट्स को पैदा करने में शामिल हो।
17.16 फेल्योर मोड्स एंड इफेक्ट्स एनालिसिस (FMEA)16
- प्रोडक्ट रिलायबिलिटी आवश्यकताओं ने फॉर्मलाइज़्ड सेफ्टी एनालिसिस तकनीक को उत्तेजित किया है, जिसे फेल्योर मोड्स एंड इफेक्ट्स एनालिसिस (FMEA) के नाम से जाना जाता है।
- इसका मतलब है — हैज़र्डस ऑपरेशंस की जाँच और एनालिसिस, जो हर कॉम्पोनेंट पार्ट के फेल्योर मोड्स पर, एक-एक करके, इंपैक्ट को इन्वेस्टिगेट करती है, यह मानते हुए कि सिस्टम के दूसरे हिस्से सही तरीके से काम कर रहे हैं।
- यह एप्रोच, फेल्योर की विशेषताओं (Characteristics) को व्यवस्थित रूप से (Analysed Individually) तय करने के लिए है, जहाँ इवेंट्स एंटीसिपेटेड (उम्मीद किए गए) होते हैं और उनका कंसन्ट्रेटेड इफेक्ट, फॉल्ट ट्री की तरह ही, अपरेज़्ड (मूल्यांकित) किया जाता है।
- FMEA, फॉल्ट ट्री की तरह ही एक "इमैजिनेटिव कंस्ट्रक्टिंग" प्रोसेस है, जिसमें हर संभावित (Conceivable) परिस्थिति को शामिल किया जाता है, जिसके तहत कोई प्रोडक्ट फेल हो सकता है — जो असुरक्षित परिस्थिति (Unsafe Situation) पैदा कर सकता है।
- FMEA, फॉल्ट ट्री की तरह ही, दूसरी एनालिटिकल तकनीकों के साथ शुरू की जाती है, आमतौर पर एक डायग्राम से जो सिस्टम में फेल्योर के इफेक्ट को इंडिविजुअल कॉम्पोनेंट्स पर देखता है।
- प्रोडक्ट रिलायबिलिटी रिक्वायरमेंट्स ने इस फॉर्मलाइज़्ड सेफ्टी एनालिसिस टेक्नीक को उत्तेजित किया है, जिसे फेल्योर मोड्स एंड इफेक्ट्स एनालिसिस (FMEA) के नाम से जाना जाता है।
17.17 अन्य सिस्टम एनालिसिस तकनीकें — PERT और CPM17
- एनालिटिकल कंट्रोल तकनीकों के विस्फोटक विकास (Explosive Growth) में, दो तकनीकों ने ऐसी लोकप्रियता (Popularity) पाई है कि वे अब सिस्टम एनालिसिस डिस्कशन में उल्लेख (Mention) के लायक हैं।
- PERT (Program Evaluation Review Technique) — U.S. Navy के Special Projects Office ने इसे 1958 में पोलैरिस वेपन्स सिस्टम्स (Polaris Weapons Systems) के लिए इंट्रोड्यूस किया था।
- PERT और CPM (Critical Path Method), लार्ज मिलिट्री डेवलपमेंट प्रोग्राम्स में हार्डवेयर-टाइप ऑपरेशंस को कंट्रोल करने में कारगर रहे हैं।
- PERT रिसर्च लेबोरेटरीज़ से मार्केट तक, प्रोडक्ट्स को विकसित करने से संबंधित है — यह सिमिलर तकनीक (Similar Technique) के रूप में विकसित हुआ।
- CPM (Critical Path Method) — ड्यू-पॉन्ट कंपनी ने इस मेथड को विकसित किया, ताकि नेटवर्क में डिज़ायर्ड कंक्लूज़न तक पहुँचने के लिए ज़रूरी सभी स्टेप्स को डायग्राम पर दर्शाया जा सके।
