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करूँ कभी #अभिषेक लाडली...🙏 आँखों से बहते झरनों का...😭 मुझे दे दो भरोसा चरणों का...🙇 ॐ स्वस्ति श्री नीलकंठाय नमः “श्रीरामचरितमानस” केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार है। भगवान श्रीराम के मर्यादित आचरण और अन्य पात्रों के माध्यम से यह मनुष्य को धर्मानुसार अनुशासित जीवन जीने का संदेश देता है ! बाबा तुलसी ने “श्रीरामचरितमानस” के रूप में भारतीय साहित्य को एक ऐसी मणि सौंपी है जिसकी एकल आभा जटिल सांसारिकता से लेकर गहन आध्यात्मिकता तक के समस्त पथ को प्रशस्त करने में सक्षम है ! रामकथा केवल पारलौकिक जगत में सहारा बनने वाले पुण्य-कर्मों का संचय ही सुनिश्चित नहीं करती बल्कि इस कथा-धारा में मनुष्यता का वह संजीवनी तत्व शामिल है, जिसके बल पर लौकिक जगत में एक अत्यंत सुंदर एवं सौहार्दपूर्ण समाज की परिकल्पना अत्यंत सरलता से साकार की जा सकती है। 🙏 भगवान कृष्ण मेरे आराध्य, विश्वास मेरी ऊर्जा, संस्कार मेरे शस्त्र, 🇮🇳 माँ, मातृभूमि, मातृभाषा मेरे लिए सर्वोपरि 🙏 For any Issues / Copyright discussions contact AbhishekVssct@gmail.com

"Mechanical Hazards"

यांत्रिक खतरे — Mechanical Hazards (Hindi Notes)
SAFETY, HEALTH AND ENVIRONMENT — Chapter 12

यांत्रिक खतरे
(Mechanical Hazards)

पूरी किताब के पेज 183 से 204 तक की जानकारी — आसान हिन्दी में, Point-wise और Bihar Board स्टूडेंट्स के लिए बिल्कुल सरल भाषा में।

👉 इस पोस्ट में यांत्रिक खतरे (Mechanical Hazards) से जुड़ी हर बात — निप पॉइंट खतरे, मशीन गार्ड, सुरक्षा उपकरण, हाथ व पावर टूल्स, रस्सी-चेन-स्लिंग की सुरक्षा, ऑटोमेशन, मैकेनिकल हैंडलिंग उपकरण, प्रेशर वेसल्स, गैस सिलिंडर, बॉयलर, पावर प्रेस, शोर-कंपन के खतरे और हल किए गए प्रश्नों को — बहुत ही आसान और सरल हिंदी में समझाया गया है। हर टॉपिक को छोटे-छोटे पॉइंट्स में लिखा गया है ताकि परीक्षा के लिए याद करना आसान हो।

12.1-12.2 परिचय व यांत्रिक खतरों के स्रोत1

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  • फैक्ट्री में मज़दूर कई तरह की मशीनों, उपकरणों, हैंडलिंग सिस्टम और हाई-प्रेशर उपकरणों के बीच काम करते हैं।
  • कुछ मशीनों में घूमने वाले, फिसलने वाले, आगे-पीछे चलने वाले पुर्जे होते हैं, जिनमें तेज़ धार, कठोर सतह, गियर, चेन ड्राइव होते हैं।
  • कुछ जगहों पर हाई-प्रेशर वाले न्यूमेटिक (हवा से चलने वाले) और हाइड्रोलिक (तरल से चलने वाले) सिस्टम होते हैं — पाइप और प्रेशर वेसल के साथ।
  • कुछ मज़दूर उच्च तापमान वाले भाप सिस्टम और बॉयलर के साथ काम करते हैं।
  • ओवरहेड क्रेन से भारी सामान पतली स्लिंग के सहारे उठाया जाता है — यहाँ भी मज़दूर नीचे से गुज़रते हैं, जो खतरनाक है।
  • यांत्रिक खतरा (Mechanical Hazard) का मतलब है — चलती हुई चीज़ों, टूटी हुई मशीनों से उड़ने वाले टुकड़ों के कारण शरीर को चोट लगने की संभावना।
  • गिरती हुई चीज़ों से टकराने, ऊँचाई से गिरने से भी चोट लगती है।
  • संपीड़ित हवा/तरल/भाप में ऊर्जा जमा रहती है — इनके फटने से टुकड़े हर दिशा में उड़ते हैं और भारी नुकसान करते हैं।
  • ज़्यादा दबाव सहने वाले पुर्जे भी फेल होकर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
  • यांत्रिक खतरे फैक्ट्री में सबसे आम हैं और चोट, अपंगता व मृत्यु का कारण बनते हैं।
  • चोट लगने वाले शरीर के अंग — हाथ, पैर, आँखें, नाक, चेहरा, सिर, जीभ। कुछ हादसे अपंगता देते हैं, कुछ जानलेवा होते हैं।
  • सुरक्षा प्रबंधन का लक्ष्य है — शून्य यांत्रिक दुर्घटना (Zero Mechanical Accidents)

12.2 यांत्रिक खतरे मुख्यतः इनसे पैदा होते हैं

  1. गलत डिज़ाइन, गलत असेंबली या मरम्मत-रखरखाव की कमी से मशीन के पुर्जों का फेल होना।
  2. मशीनों पर अपर्याप्त सुरक्षा-कवच (Safeguards)।
  3. पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) का सही से उपयोग न करना।
  4. काम की जगह पर मज़दूरों की लापरवाही और असावधानी।

यांत्रिक खतरों के मुख्य स्रोत

फ्लाईव्हील उभरे हुए मशीन पार्ट्स प्रेस प्रेशर वेसल बेल्ट/चेन/स्प्रॉकेट ड्राइव कन्वेयर लिफ्ट होइस्टिंग टैकल शाफ्ट हाथ के औज़ार पावर टूल्स

खतरनाक ऑपरेशन (जो चोट पहुँचा सकते हैं)

  • काटना (Cutting), फाड़ना (Shearing), टूटना (Breaking)
  • कुचलना (Crushing), होइस्टिंग, ढुलाई (Hauling), दबाना (Pressing)
इन ऑपरेशन से लगने वाली चोटें: उंगली कटना, अंग कुचलना, उड़ते हुए किरचों (splinters) से चोट, ऊँचाई से गिरना, ढीले कपड़ों के कारण घूमती मशीन में उलझ जाना।

चित्र 12.1 — निप पॉइंट हैज़र्ड (Nip Point Hazards)

निप पॉइंट यानी वह जगह जहाँ दो घूमने वाले पुर्जे या पुर्जा-मशीन बॉडी आपस में मिलते हैं और उंगली/हाथ फंसने का खतरा रहता है। ऐसे खतरनाक स्थान इन जगहों पर पाए जाते हैं:

चेन व स्प्रॉकेट गियर की जोड़ी बेल्ट व पुली हैंडव्हील ब्रेक शू दो घूमने वाले रोलर कन्वेयर रोलर

चित्र में बड़े तीर घूमने की दिशा दिखाते हैं और छोटे तीर निप पॉइंट (खतरे की जगह) दिखाते हैं।

12.3 मशीन गार्ड और सुरक्षा उपकरण2

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मशीन गार्ड मुख्यतः मैकेनिकल बैरियर होते हैं जो शरीर के किसी हिस्से को खतरे की जगह या खतरे के बिंदु तक पहुँचने से रोकते हैं।

मशीन गार्ड के प्रकार

  1. पूरी तरह बंद (Totally Enclosed): खतरे की जगह चारों तरफ से पूरी तरह ढकी होती है।
  2. इंटरलॉकिंग डिवाइस वाला बंद प्रकार: मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंटरलॉक के साथ।
  3. एडजस्टेबल एक्सेस वाला बंद प्रकार: ज़रूरत पर एडजस्ट किया जा सकने वाला गार्ड।
  4. सीमित एक्सेस वाला बंद प्रकार: केवल सीमित पहुँच की सुविधा वाला गार्ड।
  • मशीन गार्ड मज़बूत और सही तरीके से लगे होने चाहिए।
  • गार्ड बनाने के लिए रेलिंग, विस्तारित धातु (Expanded Metal), बुनी हुई तार (Woven Wire) आदि का इस्तेमाल होता है।

सुरक्षा उपकरण (Safety Device) क्या है

सुरक्षा उपकरण एक नियंत्रण-तंत्र (Controlling Mechanism) है, जो मशीन से जुड़ा होता है और यह काम करता है:

  1. अगर खतरे की जगह में कोई घुसपैठ हो तो मशीन को खुद रोक देता है।
  2. मज़दूर को खतरे वाली जगह तक पहुँचने से रोकता है।
  3. मशीन चालू होते ही मज़दूर के हाथ या अंगों को खतरे की जगह से दूर हटा देता है (अलग कर देता है)।

सुरक्षा उपकरणों के प्रकार (a-g)

  1. (a) एडजस्टेबल/मूवेबल बैरियर या गार्ड: पावर प्रेस और ऐसी ही मशीनों में उपयोग होते हैं, इंटरलॉकिंग सिस्टम (मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल) के साथ।
  2. (b) टू-हैंड कंट्रोल डिवाइस (Two Hand Trip): दोनों हाथों से एक साथ दो लीवर दबाने पर ही मशीन चलती है। दोनों हाथ खतरे की जगह से दूर, सुरक्षित ज़ोन में होने चाहिए तभी मशीन चलेगी।
  3. (c) पुल-आउट/पुल-अवे डिवाइस: मशीन चलने से पहले मज़दूर के हाथों को खतरे वाली जगह से खींचकर बाहर निकाल लेता है, ताकि चोट न लगे।
  4. (d) होल्ड-आउट डिवाइस: यह काम करने और रखरखाव करने वालों के बीच फर्क करता है।
  5. (e) स्वीप गार्ड: एक झूलती हुई भुजा (Sweeping Arm) खतरे वाली जगह के आगे-पीछे घूमती है, ताकि खतरे की स्थिति में मज़दूर के हाथ हट जाएँ। यह ज़्यादातर पावर प्रेस में इस्तेमाल होता है।
  6. (f) ऑप्टिकल सेंसर: फोटोइलेक्ट्रिक तकनीक पर काम करता है — जो मशीनें जल्दी रुक सकती हैं, उनमें उपयोगी है (जैसे पावर प्रेस)।
  7. (g) फीडिंग टूल्स: मैकेनिकल टाइप (प्लायर्स, टोंग्स) या मैग्नेटिक/वैक्यूम टाइप। पावर प्रेस और गोलाकार आरी (Circular Saw) में उपयोगी। इसके लिए सही प्रशिक्षण बहुत ज़रूरी है।

12.4-12.7 सामान्य नियम, हाथ-पावर टूल्स, गार्ड्स3

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12.4 सुरक्षा उपकरण उपयोग के सामान्य नियम

  1. काम शुरू करने से पहले रोज़ाना गार्ड या सुरक्षा उपकरण की जाँच करें।
  2. गार्ड को छेड़ना, एडजस्ट करना, बंद करना या हटाना — यह सभी ऑपरेटरों के लिए सख्त मना है।
  3. पूरे सिस्टम (मशीन गार्ड और सुरक्षा उपकरण) को फुलप्रूफ रखने के लिए नियमित मरम्मत, रखरखाव और निगरानी ज़रूरी है।
  4. मज़दूरों को कंट्रोल मैकेनिज्म (शुरू करने वाले और आपातकालीन स्विच) तक आसान और तुरंत पहुँच होनी चाहिए।
  5. पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) का उपयोग सुनिश्चित होना चाहिए। ढीले कपड़ों का उपयोग मना है।

12.5 हाथ के औज़ार और पावर टूल्स

  • हाथ के औज़ार: हैकसॉ, छेनी (Chisel), फाइल, प्लायर्स, हथौड़ा, स्क्रू-ड्राइवर, हैंड-ड्रिल — इन्हें मज़दूर खुद अपने हाथों से चलाते हैं।
  • हाथ के औज़ारों में खतरे: औज़ार की तेज़ धार से चोट, चिपिंग के दौरान किरचें उड़ना, काम की सतह का खुरदरा (Abrasive) होना, और औज़ार का हाथ से फिसलना।

12.6 एनक्लोज़र गार्ड्स

  • बैरियर या एनक्लोज़र गार्ड आमतौर पर खड़ी स्टील की छड़ें, छिद्रित धातु (Perforated Metal) या भारी प्लास्टिक एनक्लोज़र से बनते हैं।
  • ये खतरे की जगह के चारों तरफ लगाए जाते हैं।
  • बाज़ार में तैयार गार्ड मिलते हैं — जिन्हें एडजस्ट किया जा सकता है, या फिक्स्ड बैरियर/एनक्लोज़र गार्ड के साथ अलग-अलग डाई प्रेस के लिए बनाया जाता है।
  • जब एडजस्टेबल गार्ड इस्तेमाल हों, तो ऑपरेटर को दोबारा एडजस्ट करने से मना किया जाना चाहिए और सुपरवाइज़र को यह सुनिश्चित करना चाहिए।
  • बेहतर यह है कि डाई डिज़ाइन करने वाला खुद ही एनक्लोज़र गार्ड को डाई से जोड़ दे — यह ऑपरेशन को पूरी तरह से स्क्रीन करता है और सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।

12.7 फीडिंग टूल्स

  • फीडिंग टूल्स का उपयोग खतरनाक कामकाजी क्षेत्र में मज़दूर के हाथों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
  • उदाहरण: गोलाकार आरी (Circular Saw) में साधारण पुशर स्टिक का उपयोग किया जाता है — जिससे लकड़ी को आरी के करीब धकेला जा सकता है, हाथ का इस्तेमाल किए बिना।
  • जब गाइड फेंस उंगलियों को ब्लेड के पास लाने पर मजबूर करता है, तो पुशर स्टिक की ज़रूरत होती है।
  • फीडिंग टूल्स अक्सर पावर प्रेस में उपयोग होते हैं, जहाँ खतरनाक निकटता होती है।
  • टोंग्स में स्टॉक पकड़ने के लिए मैकेनिकल, मैग्नेटिक या वैक्यूम जबड़े (Gripping Jaws) उपलब्ध होते हैं — अलग-अलग तरह के स्टॉक के लिए अलग-अलग जबड़े होते हैं।
  • चित्र 12.2: पावर प्रेस पर एडजस्टेबल बार गार्ड — जो हाथ को खतरे वाली जगह से रोकता है।

12.8 खतरों से बचाव के सावधानी उपाय4

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  1. वर्क-बेंच का सही आकार: सभी ऑपरेशन आसानी से हो सकें, इसके लिए वर्क-बेंच का आकार पर्याप्त होना चाहिए।
  2. ध्यान से काम करना: काम करते समय पूरा ध्यान लगाना चाहिए।
  3. औज़ारों को सही जगह रखना: औज़ारों को व्यवस्थित तरीके से सही जगह रखा जाना चाहिए।
  4. तेज़/भारी औज़ारों का सावधानी से इस्तेमाल: छेनी, स्लेज हैमर जैसे भारी उपकरणों को संभालकर उपयोग करें ताकि चोट न लगे।
पावर-टूल्स (मोटर या हवा से चलने वाले, जैसे कंप्रेसर) हाथ के औज़ारों से ज़्यादा सुरक्षित माने जाते हैं।

कुछ महत्वपूर्ण मशीनों में सुरक्षा उपकरण

12.9.1 पोर्टेबल सीढ़ियाँ (Ladders)

पोर्टेबल सीढ़ियों का उपयोग रिपेयर व मेंटेनेंस के काम में बहुत होता है। ऐसे काम करते समय मज़दूर की सुरक्षा के लिए सावधानियाँ:

  1. सीढ़ी की लंबाई सही होनी चाहिए और वह बिना किसी खराबी (जैसे कमज़ोर पायदान) या फिसलन के मज़बूत होनी चाहिए।
  2. सीढ़ी उतनी ही ऊँची होनी चाहिए जितनी ऊँचाई पर काम करना है।
  3. तूफान, तेज़ हवा या भारी हवा के झोंकों के दौरान सीढ़ी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  4. बिजली की लाइव तारों के पास मेटल की सीढ़ी का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  5. सीढ़ी के दोनों सिरे फिसलन-रोधी और स्थिर सतह पर रखने चाहिए, ताकि पलटने या फिसलने का खतरा न हो।

12.9.2 रस्सी सुरक्षा (Ropes)5

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स्टील की वायर रस्सियाँ आमतौर पर उद्योगों में इस्तेमाल होती हैं। मनीला या सीसल रस्सियों का उपयोग सीमित होता है। रोपवे, टैकल जैसे लिफ्टिंग ऑपरेशन में स्टील वायर रस्सियाँ ही इस्तेमाल होती हैं।

