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करूँ कभी #अभिषेक लाडली...🙏 आँखों से बहते झरनों का...😭 मुझे दे दो भरोसा चरणों का...🙇 ॐ स्वस्ति श्री नीलकंठाय नमः “श्रीरामचरितमानस” केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार है। भगवान श्रीराम के मर्यादित आचरण और अन्य पात्रों के माध्यम से यह मनुष्य को धर्मानुसार अनुशासित जीवन जीने का संदेश देता है ! बाबा तुलसी ने “श्रीरामचरितमानस” के रूप में भारतीय साहित्य को एक ऐसी मणि सौंपी है जिसकी एकल आभा जटिल सांसारिकता से लेकर गहन आध्यात्मिकता तक के समस्त पथ को प्रशस्त करने में सक्षम है ! रामकथा केवल पारलौकिक जगत में सहारा बनने वाले पुण्य-कर्मों का संचय ही सुनिश्चित नहीं करती बल्कि इस कथा-धारा में मनुष्यता का वह संजीवनी तत्व शामिल है, जिसके बल पर लौकिक जगत में एक अत्यंत सुंदर एवं सौहार्दपूर्ण समाज की परिकल्पना अत्यंत सरलता से साकार की जा सकती है। 🙏 भगवान कृष्ण मेरे आराध्य, विश्वास मेरी ऊर्जा, संस्कार मेरे शस्त्र, 🇮🇳 माँ, मातृभूमि, मातृभाषा मेरे लिए सर्वोपरि 🙏 For any Issues / Copyright discussions contact AbhishekVssct@gmail.com

"Radiation Hazards"

Radiation Hazards — रेडिएशन हैज़ार्ड्स (परमाणु ऊर्जा एवं विकिरण सुरक्षा) Hindi Notes
SAFETY, HEALTH AND ENVIRONMENT — Chapter 15

रेडिएशन हैज़ार्ड्स — परमाणु ऊर्जा एवं विकिरण सुरक्षा
(Radiation Hazards)

पूरी किताब के पेज 242 से 263 तक की जानकारी — आसान हिन्दी में, Point-wise और Bihar Board स्टूडेंट्स के लिए बिल्कुल सरल भाषा में।

👉 यह नोट्स परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy), न्यूक्लियर फ्यूल साइकल, रेडिएशन के प्रकार, उनकी माप के यूनिट, रेडिएशन से सुरक्षा के उपाय और रेडियोएक्टिव वेस्ट डिस्पोज़ल को आसान भाषा में समझाते हैं। हर टॉपिक को छोटे-छोटे पॉइंट्स में लिखा गया है ताकि परीक्षा के लिए याद करना आसान हो।

📑 इस नोट्स में क्या-क्या है

  1. 15.1 न्यूक्लियर एनर्जी (परिचय)
  2. 15.2 न्यूक्लियर फिशन
  3. 15.3 महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
  4. 15.4 न्यूक्लियर साइकल
  5. 15.5-15.8 एनरिचमेंट, फैब्रिकेशन, चेन रिएक्शन, रीप्रोसेसिंग
  6. 15.9 न्यूक्लियर पावर प्लांट
  7. 15.10-15.13 नैचुरल गैस, थर्मल न्यूट्रॉन, एनरिचमेंट प्रोसेस, चेन रिएक्शन
  8. 15.14-15.15 आयोनाइज़िंग/नॉन-आयोनाइज़िंग व पार्टिकुलेट रेडिएशन
  9. 15.16-15.18 यूनिट्स, डोज़ और अल्फा रेडिएशन
  10. 15.19-15.20 गामा रेडिएशन व कॉस्मिक रेडिएशन
  11. 15.21-15.22 रेडिएशन प्रोटेक्शन व ALARA
  12. 15.23-15.24 डिटेक्शन इंस्ट्रूमेंट्स व मेज़रिंग डिवाइस
  13. 15.25 पर्सनल-मॉनिटरिंग डिवाइसेज़
  14. 15.26-15.28 रेडिएशन कंट्रोल्स व एक्सपोज़र
  15. 15.29 नॉन-आयोनाइज़िंग रेडिएशन
  16. 15.30 रेडियोएक्टिव वेस्ट डिस्पोज़ल
  17. सारांश और अभ्यास प्रश्न

15.1 न्यूक्लियर एनर्जी (Nuclear Energy)1

  • यूरेनियम और थोरियम के परमाणु नाभिक (Nuclei) से जो ऊर्जा निकलती है, वह "न्यूक्लियर फिशन चेन रिएक्शन" के ज़रिए ऊष्मा (Heat) के रूप में मिलती है।
  • दुनिया की कुल बिजली ज़रूरत का करीब 10% न्यूक्लियर एनर्जी से आता है। भारत की करीब 5% बिजली ज़रूरत और फ्रांस की करीब 75% बिजली ज़रूरत न्यूक्लियर पावर प्लांट से पूरी होती है।
  • न्यूक्लियर फ्यूज़न — दो नाभिकों (Nuclei) के आपस में मिलने (Combine) की प्रक्रिया है, जिसमें ऊष्मा निकलती है। यह 21वीं सदी में दुनिया की ऊर्जा समस्या हल करने में मददगार हो सकता है, लेकिन इस पर अभी रिसर्च चल रही है और नतीजे अनिश्चित (Uncertain) हैं।
  • न्यूक्लियर फिशन — भारी नाभिक (जैसे U-235) टूटकर छोटे टुकड़ों में बँट जाता है और ऊष्मा छोड़ता है। यह प्रोसेस न्यूक्लियर रिएक्टरों में होती है, जो ऊष्मा को थर्मल और इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलते हैं।
  • न्यूक्लियर फ्यूज़न रिएक्शन में दो हल्के नाभिक — ड्यूटेरियम और ट्रिटियम (हाइड्रोजन के आइसोटोप) — पर्याप्त ऊर्जा के साथ मिलकर ऊष्मा छोड़ते हैं। ड्यूटेरियम और ट्रिटियम प्रकृति में असीमित (Unlimited) मात्रा में उपलब्ध हैं, इसलिए फ्यूज़न को "सबसे उम्मीद भरा रिन्यूएबल स्रोत" कहा जाता है, पर कमर्शियल सफलता अभी अनिश्चित है।
  • यूरेनियम के कुछ भारी आइसोटोप — U-235, U-238, Pu-233 — रिएक्टरों में फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल होने वाले फिशाइल/फर्टाइल मटेरियल हैं।
  • फिशाइल मटेरियल उस अयस्क (Ore) से मिलता है जिसमें यूरेनियम की मात्रा 1% से ज़्यादा हो। कच्चे अयस्क से फिशाइल मटेरियल तक और फिर वेस्ट डिस्पोज़ल तक की पूरी प्रक्रिया को "फ्यूल साइकल" कहते हैं।
  • आज के सभी कमर्शियल न्यूक्लियर रिएक्टर फिशन टाइप के हैं। चेन रिएक्शन से न्यूक्लियर एनर्जी को थर्मल एनर्जी में बदला जाता है, और स्टीम टर्बाइन जनरेटर चलाकर बिजली बनाई जाती है।

न्यूक्लियर एनर्जी के उपयोग (Applications):

हीट → डिस्ट्रिक्ट हीटिंग, इंडस्ट्रियल हीटिंग प्रोसेस स्टीम → इंडस्ट्रियल स्टीम इलेक्ट्रिकल एनर्जी → बेस लोड, मिनी-पावर प्लांट, न्यूक्लियर सबमरीन, न्यूक्लियर शिप ट्रांसपोर्टेशन

15.2 न्यूक्लियर फिशन (Nuclear Fission)2

  • प्राकृतिक यूरेनियम (U) और थोरियम (Th) रेडियोएक्टिव मटेरियल हैं, जो पृथ्वी की मिट्टी में बहुत कम मात्रा में मिलते हैं (और समुद्र के पानी में भी, लेकिन वहाँ से अभी इसका कमर्शियल इस्तेमाल नहीं हो पा रहा)।
  • रिएक्टर में जो "फ्यूल" डाला जाता है, वह एनरिच्ड फिशाइल मटेरियल होता है (U-235 की मात्रा 2.5 से 3% तक)।
  • प्राकृतिक यूरेनियम में सिर्फ थोड़ी मात्रा फिशाइल U-235 की होती है, और बाकी बड़ा हिस्सा फर्टाइल U-238 का होता है — U 235 : 0.71% + U 238 : 99.29% = 100%
  • U-238 न्यूट्रॉन सोखकर प्लूटोनियम (Pu-239) बनाता है, जो खुद फिशाइल मटेरियल है (U 238 → Pu 239)।
  • थोरियम भी बहुतायत में उपलब्ध है। जब थोरियम न्यूट्रॉन सोखता है, तो एक नया आइसोटोप यूरेनियम U-233 बनता है, जो फिशाइल है (Th 232 → U 233)।
  • प्राकृतिक अयस्क में तीन आइसोटोप का मिश्रण होता है:

