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करूँ कभी #अभिषेक लाडली...🙏 आँखों से बहते झरनों का...😭 मुझे दे दो भरोसा चरणों का...🙇 ॐ स्वस्ति श्री नीलकंठाय नमः “श्रीरामचरितमानस” केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार है। भगवान श्रीराम के मर्यादित आचरण और अन्य पात्रों के माध्यम से यह मनुष्य को धर्मानुसार अनुशासित जीवन जीने का संदेश देता है ! बाबा तुलसी ने “श्रीरामचरितमानस” के रूप में भारतीय साहित्य को एक ऐसी मणि सौंपी है जिसकी एकल आभा जटिल सांसारिकता से लेकर गहन आध्यात्मिकता तक के समस्त पथ को प्रशस्त करने में सक्षम है ! रामकथा केवल पारलौकिक जगत में सहारा बनने वाले पुण्य-कर्मों का संचय ही सुनिश्चित नहीं करती बल्कि इस कथा-धारा में मनुष्यता का वह संजीवनी तत्व शामिल है, जिसके बल पर लौकिक जगत में एक अत्यंत सुंदर एवं सौहार्दपूर्ण समाज की परिकल्पना अत्यंत सरलता से साकार की जा सकती है। 🙏 भगवान कृष्ण मेरे आराध्य, विश्वास मेरी ऊर्जा, संस्कार मेरे शस्त्र, 🇮🇳 माँ, मातृभूमि, मातृभाषा मेरे लिए सर्वोपरि 🙏 For any Issues / Copyright discussions contact AbhishekVssct@gmail.com

"Electrical Safety, Electric Shocks and Their Prevention"

Electrical Safety, Electric Shocks and Their Prevention — विद्युत सुरक्षा और बिजली के झटके (Hindi Notes)
SAFETY, HEALTH AND ENVIRONMENT — Chapter 11

विद्युत सुरक्षा, बिजली के झटके और बचाव
(Electrical Safety, Electric Shocks and Their Prevention)

पूरी किताब के पेज 152 से 182 तक की जानकारी — आसान हिन्दी में, Point-wise और Bihar Board स्टूडेंट्स के लिए बिल्कुल सरल भाषा में।

👉 इस पोस्ट में विद्युत सुरक्षा और बिजली के झटके से जुड़ी हर बात — बिजली के खतरे, केस स्टडी, शॉक कैसे लगता है, बॉडी रेजिस्टेंस, 3-फेज व DC सिस्टम में शॉक, शॉक की गंभीरता, मेडिकल असर, फ्लैशओवर व लाइटनिंग, सुरक्षा प्रक्रिया, अर्थिंग सिस्टम, ग्राउंडिंग, इमरजेंसी रेस्क्यू, ट्रेनिंग और हल किए गए प्रश्नों को — बहुत ही आसान और सरल हिंदी में समझाया गया है। हर टॉपिक को छोटे-छोटे पॉइंट्स में लिखा गया है ताकि परीक्षा के लिए याद करना आसान हो।

📑 इस नोट्स में क्या-क्या है

  1. 11.1 परिचय — बिजली के खतरे
  2. 11.2 सावधानियाँ
  3. तालिका 11.1-11.3 — दुर्घटनाओं के कारण
  4. 11.3-11.4 विद्युत उपयोग सुरक्षा व औद्योगिक हैज़ार्ड्स
  5. चित्र 11.1-11.9 केस स्टडी व कारण
  6. 11.5 शॉक फेनोमेना (प्राइमरी/सेकेंडरी)
  7. 11.5.2-11.5.3 शॉक कैसे होता है, बॉडी रेजिस्टेंस
  8. 11.6 3-फेज AC सिस्टम में शॉक
  9. 11.7 बाइपोलर DC सिस्टम में शॉक
  10. 11.8 शॉक की गंभीरता व करंट लेवल
  11. 11.9 मेडिकल विश्लेषण
  12. 11.10 AC बनाम DC शॉक
  13. 11.11-11.13 इम्पल्स, फ्लैशओवर, लाइटनिंग
  14. 11.14-11.15 रोकथाम व सावधानियाँ
  15. 11.16 सुरक्षा प्रक्रिया (Work Permit)
  16. 11.17-11.18 अर्थिंग सिस्टम व CB-Isolator क्रम
  17. 11.19-11.20 आइसोलेटिंग डिवाइस व MV/HV सुरक्षा
  18. 11.21 इक्विपमेंट ग्राउंडिंग
  19. 11.22 इक्विपमेंट व पर्सनल गाइडलाइंस
  20. 11.23-11.25 इमरजेंसी, माइनर शॉक, सेफ्टी सिस्टम
  21. 11.26 ट्रेनिंग
  22. हल किए गए प्रश्न
  23. अभ्यास प्रश्न

11.1 परिचय — बिजली से जुड़े खतरे1

पेज 152
  • औद्योगिक और अन्य गतिविधियों में विद्युत सुरक्षा बहुत ज़रूरी है। जागरूकता, ट्रेनिंग और सही सुरक्षा प्रबंधन से बिजली के झटके व आग की घटनाएँ हर स्टेज (प्रोजेक्ट इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग, कमीशनिंग) पर रोकी जा सकती हैं।
  • बिजली खतरनाक है। लेकिन आधुनिक जीवन में घरों, फार्म, फैक्ट्रियों, पब्लिक जगहों, हीटिंग/कूलिंग, केमिकल प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्ट आदि में यह बहुत उपयोगी भी है।
  • बिजली प्लांट व उपकरणों की सही कमीशनिंग और रखरखाव से बिजली दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जा सकता है।

बिजली से होने वाले खतरे

  • बिजली का झटका (शॉक) — जलन, चोट, मौत
  • बिजली फॉल्ट — नुकसान और मौत
  • फ्लैशओवर — आर्किंग (चिंगारी) में मौत
  • विस्फोट और आग — नुकसान, संपत्ति की हानि, धुआं-धूल-गैस से जान का नुकसान
👉 बिजली से नुकसान (डेथ, इंजरी, नुकसान) डिज़ाइन, कमीशनिंग, टेस्टिंग, ऑपरेशन, मेंटेनेंस, प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्ट आदि — हर चरण पर हो सकता है। सही सावधानियों से खतरे को कम/ख़त्म किया जा सकता है।

सेफ्टी इंस्पेक्शन (निरीक्षण)

  • इलेक्ट्रिकल सेफ्टी इंस्पेक्टर डिज़ाइन-फाइनल यूज़ और मेंटेनेंस चेक करते हैं।
  • 'DOs और DONTs' तथा 'चेक-लिस्ट' का पालन ज़रूरी है।
  • 'वार्निंग साइन' लगे होने चाहिए और एंट्री रेस्ट्रिक्ट होनी चाहिए।