रस्सी की सुरक्षा के लिए ज़रूरी सावधानियाँ

  1. रस्सी का चयन निर्माता के स्पेसिफिकेशन के अनुसार होना चाहिए।
  2. रस्सी की ताकत उस पर आने वाले भार को सहन करने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए।
  3. झुकने की क्रिया (Bending Action) से रस्सी में थकान (Fatigue) पैदा होती है — इसलिए रिवर्स बेंडिंग से बचना चाहिए।
  4. वायर रस्सी को सही तरीके से हैंडल करें ताकि उसमें न किंक बने और न ही मरोड़ आए।
  5. ड्रम, रील और शीव (ग्रूव्ड व्हील/पुली) — बेंडिंग एक्शन को कम करने के लिए यथासंभव बड़े व्यास के होने चाहिए।
  6. रस्सी के दोनों सिरों पर फिटिंग के कई तरीके होते हैं — जैसे U-बोल्ट क्लिप, सॉकेट। गलत तरीके से क्लिप लगाने पर रस्सी की ताकत कम हो जाती है, इसलिए सही तरीके से लगाना ज़रूरी है।

क्लिप लगाने के सही और गलत तरीके

सही (RIGHT): क्लिप हमेशा रस्सी के डेड (छोटे) सिरे पर U-बोल्ट के साथ लगाई जानी चाहिए। रस्सी पर तनाव आने के बाद क्लिप को फिर से कसना चाहिए।

गलत (WRONG) — गलती 1: क्लिप को असमान रूप से (Stagger) लगाना — इससे रस्सी और क्लिप की पूरी ताकत विकसित नहीं होती।

गलत (WRONG) — गलती 2: U-बोल्ट को रस्सी के लाइव (लंबे) सिरे पर लगाना — इससे रस्सी की लटें कुचल जाती हैं और भार का असमान वितरण होता है, जिससे क्षमता घट जाती है।

रस्सी के सिरों को जोड़ने के लिए U-बोल्ट क्लिप, सॉकेट जैसी कई फिटिंग उपलब्ध हैं। छोटे व्यास (3/8 इंच) की रस्सी के लिए गलत फिटिंग विधि और कम संख्या में क्लिप लगाना — भारी रस्सी के मुकाबले ज़्यादा क्लिप की ज़रूरत को बढ़ाता है। सही सिरा-फिटिंग सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है।

तालिका 12.1 — सिरा-फिटिंग की क्षमता (End Fittings Efficiency)

फिटिंग का प्रकाररस्सी की ताकत का प्रतिशत
सॉकेट, सही तरीके से लगे100
क्लिप, सही तरीके से लगे80
क्लिप, गलत तरीके से लगे50 - 75
वेज सॉकेट65

12.9.4-12.9.6 क्रेन चेन, स्लिंग व फ्लाईव्हील6

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12.9.4 क्रेन चेन (Chains)

  • चेन का इस्तेमाल स्लिंग, होइस्ट, स्टीम शोवेल, मरीन उपयोगों के लिए किया जाता है।
  • चेन को शुद्ध रॉट (Wrought) आयरन से बनाया जाता है, जिसमें लोहे या स्टील का स्क्रैप या लैप न हो।
  • चेन के इस्तेमाल में सुरक्षित अभ्यास: लोड कभी भी हिलते-डुलते (kink) चेन के साथ नहीं उठाना चाहिए; कुछ प्लांट चेन पर धातु का टैग (सुरक्षित भार संख्या के साथ) जोड़ते हैं।
  • चेन के जोड़ों को कभी स्टैंप नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे कमज़ोरी का बिंदु बन जाता है। कुछ मामलों में सेकंड फ्लैट लिंक पर स्टैंप किया जाता है।
  • दो लिंक के बीच बोल्ट डालकर एक लिंक को दूसरे में जोड़ना खतरनाक प्रैक्टिस है — यह प्रतिबंधित होना चाहिए।
  • चेन का निरीक्षण: होइस्टिंग चेन का नियमित और बार-बार निरीक्षण होना चाहिए — घिसाव, दरारें, वेल्ड की जाँच, कड़ी की जांच आदि। किसी भी संदेह की स्थिति में चेन को अनीलिंग (Annealing) या नॉर्मलाइजिंग के लिए भेजा जाना चाहिए।
  • हुक: हुक अक्सर ओवरलोड के कारण मुड़ जाते हैं। एक बार मुड़ा हुआ हुक कमजोर हो जाता है, इसलिए भविष्य में उसकी ताकत पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

तालिका 12.1 — सिरा फिटिंग की क्षमता

फिटिंग का प्रकाररस्सी ताकत का %
सॉकेट्स, सही लगे100
क्लिप्स, सही लगे80
क्लिप्स, गलत लगे50-75
वेज सॉकेट्स65

चित्र 12.6: क्रेन हुक पर सेफ्टी लैच — स्लिंग को हुक से फिसलने से रोकने के लिए लॉकिंग बार लगाया जाता है।

12.9.5 स्लिंग (Slings)

  • जब सीधा-सीधा वर्टिकल लिफ्ट किया जाता है, तो लिफ्टिंग हुक पर पूरा भार सीधे आता है।
  • जब स्लिंग को एंगल पर उपयोग किया जाता है, तो स्लिंग की टांगों (Legs) पर बल बहुत बढ़ जाता है।
  • उदाहरण: टू-लेग स्लिंग 1000 kg वज़न उठा रही है — अगर लेग सीधी (0°) हो तो हर लेग पर 500 kg का भार आता है। लेकिन अगर एंगल 30° हो तो हर लेग पर तनाव लगभग 1000 kg (लगभग दोगुना) हो जाता है, और अगर एंगल केवल 5° हो तो तनाव भार से भी ज़्यादा हो सकता है।
  • इसलिए, स्लिंग का एंगल जितना छोटा होगा (यानी स्लिंग जितनी क्षैतिज होगी), उसकी टांगों पर तनाव उतना ही ज़्यादा बढ़ेगा।
  • इसलिए भार उठाते समय एंगल की गणना सावधानी से करनी चाहिए।

12.9.6 फ्लाईव्हील (Flywheels)

  • फ्लाईव्हील अगर ठीक से नहीं संभाला गया तो गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
  • अगर फ्लाईव्हील के गवर्नर की सुरक्षा ठीक से नहीं की गई हो, तो यह फटने (Bursting) जैसी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
  • फ्लाईव्हील की गति सिंक्रोनस स्पीड से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए, वरना यह ओवरस्पीड हो सकता है — इसे नियंत्रित करना ज़रूरी है।
  • अचानक भार कम होने पर (जैसे इंजन या मोटर के फेल होने पर) फ्लाईव्हील की गति अचानक बढ़ सकती है — इसका ध्यान रखना चाहिए।
  • ओवरस्पीडिंग व फ्लाईव्हील दुर्घटनाओं के मुख्य कारण — फॉल्टी गवर्नर, अचानक स्टॉप या स्टार्ट, गलत रखरखाव, ढीले बेयरिंग।
  • प्राइम मूवर द्वारा चलाए जाने वाले फ्लाईव्हील में सेंट्रीफ्यूगल फोर्स के कारण खतरे की संभावना ज़्यादा रहती है, इसलिए इनके पुर्जों की नियमित जाँच ज़रूरी है।

12.9.7-12.10 लिफ्टिंग टैकल व ऑटोमेशन7

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12.9.7 लिफ्टिंग टैकल व लिफ्टिंग उपकरण

  • क्रेन, क्लच, ब्रेक, बेयरिंग, चेन, वायर रोप, गियर जैसे उपकरणों की मैकेनिकल विफलता के कारण दुर्घटना हो सकती है — इससे बचने के लिए नियमित निरीक्षण और रखरखाव ज़रूरी है।
  • बार-बार पीरियोडिक इंस्पेक्शन और मेंटेनेंस से लिफ्टिंग उपकरणों की कार्यक्षमता बनी रहती है, और दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।

12.9.5 (DC मोटर सुरक्षा)

  1. जब DC मोटर ड्राइव का उपयोग होता है, तो आर्मेचर सर्किट टूटने की स्थिति में यह ज़रूरी है कि फ्लाईव्हील की गति अचानक न रुके।
  2. फ्लाईव्हील के किसी भी घूमने वाले हिस्से के 2 मीटर के दायरे में कर्मचारियों के जाने की संभावना को रोकने के लिए फ्लोर लेवल के भीतर की जगह गार्ड की जानी चाहिए।
  3. ड्राइव कपलिंग पर बोल्ट, फ्लाईबॉल गवर्नर या फ्रिक्शन ड्राइव जैसे अन्य घूमने वाले पुर्जों को भी उचित रूप से गार्ड किया जाना चाहिए।