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आइसोटोपप्रकार
U 235फिशाइल मटेरियल
U 238नॉन-फिशाइल, पर फर्टाइल मटेरियल
Th 232नॉन-फिशाइल, पर फर्टाइल मटेरियल
  • Fast Breeder Reactor में U-238 या Th-232 तेज़ी से फिशाइल मटेरियल में बदल जाते हैं, जिससे रिएक्टर के भीतर ही अतिरिक्त फिशाइल फ्यूल बनता (जनरेट होता) है।
  • चेन रिएक्शन सिर्फ फिशाइल मटेरियल से ही शुरू हो सकता है, जैसे — U-235, Pu-239, U-233।
  • फर्टाइल मटेरियल (जैसे U-238) न्यूट्रॉन बमबारी (Bombardment) से फिशाइल मटेरियल U-235 में बदला जा सकता है — इस प्रोसेस को "Conversion" कहते हैं।
  • फर्टाइल मटेरियल खुद फिशन नहीं कर सकता, लेकिन न्यूक्लियर रिएक्टर में न्यूट्रॉन एक्शन से उसे फिशाइल मटेरियल में बदला जा सकता है।

15.3 महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Definitions)3

  • न्यूक्लियर फिशन: नाभिक (Nucleus) का दो लगभग बराबर टुकड़ों में टूटना, जिसमें ऊष्मा निकलती है।
  • फिशन चेन रिएक्शन: एक नियंत्रित तरीके (Controlled Manner) में लगातार होने वाली फिशन प्रतिक्रियाओं की क्रमबद्ध श्रृंखला (Sequence)।
  • फिशाइल मटेरियल्स: ऐसे मटेरियल जो न्यूक्लियर फिशन दे सकते हैं — जैसे U-235, Pu-239, U-233।
  • फर्टाइल मटेरियल: ऐसा मटेरियल जो न्यूट्रॉन फ्लक्स एक्शन से फिशाइल मटेरियल में बदल सकता है (जैसे U-238), पर खुद फिशाइल नहीं होता।
  • हैवी वाटर (D₂O): हाइड्रोजन के भारी आइसोटोप (ड्यूटेरियम) वाला पानी, जो मॉडरेटर के रूप में इस्तेमाल होता है। यह तेज़ (Fast) न्यूट्रॉन को धीमा (Slow) करता है और चेन रिएक्शन को नियंत्रित करता है।
  • हैवी वाटर रिएक्टर: वह रिएक्टर जो हैवी वाटर को मॉडरेटर के रूप में इस्तेमाल करता है और प्राकृतिक यूरेनियम को फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करने देता है।
  • लाइट वाटर: साधारण पानी (H₂O)।
  • ब्रीडर रिएक्टर: वह रिएक्टर प्लांट जो खपत से ज़्यादा फ्यूल बनाता है, फर्टाइल मटेरियल को फिशाइल मटेरियल में बदलकर (U 238 → Pu 239, Th 232 → U 233)।
  • कन्वर्टर रिएक्टर: वह रिएक्टर जो कुछ फ्यूल बनाता है, पर अपनी ज़रूरत से कम — जैसे लाइट वाटर रिएक्टर, हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर।
  • रेडियोएक्टिविटी: परमाणु नाभिकों में अपने आप होने वाला बदलाव, जो एक प्रकार से दूसरे प्रकार में बदलते हैं। इसके साथ अल्फा, बीटा, गामा रेडिएशन निकलती है।
  • शील्डिंग: रेडिएशन के स्रोत (Source) और वातावरण/व्यक्ति/सेंसिटिव इंस्ट्रूमेंट के बीच शील्ड लगाकर रेडिएशन को कम करना।
  • यूरेनियम (U): एटॉमिक नंबर 92 और औसत एटॉमिक वेट 238 वाला रेडियोएक्टिव तत्व। इसके दो मुख्य आइसोटोप — U-235 (0.7%) और U-238 (99.3%)।
  • थोरियम (Th): एटॉमिक नंबर 90 और एटॉमिक वेट लगभग 232 वाला प्राकृतिक रेडियोएक्टिव तत्व, जो फर्टाइल है और न्यूट्रॉन से U-233 में बदल सकता है।
  • न्यूक्लियर रिएक्टर: वह प्लांट जो फिशन चेन रिएक्शन को शुरू करता, बनाए रखता, नियंत्रित करता और रेडियोएक्टिव रेडिएशन से सुरक्षा भी देता है।
  • थर्मल रिएक्टर: जिसमें चेन रिएक्शन धीमे (थर्मल) न्यूट्रॉन से चलता है। फ्यूल U-235 और U-238 दोनों होता है।

15.4 न्यूक्लियर साइकल (Nuclear Cycle)4

  • न्यूक्लियर साइकल में — माइनिंग, यूरेनियम रिफाइनिंग, फ्यूल एलिमेंट फैब्रिकेशन, रिएक्टर में उनका उपयोग, केमिकल प्रोसेसिंग, री-एनरिचमेंट और वेस्ट स्टोरेज तक के सभी क्रमिक चरण (Sequential Steps) शामिल हैं।
  • पानी, कोयला, नैचुरल गैस, पेट्रोलियम की तरह यूरेनियम-थोरियम के गाढ़े (Concentrated) डिपॉज़िट प्रकृति में उपलब्ध नहीं हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कुछ हाई-कंसंट्रेशन (10%+) डिपॉज़िट पहले ही खत्म हो चुके हैं।

🪨 अयस्क के प्रकार (Deposit Classes)

  • Vein Deposits: क्रिस्टलीय चट्टानों (Crystalline Rocks) में यूरेनियम की नसें (Veins), जिनकी मोटाई कुछ बहुत पतली होती है, यूरेनियम कंटेंट 0.1% से 1% तक।
  • Sedimentary Deposits: प्लेटलेट्स (Platelets) के रूप में, अवक्षेपित घोल (Precipitated Solutions) से बने, मोटाई 50 से 500 मीटर, क्षेत्रफल 200 से 200,000 वर्ग किमी। यूरेनियम कंटेंट 0.2% तक।

🔢 न्यूक्लियर साइकल के मुख्य स्टेप्स

Exploration (खोज) → Mining (खनन) → Milling (कुचलना) → Conversion (रूपांतरण) → Enrichment (संवर्धन) → Fuel Fabrication (फ्यूल निर्माण) → Fuel Use / Nuclear Reactor → Heat, Steam → Electrical Energy
साथ ही: Fuel Reprocessing → Restore in Enrichment Plant, और Waste Disposal of Radioactive Waste Substance

  • 1. Exploration (Prospecting): यूरेनियम और थोरियम के डिपॉज़िट पानी, कोयला, गैस की तरह ज़्यादा गाढ़े रूप में नहीं मिलते। बहुत कम हाई-कंसंट्रेशन (10%+) डिपॉज़िट द्वितीय विश्व युद्ध में ही खत्म हो चुके हैं।
  • 2. Mining (खनन): यूरेनियम अयस्क को ओपन पिट माइन या अंडरग्राउंड माइन से निकाला जाता है। कच्चे अयस्क में यूरेनियम की मात्रा बहुत कम होती है (1 किलो तक)।
  • 3. Milling (कुचलना): यूरेनियम अयस्क को पीसा (Pulverised) जाता है और केमिकल रीएजेंट वाले "लीच लिकर" में मिलाया जाता है, ताकि यूरेनियम घुल सके।
  • 4. Concentration: घुला हुआ यूरेनियम सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन या आयन-एक्सचेंज से निकाला जाता है। पानी हटाकर क्रूड यूरेनियम कंसंट्रेट (Yellow Cake) बनाया जाता है, जिसमें 70-90% यूरेनियम होता है।
  • 5. Refining, Concentration and Conversion: Yellow Cake को सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन से शुद्ध किया जाता है और कैल्सिनेशन (Calcined) करके यूरेनियम ट्राईऑक्साइड (UO₃ / Orange Oxide) बनाया जाता है। इसे हाइड्रोजनेशन से यूरेनियम डाईऑक्साइड (UO₂) में बदला जाता है। फिर हाइड्रोजन फ्लोराइड गैस (HF) से गुज़ारकर यूरेनियम टेट्राफ्लोराइड (UF₄) / "Green Salt" बनता है, जिसे प्रोसेस करके यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (UF₆) बनाया जाता है।