सेफ्टी प्रीकॉशन्स

  • हर स्टेज (डिज़ाइन से फाइनल यूज़ व मेंटेनेंस तक) पर डॉक्युमेंट किए जाने चाहिए।
  • फायर हैज़र्ड — जान-माल का नुकसान, धुआं-गैस से नुकसान — इनसे बचाव ज़रूरी है।

इंडियन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट एंड रूल्स (1965)

  • इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट के सप्लायर व उपयोगकर्ता को safety clearance देने से पहले सेफ्टी फॉर्मूलेट व एनफोर्स करनी चाहिए।
  • सप्लायर व यूज़र दोनों की जिम्मेदारी है इक्विपमेंट को हर स्टेज पर सुरक्षित रखना — इरेक्शन, टेस्टिंग, ऑपरेशन, मेंटेनेंस।
  • यह एक्ट व रूल्स इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई अंडरटेकिंग्स, कॉन्ट्रैक्टर्स, मैन्युफैक्चरर्स, यूज़र पर सुरक्षा नियम अनिवार्य करते हैं।

11.2 विद्युत उपयोग में सावधानियाँ और सुरक्षा2

पेज 154
  • सभी वोल्टेज को खतरनाक मानना चाहिए, भले ही वोल्टेज ज़्यादा गंभीर चोट के लिए काफी ज़्यादा न हो।
  • सभी इलेक्ट्रिकल सर्किट को "लाइव" (चालू) मानकर काम करना चाहिए, जब तक कि यह पक्का न हो कि वो:
  • (a) डेड (बंद), (b) आइसोलेटेड (अलग), (c) अर्थेड (पृथ्वी से जुड़ा) हो।
  • कोई भी काम बिना उचित परमिट-टू-वर्क, पॉइंट ऑफ डिस्कनेक्शन जांचे बिना नहीं करना चाहिए।
  • काम करते समय अनावश्यक तारों/परिस्थितियों की जांच की जानी चाहिए ताकि गलती न हो।
WATCH; DON'T SWITCH-ON; MEN AT WORK; DANGER 440; DON'T TOUCH — यह बोर्ड सर्किट पर लगाना ज़रूरी है ताकि काम के दौरान गलती से सप्लाई ऑन न हो जाए।

तालिका 11.1-11.3 — औद्योगिक प्लांट में दुर्घटनाओं के कारण व निवारण3

पेज 153, 156

यह किताब में दी गई तालिका 11.1, 11.2 व 11.3 (Case Studies of Electrical Accidents) से ली गई है, जो हादसों के कारण और उन्हें रोकने के उपाय बताती है।

A. आवास/दुकान — घटनाएँ

  1. घर में व्यक्ति को लाइव इमर्शन हीटर छूने से करंट लगा
  2. रूम हीटर में आग लग गई
  3. बिजली उपकरण से शॉक लगा
  4. पंखा गिर गया
  5. बिजली की आग से भारी नुकसान हुआ

कारण/रिमार्क्स: जागरूकता की कमी, असुरक्षित उपकरण, सावधानी न बरतना, लापरवाही, दोषपूर्ण उपकरण, ग़लत अर्थिंग न होना, ढीला कनेक्शन, गर्मी अत्यधिक होना, इंसुलेशन जल जाना आदि।

B. इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन (सबस्टेशन, जनरेटिंग स्टेशन, ट्रांसमिशन/अंडरग्राउंड केबल आदि)

  • सीधा संपर्क, फॉल्टी संरचना/बॉडी में संपर्क, विस्फोट, फायर, फेल्योर, अनसेफ इंस्टॉलेशन
  • व्यक्तियों को जानकारी न होना, ट्रेनिंग न होना, सेफ्टी मैनेजमेंट की कमी
  • असुरक्षित मटीरियल, सामग्री का ओवरहीट होना, स्पार्किंग, इंसुलेशन ख़राब होना

तालिका 11.2 — प्लांट में हैज़ार्ड्स (चित्र 11.1 से 11.9 के अनुसार)

चित्र सं.घटनाप्रभाव
1व्यक्ति लाइव कंडक्टर छूएबिजली का झटका
2व्यक्ति फॉल्टी स्ट्रक्चर छूएबिजली का झटका
3व्यक्ति फॉल्टेड उपकरण/इंक्लोज़र छूएबिजली का झटका
4ऊँची लाइव कंडक्टर के पास सीढ़ी/मेटल रॉड रखनाशॉक/फ्लैशओवर/फॉल्ट
5प्री-चार्ज्ड कैपेसिटर/कंडक्टर छूनाबिजली का झटका
6बिना प्रोटेक्शन के घूमने वाला शाफ्ट/फ्लैंजदुर्घटना, चोट
7ट्रेंच/मैनहोल में गिरनाचोट
8ऊँचाई से गिरनाचोट
9तेल भरे इक्विपमेंट में विस्फोटफायर, तबाही
निवारक उपाय: इंसुलेटेड/अर्थेड मेटैलिक इंक्लोज़र प्रदान करना, कंडक्टर/इक्विपमेंट को इंसुलेटेड स्लीव लगाना, क्लियरेंस ज़ोन में प्रवेश न देना, एरिया को फेंस से बंद करना, "LIVE-DON'T TOUCH" बोर्ड लगाना, चार्ज्ड/अर्थेड बॉडी सुनिश्चित करना।

11.3-11.4 विद्युत उपयोग में सुरक्षा व औद्योगिक हैज़ार्ड्स4

पेज 155

11.3 सेफ्टी इन यूज़ ऑफ इलेक्ट्रिसिटी

  • पर्सनल व प्रॉपर्टी की सुरक्षा के लिए इंस्टॉलेशन का डिज़ाइन ठीक होना ज़रूरी है — कंस्ट्रक्शन ऑफ प्लांट सेफ व रिलायबल होना चाहिए।
  • प्रीकॉशन्स लेने चाहिए — बर्निंग एनर्जी सप्लाई के लिए ड्यू एनर्जी की व्यवस्था।
  • इक्विपमेंट व अपैरेटस अच्छी तरह मेंटेन होने चाहिए ताकि फायर या मैकेनिकल शॉक का खतरा न हो — इंडियन स्टैंडर्ड या इंटरनेशनल स्टैंडर्ड स्पेसिफिकेशन के अनुसार।

मिनिमम रिक्वायरमेंट्स

  1. सफिशिएंट रेटिंग
  2. प्रॉपर व गुड इंसुलेटिंग मैटीरियल
  3. मैकेनिकल स्ट्रेंथ (फॉल्ट करंट व शॉर्ट सर्किट कैपेसिटी सहना)

11.4 इलेक्ट्रिकल हैज़ार्ड्स इन इंडस्ट्रियल सिस्टम्स

  • इलेक्ट्रिक पावर इंडस्ट्री का ज़रूरी इनपुट है — कई तरह के उद्योगों में इस्तेमाल होता है: ड्राइव, हीटिंग, मेल्टिंग, इल्युमिनेशन, कंट्रोल/प्रोटेक्शन आदि।
  • बड़े कंज्यूमर HT सप्लाई और छोटे उद्योग LT सप्लाई लेते हैं।
  • 50 V से ज़्यादा वोल्टेज खतरनाक है।
इलेक्ट्रिसिटी से होने वाले हैज़ार्ड्स तालिका 11.2 व चित्र 11.1 से 11.15 में दिखाए गए हैं (यह अगले सेक्शन में कवर किया गया है)।