12.10 ऑटोमेशन (Automation)

किसी ऑपरेशन या प्रक्रिया का ऑटोमेशन इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितनी बंद (Enclosed) और पूर्ण है, जहाँ तकनीशियनों की निगरानी बहुत कम ज़रूरत हो।

  • ऑटोमेशन एक स्व-सुधार (Self-Correcting) प्रणाली है, जिसे सर्वो-मैकेनिज्म कहते हैं। यह तकनीशियनों की रीडिंग की सुपरविज़न और मूल्यांकन से उत्पादन प्राप्ति को सुरक्षित तरीके से अनुकूलित करती है।

ऑटोमेशन के 4 मुख्य भाग

  1. इंफॉर्मेशन: उत्पाद की जानकारी (आकार, स्थिति, गति आदि) प्राप्त करने का सर्किट।
  2. कंट्रोलर: जानकारी को उस क्रम में फीड करता है जिसमें ऑपरेशन सही ढंग से होना चाहिए।
  3. प्रोडक्शन मशीन: लेथ, ड्रिल, टाइपराइटर आदि जो असली काम करती है।
  4. फीडबैक (सर्वोमैकेनिज्म): स्वचालित संचालन में आकार, स्थिति, गति में असंतुलन (Imbalance) को पहचान कर सर्किट को सक्रिय करता है, जो ऑटोमैटिक कंट्रोल को चलाता है।
उदाहरण: जहाज़ का ऑटो-स्टीयरिंग कंपास — अगर जहाज़ रास्ते से भटकता है, तो कंपास खुद स्टीयरिंग को सुधारता है, जब तक जहाज़ सही रास्ते पर वापस न आ जाए।

चित्र 12.7 — स्टैंडर्ड हैंड सिग्नल्स (क्रेन ऑपरेशन के लिए)

HOIST (ऊपर उठाना) LOWER (नीचे करना) RACK TRAVEL (चलना) STOP (रुकना) EMERGENCY STOP

लिफ्टिंग उपकरण के सुरक्षित संचालन में ऑपरेटर और सिग्नल देने वाले (Signaler) के बीच अच्छी टीमवर्क ज़रूरी है। सिग्नल देने वाला व्यक्ति स्लिंग या हुक-ऑन डिवाइस को सुरक्षित करने के लिए प्रशिक्षित होना चाहिए। सिग्नल देने वाला व्यक्ति ही लोड को हिलाने के दौरान सिग्नल देता है।

12.11 मैकेनिकल हैंडलिंग उपकरण8

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मैकेनिकल हैंडलिंग उपकरण उद्योगों में सामग्री (जैसे लौह अयस्क, गत्ता, कोयला) की ढुलाई के लिए बहुत उपयोग होते हैं। सामग्री नाज़ुक या विस्फोटक भी हो सकती है। यह हैंडलिंग बेल्ट कन्वेयर, रोपवे, एलिवेटर, होइस्ट व लिफ्ट, फोर्क लिफ्ट ट्रक और ढुलाई वाहन (हाथ ठेला, व्हील बैरो) के रूप में हो सकती है।

12.11.1 कन्वेयर — सावधानियाँ

  1. ऑपरेटर व आस-पास काम करने वाले मज़दूरों को पूरी तरह प्रशिक्षित होना चाहिए।
  2. दुर्घटना रोकने के लिए कन्वेयर व रोपवे में संवेदनशील जगहों पर गार्ड-रेल लगाई जानी चाहिए।
  3. गिरने वाली सामग्री से चोट रोकने के लिए काम करने की जगहों व रास्तों के पास उचित बैरियर लगाए जाने चाहिए।
  4. फर्श में सभी कटआउट को सही तरीके से गार्ड किया जाना चाहिए।
  5. संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी संकेत या सिग्नल प्रदर्शित होने चाहिए।
  6. सुरक्षित काम के लिए पर्याप्त क्लीयरेंस (हेडरूम) प्रदान की जानी चाहिए।
  7. दोषपूर्ण पुर्जों को समय पर बदलने के लिए योग्य व्यक्तियों द्वारा नियमित निरीक्षण होने चाहिए।

12.11.2 रोपवे — ज़रूरी बातें

  1. कैरिज को रस्सियों से जोड़ना पूरी तरह फुलप्रूफ होना चाहिए।
  2. कैरिज की भार-वहन क्षमता से अधिक भार नहीं होना चाहिए।
  3. स्टील वायर-रोप की सही स्पेसिफिकेशन होनी चाहिए।

12.11.3 एलिवेटर/लिफ्ट

  • एलिवेटर व ऐसे लिफ्टिंग उपकरण, ज़िम्मेदार निर्माताओं द्वारा स्टैंडर्ड या कोड स्पेसिफिकेशन के अनुसार बनाए जाते हैं — इसलिए ये सुरक्षित परिवहन के साधन माने जाते हैं। फिर भी, हर साल एलिवेटर लिफ्ट के प्रवेश द्वार पर कुछ "दुर्घटनाएँ" होती हैं।
  • (A) होइस्टवे: हर मंज़िल या लैंडिंग पर 1.8 मीटर की ऊँचाई तक अच्छी तरह से एनक्लोज़र से सुरक्षित होनी चाहिए। हॉयस्टवे के अंदर कोई भी प्रोजेक्शन नहीं होना चाहिए।
  • (B) होइस्टवे एंट्रेंस: कार प्लेटफार्म और लैंडिंग के बीच फंसने का खतरा रहता है। एलिवेटर के लिए अधिकतम स्वीकृत क्लीयरेंस 40 mm है। होइस्टवे एंट्रेंस पर लॉक व इंटरलॉक वाले दरवाज़े/गेट होने चाहिए, ताकि कार को लैंडिंग से हटाने से पहले सभी दरवाज़े लॉक और बंद हों।

12.11.4 फोर्क लिफ्ट ट्रक

  • गिरने वाली चीज़ों से ऑपरेटर को बचाने के लिए पर्याप्त मज़बूत ओवरहेड सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
  • ब्रेक, गियर, लाइटिंग सिस्टम को अच्छी हालत में रखने के लिए नियमित मेंटेनेंस व निरीक्षण ज़रूरी है।
  • ट्रकों से निकलने वाली एग्ज़ॉस्ट (कार्बन मोनोऑक्साइड) से वातावरण अनुमत सीमा से ज़्यादा प्रदूषित नहीं होना चाहिए।

12.11.5 ढुलाई वाहन (Toeing Vehicles)

व्हीलबैरो, डॉली आदि मैनुअल तरीके से चलाए जाते हैं। हाथ के गार्ड हाथों की त्वचा में खरोंच, छोटी चोट और छिलने से बचाने में मदद करते हैं।

12.12-12.13 प्रेशर हैज़र्ड व गैस सिलिंडर सुरक्षा9

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12.12 प्रेशर हैज़र्ड और प्रेशर वेसल्स

प्रेशर हैज़र्ड कंप्रेसिबल (संपीड़ित होने वाले) और इनकंप्रेसिबल (न संपीड़ित होने वाले) तरल पदार्थों से होते हैं।

  1. लो प्रेशर हैज़र्ड: बहुत ऊँची जगहों पर होते हैं — इससे नाक व कान से खून बहने की समस्या हो सकती है।
  2. हाई प्रेशर हैज़र्ड: विस्फोट, तरल या गैस का अचानक तेज़ी से निकलना, वॉटर हैमर — ये हाई-प्रेशर हैज़र्ड के कुछ उदाहरण हैं। वॉटर हैमर (पानी जैसे इनकंप्रेसिबल तरल में) पाइपलाइन में अचानक वाल्व बंद होने से पैदा होता है, जो पाइपलाइन सिस्टम को नुकसान पहुँचा सकता है।

12.12.1 प्रेशर वेसल्स

ये कंटेनर हैं जो दबाव में तरल पदार्थों को स्टोर करने के लिए बनाए जाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:

  1. अनफायर्ड प्रेशर वेसल: इन्हें स्रोत से दूर रखा जाता है, जैसे — LPG सिलिंडर, एसिटिलीन सिलिंडर, ऑक्सीजन सिलिंडर आदि।
  2. फायर्ड स्टीम/प्रेशर वेसल: जहाँ ठोस, तरल या गैसीय ईंधन को जलाकर उत्पन्न हुई गर्मी से भाप बनाई जाती है। बॉयलर इसके उदाहरण हैं।