15.5-15.8 एनरिचमेंट, फैब्रिकेशन, चेन रिएक्शन व रीप्रोसेसिंग5

🔺 15.5 एनरिचमेंट (Enrichment)

  • एनरिचमेंट वह प्रोसेस है जिसमें फिशाइल यूरेनियम आइसोटोप (U-235) की मात्रा को प्राकृतिक 0.7% से बढ़ाया जाता है।
  • यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड में U-235 की मात्रा 0.7% से बढ़ाकर 2 से 4% तक की जाती है — इसे "एनरिचमेंट प्लांट" में किया जाता है।
  • एनरिचमेंट दो तरीकों से होता है: (a) फिशाइल मटेरियल U-235 या U-233 मिलाकर, (b) नॉन-फिशाइल मटेरियल हटाकर।
  • एनरिच्ड यूरेनियम में फिशाइल कंटेंट 2 से 3% होता है, जबकि एनरिचमेंट से पहले सिर्फ 0.7% होता है।

🔧 15.6 फैब्रिकेशन (Fabrication)

  • नॉन-ब्रीडर टाइप न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए फ्यूल एलिमेंट्स के निर्माण और असेंबली को "फ्यूल फैब्रिकेशन" कहते हैं।
  • एनरिच्ड UF₆ को पहले यूरेनियम डाईऑक्साइड, यूरेनियम मेटल या यूरेनियम कार्बाइड में बदला जाता है, फिर स्टेनलेस स्टील या ज़िरकोनियम ट्यूब में पेलेट्स के रूप में भरा जाता है।
  • पेलेट्स 1 से 2 सेमी व्यास और 2 से 3 सेमी लंबाई के होते हैं, जो फ्यूल रॉड बनाते हैं। 50 से 300 फ्यूल रॉड मिलकर फ्यूल एलिमेंट बनाते हैं, जिसे धातु की पतली सीलबंद परत से ढका जाता है।
  • एक रिएक्टर को 100 से 300 फ्यूल एलिमेंट्स चाहिए होते हैं।

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टर्मअर्थ
Fuel Pelletफिशाइल यूरेनियम फ्यूल के बेलनाकार (Cylindrical) टुकड़े
Fuel Rodपेलेट्स की एक शृंखला, धातु की बेलनाकार सीलबंद ट्यूब में
Fuel Elementफ्यूल रॉड्स का क्लस्टर, रिएक्टर में डालने के लिए

⚛️ 15.7 न्यूक्लियर फिशन चेन रिएक्शन

  • फ्यूल एलिमेंट्स रिएक्टर में डाले जाते हैं। कुछ न्यूट्रॉन U-235 एटम को तोड़ते हैं, जिससे ऊष्मा और रेडियोएक्टिव फिशन फ्रैगमेंट्स निकलते हैं।
  • कुछ और न्यूट्रॉन फ्यूल में मौजूद U-238 को प्लूटोनियम (Pu-239) में बदल देते हैं, जो खुद फिशाइल है और चेन रिएक्शन में योगदान देता है।
  • रिएक्शन के दौरान फ्यूल में U-235 का कंसंट्रेशन घटता जाता है। लगभग 2 साल ऑपरेशन के बाद, कंसंट्रेशन घटकर मूल का 25% रह जाता है। इसके बाद Irradiated Fuel Elements को बचे हुए U-235 और Pu-239 को रिकवर करने के लिए रिएक्टर से निकाल लिया जाता है।

♻️ 15.8 न्यूक्लियर साइकल रीप्रोसेसिंग

  • रिएक्टर से निकाले गए Irradiated Fuel Elements बहुत ज़्यादा रेडियोएक्टिव होते हैं, इसलिए उन्हें बड़ी सावधानी से रीप्रोसेस किया जाता है। इससे मिलता है:
  • (a) Special elements and metal: फ्यूल एलिमेंट्स के निर्माण और रिएक्टर बनाने में इस्तेमाल।
  • (b) Recovered U-235 and Pu-239: एनरिचमेंट प्लांट में वापस फीड किया जाता है।
  • (c) Fission Products (FP): इन्हें आगे प्रोसेस करके अलग किया जाता है — Useful FP (साइंटिफिक, इंडस्ट्रियल, एग्रीकल्चरल, मिलिट्री उपयोग के लिए) और Nonusable FP (रेडियोएक्टिव, जिन्हें सुरक्षित स्तर तक पहुँचने में शॉर्ट/मीडियम/लॉन्ग टाइम लगता है)।
  • रेडियोएक्टिव वेस्ट मटेरियल को तीन कैटेगरी में बाँटा जाता है: (p) ज़ीरो/लो रेडियोएक्टिविटी मटेरियल — बिना ज़्यादा शील्डिंग के फैलाया या स्टोर किया जाता है। (q) मीडियम रेडियोएक्टिविटी मटेरियल — रेडियोएक्टिविटी घटने तक कुछ महीने पानी में स्टोर किया जाता है। (r) हाई रेडियोएक्टिव मटेरियल — कम स्तर तक पहुँचने तक स्टोर, फिर "अंडरग्राउंड स्टोरेज" या "ऑन ग्राउंड सरफेस स्टोरेज" में एनकैप्सुलेटेड सील्ड कास्क में रिमोट, सुरक्षित जगह पर रखा जाता है।
  • 35 टन फैब्रिकेटेड फ्यूल से लगभग 23.5 टन लो-लेवल वेस्ट और 17 टन हाई-लेवल वेस्ट बनता है।

15.9 न्यूक्लियर पावर प्लांट6

  • पूर्व USSR में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स वित्तीय संसाधनों की कमी और "सेल्फ रिलायंस" नीति के कारण देरी से चल रहे हैं। भारत के पावर प्रोजेक्ट्स भी इसी तरह प्रभावित हुए हैं।
  • भारत का कुल स्थापित (Installed) न्यूक्लियर कैपेसिटी शेयर, फास्ट ट्रैक कोयला-गैस आधारित प्लांट की तुलना में उच्च वित्तीय आवंटन के बावजूद 3% से कम है।
  • भारत के पास थोरियम का बड़ा भंडार है, न्यूक्लियर पावर प्लांट की दीर्घकालिक (Long-term) क्षमता है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्लांट B और D की योजना है, जो 10वें पंचवर्षीय योजना के दौरान लाए जाने की उम्मीद है।

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विवरणक्षमता
न्यूक्लियर पावर प्लांट (मार्च 1997)2300 MW
निर्माणाधीन प्लांट800 MW
न्यूक्लियर पावर प्लांट (मार्च 2003)3100 MW

15.10-15.13 नैचुरल गैस, थर्मल न्यूट्रॉन, एनरिचमेंट प्रोसेस व चेन रिएक्शन7

🔥 15.10 नैचुरल गैस

  • भारत में गैस-आधारित पावर प्लांट की क्षमता लगभग 15000 MW अनुमानित है, जिसमें 1344 MW कमीशन हो चुके हैं। 1999 का टारगेट 15000 MW था।
  • भारत के पास हाइड्रोकार्बन के प्रमाणित भंडार का सिर्फ 0.04% ही है, और तेल-गैस का नेट इंपोर्टर है।
  • लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) समुद्री टैंकरों से पावर प्लांट्स के लिए इंपोर्ट किया जाता है।
  • 1990-1998 के दौरान, पावर प्लांट में नैचुरल गैस की खपत 40% से घटकर 25% रह गई, जबकि फर्टिलाइज़र उत्पादन के लिए इसका उपयोग बढ़ा।

🌡️ 15.11 थर्मल न्यूट्रॉन

  • थर्मल न्यूट्रॉन में फास्ट न्यूट्रॉन की तुलना में बहुत कम काइनेटिक एनर्जी होती है — यानी ये धीमे (Slow) न्यूट्रॉन होते हैं।
  • U-238 के मुकाबले U-235 का न्यूट्रॉन-सोखने का गुण (Absorption Property) थर्मल इक्विलिब्रियम में काफी ज़्यादा होता है, इसलिए U-235 आसानी से फिशन कर सकता है।
  • U-235 और U-238 को अलग करना एक महंगा और जटिल स्टेज है, जिस पर रिएक्टर मुख्यतः निर्भर करते हैं। जिन न्यूट्रॉन को धीमा (Slow) करके थर्मल न्यूट्रॉन प्रोड्यूस किया जाता है, वे इस चेन रिएक्शन में इस्तेमाल होते हैं।