चित्र 11.1-11.9 — विद्युत दुर्घटनाओं के केस स्टडी व कारण5

पेज 157-160

यह किताब में कई चित्रों (Fig 11.1 से Fig 11.15 तक) के ज़रिए बिजली के झटके के अलग-अलग सिनेरियो दिखाए गए हैं — जैसे सीढ़ी लाइव लाइन के पास ले जाना, केबल का बिना कवर के होना, ट्रेंच खुला रहना, कैपेसिटर डिस्चार्ज न होना आदि। हर एक के कारण और सुधारात्मक उपाय (Preventive Measures) नीचे दिए हैं:

मुख्य कारण (Causes)

  • स्ट्रक्चर/इक्विपमेंट इंक्लोज़र अर्थेड नहीं था, दूसरी मेटल बॉडी से अर्थ फॉल्ट डिटेक्ट नहीं हुआ
  • व्यक्ति को स्विचयार्ड में सीढ़ी ले जाने दिया गया
  • फेंस और लॉक अच्छे नहीं थे, स्विचयार्ड के लिए 'DEAD' लॉक सिस्टम नहीं था
  • व्यक्ति खतरों से 'अवेयर' नहीं था, ट्रेनिंग सुपरविज़न की कमी थी
  • कैपेसिटर यूनिट में इंटरनल डिस्चार्ज रेसिस्टर नहीं था, रिटर्न पाथ नहीं दिया गया था
  • अंडरग्राउंड केबल बिना प्रोटेक्टिव RCC स्लैब के था
  • सेफ्टी बेल्ट का उपयोग नहीं किया गया, सुपरवाइज़र को जानकारी नहीं थी
  • केबल ट्रेंच/मैन-होल बिना कवर के था
  • एक्सकेवेशन (खुदाई) बिना फेंस के थी, रात में इल्युमिनेशन नहीं थी

निवारक उपाय (Preventive Measures)

  • अर्थिंग सिस्टम इंस्टॉल करना, अन्य मेटल बॉडीज़ को अर्थ करना
  • फेंस, लॉक और परमिट सिस्टम लागू करना; 'DEAD' के लिए स्विचयार्ड लॉक करना
  • पर्सन को ट्रेनिंग देना, सेफ्टी सुपरविज़न सुधारना, डेंजर प्लेट/कॉशन नोटिस लगाना
  • कैपेसिटर यूनिट में इंटरनल डिस्चार्ज रेसिस्टर प्रोवाइड करना
  • RCC स्लैब कवर देना, पावर केबल के ऊपर सुरक्षा
  • सेफ्टी बेल्ट प्रोवाइड करना, क्लाइंबिंग ट्रेनिंग देना
  • ट्रेंच/मैन-होल पर कवर लगाना
  • एक्सकेवेशन में फेंस और नाइट में इल्युमिनेशन प्रोवाइड करना

11.5 इलेक्ट्रिक शॉक फेनोमेना — प्राइमरी व सेकेंडरी शॉक6

पेज 162

जब इलेक्ट्रिक करंट मानव शरीर के किसी भाग से गुजरता है, तो यह नर्वस सिस्टम में अचानक उत्तेजना (Stimulation) पैदा करता है — इसे "इलेक्ट्रिक शॉक" कहते हैं। शॉक "डायरेक्ट कॉन्टैक्ट विद लाइव कंडक्टर या फ्लैशओवर" से होता है।

11.5.1 प्राइमरी शॉक (Primary Shock)

  • प्राइमरी शॉक बॉडी से बहुत ज़्यादा मैग्नीट्यूड का इलेक्ट्रिक करंट गुजरने से होता है।
  • यह जानलेवा हो सकता है। इससे: फिब्रिलेशन (अनियमित दिल की धड़कन), रेस्पिरेटरी टिटेनी (सांस की मांसपेशियों में जकड़न) होती है।

सेकेंडरी शॉक (Secondary Shock)

  • सेकेंडरी शॉक कम मैग्नीट्यूड के करंट से होता है।
  • यह जानलेवा नहीं होता, लेकिन कष्टदायक (annoying) होता है और अनइच्छित मांसपेशी प्रतिक्रिया (involuntary muscle reaction) पैदा करता है।
  • इसके नतीजे — अलार्म, बैलेंस खोना, चोट लगना — हो सकते हैं।

11.5.2-11.5.3 शॉक कैसे होता है और बॉडी रेजिस्टेंस7

पेज 162-163

11.5.2 इलेक्ट्रिक शॉक कब होता है

इंसान के शरीर के दो या ज़्यादा प्वाइंट्स के बीच वोल्टेज डिफरेंस होना ज़रूरी है, तभी करंट फ्लो होता है। शॉक इन में से किसी भी स्थिति में हो सकता है:

  1. जब शरीर के किसी हिस्से में करंट दो फेज़ वायर या डायरेक्ट कॉन्टैक्ट से पास होता है।
  2. जब शरीर एक फेज़ और अर्थ को टच करके ब्रिज करता है।
  3. जब शरीर एक ही फेज़ के दो अलग-अलग वोल्टेज पॉइंट्स को टच करता है (करंट फ्लो के कारण)।
  4. जब शरीर सप्लाई वोल्टेज या इंड्यूस्ड वोल्टेज/चार्ज्ड वोल्टेज वाले दो प्वाइंट्स को छूता है।

इलेक्ट्रिक शॉक लगने की संभावना

  • प्रैक्टिस में सप्लाई सिस्टम "थ्री-फेज़ न्यूट्रल-अर्थेड" या "थ्री-फेज़ नो-न्यूट्रल" होता है।
  • बाइपोलर DC सिस्टम न्यूट्रल-अर्थेड होता है। एक पोल पॉजिटिव, दूसरा नेगेटिव अर्थ के सापेक्ष होता है।
  • फेज़ कंडक्टर आपस में इनहेरेंट कैपेसिटेंस रखते हैं, इसलिए अर्थ अच्छा कंडक्टर होने के कारण रिटर्न पाथ प्रोवाइड करता है।

वेट स्किन बनाम ड्राई स्किन

  • वेट स्किन (गीली त्वचा) ड्राई स्किन (सूखी त्वचा) से ज़्यादा खतरनाक है, क्योंकि वेट स्किन का रेजिस्टेंस कम होता है।
  • कट्स, वुंड्स, ब्रुइज़ेज़ वाली त्वचा में भी रेजिस्टेंस कम होता है — इसलिए यह ज़्यादा खतरनाक है।
  • शॉक हार्ट, ब्रेन इनवॉल्व होने पर बहुत गंभीर हो सकता है — यह रिमोट स्किन इंवॉल्वमेंट से कम खतरनाक होता है।