- PERT और CPM, दोनों प्लानिंग से डील करते हैं — सबसे ज़्यादा टाइम कंज़्यूम करने वाला पाथ क्रिटिकल पाथ (Critical Path) कहलाता है, जिसके स्टेप्स लॉजिस्टिकली प्रॉब्लम्स को हल करने में शामिल होते हैं जो सेफ्टी को असर डालते हैं।
- ये तकनीकें विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं (सबसे कम व सबसे छोटी संभव बॉटलनेक्स को क्रम में लगाना), ताकि समय कम किया जा सके, कुल आवश्यक समय का अनुमान लगाया जा सके, पर्सनल और मटेरियल प्लानिंग को सुगम बनाया जा सके, और किसी भी संभावित हैज़र्ड को पहले से देखकर उन्हें खत्म या कम करने के कदम उठाए जा सकें।
17.18–17.19 रिस्क टॉलरेबिलिटी व 10-पॉइंट हैज़र्ड स्केल18-19
17.18 रिस्क टॉलरेबिलिटी (Risk Tolerability)
- बेहतर स्थिति में, हैज़र्ड्स को फेल-सेफ मेथड्स से खत्म या न्यूट्रलाइज़ किया जाता है, ताकि कोई खतरा (Danger) मौजूद न रहे — लेकिन प्रैक्टिस में इस आदर्श (Ideal) को अक्सर समझौता (Compromise) करना पड़ता है।
- किसी हैज़र्ड की स्वीकार्यता (Acceptability) का निर्धारक (Determinant), उस रिस्क की टॉलरेबिलिटी है, जो सबसे प्रभावी नियंत्रणों (Most Effective Controls) को लगाने के बाद रह जाती है।
- रिस्क की मैग्निट्यूड और उसकी टॉलरेबिलिटी की जाँच में, सबसे पहले इफेक्ट्स की गंभीरता (Seriousness of Effects) पर विचार होता है, इसके बहुत करीब है अनवांटेड इवेंट के होने की प्रोबेबिलिटी।
- एक और फैक्टर है — एक्सपोज़र की सेंसिटिविटी (Sensitivity of Exposure), जिसमें एथिकल और लीगल रिस्पॉन्सिबिलिटी, प्रोप्राइटी और कॉन्फिडेंस जैसे कंसीडरेशन शामिल हैं।
- रिस्क की मैग्निट्यूड को 3-डायमेंशनल (त्रि-आयामी) वॉल्यूम के रूप में सोचा जा सकता है — एक ऐक्सिस पर एक्सपोज़र की सेंसिटिविटी, दूसरी पर प्रोबेबिलिटी ऑफ ऑकरेंस, और तीसरी पर सीरियसनेस ऑफ इफेक्ट्स मापी जाती है।
17.19 वर्कप्लेस हैज़ार्ड के लिए 10-पॉइंट स्केल
- यह स्केल सीरियस और माइनर हैज़र्ड्स के बीच फर्क करने की रैंकिंग देता है — वर्स्ट-फर्स्ट बेसिस पर, ताकि हैज़र्ड को खत्म करने की एक इफेक्टिव और ऑर्डरली स्ट्रैटेजी बनाई जा सके। 10 सबसे खराब हैज़र्ड और 1 सबसे कम गंभीर हैज़र्ड को दर्शाता है।
| स्केल | विवरण |
|---|---|
| 1 | टेक्निकल वायलेशन |
| 2 | कोई असली फेटैलिटी हैज़र्ड नहीं |
| 3 | फेटैलिटी हैज़र्ड वास्तव में चिंता का विषय नहीं (माइनर इंजरी रिस्क मौजूद, मेजर इंजरी की संभावना बहुत कम) |
| 4 | फेटैलिटी हैज़र्ड रिमोट या नॉन-एक्ज़िस्टेंट, मेजर इंजरी रिस्क कम |
| 5 | फेटैलिटी हैज़र्ड रिमोट या लागू नहीं (मेजर इंजरी जैसे एंप्युटेशन बहुत संभावित नहीं) |
| 6 | फेटैलिटी हैज़र्ड असंभावित (Unlikely) |
| 7 | फेटैलिटी बहुत संभावित नहीं, लेकिन मेजर इंजरी हो सकती है |