🌀 15.12 एनरिचमेंट प्रोसेस

  • एनरिचमेंट वह प्रोसेस है जिसमें फिशाइल आइसोटोप U-235 (U-235) का अनुपात नैचुरल यूरेनियम में मौजूद 0.7% से बढ़ाकर 2% से 3% तक किया जाता है, क्योंकि U-238 फिशाइल नहीं है इसे फिशाइल में बदलना ज़रूरी है।
  • U-235 और U-238 केमिकली एक जैसे होते हैं, बस एटॉमिक वेट में 3 (डिफरेंस) से अलग होते हैं। इस अंतर के आधार पर ही U-238 और U-235 को अलग किया जाता है।
  • 1950 से पहले इस्तेमाल की जाने वाली एनरिचमेंट प्रक्रियाएँ थीं: थर्मल डिफ्यूज़िंग और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक। अब बड़े एनरिचमेंट प्लांट में "सेंट्रीफ्यूज प्रिंसिपल" अपनाया गया है (यूरोप, USA आदि में)।
  • सेंट्रीफ्यूज में हल्का U-235 आइसोटोप सेंट्रीफ्यूज के अंदरूनी किनारे (Inner Edge) पर इकट्ठा होता है, जबकि भारी U-238 बाहरी किनारे (Outer Periphery) पर जमा होता है।

⛓️ 15.13 चेन रिएक्शन

  • चेन रिएक्शन एक "सेल्फ सस्टेन्ड" रिएक्शन है — एक नियंत्रित तरीके से चलने वाली फिशन प्रतिक्रियाओं की क्रमबद्ध सीरीज़।
  • चेन रिएक्शन के लिए फ्यूल को एनरिच्ड किया जाना ज़रूरी है (यानी फिशाइल यूरेनियम 2% से 4% तक)। इसके लिए कुछ ज़रूरी शर्तें हैं — जैसे नॉन-फिशाइल U-235 की मात्रा को घटाना।
  • थर्मल रिएक्टर में फास्ट न्यूट्रॉन को बिना ऊर्जा गँवाए धीमा किया जाता है, जिससे लाखों (Many Million) परमाणुओं की चेन रिएक्शन शुरू हो सके।
  • अगर पर्याप्त फ्यूल न हो या मॉडरेटर और कॉन्फिगरेशन सही न हो, तो रिएक्टर सस्टेन नहीं हो पाएगा। जितनी मात्रा में फिशाइल मटेरियल आवश्यक होती है, उसे "क्रिटिकल मास" कहते हैं, और इस स्थिति को "क्रिटिकैलिटी" कहते हैं।

15.14-15.15 आयोनाइज़िंग/नॉन-आयोनाइज़िंग व पार्टिकुलेट रेडिएशन8

☢️ 15.14 आयोनाइज़िंग और नॉन-आयोनाइज़िंग रेडिएशन

  • भारी नाभिकों (Heavy Nuclei) के फिशन से भारी मात्रा में विस्फोटक बल (Explosive Force) निकलता है। एटॉम में स्टोर एनर्जी को पर्यावरण में छोड़ना एक बड़ा हैज़ार्ड है — जैसे द्वितीय विश्व युद्ध में हिरोशिमा-नागासाकी पर एटॉमिक बॉम्बिंग से हुआ।
  • 1896 में X-ray की खोज के बाद, X-ray के हानिकारक प्रभाव (जलना, त्वचा रोग) खोज के 6 महीनों के अंदर ही रिपोर्ट हुए।
  • द्वितीय विश्व युद्ध से पहले, रेडियोएक्टिव मटेरियल संभालने वाले सिर्फ प्रशिक्षित वैज्ञानिक और तकनीशियन ही X-ray से काम करते थे। एटॉमिक एनर्जी प्रोजेक्ट्स के आने के बाद रेडिएशन से काम करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है।
  • रेडिएशन का उपयोग जितना बढ़ा है, उतनी ही सुरक्षा प्रीकॉशंस (जैसे आइसोटोप, ट्रेसर, लार्ज स्केल प्रोसेस) की ज़रूरत बढ़ी है। स्पेंट रिएक्टर फ्यूल संभालना बड़ा खतरा है और इसमें अच्छे मेडिकल डायग्नोसिस व थेरेपी की ज़रूरत होती है।
  • माइक्रोस्कोपिक स्तर पर मैटर की समझ ग्रीक फिलॉसफर डेमोक्रिटस के समय से चली आ रही है। बेसिक कॉन्स्टिट्यूएंट्स (एटम) की जानकारी रेडिएशन हैज़ार्ड को समझने और उससे बचाव में बेहद ज़रूरी है।
  • रेडिएशन टर्म — फोटॉन (X-रे, गामा, इंफ्रारेड, अल्ट्रावायलेट, विज़िबल) और पार्टिकुलेट (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, मेसॉन) दोनों तरह के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन फॉर्म्स को कवर करता है।
  • जब रेडिएशन सोर्स एटम से इलेक्ट्रॉन को हटाने में सक्षम होता है, तो उस प्रक्रिया को "आयोनाइज़ेशन (Ionization)" कहते हैं। हल्की रोशनी और रेडियो वेव्स आयोनाइज़ेशन नहीं कर सकतीं।

✨ 15.15 पार्टिकुलेट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन

  • जब एटम स्टेबल (अनएक्साइटेड) स्थिति में होता है, इलेक्ट्रॉन अपनी ऑर्बिट पर एक निश्चित दूरी और एनर्जी लेवल पर घूमते रहते हैं।
  • जब एटम को एनर्जी मिलती है (एब्ज़ॉर्ब करता है), तो एटम एक्साइटेड या अनस्टेबल स्टेट में चला जाता है। इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर, अनस्टेबल ऑर्बिटल एरिया में चले जाते हैं, और इलेक्ट्रॉन बढ़ने पर पार्टिकुलेट रेडिएशन का खतरनाक क्षेत्र (Danger Area) भी बढ़ जाता है।
  • रेडिएशन नाभिक (न्यूक्लियस) से "पार्टिकुलेट" रूप में निकलती है (मास होता है), जबकि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन बिना मास के ऑर्बिटल एनर्जी ट्रांसफर के रूप में निकलती है।
  • पार्टिकुलेट रेडिएशन (जैसे अल्फा, बीटा, ड्यूटरॉन) को अक्सर "बिलियर्ड बॉल" की तरह समझा जाता है — एक कण दूसरे बिंदु पर टकराता है। मास वाले सामान्य पार्टिकल्स — न्यूट्रॉन, प्रोटॉन, मेसॉन, इलेक्ट्रॉन, पॉज़िट्रॉन, न्यूट्रिनो — इसी तरह वर्णित होते हैं।

15.16-15.18 यूनिट्स, रेडिएशन डोज़ और अल्फा रेडिएशन9

📏 15.16 यूनिट्स ऑफ आयोनाइज़िंग रेडिएशन मेज़रमेंट

  • किसी मीडियम से गुज़रने के दौरान रेडिएशन की मात्रा को मापा जाता है। यह क्वांटिटी चार्ज, एनर्जी या बायोलॉजिकल इफेक्ट (डैमेज) को रेफर कर सकती है, जिसकी यूनिट्स हैं — रोंटगेन, रेप, रैड और रेम

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यूनिटक्या मापा जाता हैटाइपकहाँ इस्तेमालएनर्जी एब्ज़ॉर्प्शन (ergs/gm)
रोंटगेन (Roentgen)एयरX या गामामॉनिटरिंग पार्टिकुलेट83
रेप (Rep)सॉफ्ट टिश्यूपार्टिकुलेट, ऑल टाइप्सबायोलॉजिकल एंड फिज़िकल रिसर्च83
रैड (Rad)कोई भी मटेरियलऑल टाइप्सबायोलॉजिकल एंड फिज़िकल रिसर्च100
रेम (Rem)पर्सनल रिकॉर्ड्सऑल टाइप्स
  • चूँकि रेप की गणना में कुछ दिक्कतें थीं (जैसे X-रे को मापने के लिए एयर के लिए इस्तेमाल की गई ऊर्जा दूसरे मटेरियल पर लागू नहीं होती), इसलिए रैड यूनिट प्रस्तावित हुई — यह सभी पार्टिकुलेट रेडिएशन को एक नई यूनिट में मापने के लिए इस्तेमाल होती है। हार्ड टिश्यू (हड्डी) की तुलना में सॉफ्ट टिश्यू (पानी) ज़्यादा एनर्जी सोखता है।
  • इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम: वेवलेंथ जितनी ज़्यादा पेनेट्रेट करने वाली हो, उतनी ऊँची एनर्जी फॉर्म होती है — इंफ्रारेड, अल्ट्रावायलेट, X-रे, गामा रे, माइक्रोन्स, ऐंगस्ट्रॉम यूनिट में मापे जाते हैं।