तालिका 11.4 — मानव शरीर के रास्तों का रेजिस्टेंस

बॉडी पाथरेजिस्टेंस (ओम)
ड्राई स्किन10 से 50 मेगा-ओम
वेट स्किन1000 ओम
हैंड-टू-फुट500 से 600 ओम
इंटरनल (त्वचा को छोड़कर)100 ओम
ईयर टू ईयर100 ओम
इंटरनल (स्किन छोड़कर)100 ओम
👉 जितना ज़्यादा वोल्टेज (10 kV+, एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज 220 kV+), उतना ज़्यादा करंट प्रवाहित होगा (Ohm's Law: Ib = Vb/Rb), और शॉक उतना ज़्यादा गंभीर होगा।

11.5.3 इलेक्ट्रिक शॉक लगने की संभावना — किन परिस्थितियों में

  • असुरक्षित पर्सनल एक्ट (कार्य) या असुरक्षित कंडीशन के कारण शॉक होता है — प्रैक्टिस में सप्लाई सिस्टम की टाइप सबसे सामान्य कारण है।
  • थ्री-फेज़ AC सिस्टम: न्यूट्रल-अर्थेड, तीन वायर या चार वायर सिस्टम में — बेयर कंडक्टर टच करना।
  • बाइपोलर DC सिस्टम: न्यूट्रल-अर्थेड, एक पोल पॉज़िटिव, दूसरा नेगेटिव अर्थ के संबंध में।
  • अर्थ अच्छा कंडक्टर प्रदान करता है, इसलिए फॉल्ट/लीकेज करंट के लिए रिटर्न पाथ अच्छी सिचुएशन प्रदान करता है।

इलेक्ट्रिक शॉक लगने के तरीके

  • व्यक्ति खड़ा होते हुए अर्थ पर, और कंडक्टर छूकर शॉक ले सकता है (Bipolar DC सिस्टम में)
  • व्यक्ति एक फेज़/पोल से दूसरे को हाथों से छूकर ब्रिज करता है
  • व्यक्ति एक फेज़ और अर्थ को ब्रिज करता है, दो फेज़ और अर्थ को हाथ-पैर से ब्रिज करता है
  • पर्सन स्टैंडिंग ऑन अर्थ/ग्राउंड में मेटैलिक टूल/रॉड/लैडर/स्ट्रक्चरल पार्ट से इलेक्ट्रिक करंट फ्लो कर सकता है, यदि कंडक्टर टच होता है।
  • पर्सन डायरेक्टली या टूल/रॉड/लैडर/स्ट्रक्चरल पार्ट के ज़रिए, बेयर कंडक्टर को टच करता है — शॉक करंट/इंड्यूस्ड करंट/फॉल्ट करंट के लिए
  • फ्लैशओवर की स्थिति में शॉक — पूअर इंसुलेटेड हाई वोल्टेज कंडक्टर पर दो पॉइंट्स पर संपर्क
  • लाइटनिंग स्ट्रोक में करंट, ह्यूमन बॉडी के ज़रिए फ्लो हो सकता है।

11.6 थ्री-फेज़ AC सिस्टम में शॉक8

पेज 164
  • थ्री फेज़, 50 Hz AC सिस्टम जनरेशन, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और यूटिलाइज़ेशन के लिए उपयोग होता है। मॉडर्न सप्लाई सिस्टम जनरेटर/ट्रांसफार्मर के न्यूट्रल पॉइंट पर 'अर्थेड' होते हैं।
  • इसलिए अर्थ, शॉक करंट के लिए रिटर्न पाथ बनाता है।
  • फोर वायर AC सिस्टम में न्यूट्रल वायर 'N' अनबैलेंस्ड करंट के लिए रिटर्न पाथ देता है।
  • फेज़-टू-अर्थ वोल्टेज, संबंधित फेज़-टू-ग्राउंड कैपेसिटेंस को चार्ज करता है — यह इनविज़िबल कैपेसिटिव कपलिंग बनाती है।

अलग-अलग स्थितियाँ (चित्र 11.19)

  • व्यक्ति (A): ज़मीन पर खड़ा और एक फेज़ कंडक्टर (R) टच करता है — वोल्टेज Vph मिलता है (टच पॉइंट और अर्थ के बीच)।
  • व्यक्ति (B): ज़मीन पर खड़ा और दो फेज़ कंडक्टर हाथों से टच करता है — वोल्टेज Vph-ph मिलता है (Vph-ph = √3 × Vph)।
  • व्यक्ति (C): ज़मीन से इंसुलेटेड है और एक फेज़ कंडक्टर के एक प्वाइंट को टच करता है — कोई वोल्टेज नहीं मिलता (स्टैटिक फील्ड को छोड़कर)।
  • व्यक्ति: ग्राउंड से इंसुलेटेड होकर एक ही फेज़ के दो अलग-अलग पॉइंट्स को टच करने पर वोल्टेज Vpq से शॉक मिलता है।
  • व्यक्ति (E): डिस्कनेक्टेड चार्ज्ड कंडक्टर को टच करने पर कैपेसिटिव डिस्चार्ज करंट से शॉक लगता है।

11.7 बाइपोलर DC सिस्टम में शॉक9

पेज 165
  • बाइपोलर DC सिस्टम इलेक्ट्रो-मेटलर्जिकल वर्क्स (जैसे एल्युमीनियम एक्सट्रैक्शन) और इलेक्ट्रो-केमिकल वर्क्स (जैसे इलेक्ट्रोप्लेटिंग शॉप) में उपयोग होते हैं।
  • सप्लाई का न्यूट्रल अर्थेड होता है।
  • व्यक्ति (F) पोल कंडक्टर छूने पर वोल्टेज U1 से शॉक लेता है।
  • व्यक्ति (H) दो पॉइंट्स टच करने पर वोल्टेज U1-2 से शॉक लेता है।

11.8 इलेक्ट्रिक शॉक की गंभीरता (Severity)10

पेज 165-167

शॉक की गंभीरता कई कारकों पर निर्भर करती है:

  1. ह्यूमन बॉडी से गुज़रने वाले करंट की मैग्नीट्यूड (मिली-एम्पेयर) — जो समय के साथ बदलती है (सबट्रांज़िएंट स्टेट में)
  2. करंट का वेवफॉर्म (DC, 50 Hz AC, इम्पल्स या हाई फ्रीक्वेंसी)
  3. करंट के बढ़ने की दर (mA/ms)
  4. बॉडी में करंट का पथ (हार्ट/ब्रेन से या नहीं)
  5. करंट फ्लो का समय (मिली-सेकंड से लेकर कुछ सेकंड)