फायर्ड बॉयलर के प्रकार

  • फायर ट्यूब बॉयलर: मोबाइल यूनिट्स (जैसे लोकोमोटिव बॉयलर) के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
  • वॉटर ट्यूब बॉयलर: जो जल्दी भाप बना सकते हैं, थर्मल पावर स्टेशनों में स्थायी बॉयलर के तौर पर उपयोग होते हैं।
प्रेशर वेसल और उनके उपकरणों को ASME (American Society of Mechanical Engineers) के प्रेशर वेसल कोड के अनुसार डिज़ाइन व इंस्टॉल किया जाना चाहिए। अगर राज्य या स्थानीय नियम भी लागू हों तो उनका पालन ज़रूरी है। इंस्टॉलेशन शुरू करने से पहले सक्षम अधिकारी (जैसे बीमा कंपनी या राज्य/शहर निरीक्षण विभाग) से मंजूरी लेनी चाहिए।

रप्चर डिस्क (Rupture Disc)

  • प्रेशर वेसल में जब दबाव तय सीमा से ज़्यादा हो जाए, तो निर्धारित सुरक्षा रिलीफ वाल्व के बदले या साथ में रप्चर डिस्क का इस्तेमाल किया जाता है, जो दबाव को डिस्चार्ज कर देती है।
  • रप्चर डिस्क एक बार फटने के बाद खुद से रीसेट नहीं होती (जैसा सेफ्टी वाल्व करता है) — इसलिए ज़्यादातर टैंक की सामग्री बाहर निकल सकती है। इसलिए ज्वलनशील गैसों या अस्थिर तरल पदार्थों वाले वेसल में इसका इस्तेमाल उचित नहीं है।

फ्यूज़िबल प्लग

  • ये रप्चर डिस्क जैसे ही काम करते हैं — जब तापमान असुरक्षित स्तर पर पहुंच जाता है, तो प्लग की धातु पिघल जाती है और दबाव खुली हुई जगह से निकल जाता है।
  • हॉट-वाटर टैंक जैसे उपकरणों में सेफ्टी वाल्व और फ्यूज़िबल प्लग — दोनों का संयोजन इस्तेमाल किया जाता है, ताकि तापमान और दबाव दोनों की सुरक्षा मिल सके।
  • कंटेनर लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद जंग खा सकता है — जिससे तरल पदार्थों का रिसाव हो सकता है। दबाव में अचानक फटने से टुकड़े उड़ सकते हैं, जो आस-पास के लोगों को चोट पहुँचा सकते हैं।

12.13 गैस सिलिंडर के उपयोग में सुरक्षा उपाय

  • ऑक्सी-एसिटिलीन फ्लेम बनाने के लिए वेल्डिंग व कटिंग में गैसों का उपयोग होता है।
  • अलग-अलग गैस वाले सिलिंडरों की पहचान के लिए अलग-अलग रंग होते हैं — जैसे एसिटिलीन (मरून रंग), ऑक्सीजन (काला रंग)।
  • सिलिंडर हमेशा शेड (छाया) में स्टोर किए जाने चाहिए, खुली आग के पास नहीं।
  • सिलिंडर को खड़ा रखा जाना चाहिए और ट्रांसपोर्ट में उन्हें ट्रॉलियों पर ले जाना चाहिए, लुढ़का कर नहीं।
  • सिलिंडर की प्रेशर वाल्व के लिए नॉन-रिटर्न वाल्व की सिफारिश की जाती है।
  • एसिटिलीन के हर वायुमंडलीय दबाव पर, एसिटोन उसकी अपनी मात्रा का लगभग 25 गुना घोल सकता है — इससे सुरक्षा के लिए दबाव कम करने में मदद मिलती है।

12.14 फायर्ड प्रेशर वेसल्स (बॉयलर सुरक्षा)10

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सामग्री की ताकत की बढ़ती जानकारी, निर्माण मानकों (जैसे ASME बॉयलर कोड), राज्य/शहर के कानून, निरीक्षण सेवाओं और बीमा कंपनियों की वजह से अब बॉयलर विस्फोट काफी कम हो गए हैं। जब बॉयलर विस्फोट होता है, तो आमतौर पर बॉयलर रूम ऑपरेटरों द्वारा स्थापित सुरक्षा प्रैक्टिस में लापरवाही ही मुख्य कारण होती है।

  • बॉयलरों का निरीक्षण नेशनल बोर्ड ऑफ बॉयलर एंड प्रेशर वेसल इंस्पेक्टर्स द्वारा नियुक्त इंस्पेक्टर करते हैं।
  • केवल ASME कोड के अनुसार बने बॉयलर ही इस्तेमाल किए जाने चाहिए — इसकी पुष्टि "क्लोवरलीफ" स्टैंप से होती है, जो बॉयलर के आकार, सुरक्षित संचालन दबाव, निर्माण वर्ष, सीरियल नंबर और इंस्पेक्टर का नंबर दिखाता है।
  • पुराने (सेकंड हैंड) बॉयलर खरीदते समय योग्य इंस्पेक्टर या मैकेनिकल इंजीनियर की सलाह ज़रूरी है।
  • बॉयलर व सहायक उपकरण ऐसी जगह लगाए जाने चाहिए जहाँ विस्फोट, आग, बाढ़ या अन्य बाहरी परिस्थितियों से क्षति की संभावना कम से कम हो।

12.14.1 सेफ्टी वाल्व

  • सेफ्टी वाल्व बॉयलर से जुड़े होते हैं और किसी अन्य स्टीम कनेक्शन से स्वतंत्र होने चाहिए।
  • यदि आउटलेट पाइप का इस्तेमाल हो, तो उसका क्रॉस-सेक्शनल एरिया वाल्व आउटलेट के बराबर पूरा होना चाहिए।
  • डिस्चार्ज ऐसी जगह किया जाए जहाँ बॉयलर के आस-पास के प्लेटफॉर्म प्रभावित न हों।
  • सेफ्टी वाल्व को हर वर्क शिफ्ट की शुरुआत में हैंड-टेस्टिंग लीवर या अन्य डिवाइस से टेस्ट किया जाना चाहिए।

12.14.2 गॉज ग्लास (Gauge Glass)

  • हर बॉयलर में कम से कम एक वॉटर गॉज ग्लास होना चाहिए, जो बॉयलर के सबसे निचले दृश्य बिंदु से कम से कम 50 mm नीचे स्थापित हो।
  • पानी का स्तर रोज़ाना जांचना चाहिए — हर शिफ्ट की शुरुआत में यह अच्छा अभ्यास है।
  • गॉज ग्लास को वायर मेश या गार्ड से सुरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि टूटने से चोट न लगे।
  • प्रेशर गॉज और रिकॉर्डिंग उपकरण को कंपन, नमी, जंग और ट्रैफिक से होने वाली क्षति से बचाना चाहिए।
  • ऑटोमेटिक व सेफ्टी कंट्रोल हर शिफ्ट शुरू होने से पहले जांचे जाने चाहिए — कोई खराबी मिलने पर मरम्मत होने तक बॉयलर नहीं चलाना चाहिए।

12.14.3 फर्नेस विस्फोट

  • फर्नेस विस्फोट से इंजीनियर व फायरमैन को चोट लग सकती है।
  • ऑटोमैटिक फायर्ड बॉयलर, हैंड-फायर्ड की तुलना में विस्फोट के लिए ज़्यादा प्रवण होते हैं।
  • फर्नेस विस्फोट के सामान्य कारण: गलत फायरिंग, इग्निशन फेलियर, फ्लेम या पावर में रुकावट।
  • ऑयल और गैस से चलने वाले बॉयलरों में ऑटोमैटिक फ्यूल शट-ऑफ डिवाइस होने चाहिए, जो फ्लेम बुझने पर काम करें।
  • फ्यूल पाइपिंग और वाल्व ऐसी जगह से इंस्टॉल होने चाहिए जहाँ से बॉयलर रूम से दूर स्थित स्थान से फ्यूल सप्लाई बंद की जा सके, यदि वहाँ कोई विस्फोट हो जाए।