📐 15.17 रेडिएशन डोज़

  • रेडिएशन डोज़ को बॉडी द्वारा पूरी तरह अवशोषित (Absorbed) एनर्जी की कुल मात्रा के रूप में परिभाषित किया जाता है, यूनिट्स में व्यक्त, पर पूरी बॉडी में एक जैसा एब्ज़ॉर्ब नहीं होता। रेडिएशन के प्रकार, दोस, और शरीर की सतह पर लोकेशन के अनुसार यह अलग-अलग होता है — लो-एनर्जी रेडिएशन डोज़ पर रेफर करते समय ज़रूरी है, हाई-एनर्जी रेडिएशन ज़्यादा पेनिट्रेट कर गहरे प्रभाव डालता है।
  • Table 15.6 में शरीर के हिस्सों के अनुसार अनुशंसित (Recommended) एलाउएबल रेडिएशन डोज़ बताई गई है — जैसे: Whole Body / Head and Trunk / Active Blood — 1¼ Rems per Calendar Quarter, Forming Organs / Lens of Eyes / Gonads — 1¼, Hands and Forearms / Feet and Ankles — 8¾, Skin of Whole Body — ½
  • कुल बायोलॉजिकल डोज़ की गणना के लिए "रेम" यूनिट का उपयोग होता है, जो कई रेडिएशन टाइप्स के मिक्स डोज़ को कंपनसेट करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

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उदाहरणबराबर (rem में)
1 रोंटगेन डोज़ (X या गामा रेडिएशन)1 रेम
1 रेड डोज़ (X, गामा, बीटा रेडिएशन)1 रेम
0.1 रेड डोज़ (हाई एनर्जी न्यूट्रॉन/हाई एनर्जी प्रोटॉन)1 रेम
0.05 रेड डोज़ (प्रोटॉन से भारी पार्टिकल्स)1 रेम

☣️ 15.18 अल्फा रेडिएशन

  • अल्फा पार्टिकल एक स्टेबल, तेज़ी से चलने वाला (Rapidly Moving) दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन की यूनिट है, जो अनस्टेबल (Disintegrating) नाभिक से निकलता है। इसकी शॉर्ट रेंज बाहरी अल्फा एमिटर्स से मिलने वाले खतरे को कम करती है।
  • अगर अल्फा-एमिटिंग रेडियोएक्टिव मटेरियल शरीर में सीधे प्रवेश (Ingestion/Inhalation) कर जाए, तो हाई डिग्री का सेल डैमेज हो सकता है, हालाँकि बाहरी तौर पर एक्सटर्नल एमिटर्स से खतरा नगण्य (Negligible) होता है।
  • न्यूट्रॉन की कोई इलेक्ट्रिकल चार्ज नहीं होती, इसलिए यह पदार्थ से सीधे इंटरैक्ट नहीं होता। फास्ट न्यूट्रॉन में हाई पेनिट्रेटिंग पावर होती है, स्लो न्यूट्रॉन में हाई आयोनाइज़ेशन स्पेसिफिकिटी होती है।

15.19-15.20 गामा रेडिएशन व कॉस्मिक रेडिएशन10

💥 15.19 गामा रेडिएशन

  • गामा रेडिएशन एक टिपिकल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन है, जिसकी वेवलेंथ बहुत छोटी और फ्रीक्वेंसी बहुत ऊँची होती है। यह एक कम एक्साइटेड स्टेट (Less Excited State) की ओर बढ़ते हुए तब बनती है, जब न्यूक्लियस रेडियोएक्टिव प्रोसेस से गुज़रता है — जैसे रेडियोएक्टिव सीसा (Lead) में स्टेबल होने की प्रक्रिया।
  • गामा रेडिएशन एक "अल्ट्रा तीव्र (Sufficient) एनर्जी" वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन है जो मैटर के साथ इंटरैक्ट करती है और चार्ज्ड पार्टिकल्स बनाती है, जिससे टिश्यू डैमेज होता है।
  • गामा रेडिएशन X-रे रेडिएशन के समान (Comparable) है, पर बहुत तेज़ी से (Rapidly) फैलती है, जो अत्यधिक (Extreme) डेप्थ तक पहुँचती है और पूरे शरीर को आयोनाइज़ कर सकती है — इसलिए यही कारण है कि गामा रेडिएशन को इतना खतरनाक माना जाता है।

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अंग (Organ)एक्यूमुलेटेड डोज़ (rem)
Whole body, Head and Trunk, Active Blood, Gonads (Individual)3 (13 सप्ताह में)
वही, 18 साल के ऊपर5 गुना ज़्यादा (30 साल में)
Skin of Whole Body/Thyroid10 (13 सप्ताह), 30 (साल में)
Hands and Forearms, Feet and Ankles75 (13 सप्ताह), 25 (साल में)
Bone (Body Burden)0.1 meg. Ra-226 या इसके बायोलॉजिकल इक्विवैलेंट
Other Organs (13 सप्ताह/साल)5/15

🌌 15.20 कॉस्मिक रेडिएशन

  • कॉस्मिक रेडिएशन इंसानों के लिए मुख्य रूप से "हाई फ्लाइट (ऊँची उड़ान)" के दौरान हैज़ार्ड होती है। पृथ्वी पर, यह इतनी कम है कि इससे इंसान के शरीर के आयोनाइज़ेशन में बहुत छोटा (Relatively Few) हिस्सा ही मिलता है।
  • वैज्ञानिक साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स से एटमॉस्फियर के ऊपर देखे गए कॉस्मिक मेसॉन शावर्स में नाइट्रोजन, कार्बन और ऑक्सीजन जैसे "प्राइमरी कॉस्मिक न्यूक्लियाई" होते हैं (यानी हैवी न्यूक्लियाई)।
  • पृथ्वी का वातावरण (Atmosphere) एक प्रोटेक्टिव शील्ड की तरह काम करता है। कुछ ही प्राइमरी एटमॉस्फियरिक पार्टिकल्स पृथ्वी की सतह तक पहुँचते हैं, क्योंकि प्राइमरी पार्टिकल एटमॉस्फियर में मौजूद स्पेस के साथ टकराकर अपनी एनर्जी खो देता है।

15.21-15.22 रेडिएशन प्रोटेक्शन व ALARA11

🛡️ 15.21 रेडिएशन प्रोटेक्शन

  • सर्टेन लेवल से नीचे रेडिएशन एक्सपोज़र से कोई साफ प्रभाव (Apparent Effect) नहीं दिखता, अन्यथा सभी आयोनाइज़िंग रेडिएशन हानिकारक होती हैं। शील्डिंग और मॉनिटरिंग जैसे रेडिएशन प्रोटेक्शन प्रोग्राम, डिटेक्शन जितने ही ज़रूरी हैं।
  • एटॉमिक प्रोडक्ट इंडस्ट्री में हेल्थ फिज़िसिस्ट रेडियोलॉजिकल सेफ्टी के लिए ज़िम्मेदार होते हैं — इसमें एम्प्लॉयीज़ की मॉनिटरिंग, हैज़ार्ड इवैल्युएशन और वेस्ट डिस्पोज़ल ऑपरेशंस शामिल हैं। सेफ्टी स्पेशलिस्ट भी इस काम में शामिल होते हैं।
  • रेडियोएक्टिव मटेरियल के इस्तेमाल की बढ़ती फ्रीक्वेंसी को देखते हुए, इंडस्ट्री में एप्लीकेशन तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है, इसलिए यह हेल्पफुल एड्स इस्तेमाल करने में मदद करता है, जिनमें कम खर्च से ज़्यादा प्रोडक्ट्स इम्प्रूव किए जा सकते हैं। कुछ करंट यूज़ेस:
1. इंडस्ट्रियल रिसर्च — इरेडिएटेड टूल्स/पार्ट्स का घिसाव मापना 2. रेडियोलॉजी — X-रे की जगह 3. गॉजिंग — स्टील, पेंट, पेपर आदि की मोटाई नापना 4. ट्रेसर्स — फ्लुइड फ्लो लाइनें ट्रेस करना 5. आयोनाइज़र्स — स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी हटाना 6. पॉलीमराइज़ेशन — केमिकल रिएक्शन तेज़ करना 7. रेडिएशन — लो-इंटेंसिटी हाई सोर्स एग्ज़िट साइन/स्टोरेज बिन/ट्रैफिक लेन मार्कर्स
  • ऊपर बताए गए सभी एप्लीकेशंस वाले इंस्ट्रूमेंट्स में रेडियोएक्टिव मटेरियल की मौजूदगी की जानकारी देनी चाहिए।
  • Fig 15.4 — ANSI Standard Radiation Symbol: स्टैंडर्ड रेडिएशन सिंबल में क्रॉस-हैच्ड एरिया पर्पल कलर के होते हैं और बैकग्राउंड पीला (Yellow) होता है, जिसमें 60° का एंगल बना होता है।