अन्य महत्वपूर्ण कारक

  • व्यक्ति की शॉक सहने की क्षमता, हार्ट-ब्रेन की स्थिति, स्वास्थ्य, पहले के अनुभव
  • शॉक के समय हार्ट साइकिल की फेज़ (चरण)
  • क्या व्यक्ति मांसपेशी प्रतिक्रिया से थ्रो-ऑफ हो जाता है या मांसपेशी संकुचन (paralysis) से चिपक जाता है
👉 हार्ट से गुज़रने वाला करंट सबसे खतरनाक है। ड्राई स्किन में हाथ की फिंगर-टू-फिंगर रेजिस्टेंस लगभग 10 मेगा-ओम होती है, पर वेट (गीले) हाथ में यह घटकर 5000 ओम रह जाती है। इसलिए वेट सराउंडिंग्स खतरनाक हैं — 50 वोल्ट AC भी वेट सराउंडिंग में घातक हो सकता है। बाथरूम जैसी वेट जगहों में गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं।

तालिका 11.5 — रिकॉग्निशन लेवल, लेट-गो लेवल, शॉक-लेवल (50 Hz)

करंट लेवल rms (50 Hz)प्रभाव
0.1-0.25 mAटच परसेप्शन
0.3-1 mAग्रिप परसेप्शन
2-3 mAमोमेंटरी शॉक व हानिकारक प्रतिक्रिया
3-4 mAबिना ग्रिप शॉक (बच्चों के लिए Let-go shock)
3 mAखतरनाक स्थिति की सीमा
4-10 mAबिना ग्रिप शॉक (महिलाओं के लिए Let-go shock)
10-15 mAबिना ग्रिप शॉक (पुरुषों के लिए Let-go shock)

तालिका 11.6 — शॉक करंट के मैग्नीट्यूड का प्रभाव

करंट, 50 Hz rmsप्रभाव
10 mA से कमहल्की अनुभूति, दर्द नहीं
10-15 mAदर्दनाक शॉक पर मांसपेशी नियंत्रण में
15-20 mAमांसपेशी नियंत्रण प्रभावित
20-40 mAमांसपेशी संकुचन, सांस प्रभावित
40-80 mAदिल की अनियमित धड़कन (फिब्रिलेशन), मौत संभव
100 mA से ज़्यादागंभीर जलन, दिल रुकना, मौत निश्चित
AC वोल्टेज वेव का पीक वैल्यू DC से ज़्यादा होता है, और AC फ्रीक्वेंसी दिल की धड़कन की फ्रीक्वेंसी से मैच करती है — इसलिए AC ज़्यादा खतरनाक है। (220 Vrms वेव का पीक वैल्यू = √2 × 220 = 311 V)। बहुत कम समय के लिए संपर्क (व्यक्ति को झटके से दूर फेंकना) होने पर जान बच सकती है। व्यक्ति को तुरंत आर्टिफिशियल रेस्पिरेशन देकर बचाया जा सकता है।

तालिका 11.7 — शॉक करंट के लेवल (डायरेक्ट कॉन्टैक्ट से)

लेवलप्रभावपुरुष (mA)महिला (mA)बच्चे (mA)
1परसेप्शन थ्रेशहोल्ड964
2मांसपेशी नियंत्रण प्रभावित, लेट-गो थ्रेशहोल्ड15106
3सांस लेने में दिक्कत201510
4रेस्पिरेटरी टिटेनी, गंभीर सांस दिक्कत231712
5वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन, मांसपेशी नियंत्रण खोना80 (3 sec)50 (3 sec)30 (3 sec)
6गंभीर शॉक, फिब्रिलेशन, सांस रुकना80 (>3 sec)50 (>3 sec)40 (>3 sec)
7गंभीर जलन, दिल रुकना, मौत निश्चित100 (10 sec)80 (10 sec)50 (10 sec)

11.9 इलेक्ट्रिक शॉक का मेडिकल विश्लेषण11

पेज 168
  • इलेक्ट्रिक करंट का फ्लो ह्यूमन नर्वस सिस्टम को डिस्टर्ब करता है — सेंट्रल नर्वस सिस्टम कोऑर्डिनेटेड मसल फंक्शन कंट्रोल करता है।
  • ह्यूमन नर्वस सिस्टम दिमाग और शरीर के बीच माइन्यूट (छोटे) इलेक्ट्रिक करंट के ज़रिए काम करता है — यह इंटरफेस, इलेक्ट्रिक करंट और बॉडी टॉलरेंस को समझने में मदद करता है।
  • 15 mA AC पर व्यक्ति दुर्घटनावश हुई मांसपेशी संकुचन के कारण लाइव कंडक्टर छोड़ नहीं पाता।

रेस्पिरेटरी टिटेनी (मेडिकल)

शार्प फ्लेक्शन (मुड़ना), ट्विचिंग (फड़कना), मांसपेशियों में ऐंठन जो लंबे समय तक रहती है (सामान्य से ज़्यादा)।

फिब्रिलेशन (मेडिकल)

मांसपेशी फाइबर्स की स्वतःस्फूर्त गतिविधि से हार्ट/ट्राई-वेंट्रिकुलर मसल्स में एक छोटी स्थानीय गड़बड़ी।

  • ह्यूमन बॉडी लाइफ, दो महत्वपूर्ण फिजियोलॉजिकल फंक्शन (Breathing और Heartbeat/Blood Circulation) पर टिकी है।
  • "मिन्यूट बायो-केमिकल इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल" ब्रेन/हार्ट को कंट्रोल करते हैं — इनकी फेल्योर जानलेवा है।
  • बाहरी सोर्स से आने वाला AC शॉक करंट, हार्ट/ब्रेन में इंटरनल पोटेंशियल ड्राइव करता है, जिससे शरीर में मांसपेशी सडन कॉन्ट्रैक्शन होता है (Cramp या Freeze)।
  • यह ब्रेथिंग और हार्ट-मसाज पर असर डालता है — रिलैक्सेशन के लिए समय नहीं मिलता।
  • AC शॉक करंट के फ्लो से मसल्स सडनली कॉन्ट्रैक्ट होती हैं और लाइव कंडक्टर छोड़ नहीं पातीं (Let-go threshold)।
  • इलेक्ट्रॉनिक इम्पल्स के डिस्टर्बेंस से लंग-डायाफ्राम की मांसपेशियां इर्रेगुलर ब्रीदिंग या ब्रीदिंग स्टॉपेज कर सकती हैं।
  • हार्ट को कंट्रोल करने वाले सिग्नल डिस्टर्ब होने से 'वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन' (इर्रेगुलर हार्ट बीट) हो सकता है, जिससे हार्ट-मसाज व ब्लड सर्कुलेशन डिस्टर्ब होता है।
  • करंट रुकने पर भी हार्टबीट और ब्रीदिंग तुरंत नॉर्मल नहीं होते — यह प्रोसेस "आर्टिफिशियल रेस्पिरेशन" से रीस्टोर हो सकता है।