| 8 | फेटैलिटी संभव — मेजर इंजरी होने की पूरी संभावना |
| 9 | फेटैलिटी होने की संभावना (जान-माल का आंशिक नुकसान) |
| 10 | फेटैलिटी होना तय जैसा (रिस्क बहुत गंभीर) |
फेल्योर की गंभीरता का वर्गीकरण
- Safe (सुरक्षित): फेल्योर सिस्टम की मिशन पूरी करने की क्षमता को नहीं बदलता, कोई सिस्टम हैज़र्ड नहीं बनाता और न ही पर्सनल इंजरी या प्रॉपर्टी डैमेज करता है।
- Marginal (मामूली): फेल्योर सिस्टम की मिशन क्षमता को कुछ हद तक प्रभावित करता है, लेकिन सिस्टम या पर्सनल को नुकसान नहीं होता, और इसे उचित काउंटरमेज़र्स से कंपनसेट किया जा सकता है।
- Critical (गंभीर): फेल्योर सिस्टम मिशन को प्रभावित करता है, सिस्टम, पर्सनल इंजरी, या प्रॉपर्टी डैमेज का कारण बनता है, और पर्सनल व सिस्टम की सर्वाइवल के लिए तुरंत करेक्शन ज़रूरी होता है।
- Catastrophic (विनाशकारी): फेल्योर सिस्टम का पूर्ण ब्रेकडाउन कर देता है, जिससे एक या ज़्यादा जनहानि (Fatalities) या मल्टीपल इंजरीज़ होती हैं।
- प्रोबेबिलिटी क्लासिफिकेशन (औसत समय के आधार पर):
Probable — 10,000 घंटे से कम में एक फेल्योर Reasonably Probable — 10,001 से 1,00,000 घंटे में एक फेल्योर Remote — 10,0001 से 10 मिलियन घंटे में एक फेल्योर Extremely Remote — 10 मिलियन घंटे से ज़्यादा में एक फेल्योर
📝 सारांश (Summary)
इंडस्ट्रियल सेफ्टी एनालिसिस में सिस्टम एनालिसिस, हैज़र्ड को पहचानने और उसे खत्म करने के लिए ऑर्डरली प्रोसीजर देती है। फॉल्ट ट्री एनालिसिस (AND/OR गेट्स के ज़रिए), FMEA, THERP और PERT/CPM जैसी तकनीकें, हैज़र्ड्स को सिस्टेमैटिक तरीके से पहचानने, उनका मूल्यांकन करने और उन्हें कंट्रोल करने में मदद करती हैं। इंजरी डाटा को सही ढंग से इकट्ठा करना और उसका विश्लेषण करना, भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में बेहद ज़रूरी है। रिस्क टॉलरेबिलिटी और 10-पॉइंट हैज़र्ड स्केल की मदद से यह तय किया जाता है कि कौन-सा हैज़र्ड कितना गंभीर है और उसे किस प्राथमिकता से हल करना चाहिए।
❓ अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
- सिस्टम क्या है?
- प्रमुख सिस्टम एनालिसिस तकनीकें कौन-सी हैं?
- आप सिस्टम एनालिसिस कैसे करेंगे?
(a) होमोजेनिटी इन सिस्टम एनालिसिस (b) बाइनरी नंबर सिस्टम (c) कंप्यूटर लॉजिक (d) फेल्योर मोड्स एंड इफेक्ट्स एनालिसिस (e) रिस्क टॉलरेबिलिटी
- PERT और CPM की व्याख्या करें।
- फॉल्ट ट्री एनालिसिस समझाएँ।
- THERP से क्या समझते हैं?
- रिस्क टॉलरेबिलिटी पर चर्चा करें।
- सिस्टम्स हैज़र्ड को कम करने के लिए इसे कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है?
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