📉 15.22 ALARA

  • ALARA का मतलब है "As Low As Reasonably Achievable" — यह कॉन्सेप्ट ऑक्यूपेशनल एक्सपोज़र को कम से कम रखने के लिए बनाया गया है, ताकि एक्सपोज़र स्पेसिफाइड लिमिट से बहुत नीचे रहे।
  • रेडियोएक्टिव मटेरियल पर लगी CAUTION लेबल में इंफो होती है — रेडियोएक्टिव मटेरियल, unauthorized व्यक्ति कम से कम इतनी दूरी बनाए रखें, इमरजेंसी कॉल में किससे संपर्क करें, और यह मैनुअल पढ़े बिना कोई ऑपरेट न करे।

15.23-15.24 डिटेक्शन इंस्ट्रूमेंट्स व मेज़रिंग डिवाइस12

🔬 15.23 इंस्ट्रूमेंट्स फॉर रेडिएशन डिटेक्शन एंड मेज़रमेंट

  • रेडिएशन डिटेक्शन और मेज़रमेंट के लिए सिलेक्शन सर्वे इंस्ट्रूमेंट्स को ध्यान से डिज़ाइन किया जाता है, ताकि पर्टिकुलर टाइप और एनर्जी लेवल की रेडिएशन को मॉनिटर किया जा सके।
  • अल्फा पार्टिकल्स डिटेक्ट करने में सबसे मुश्किल हैं क्योंकि इनकी रेंज कम होती है (एयर में 12.5 सेमी से कम) और आसानी से अवशोषित हो जाते हैं (0.15 mm पेपर द्वारा भी रुक जाते हैं)। अल्फा पार्टिकल मॉनिटरिंग के लिए मुख्यतः प्रोपोर्शनल काउंटर, आयोनाइज़ेशन चैंबर और सिंटिलेशन डिटेक्टर इस्तेमाल होते हैं।
  • बीटा और गामा रेडिएशन को आयोनाइज़ेशन चैंबर से मापा जाता है। म्यूलर ट्यूब बीटा रेडिएशन को गामा से कम पेनिट्रेट करता है। मिक्स्ड रेडिएशन (अल्फा और बीटा) के लिए, दो अलग शील्ड डिटेक्टिंग एलिमेंट के ऊपर रखे जाते हैं, ताकि दोनों को डिफरेंशिएट किया जा सके।
  • रेडिएशन-मेज़रिंग डिवाइसेज़ हेल्थ प्रोटेक्शन के लिए तीन मेज़रमेंट पर्पस से डिज़ाइन किए जाते हैं: 1. Determination of Contamination, 2. Determination of Dosage, 3. Determination of Dosage Rate

📟 15.24 डिवाइसेज़ फॉर मेज़रिंग रेडिएशन

  • 15.24.1 Crystal Dosimeters: Dosimeters में डोज़ मेज़रिंग टाइप शामिल हैं जिनमें फिल्म बैंडेज या क्रिस्टल शामिल हैं। एक क्रिस्टल (जैसे सिल्वर क्लोराइड, पोटैशियम ब्रोमाइड, थैलियम ब्रोमाइड) पर रखकर डोसीमीटर की डोसेज को इवैल्यूएट किया जाता है। इसे एक मेज़रेबल लाइट सोर्स के फॉर्म में एक्सपोज़ करने पर, यह एक इफेक्ट स्टोर एनर्जी को इलेक्ट्रिकल करंट के रूप में रिलीज़ करता है।
  • 15.24.2 Ionization Chambers: आयोनाइज़िंग चैंबर दो इलेक्ट्रिकली कंडक्टिंग प्लेट्स से बनते हैं। एक प्लेट पॉज़िटिव पोल (+) से और दूसरी नेगेटिव पोल (–) से जुड़ी होती है। जब गैस भरे सिलिंडर में रेडिएशन सोर्स आता है, तो गैस एटम आयोनाइज़ होते हैं और पॉज़िटिव आयन नेगेटिव प्लेट की ओर और नेगेटिव आयन (इलेक्ट्रॉन) पॉज़िटिव प्लेट की ओर आकर्षित होते हैं — इससे एक मापने योग्य फ्लो (Measurable Flow) बनता है।
  • 15.24.3 Geiger-Muller Counter (Geiger Counter): यह एक आयोनाइज़ेशन ग्रुप का रेडिएशन मेज़रिंग इंस्ट्रूमेंट है। एक सिलिंडर होता है जिसके सेंटर एक्सिस के साथ वायर होता है, जो पॉज़िटिवली चार्ज्ड होता है, गैस से भरे कंटेनर में। रेडिएशन ट्यूब में एंटर करके गैस के प्रोड्यूसेशंस को आयोनाइज़ करती है, इलेक्ट्रिकल पल्स तार के साथ पैदा होता है, जो एम्पलीफायर में जाता है और लाउडस्पीकर या मैकेनिकल काउंटर पर एक क्लिक पैदा करता है, जिससे आयोनाइज़िंग रेडिएशन की क्वांटिटी नापी जा सकती है।
  • 15.24.4 Proportional Counters: गीगर काउंटर जैसा ही होता है, पर बेसिकली इसमें अल्फा और बीटा दोनों पार्टिकल्स के बीच अंतर करने की क्षमता होती है, इसलिए यह अल्फा पार्टिकल्स को काउंट करने में ज़्यादा उपयोगी है। यह गामा न्यूट्रॉन से ज़्यादा संतोषजनक (Satisfactory) डिटेक्टर है।
  • 15.24.5 The Scintillation Counter: यह काउंटर उन मटेरियल की प्रॉपर्टी इस्तेमाल करता है जो रेडिएंट एनर्जी से टकराने पर "फ्लैशेस ऑफ लाइट" (सिंटिलेशंस) पैदा करते हैं। इसमें एक डिवाइस "फोटोमल्टीप्लायर ट्यूब" कहलाता है, जो कोटेड सरफेस से टकराने वाले इलेक्ट्रॉनों को डिस्लॉज करता है। इस प्रकार के डिवाइस बहुत तेज़ी से काम करते हैं और हाई इंटेंसिटी माप सकते हैं।

15.25 पर्सनल-मॉनिटरिंग डिवाइसेज़13

  • पर्सनल मॉनिटरिंग डिवाइसेज़ का उपयोग एक्सेसिव डोज़ ऑफ रेडिएशन से लोगों को प्रोटेक्ट करने के लिए किया जाता है। इंस्ट्रूमेंट्स दो तरह की मॉनिटरिंग के लिए ज़रूरी हैं — पर्सनल मॉनिटरिंग (जो इंडिविजुअल द्वारा प्राप्त एक्सपोज़र निर्धारित करती है) और एरिया मॉनिटरिंग (जो एरिया में मौजूद एक्सपोज़र लेवल मापती है)।

🎞️ 15.25.1 Film Badge

  • यह लो रेडिएशन एक्सपोज़र के लिए डिज़ाइन किया गया डोसीमीटर है। यह प्लास्टिक या मेटल होल्डर के साथ फोटोग्राफ पर पहना जाता है — कॉलर, नाम, या क्लॉक नंबर पर।
  • बैज एक मेटल इंसर्ट (लेड, कैडमियम आदि) होता है, जो फ्रंट और रियर फिल्टर से लैस होता है। एक विंडो (1/2 x 3/4 इंच) फिल्म पैक से अलग शील्डिंग मटेरियल में स्थित होती है।
  • फिल्म डेंसिटोमीटर सबसे कॉमन पर्सनल मॉनिटरिंग इंस्ट्रूमेंट है, जो मुख्यतः क्लॉथिंग पर पहना जाता है, ताकि X या डायरेक्ट रेडिएशन डिटेक्ट हो सके।
  • केमिकल डोसीमीटर और ग्लास डोसीमीटर सप्लीमेंटल प्रोसेस की ज़रूरत होती है, जबकि फिल्मबैज डायरेक्ट रीडिंग होते हैं।

🖊️ 15.25.2 Pocket Dosimeter (Geiger Counter)

  • यह पेन जैसा इंस्ट्रूमेंट है, जो सेंटर वायर के साथ सिलिंडर की एक्सिस पर कंपोज़्ड होता है, और गैस से भरे सिलिंडर के केंद्र में एक वायर चलता है, जो पॉज़िटिवली चार्ज्ड होता है।
  • दो पॉकेट डोसीमीटर होते हैं — जो न्यूट्रॉन और गामा रेडिएशन मापते हैं, और फॉल्स रीडिंग की संभावना कम करने के लिए इनको हर कर्मचारी द्वारा पहना जाता है।