तालिका 11.8 — इलेक्ट्रिक शॉक का ह्यूमन बॉडी पर प्रभाव

प्रभावDC पुरुष50 Hz AC पुरुष10 kHz पुरुष
हाथ पर हल्की अनुभूति10.57
परसेप्शन थ्रेशहोल्ड51.412
दर्द नहीं, मांसपेशी नियंत्रण में91.815
दर्दनाक, लेट-गो थ्रेशहोल्ड65950
दर्दनाक, गंभीर मांसपेशी संकुचन902390
वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन (3 sec)500 (10 sec)100 (10 sec)-

(यह तालिका किताब के तालिका 11.8 का संक्षिप्त रूप है — Milli-Amperes में मान)

11.10 AC शॉक बनाम DC शॉक12

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  • AC करंट से लगने वाले शॉक का फ्रीक्वेंसी 50 Hz है, जो नॉर्मल हार्टबीट फ्रीक्वेंसी की रेंज में नहीं है।
  • AC शॉक करंट फ्रीक्वेंसी हार्टबीट के फ्रीक्वेंसी को डिस्टर्ब करती है।
  • सेंट्रल नर्वस सिस्टम हार्ट व लंग-डायाफ्राम की मांसपेशियों को कंट्रोल करता है — ब्रेन-हार्ट के बीच साइक्लिक इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स (12-16 साइकिल प्रति मिनट) फ्लो होते हैं।
  • बाहरी AC शॉक करंट इन सिग्नल्स को डिस्टर्ब करता है — मसल्स कॉन्ट्रैक्ट या रिलैक्स नहीं हो पातीं, जिससे व्यक्ति लाइव कंडक्टर छोड़ नहीं पाता (Let-go)।
  • इससे लंग-डायाफ्राम की मांसपेशियां डिटैच होकर इर्रेगुलर ब्रीदिंग या ब्रीदिंग स्टॉपेज कर सकती हैं।
  • हार्ट की मांसपेशियां एरेटिकली बिहेव करती हैं, जिससे "वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन" (Heart-massage disturbed) होता है।
  • कुछ सेकंड में व्यक्ति की मौत हो सकती है (जब तक आर्टिफिशियल रेस्पिरेशन न मिले)।
  • नॉर्मल हार्ट-बीट फ्रीक्वेंसी 70 साइकिल/मिनट (~1.17 Hz) है। 50 Hz करंट, हार्ट फ्रीक्वेंसी से बहुत ज़्यादा है — इसलिए बहुत खतरनाक है।
  • 50 Hz शॉक इफेक्ट्स: हार्ट और लंग की मांसपेशियां जल्दी और गलत तरीके से ऑपरेट करने की कोशिश करती हैं — एक बार फिब्रिलेशन शुरू होने पर मौत लगभग निश्चित है।
DC शॉक बनाम AC शॉक:
  • DC शॉक में लंग-डायाफ्राम मांसपेशियां क्रैम्पिंग सिर्फ एक बार होती है (DC वोल्टेज सिग्नल कारण)।
  • AC शॉक में लंग रेस्पिरेशन की फ्रीक्वेंसी 50 Hz करंट के लिए बहुत ज़्यादा है, इसलिए यह ज़्यादा खतरनाक है।
  • इसलिए DC शॉक लेवल, AC शॉक की तुलना में ज़्यादा वोल्टेज पर घातक होते हैं (तालिका 11.9 के अनुसार)।

11.11-11.13 इम्पल्स डिस्चार्ज, फ्लैशओवर व लाइटनिंग13

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11.11 इम्पल्स करंट डिस्चार्ज का प्रभाव

  • जब वोल्टेज सर्ज (इम्पल्स) कुछ सौ माइक्रोसेकंड की कम अवधि के लिए ह्यूमन बॉडी से डिस्चार्ज होता है, तो शरीर को शॉक लगता है।
  • गंभीरता, डिस्चार्ज करंट के पीक मैग्नीट्यूड और डिस्चार्ज एनर्जी पर निर्भर करती है।

तालिका 11.9 — इम्पल्स करंट डिस्चार्ज का प्रभाव

डिस्चार्ज करंट पीक (mA)डिस्चार्ज एनर्जीह्यूमन बॉडी पर प्रभाव
10.12 mJपरसेप्शन
22 mJइरिटेशन
525 mJअसुरक्षित (Unsafe)

11.12 फ्लैशओवर या स्पार्क-ओवर से शॉक

  • फ्लैशओवर/स्पार्क-ओवर, हवा (या तेल, गैस) में डिस्रप्टिव डिस्चार्ज है — जो दो कंडक्टरों के बीच अलग-अलग पोटेंशियल पर आयनाइज़ेशन से होता है।
  • जब एयर-गैप की स्ट्रेंथ, अप्लाइड वोल्टेज से कम पड़ जाती है, तो एयर-गैप ब्रेक-डाउन होता है, फ्लैशओवर होता है।
  • यह पावर फ्रीक्वेंसी ओवरवोल्टेज या स्विचिंग सर्जेज़ के दौरान हो सकता है।

11.13 ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइन व आउटडोर सबस्टेशन पर लाइटनिंग स्ट्रोक

  • चार्ज्ड बादलों से ग्राउंड तक अचानक डिस्चार्ज होने से लाइटनिंग स्ट्रोक (light और thunder sound के साथ) होता है।
  • लाइटनिंग ओवरवोल्टेज सर्जेस, डायरेक्ट या इनडायरेक्ट लाइटनिंग स्ट्रोक्स से हो सकते हैं।
  • डायरेक्ट स्ट्रोक्स: क्लाउड से ग्राउंड — कंडक्टर/अर्थ वायर/स्ट्रक्चर/बसबार/इक्विपमेंट/ऊँची बिल्डिंग/पेड़ पर।
  • डायरेक्ट स्ट्रोक्स के टिपिकल वैल्यू: 200 MV पीक, 20 kA, 100 माइक्रोसेक, 22 kWh एनर्जी।
  • डायरेक्ट स्ट्रोक्स ट्रांसमिशन लाइन दोनों दिशाओं में यात्रा करते हैं, इंसुलेटर्स, सबस्टेशन उपकरण को नुकसान पहुंचाते हैं।

निवारक उपाय (Protective Measures)

ओवरहेड शील्डिंग कंडक्टर (अर्थेड) सर्ज अरेस्टर लाइटनिंग मास्ट सबस्टेशन में लाइटनिंग रॉड ऊँची बिल्डिंग पर ग्राउंडिंग मैट टावर/सबस्टेशन में इंसुलेशन कोऑर्डिनेशन न्यूट्रल अर्थिंग
इनडायरेक्ट लाइटनिंग सर्जेस चार्ज्ड बादलों द्वारा ट्रांसमिशन लाइन के ऊपर से गुज़रने पर पैदा होते हैं। उनका एम्प्लीट्यूड और गंभीरता डायरेक्ट स्ट्रोक्स की तुलना में कम होती है।