12.14.4 वेसल्स के लिए वेंट

  • दबाव में मौजूद वेसल को खोलने से पहले आंतरिक दबाव को छोड़ने के लिए वेंट ज़रूरी हैं।
  • वेंट पाइप का व्यास पर्याप्त बड़ा होना चाहिए ताकि अतिरिक्त दबाव सही तरीके से बाहर निकल सके।
  • पाइप को इस तरह इंस्टॉल करना चाहिए कि यह स्टोर सामग्री, गंदगी या फ्रीजिंग से अवरुद्ध न हो।
  • फ्लेम अरेस्टर व मौसम-सुरक्षा टोपियों की ज़रूरत पड़ सकती है, पाइप के वायुमंडलीय सिरे पर।
  • वेंट पाइप में शट-ऑफ वाल्व का इस्तेमाल प्रतिबंधित होना चाहिए, लेकिन जहाँ गंदगी या ठंड से पाइप बंद होने का खतरा हो, वहाँ सेफ्टी रिलीफ वाल्व लगाई जा सकती है।
चित्र 12.8: बॉयलर वाल्व लॉक — वाल्व लॉक के साथ डिस्प्ले डैंगर टैग ("DANGER MAN IN BOILER") लगाया जाता है, ताकि किसी को गलती से वाल्व न खोलने दिया जाए जब कोई मज़दूर बॉयलर के अंदर काम कर रहा हो।

12.15-12.17 टैंक, हाइड्रोस्टेटिक टेस्ट व होल्ड-ऑफ11

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12.15 टैंकों को खाली करना, जांचना व मरम्मत करना

  • टैंक खाली करना, साफ करना, जांचना या मरम्मत करना — यह एक विशेष कार्य है, जो केवल पूरी तरह से प्रशिक्षित और करीबी निगरानी में काम करने वाले मज़दूरों को दिया जाना चाहिए।
  • टैंक कार खाली करने से पहले: कार की सटीक स्थिति की जाँच, ब्रेक सेट करना, पहियों को दोनों सिरों पर ब्लॉक करना और सही चेतावनी संकेत लगाना ज़रूरी है।
  • यदि सामग्री निकालने में कंप्रेस्ड एयर का इस्तेमाल हो, तो टैंक की सामग्री पर लगने वाला दबाव 2 kg/cm² से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।

टैंक में प्रवेश करने से पहले सावधानियाँ

  1. टैंक की सभी पाइपलाइनों को बंद करना चाहिए — पाइप के छोटे हिस्से को हटाकर उसे ब्लैंक फ्लेंज से ढकना बेहतर तरीका है।
  2. टैंक के अंदर मौजूद उपकरण (जैसे एजिटेटर) और मशीनरी को इलेक्ट्रिकल कंट्रोल स्विच लॉक करके या ड्राइव बेल्ट डिस्कनेक्ट करके सुरक्षित करना चाहिए।
  3. ऑक्सीजन की कमी और ज़हरीले/ज्वलनशील तत्वों के लिए वातावरण को टेस्ट किया जाना चाहिए।
  4. अगर हवा सुरक्षित नहीं पाई जाती, तो हर मज़दूर को सेल्फ-कंटेन्ड ब्रीदिंग एप्रेटस या सप्लाइड एयर रेस्पिरेटर, रेस्क्यू हार्नेस-लाइफलाइन और केमिकल गॉगल्स पहनने चाहिए।
  5. आपातकाल के लिए कम से कम एक सेट सुरक्षा उपकरण हमेशा तैयार रखना चाहिए।
  6. टैंक के अंदर काम कर रहे व्यक्तियों को टैंक के बाहर से देखते रहने के लिए एक व्यक्ति होना चाहिए। हर व्यक्ति के लिए बचाव में कम से कम दो मज़दूर उपलब्ध होने चाहिए।
  7. पोर्टेबल लाइट्स व टूल्स 6 या 12 वोल्ट पर चलने चाहिए, और ग्राउंडिंग के लिए थर्ड वायर से जुड़े होने चाहिए।

12.16 हाइड्रोस्टेटिक टेस्ट

  • यह हाइड्रोलिक दबाव लगाकर वेसल की दबाव सहने की क्षमता जाँचने की विधि है।
  • तरल (जैसे पानी) के साथ टेस्ट करना गैस की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि तरल में जमा ऊर्जा गैस से बहुत कम होती है — तरल लगभग असंपीड्य (Incompressible) होता है।
  • हाइड्रोस्टेटिक टेस्ट में वेसल फटने पर वैसा भारी विस्फोट नहीं होगा जैसा गैस के साथ टेस्ट में होता।
  • यह टेस्ट आमतौर पर डिज़ाइन के कार्यशील दबाव (Working Pressure) का डेढ़ गुना दबाव देकर किया जाता है। कुछ मामलों में अंतिम बर्स्टिंग प्रेशर मापने के लिए 5 गुना या ज़्यादा दबाव भी दिया जाता है।
  • कंटेनर के अंदर की हवा टेस्ट से पहले निकाली जानी चाहिए।

टेस्ट के लिए सुरक्षा सावधानियाँ

  1. यह सुनिश्चित करना कि कंटेनर में हवा न हो।
  2. रप्चर डिस्क का इस्तेमाल करना — खासकर जब टेस्ट प्रेशर अधिक हो।
  3. सुरक्षित संरक्षित टेस्ट एरिया बनाना — जैसे स्टील बॉक्स, टेस्ट सेल या गड्ढा।
टेस्ट प्रेशर लगाते समय ऊर्जा को कम करने के लिए कंटेनर में ठोस पदार्थ भरकर, तरल की मात्रा को यथासंभव कम रखा जाता है।

12.17 होल्ड-ऑफ सिस्टम

यह सिस्टम "उपलब्ध व चालू" उपकरण को "अनुपलब्ध या मृत" उपकरण से अलग बताता है, ताकि मेंटेनेंस मैकेनिक गलती से चालू उपकरण को न छू लें।

होल्ड-ऑफ सिस्टम के 4 मुख्य हिस्से

  1. होल्ड-ऑफ टैग: जो "Do Not Operate" (चालू न करें) लिखी होती हैं और उपकरण पर लगाई जाती हैं।
  2. वाल्व व स्विच लॉक: जिनकी चाबी सुपरवाइज़र और लॉक बंद करने वाले व्यक्ति के पास रहती है, ताकि दूसरे मज़दूर गलती से अनुपलब्ध उपकरण न चला सकें।
  3. वाल्व व उपकरण की सूची: जिन्हें किसी खास काम के लिए टैग या लॉक किया जाना चाहिए।
  4. लॉगबुक: जिसमें तारीख, उपकरण, अनुपलब्धता का कारण और शामिल कर्मचारियों की जानकारी दर्ज की जाती है।
केवल मौखिक रूप से बताना कि कोई उपकरण बंद है — बिल्कुल भी अच्छा तरीका नहीं है, क्योंकि यह जानकारी भूल सकते हैं या सभी संबंधित मज़दूरों तक नहीं पहुँच सकती।

12.18-12.19 प्रशिक्षण, शोर व कंपन के खतरे12

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12.18 शिक्षा और प्रशिक्षण

  • प्रेशर वेसल (फायर्ड और अनफायर्ड दोनों) से जुड़े सभी ऑपरेटरों और मज़दूरों को नियमित अंतराल पर उचित शिक्षा और जानकारी दी जानी चाहिए।
  • ट्रेनिंग दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • ऑपरेटरों को सही संचालन, सुरक्षा मानकों का पालन, आपातकाल में क्या कार्रवाई करनी है — इसकी ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।

12.19 शोर और कंपन के खतरे

  • शोर और कंपन के खतरे मुख्यतः इन कारणों से होते हैं:
पुरानी मशीनों का इस्तेमाल दोषपूर्ण माउंटिंग गलत ऑपरेटिंग स्पीड खराब डिज़ाइन नींव गलत लेआउट व प्लानिंग
शोर और कंपन कान के पर्दे को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जलन/इरिटेशन कर सकते हैं, नर्वसनेस पैदा कर सकते हैं और सुनने की क्षमता कम कर सकते हैं।

12.20-12.21 पावर प्रेस व उसका मेंटेनेंस13

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12.20 पावर प्रेस

  • पावर प्रेस को अक्सर सबसे खतरनाक औद्योगिक उपकरण माना जाता है, और इसे OSHA 1910.217 का पालन करना चाहिए।
  • यह मेटल-शेपिंग ऑपरेशन में बहुत उपयोग होती है — डाई (धातु को आकार देने वाला टूल) और प्रेस (डाई-एक्शन के लिए ज़रूरी शक्ति देने वाला उपकरण) मिलकर काम करते हैं।
  • पावर प्रेस मुख्यतः एक राम (प्लंजर) से बनी होती है, जो कनेक्टिंग रॉड और क्रैंकशाफ्ट से जुड़ी होती है, और फ्लाईव्हील द्वारा चलाई जाती है। फ्लाईव्हील क्रैंकशाफ्ट की गति में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने वाला भारी पहिया है।
  • फ्लाईव्हील और क्रैंकशाफ्ट एक क्लच मैकेनिज्म से जुड़े होते हैं। जब क्रैंकशाफ्ट स्ट्रोक के ऊपरी हिस्से तक पहुँचता है, तो क्लच अपने आप अलग हो जाता है और क्रैंकशाफ्ट को उस स्थिति में ब्रेक द्वारा रोक दिया जाता है।
  • प्रेस को पैडल या हैंड कंट्रोल से ऑपरेट किया जाता है, जो क्लच मैकेनिज्म को जोड़ता है और फ्लाईव्हील से क्रैंकशाफ्ट तक ड्राइविंग फोर्स ट्रांसफर करता है।
  • डाई को सेट करने का काम प्रशिक्षित और सुरक्षा नियमों को समझने वाले मज़दूरों की ज़िम्मेदारी होनी चाहिए। सुपरवाइज़र आमतौर पर सेटअप की जाँच करता है और उसके बाद ही प्रेस को चलाने की मंज़ूरी मिलती है।