🔵 15.25.3 The Glass Dosimeter

  • यह हाई-लेवल गामा रेडिएशन मापता है (मिली-रोंटगेन में)। शॉर्ट-टर्म एमरजेंसी एक्सपोज़र मापने के लिए यह डिवाइस एक पेंडेंट की तरह प्लास्टिक में एनक्लोज़्ड होता है, जिसमें सिल्वर कोटेड फॉस्फेट ग्लास एलिमेंट होता है।
  • जब रेडिएशन एक्सपोज़ होता है तो यह ल्यूमिनेसेंट (Luminescent) हो जाता है। ल्यूमिनेसेंस को कंप्यूटर इंडिकेटर में एब्ज़ॉर्ब्ड डोज़ को रोंटगेन में मापा जा सकता है।

🧪 15.25.4 The Chemical Dosimeter

  • यह एक पोर्टेबल और डायरेक्ट रीडिंग डोसीमीटर है। फिक्स्ड टेम्परेचर और प्रेशर लिमिट्स में परफॉर्म किया जाता है — एक फिक्स्ड कैलिब्रेटेड डिस्क, एक स्मॉल चैंबर में रखा जाता है।
  • जब लिक्विड को इरेडिएटेड किया जाता है, चेंज होता है, और डिस्क कलर चेंज करती है। यह 20 या ज़्यादा रोंटगेन रेडिएशन मापता है।

👟 15.25.5 Hand and Foot Counters

  • यह वॉल-माउंटेड ट्यूब काउंटर होता है, जो वर्कर्स के हाथ और जूते के सोल्स पर रेडियोएक्टिव मटेरियल की कैरीइंग रोकने के लिए इस्तेमाल होता है। इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाते समय इस्तेमाल किया जाता है।

15.26-15.28 रेडिएशन कंट्रोल्स व एक्सपोज़र सुरक्षा14

🎛️ 15.26 आयोनाइज़िंग रेडिएशन कंट्रोल्स

  • Area Monitoring: वर्किंग एरिया में यह लगातार या समय-समय पर मौजूद डोज़ेज लेवल्स को निर्धारित करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। एक फिक्स्ड सिस्टम प्रीसेट अलार्म के साथ होता है, जो रेडिएशन क्रॉस होने पर अलार्म बजाता है।
  • Medical Support: एम्प्लॉयीज़ की हेल्थ के कंट्रोल में रेडिएशन सोर्सेज़ के प्रति महत्वपूर्ण एलिमेंट है। हेल्थ एग्ज़ामिनेशन द्वारा प्रीप्लेसमेंट फिज़िकल के तौर पर उपलब्ध कराया जाता है, ताकि पता चल सके कि इंडस्ट्री में कोई फिज़िकल कैरेक्टरिस्टिक्स न हो जो रेडिएशन रिस्क बढ़ाए, जैसे मेडिकल हिस्ट्री, अनीमिया, कैटरैक्ट्स, डिफॉर्मिटी, रिटार्डेड ब्लड क्लॉटिंग या ल्यूकीमिया।
  • Monitoring Record Keeping: रिकॉर्डिंग मॉनिटरिंग डेटा प्रोटेक्शन प्रोग्राम का एक महत्वपूर्ण एलिमेंट है। सेफगार्ड्स एम्प्लॉयीज़ की डॉक्यूमेंटेशन, सुपरवाइज़र्स और कंपनी के लिए एक्यूरेट डेटा रखना ज़रूरी है, रेडियोलॉजिकल एक्सपोज़र के लिए फ्यूचर रेगुलेशन में हिस्टोरिकल एक्सपोज़र महत्वपूर्ण है।

⚠️ 15.27 कंट्रोलिंग रेडिएशन एक्सपोज़र

  • अनकंट्रोल्ड एंट्री ऑफ रेडियोएक्टिविटी बॉडी में इनहेलेशन, इंजेशन या स्किन के थ्रू एब्ज़ॉर्प्शन से हानिकारक इफेक्ट्स पैदा कर सकती है। पोटेंशियल हैज़ार्ड इन बातों पर निर्भर करता है:
  • 1. रेडियन एनर्जी की मैग्नीट्यूड 2. रेडिएशन का टाइप 3. रेडियोएक्टिव सोर्स का हाफ-लाइफ 4. बॉडी में ली गई रेडियोएक्टिव मटेरियल की क्वांटिटी और एलिमिनेशन रेट 5. रेडियोएक्टिव सब्सटेंस की सिलेक्टिविटी (शरीर के सिट्स के लिए)।
  • रेडिएशन एक्सपोज़र कंट्रोलिंग में तीन कंसिडरेशन होती हैं: 1. एक्सपोज़र की रेट (millirontgens/hour में), 2. रेडिएशन सोर्स से दूरी (इंटेंसिटी इनवर्सली डिक्रीज़ होती है वर्ग दूरी के, जैसे 10 फीट से 1 फुट दूरी पर इंटेंसिटी 100 गुना घट जाएगी), 3. शील्डिंग (बैरियर मटेरियल की फिज़िकल प्रॉपर्टीज़ के अनुसार रेडिएशन ब्लॉक/एटेन्युएट करना)।
  • बैरियर के लिए मटेरियल कैसे सिलेक्ट होगा यह रेडिएशन के टाइप और एनर्जी पर निर्भर करता है — जैसे एक न्यूक्लियर रिएक्टर में शील्डिंग के लिए कई डिफरेंट मटेरियल की ज़रूरत हो सकती है, जिसकी वज़न (Weight) ही बैरियर का मुख्य फैक्टर होता है।
  • शील्ड्स की इंस्टॉलेशन में साइड, ऊपर या नीचे — सोर्स के चारों तरफ केयर ज़रूरी है, ताकि आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति प्रोटेक्टेड रहे।

☢️ 15.28 कंट्रोलिंग रेडियोआइसोटोप हैज़ार्ड्स

  • 15.28.1 External Radiation Hazards: जब एक्टिविटी में इंडस्ट्रियल रेडियोग्राफिक सोर्स, प्रोसीजरल ड्रिल शामिल हो, तो हेल्थ फिज़िसिस्ट की मदद से सेफ्टी स्पेशलिस्ट को इंस्टॉलेशन से पहले प्रीलिमिनरी रेडिएशन सर्वे करना चाहिए और शील्डिंग, वेंटिलेशन में डिज़ाइन चेंज सुझाने चाहिए। पोस्टिंग रिक्वायरमेंट्स (Areas, Rooms, Containers) फेडरल रेगुलेशंस के अनुसार होनी चाहिए।
  • 15.28.2 Internal Radiation Hazards: कंटैमिनेटेड वॉश वॉटर को उचित जगह डिस्पोज़ करें (सिंक से लेकर सीवर तक)। बड़ी मात्रा में एक्सहॉस्ट डस्ट को होड्स से जमा और डिस्पोज़ किया जाना चाहिए। इंस्टॉलेशन से पहले सभी इंपॉर्टेंट प्रश्न — क्या डस्ट कलेक्ट होती है? स्टोरेज एरिया रिक्वायर्ड? — पर विचार होना चाहिए।

15.29 नॉन-आयोनाइज़िंग रेडिएशन15

  • नॉन-आयोनाइज़िंग रेडिएशन से जुड़े इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के क्षेत्र — माइक्रोवेव, इंफ्रारेड, विज़िबल लाइट, अल्ट्रावायलेट और लेज़र रेडिएशन शामिल हैं।
  • रेडिएशन बैंड्स को उनकी फ्रीक्वेंसी (और वेवलेंथ) के अनुसार क्लासिफाई किया जाता है। बैंड्स के बीच शार्प रेखा नहीं होती, बल्कि ये ओवरलैप करते हैं।

💡 15.29.1 Visible Spectrum

  • विज़िबल पार्ट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में 400 से 800 नैनोमीटर रेंज में होता है, जो ऑक्यूपेशनल विज़िबल लाइट कंसर्न को कवर करता है।
  • तीन प्राइमरी किस्में हैं: इंसिडेंट लाइट (सीधे सोर्स से आने वाली), रिफ्लेक्टेड लाइट (सरफेस से बाउंस होने वाली), ट्रांसमिटेड लाइट (लैंप डिफ्यूज़र से गुज़रने वाली)।
  • विज़िबल लाइट के दो सोर्स — इनकैंडेसेंट (हॉट बॉडी) और डिस्चार्ज सोर्स (फ्लोरोसेंट, फ्लैश ट्यूब, प्लाज़्मा टॉर्च)।