11.14-11.15 शॉक की रोकथाम व सावधानियाँ14

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11.14 शॉक की रोकथाम (Prevention of Shocks)

  • बॉडीज़/स्ट्रक्चर्स को अर्थ करना ज़रूरी है।
  • कंडक्टर्स को इंसुलेटेड/इंक्लोज़्ड/नॉट-एक्सेसिबल बनाना चाहिए।
  • हाई वोल्टेज कंडक्टर से क्लियर दूरी बनाए रखनी चाहिए।
  • व्यक्तियों को सेफ्टी इंसुलेटिंग जूते और इंसुलेटिंग हैंड-ग्लव्स पहनने चाहिए।
  • लाइव लाइन वर्किंग से बचना चाहिए।
  • कंडक्टर को डेड और डिस्चार्ज्ड करने के बाद ही टच करना चाहिए।

11.15 कॉन्टैक्ट शॉक, फ्लैश शॉक व बर्न्स के खिलाफ सुरक्षा सावधानियाँ

सुरक्षा सावधानियों को इन वर्गों में बांटा जा सकता है:

  • प्लांट/इंस्टॉलेशन के डिज़ाइन में सुरक्षा सावधानियाँ — इक्विपमेंट, अर्थिंग सिस्टम, सिविल वर्क्स।
  • जनरल सेफ्टी सावधानियाँ।
  • प्लांट/इक्विपमेंट के इरेक्शन में सावधानियाँ।
  • प्लांट/इक्विपमेंट की टेस्टिंग/कमीशनिंग में सावधानियाँ।
  • प्लांट/इक्विपमेंट के ऑपरेशन में सावधानियाँ।
  • प्लांट/इक्विपमेंट के मेंटेनेंस में सावधानियाँ।
  • छोटी रेजिडेंशियल बिल्डिंग के लिए 'DONT'S' सिंपल तरीके से लिस्ट होने चाहिए।
बड़े इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन के लिए — एक व्यवस्थित सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित होना चाहिए, सेफ्टी रूल्स एनफोर्स होने चाहिए, व्यक्तियों को ट्रेनिंग और सुविधाएं देनी चाहिए। सेफ्टी प्रीकॉशन्स को इक्विपमेंट/इंस्टॉलेशन की वोल्टेज के अनुसार क्लासिफाई किया जाता है:
  • लो वोल्टेज इंस्टॉलेशन (< 1000 V)
  • मीडियम वोल्टेज (< 33 kV)
  • मीडियम व हाई वोल्टेज (> 220 kV) — जहाँ शॉक व फ्लैशओवर का जोखिम सबसे ज़्यादा है

11.16 इलेक्ट्रिकल प्लांट में सुरक्षा प्रक्रिया (Work Permit System)15

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प्रोसीजर और पेपर वर्क कमीशनिंग, ऑपरेशन, मेंटेनेंस के शुरू से ही एनफोर्स होने चाहिए। इसमें शामिल हैं:

  1. परमिट टू वर्क
  2. एक्सेस टू वर्क
  3. एंट्री पासेस
  4. मटीरियल गेट पास इत्यादि

इंस्टॉलेशन, कमीशनिंग व मेंटेनेंस के लिए ज़रूरी स्टेप्स

  • रिस्पॉन्सिबल ऑथराइज़्ड व्यक्तियों की लिखित अनुमति के बिना काम शुरू नहीं करना चाहिए।
  • मेंटेनेंस वर्क को अधिकृत करने के लिए स्कीम व मित कार्ड आवश्यक है।
  • काम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह स्टेप्स होने चाहिए:
  1. लाइव पार्ट्स को हर मिस्टेक से पहचानना — नो स्विचिंग ऑन इवन बाई मिस्टेक
  2. डेंजर नोटिस व सेफ्टी नोटिस वर्कप्लेस पर रखना
  3. पड़ोसी स्विचेस को लॉक्ड ओपन रखना ताकि थर्ड पर्सन गलती से स्विच ऑन न कर दे
  4. अर्थिंग: सभी इंकमर्स/आउटगोअर्स को आइसोलेट और अर्थ करना चाहिए।
  5. प्रॉपर टूल्स, सेफ्टी डिवाइसेज़ इलेक्ट्रिशियंस को प्रोवाइड करने चाहिए।
  6. इलेक्ट्रिशियंस को अच्छी तरह ट्रेंड होना चाहिए।
  7. फर्स्ट एड उपलब्ध होनी चाहिए।
  8. ऑथोरिटी की परमिशन से ही काम खत्म होने के बाद स्विचिंग-ऑन करना चाहिए।
  9. 400 V इंस्टॉलेशन पर भी मौत हो सकती है — सेफ्टी रूल्स फेथफुली फॉलो करनी चाहिए।
  10. स्पेसिफिक काम के लिए ऑथराइज़्ड पर्सन से परमिशन लेनी चाहिए। 'वर्क परमिट' फॉर्म भरना और साइन करना चाहिए। काम पूरा होने पर ऑथोरिटी को वापस देना चाहिए।
  11. यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सप्लाई सभी सिरों से स्विच-ऑफ है।
HV अपैरेटस पर काम: जब तक अपैरेटस डेड, आइसोलेटर्स ओपन और लॉक्ड न हों, अर्थिंग स्विचेस क्लोज्ड और लॉक्ड न हों, काम शुरू न करें। रिपेयर/मेंटेनेंस का काम शुरू होने से पहले HV कंडक्टर को डिस्चार्ज और अर्थ से सिक्योरली कनेक्ट करना चाहिए।

WATCH; DON'T SWITCH-ON; MEN AT WORK; DANGER 440; DON'T TOUCH — बोर्ड सेफ्टी शूज़, बेल्ट, ग्लव्स, हैट पहनना; वेट कपड़े/जूते/मेटल टेप्स इस्तेमाल न करना; बैरियर्स, रस्सियाँ रखना; मेंटेनेंस ज़ोन को अर्थ करना; बस-सेक्शन/कंडक्टिंग पार्ट्स की जानकारी रखना।

11.17-11.18 अर्थिंग सिस्टम व CB-Isolator ऑपरेशन क्रम16

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11.17 अर्थिंग सिस्टम की इंस्टॉलेशन

  • सेफ्टी प्रोसीजर का लक्ष्य है — एक भी व्यक्ति घायल न हो। बिजली का झटका हर संभावित सावधानी से खत्म किया जाना चाहिए।
  • इरेक्शन सीक्वेंस अलग-अलग साइट्स पर अलग हो सकती है — पर अर्थ-मैट, अर्थ रॉड्स व अर्थिंग कॉपर प्लेट्स बिछाना ज़रूरी है।
  • अर्थिंग वर्क में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि सॉइल कैरेक्टरिस्टिक्स के कारण मेटल पर करोसिव इफेक्ट हो सकता है।
  • शॉर्ट-सर्किट और अर्थ-फॉल्ट करंट सुरक्षित तरीके से डिस्चार्ज होनी चाहिए।
  • सिस्टम के ऊपर व्यक्तियों की सेफ्टी के लिए टच पोटेंशियल और स्टेप पोटेंशियल के खतरे को ग्राउंड से खत्म करना चाहिए।