पावर प्रेस गार्डिंग के दो वर्गीकरण

  1. प्रेस ऑपरेटर को उत्पादन प्रक्रिया के दौरान उस जगह के इनहेरेंट (स्वाभाविक) खतरों से गार्ड करने वाला डिवाइस या ऑपरेटिंग तरीका देना।
  2. उन खतरों से सुरक्षा जो उत्पादन से सीधे जुड़े नहीं हैं, पर जिस जगह प्रेस काम कर रही है उस बिंदु पर मौजूद होते हैं।

तालिका 12.2 — गार्डिंग की दूरी व ओपनिंग साइज़ (सामग्री के अनुसार)

सामग्री का प्रकारचलती हुई पार्ट से दूरीओपनिंग साइज़
क्रॉस्ड वुड100 mm से कम / 100-375 mm10 mm / 50 mm
बुना हुआ तार (Woven Wire)50 mm से कम / 50-100 mm / 100-375 mm10 mm / 12.5 mm / 50 mm
एक्सपैंडेड मेटल100 mm से कम / 100-375 mm12.5 mm / 50 mm
परफोरेटेड मेटल100 mm से कम / 100-375 mm12.5 mm / 50 mm
रेलिंगन्यूनतम 375 mm / अधिकतम 500 mmएंगल आयरन 37.5×37.5×5 mm

12.21 पावर प्रेस मेंटेनेंस

  • पावर प्रेस के मेंटेनेंस से इसके खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  • निर्माता की सिफारिशों के अनुसार उपकरण को उच्चतम क्षमता पर बनाए रखने के लिए साल में 2-6 बार पीरियोडिक इंस्पेक्शन ज़रूरी है।
  • ब्रेक: प्रेस का सबसे ज़रूरी लेकिन अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला हिस्सा है। यह क्रैंकशाफ्ट और राम को रोकने का काम करता है — दिन में हज़ारों बार। घिसी हुई या ऑयल-सोक्ड ब्रेक को अच्छी लाइनिंग से रीलाइन किया जाना चाहिए।
  • ब्रेक एडजस्टमेंट ऐसा होना चाहिए कि यह क्रैंकशाफ्ट को उसके टॉप डेड सेंटर से 5 डिग्री पहले रोक दे।
  • अगर ब्रेक हब गर्म होने से फैलती है, तो ब्रेक ढीली पड़ सकती है, जिससे राम गिरने का खतरा रहता है — इसे समय पर ठीक करना ज़रूरी है।
  • क्लच: कई प्रकार के हो सकते हैं (हाथ/पैर लीवर, पुश बटन व सोलनॉइड, एयर प्रेशर, या इनका मिश्रण)। घिसे या टूटे पुर्जों को तुरंत बदला जाना चाहिए; अस्थायी जुगाड़ (मेकशिफ्ट) की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
  • राम काउंटरबैलेंस: राम के भार को संतुलित रखने और पावर आवश्यकता को कम करने के लिए दिया जाता है, यह लंबी स्प्रिंग या एयर सिलेंडर के ज़रिए किया जा सकता है।
  • ट्रेडल/पेडल: पैर से चलाई जाने वाली प्रेस के पैडल को इस तरह रखा और गार्ड किया जाना चाहिए ताकि गलती से न दब जाए।
  • डाई सेटर: डाई सेट करते समय ऑपरेटिंग कंट्रोलर को डिस्कनेक्ट करना और पावर बंद करना (स्विच लॉक) ज़रूरी है। राम को गिरने से रोकने के लिए एक सेफ्टी ब्लॉक (लकड़ी या सॉफ्ट मेटल) राम के नीचे रखा जाना चाहिए।
  • डाई को चेन होइस्ट या हाइड्रोलिक लिफ्टिंग डिवाइस के ज़रिए बोल्स्टर प्लेट पर लाया जाना चाहिए।

12.22 कार्यस्थल में खतरों का प्रबंधन14

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इंजीनियरिंग उद्योगों में कार्यस्थल पर मुख्य खतरे — यांत्रिक खतरे, गर्मी, शोर और विकिरण (Radiation) के संपर्क में आना है।

गर्मी (Heat)

  • अगर कार्यस्थल का तापमान सामान्य शरीर के तापमान से अधिक हो, तो शरीर पर हीट स्ट्रेस पड़ता है।
  • शरीर से पानी की कमी होती है, और अगर पर्याप्त मात्रा में पानी की भरपाई न हो, तो यह हीट शॉक (लू लगना) का कारण बन सकता है।

विकिरण (Radiation)

  • जब कोई सामग्री गर्म होकर लाल या सफेद गर्म (Red or White Hot) होकर रेडिएशन छोड़ती है, इसमें IR (Infrared) और UV (Ultraviolet) रेडिएशन शामिल हो सकते हैं।
  • मानव आँख इस तरह के रेडिएशन के लिए अभ्यस्त नहीं है — अगर सुरक्षा उपाय न किए जाएँ, तो आँखों को नुकसान पहुँच सकता है।
  • नियमित रूप से इस तरह के रेडिएशन के संपर्क में आने से आँखों की रोशनी को नुकसान होता है।

शोर (Noise)

  • ठोस-से-ठोस संपर्क या टकराव से शोर पैदा होता है। इंजीनियरिंग उद्योगों में यह आम है।
  • अगर शोर का स्तर सहनशील सीमा से ज़्यादा हो, तो यह शोर-प्रेरित सुनने की क्षमता में कमी (Noise Induced Hearing Impairment) का कारण बन सकता है।
  • शोर के केवल श्रवण (Auditory) प्रभाव ही नहीं, बल्कि गैर-श्रवण (Non-Auditory) प्रभाव भी होते हैं — जैसे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में एंज़ाइम स्राव जो तनाव पैदा करता है, और यह तनाव व्यक्ति को अधिक तेज़ी से काम करने के लिए मजबूर करता है।

इन खतरों को नियंत्रित करने के उपाय

  1. अगर इन्हें नियंत्रित नहीं किया गया, तो शारीरिक संदूषकों (Physical Contaminants) का असर या तो बढ़ सकता है या प्रभावित व्यक्ति को इससे बचाना पड़ेगा।
  2. सबसे आसान तरीका: संदूषण के स्रोत और प्रभावित व्यक्ति के बीच पर्याप्त दूरी रखकर उपयुक्त बैरियर बनाना — जितने कम लोग उजागर हों, उतना अच्छा।
  3. गर्मी: उचित यूनिफॉर्म और आँखों की सुरक्षा पहनना।
  4. ऑटोमेशन: इससे शॉप फ्लोर पर मौजूद लोगों की संख्या घटाई जा सकती है।
  5. व्यक्तियों की फिज़िकल उपस्थिति को जलवायु नियंत्रित कमरों (Climatically Controlled Rooms) में रखना बेहतर होता है, ताकि लोगों को नियमित अंतराल पर बाहर न जाना पड़े।
  6. रेडिएशन: उपयुक्त यूनिफॉर्म पहनना, आँखों की जाँच नियमित रूप से करवाना — इसका प्रभाव किसी को भी हो सकता है, इसलिए यह ज़रूरी है।
  7. शोर: शोर भरे वातावरण में मज़दूरों को उचित इयर प्रोटेक्टर पहनने चाहिए, जो शोर के स्तर को कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हों।
  8. उपकरणों की काम करने की प्रक्रिया में लोगों को शोर से दूर रहने का इंतज़ाम करना चाहिए।

रसायन (Chemicals)

रसायन शरीर में प्रवेश कर नुकसान पहुँचा सकते हैं। शरीर में प्रवेश के 3 मुख्य रास्ते हैं:

  1. श्वसन तंत्र से (Inhalation): श्वसन तंत्र में प्रवेश करने वाला खतरनाक एक्सपोज़र, सबसे आम है।
  2. खाने से (Ingestion): मुँह के रास्ते से शरीर में पहुँचना।
  3. त्वचा व श्लेष्मा झिल्ली के संपर्क से (Skin and Mucous Membrane Contact): साँस लेने की दर बढ़ने पर एक्सपोज़र लगातार बढ़ता है। ज़्यादा डोज़ के थोड़े समय के एक्सपोज़र का असर तुरंत महसूस होता है, जबकि लंबे समय के छोटे-छोटे डोज़ का असर देर से पता चलता है।

केमिकल के प्रकार (श्वसन तंत्र में प्रवेश करने वाले)

  1. (i) फिज़िकल एस्फिक्सिएंट: जो ऑक्सीजन एक्सचेंज को फिजिकल रूप से ब्लॉक कर देते हैं — जैसे नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, हीलियम, हाइड्रोजन आदि — जो हवा के साथ मिलकर ऑक्सीजन की सांस लेने योग्य सीमा को कम करते हैं।
  2. (ii) सिंपल एस्फिक्सिएंट: कॉटन, फाइबर, स्टार्च, कोयले की धूल आदि।
  3. (iii) केमिकल एस्फिक्सिएंट: क्लोरीन, अमोनिया, हाइड्रोजन क्लोराइड, टोल्यूइन डाई-आइसोसाइनेट आदि — फेफड़ों में जलन और सूजन (पल्मोनरी ओडेमा) पैदा करती हैं। गैसें व सॉलिड जो पानी में अच्छी तरह घुलते हैं, ऊपरी श्वसन नली की श्लेष्मा में घुल जाते हैं।
  • कुछ रसायन (जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन साइनाइड) फेफड़ों से पानी में घुलकर रक्त में प्रवेश करके ऑक्सीजन के साथ हीमोग्लोबिन में मिल जाते हैं — जिससे शरीर को ज़रूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और मृत्यु भी हो सकती है।
  • सिस्टमिक पॉइज़न: ये रसायन शरीर में प्रवेश कर विभिन्न अंगों में क्षति पहुँचा सकते हैं, चाहे वे प्रवेश किसी भी रास्ते से हों — इनका असर दिल, फेफड़े, किडनी और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है।
  • त्वचा से हमला करने वाले: सल्फेट जैसे रसायन त्वचा को नुकसान पहुँचा सकते हैं; कोरोसिव्स (जैसे एसिड, अल्कली) त्वचा को नुकसान और डिफैट (Deffat) कर सकते हैं; सॉल्वेंट्स (जैसे अल्कोहल, हाइड्रोकार्बन, कीटोन) भी त्वचा में प्रवेश कर सकते हैं।

थ्रेशहोल्ड लिमिट वैल्यू (TLV)

किसी रसायन के प्रभाव को दिखाने के लिए ज़्यादातर आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला मानक — थ्रेशहोल्ड लिमिट वैल्यू (TLV) है। यह वह अधिकतम स्वीकार्य सांद्रता या दर है, जिससे किसी व्यक्ति को कार्यस्थल पर बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के, 8 घंटे प्रतिदिन, 40 घंटे प्रति सप्ताह, 52 सप्ताह प्रति वर्ष तक उजागर किया जा सकता है। इसे गैसों-वाष्पों के लिए प्रति मिलियन (PPM) और धूल के लिए प्रति घन मीटर हवा में मिलीग्राम में मापा जाता है।

विषाक्तता नियंत्रण के तरीके (LD50/LC50)

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  • LD50: किसी रसायन की विषाक्तता को दिखाता है — यह वह खुराक (Dose) है, जिसे टेस्ट में शामिल जानवरों को दिया जाने पर 50% जानवरों की मौत हो जाती है।
  • LC50: हवा में मौजूद सांद्रता (Concentration) दिखाता है — जिस पर टेस्ट के जानवरों को उजागर करने पर 50% की मौत हो जाती है।

खतरों को नियंत्रित करने के कई तरीके हैं:

  1. एलिमिनेशन (हटाना): उन प्रक्रियाओं को विकसित करना जहाँ खतरनाक रसायनों की जगह हानिरहित या कम हानिकारक रसायन उपयोग किए जाएँ।
  2. सब्सटीट्यूशन (बदलना): हानिकारक रसायनों को कम हानिकारक रसायनों से बदलना।
  3. आइसोलेशन (अलगाव): जहाँ एलिमिनेशन/सब्सटीट्यूशन संभव न हो, वहाँ रसायन के उत्पादन बिंदु के आसपास लोगों की संख्या सीमित कर, आइसोलेशन बॉक्स, रिमोट हैंडलिंग आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
  4. वेंटिलेशन: दो प्रकार के वेंटिलेशन सिस्टम आम इस्तेमाल में हैं — (i) लोकल एग्ज़ॉस्ट: उत्पादन बिंदु से खतरनाक रसायन को हटाने के लिए; (ii) जनरल वेंटिलेशन: हवा में हानिकारक सांद्रता को थ्रेशहोल्ड लिमिट वैल्यू से नीचे तक पतला (Dilute) करने के लिए।
  5. पर्सनल प्रोटेक्शन: इसके अलावा, अगर मज़दूर ताज़ी हवा में साँस लेने के साथ काम करें, तो सुरक्षा मानक और बेहतर हो जाता है।

हल किया गया प्रश्न (Solved Question 12.1)Q

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प्रश्न: मैनुअल मटेरियल हैंडलिंग में दुर्घटना के क्या कारण हैं और किन सावधानियों की ज़रूरत है?

उत्तर: मैनुअल हैंडलिंग में दुर्घटना के कारण हैं — असुरक्षित मुद्राएँ (Postures), असुरक्षित पकड़, स्थिरता की कमी, गलत तरीके से उठाना, भारी भार, और ग्रुप की असंगति (Incompatibility)।

मटेरियल हैंडलिंग में सावधानियाँ

  • टीम में काम करते समय, समान शारीरिक क्षमता वाले सही संख्या में लोगों को शामिल करना।
  • लंबाई, आकार जैसे अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए अधिकतम वज़न नियमों का पालन करना।
  • भार के गुरुत्व केंद्र (Centre of Gravity) को ज़रूरी स्थिति में समायोजित करना।
  • भार, उसकी विशेषताओं और अन्य पहलुओं का सही आकलन ड्यूटी शुरू करने से पहले करना ज़रूरी है।
  • भार को संभालने वाले व्यक्तियों की जानकारी होनी चाहिए और दुर्घटना/टूट-फूट की स्थिति में क्या करना है, यह प्रक्रिया पहले से तय होनी चाहिए।
  • ग्रुप में काम करते समय, ग्रुप की अनुकूलता (Compatibility) को ध्यान से जांचना चाहिए। एक लीडर चुनना चाहिए, जो काम की निगरानी करे और सभी के बीच सिग्नल्स समन्वित करे।

❓ अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

  1. यांत्रिक खतरों (Mechanical Hazards) की विभिन्न वजहें बताएँ।
  2. मशीन गार्ड्स संक्षेप में समझाएँ।
  3. एनक्लोज़र गार्ड्स संक्षेप में समझाएँ।
  4. संक्षिप्त टिप्पणी लिखें — (a) एनक्लोज़र गार्ड्स (b) ऑप्टिकल सेंसर (c) फीडिंग टूल्स।
  5. निम्नलिखित के लिए उपयोग होने वाले सुरक्षा उपकरणों की चर्चा करें — (a) लिफ्टिंग टैकल व लिफ्टिंग उपकरण (b) हाथ व पावर टूल्स (c) तापमान से जुड़े खतरे (d) शोर के दुष्प्रभाव।
  6. निम्नलिखित के लिए सुरक्षा उपकरणों की संक्षेप में चर्चा करें — (a) पोर्टेबल सीढ़ी (b) चेन (c) रस्सी (d) फ्लाईव्हील (e) लिफ्टिंग उपकरण (f) कन्वेयर (g) फोर्क लिफ्ट ट्रक (h) एलिवेटर/लिफ्ट।
  7. प्रेशर वेसल्स से होने वाले खतरों की संक्षेप में चर्चा करें।
  8. निम्नलिखित के लिए ली जाने वाली सुरक्षा सावधानियाँ बताएँ — (a) गैस सिलिंडर (b) बॉयलर (c) फर्नेस विस्फोट।
🦺 Notes prepared for easy Hindi-medium exam revision — Chapter 12: Mechanical Hazards (Page 183–204)

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