🌞 15.29.2 Ultraviolet Spectrum

  • UV स्पेक्ट्रम रेंज 4 से 400 नैनोमीटर होती है, तीन सब-कैटेगरी में — वैक्यूम UV, फार UV, नियर UV।
  • UV रेडिएशन आँखों को दिखाई नहीं देती, यह सूरज से और आर्टिफिशियल इलेक्ट्रिकल आर्क से आती है।
  • इंडस्ट्री में UV एक्सपोज़र फ्लुओरेसेंट मटेरियल डिटेक्शन, UV लेज़र्स, वेल्डिंग, स्किन/आई हैज़ार्ड्स से जुड़े हैं। प्रोटेक्शन के लिए (1) रेडिएशन शील्डिंग, (2) प्रॉपर गॉगल्स, (3) प्रोटेक्टिव क्लोदिंग, (4) स्किन क्रीम इस्तेमाल होते हैं।

📡 15.29.3 Microwave Radiation

  • माइक्रोवेव रेंज 100 मेगाहर्ट्ज़ से 300,000 मेगाहर्ट्ज़ (MHz) होती है। इंडस्ट्री में इस्तेमाल बढ़ने से एक्सपोज़्ड वर्कर्स की संख्या बढ़ी है।
  • मुख्य हैज़ार्ड थर्मल इफेक्ट्स से जुड़ा है, कुछ नॉन-थर्मल इफेक्ट्स भी रिपोर्ट हुए हैं।
  • कंट्रोल के मुख्य सिद्धांत — रिस्ट्रिक्टेड एंट्री, एक्सपोज़र टाइम कम करना, शील्डिंग/एनक्लोज़िंग, माइक्रोवेव सोर्स की रिओरिएंटेशन। पर्सनल प्रोटेक्टिव डिवाइस अक्सर बेअसर होते हैं, इसलिए सोर्स पर ही एक्सपोज़र कम करना ज़रूरी है।

🔥 15.29.4 Infrared Radiation

  • IR स्पेक्ट्रम 800 नैनोमीटर (0.8 माइक्रोमीटर) से 400 माइक्रोमीटर तक होता है, नियर-IR और फार-IR में विभाजित।
  • स्किन डैमेज थर्मल नेचर का होता है, कोई लॉन्ग-टर्म लो-लेवल इफेक्ट नहीं जाना जाता। स्किन और आँखें क्रिटिकल ऑर्गन हैं। प्रोटेक्शन के लिए प्रोटेक्टिव आईवियर और फेस शील्ड इस्तेमाल होते हैं।

🔦 15.29.5 Lasers

  • LASER शब्द "Light Amplification by Stimulated Emission of Radiation" का एक्रोनिम है।
  • लेज़र इंफ्रारेड, विज़िबल और अल्ट्रावायलेट रीजन में एनर्जी की बड़ी मात्रा को छोटे क्रॉस-सेक्शनल एरिया में कंसंट्रेट करते हैं, और लंबी दूरी तक प्रोजेक्ट किए जा सकते हैं।
  • हाई पावर डेंसिटी और शॉर्ट पल्स के कारण, ह्यूमन टिश्यू पर कैटास्ट्रोफिक इफेक्ट्स हो सकते हैं। मुख्य कंट्रोल तरीका — डायरेक्ट लेज़र बीम और उसके रिफ्लेक्शंस को मिनिमाइज़ करना, एजुकेशन और प्रोटेक्टिव आईवियर इस्तेमाल करना।

15.30 रेडियोएक्टिव वेस्ट डिस्पोज़ल16

  • रेडियोएक्टिव वेस्ट (a) ओर प्रोसेसिंग, सेपरेटिंग ऑपरेशंस और न्यूक्लियर रिएक्टर्स में; (b) हॉस्पिटल्स और रिसर्च लेबोरेटरीज़ में (जहाँ रेडियोएक्टिव आइसोटोप ट्रीटमेंट और रिसर्च के लिए इस्तेमाल होते हैं) होता है।
  • लिक्विड वेस्ट में रेडियोएक्टिव सब्सटेंस के सस्पेंडेड रेजिड्यू होते हैं। सॉलिड वेस्ट में एक्सपेरिमेंट के लिए इस्तेमाल की गई एनिमल टिश्यूज़ होती हैं, जिनकी मात्रा बहुत कम होती है इसलिए डिस्पोज़ल में ज़्यादा समस्या नहीं होती।
  • एटॉमिक एनर्जी कमीशन में प्लांट वेस्ट की स्ट्रेंथ काफी अधिक होती है। ट्रीटमेंट और डिस्पोज़ल के मुख्य तरीके: (1) कंसंट्रेशन (छोटे वॉल्यूम में स्टोरेज और बाद में रीयूज़ के लिए), (2) डाईल्यूशन (नॉन-रेडियोएक्टिव मटेरियल — एयर या पानी, स्टेबल आइसोटोप — के साथ मैक्सिमम परमिसिबल कंसंट्रेशन तक)।
  • रेडियोएक्टिव वेस्ट के डिस्पोज़ल की समस्या इसलिए जटिल है क्योंकि नैचुरल प्रोसेस (रेडियोएक्टिव डिके) के अलावा रेडियोएक्टिविटी को नष्ट नहीं किया जा सकता। सैकड़ों साल की लंबी हाफ-लाइफ वाले आइसोटोप डिस्पोज़ल को और मुश्किल बनाते हैं। इसलिए कलेक्टर्स, पाइप्स और कंड्यूट्स में खास सावधानी ज़रूरी है, ताकि एक्सपोज़र से बचा जा सके।
  • जब रेडियोएक्टिव वेस्ट को दूसरे मटेरियल (एयर, पानी) से डाइल्यूट किया जाता है, तब केमिकल, फिज़िकल या बायोलॉजिकल प्रोसेस से री-कंसंट्रेशन का खतरा रहता है। इसलिए वेस्ट को ऑयल ड्रम्स में सीमेंट करके समुद्र में शोर से 100 मील दूर डंप किया जाता है, या फिर ज़मीन के अंदर गहराई में दफनाया जाता है।

📝 सारांश (Summary)

न्यूक्लियर एनर्जी यूरेनियम और थोरियम के फिशन से मिलती है, जिसे न्यूक्लियर फ्यूल साइकल (माइनिंग से लेकर वेस्ट डिस्पोज़ल तक) के ज़रिए इस्तेमाल किया जाता है। रेडिएशन कई प्रकार की होती है — आयोनाइज़िंग (अल्फा, बीटा, गामा, कॉस्मिक) और नॉन-आयोनाइज़िंग (विज़िबल, UV, माइक्रोवेव, IR, लेज़र)। रेडिएशन को रोंटगेन, रेप, रैड, रेम जैसी यूनिट्स में मापा जाता है। रेडिएशन से सुरक्षा के लिए ALARA सिद्धांत, शील्डिंग, दूरी और एक्सपोज़र टाइम कम करने जैसे तरीके अपनाए जाते हैं, और गीगर काउंटर, फिल्म बैज, डोसीमीटर जैसे इंस्ट्रूमेंट्स से रेडिएशन मॉनिटर की जाती है। अंत में रेडियोएक्टिव वेस्ट को समुद्र में गहराई में या ज़मीन में सुरक्षित तरीके से डिस्पोज़ किया जाता है।

❓ अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

  1. न्यूक्लियर फिशन और इसके पर्यावरणीय हैज़ार्ड्स क्या हैं?
    (A) फिशन प्रोसेस (B) एनवायरनमेंटल इफेक्ट्स
  2. पार्टिकुलेट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की चर्चा करें।
    (A) पार्टिकुलेट टाइप्स (B) EM स्पेक्ट्रम
  3. ऑक्यूपेशनल एक्सपोज़र के लिए रेडिएशन प्रोटेक्शन गाइड की चर्चा करें।
    (A) डोज़ लिमिट्स (B) प्रोटेक्शन मेथड्स
  4. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें:
    (a) न्यूक्लियर साइकल व रीप्रोसेसिंग (b) एनरिचमेंट प्रोसेस (c) नैचुरल गैस (d) आयोनाइज़िंग रेडिएशन (e) नॉन-आयोनाइज़िंग रेडिएशन (f) ALARA (g) आयोनाइज़िंग रेडिएशन की यूनिट्स (h) अल्फा रेडिएशन (i) गामा रेडिएशन (j) कॉस्मिक रेडिएशन
  5. एक्सपोज़र से रेडिएशन प्रोटेक्शन की चर्चा करें।
  6. रेडिएशन डिटेक्शन और मेज़रमेंट के लिए विभिन्न इंस्ट्रूमेंट्स की चर्चा करें।
  7. आयोनाइज़िंग रेडिएशन को कंट्रोल करने के तरीके बताएं।
  8. इंटरनल रेडिएशन हैज़ार्ड्स की चर्चा करें।
  9. रेडियोएक्टिव वेस्ट का डिस्पोज़ल कैसे करेंगे?
📘 Notes prepared for easy Hindi-medium exam revision — Chapter 15: Radiation Hazards

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