अर्थिंग डॉक्युमेंटेशन में शामिल आइटम

स्ट्रक्चर अर्थिंग टावर व ओवरहेड शील्ड अर्थिंग अपैरेटस व कैबिनेट अर्थिंग अर्थिंग स्विचेस टर्मिनल डिस्कनेक्टर अर्थ स्विच टर्मिनल इक्विपमेंट अर्थिंग ट्रांसफार्मर न्यूट्रल अर्थिंग ट्रांसफार्मर टैंक्स अर्थिंग सर्ज अरेस्टर टर्मिनल अर्थिंग केबल रैक्स अर्थिंग कैपेसिटर न्यूट्रल अर्थिंग शंट रिएक्टर टर्मिनल अर्थिंग फेंसिंग, डोर, स्क्रीन, लैंप पोस्ट, कैबिनेट अर्थिंग

11.18 सर्किट-ब्रेकर, आइसोलेटर व अर्थिंग स्विच ऑपरेशन का सीक्वेंस

  • सर्किट-ब्रेकर मेकिंग/ब्रेकिंग करंट स्विच करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है, आइसोलेटर्स सिर्फ आइसोलेशन (नो मेकिंग/ब्रेकिंग) के लिए डिज़ाइन होते हैं।

सर्किट ओपन करते समय क्रम

सर्किट-ब्रेकर पहले ओपन करें → आइसोलेटर बाद में ओपन करें

सर्किट क्लोज करते समय क्रम

अर्थिंग स्विच ओपन करें → आइसोलेटर स्विच पहले क्लोज करें → फिर सर्किट-ब्रेकर क्लोज करें
करंट कैरींग सर्किट को ब्रेक/मेक करना सिर्फ 'सर्किट-ब्रेकर' का काम है। आइसोलेटर्स करंट ब्रेकिंग या मेकिंग के लिए रेटेड नहीं होते। आइसोलेटर विज़िबल आइसोलेशन और सेफ्टी प्रोवाइड करने के लिए ओपन किया जाता है।

11.19-11.20 आइसोलेटिंग डिवाइस व MV/HV सेफ्टी प्रोविजन17

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11.19 इलेक्ट्रिकल सप्लाई के लिए आइसोलेटिंग डिवाइस

  • आइसोलेटिंग डिवाइस को करंट कैरी व ब्रेक करने की क्षमता होनी चाहिए, ताकि सप्लाई को इमरजेंसी में आसानी से कंप्लीट आइसोलेट कर सकें।
  • यह इंस्टॉलेशन की टाइप पर निर्भर करता है कि रीडिली एक्सेसिबल पोजिशन में हो।

टेबल — आइसोलेटिंग डिवाइस की टाइप

इंस्टॉलेशन टाइपआइसोलेटिंग डिवाइस
लो वोल्टेज व मीडियम वोल्टेजलिंक्ड स्विच विद फ्यूज या सर्किट ब्रेकर
हाई वोल्टेज (a) 1000 KVA तक 11 kVलिंक्ड स्विच विद फ्यूज या सर्किट ब्रेकर
2500 KVA तक 33 kVलिंक्ड स्विच विद फ्यूज या सर्किट ब्रेकर
(b) 1000 KVA से ज़्यादा 11 kVसर्किट ब्रेकर
2500 KVA से ज़्यादा 33 kVसर्किट ब्रेकर

11.20 मीडियम वोल्टेज/हाई वोल्टेज पर सेफ्टी प्रोविजन

  1. ओवरहेड लाइन को छोड़कर, सभी कंडक्टर मेटैलिक केसिंग में पूरी तरह इंक्लोज्ड होने चाहिए।
  2. ऑल मेटल वर्क, इंक्लोज़िंग, सपोर्ट्स आदि अर्थिंग सिस्टम से कनेक्टेड होने चाहिए।
  3. इंस्टॉलेशन/अपैरेटस इनफ्लेमेबल मैटीरियल, फ्लेम-प्रूफ, डस्ट-टाइट फिटिंग्स से रिलेवेंट स्पेसिफिकेशन के अनुसार होने चाहिए।

सबस्टेशन इंस्टॉलेशन में जांच के बिंदु

फेज़-टू-फेज़ व फेज़-टू-अर्थ क्लियरेंस ग्राउंड क्लियरेंस फेंसिंग फायर फाइटिंग इक्विपमेंट केबल ट्रेंच कवर नेम प्लेट्स अर्थ इलेक्ट्रोड HT/LT पैनल प्रोटेक्शन ऑयल पिट्स/सम्प्स

11.21 इक्विपमेंट ग्राउंडिंग18

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  • सभी इलेक्ट्रिकल अपैरेटस, इक्विपमेंट व सिस्टम्स IS 3043:1987 (Grounding) और IEC स्टैंडर्ड्स के अनुसार ग्राउंडेड होने चाहिए।
  • ग्राउंडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला कंडक्टर, प्रोटेक्टिव डिवाइस के लिए ज़रूरी काम पूरा करना चाहिए।

ग्राउंडिंग कंडक्टर की क्राइटेरिया

  • परमानेंट और कंटिन्युअस होना चाहिए
  • सर्किट के प्रोटेक्टिव डिवाइस के लिए फैसिलिटेट करना चाहिए
  • ग्राउंड को सेफ लेवल पर लिमिट करने के लिए सफिशिएंट लो इंपीडेंस होनी चाहिए
  • एंटिसिपेटेड फॉल्ट-करंट फ्रीक्वेंसी और मैग्नीट्यूड सेफली कंडक्ट करने की कैपेसिटी होनी चाहिए
जब इंसुलेशन फेल होता है, तो कंडक्टर्स लाइन वोल्टेज से अंडरग्राउंडेड मेटल इंक्लोज़र्स को हैज़र्डस वोल्टेज डिफरेंस देते हैं। इक्विपमेंट-ग्राउंडिंग कंडक्टर मेटल एनक्लोज़र को अटैच होकर लो-रेजिस्टेंस कंटिन्युअस पाथ प्रदान करता है — ग्राउंड फॉल्ट डेवलपमेंट में फॉल्ट करंट को कंडक्ट करके डी-एनर्जाइज़ करता है।
  • ग्राउंडिंग कंडक्टर एक बेयर कंडक्टर हो सकता है या ग्रीन इंसुलेटेड कंडक्टर विद येलो स्ट्राइप।
  • इक्विपमेंट-ग्राउंडिंग कंडक्टर पोर्टेबल कॉर्ड में ग्राउंडेड होना चाहिए।

11.22 इक्विपमेंट व पर्सनल गाइडलाइंस19

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  • मेटल इंक्लोज़र, टेम्पररी पावर डिस्ट्रिब्यूशन बोर्ड्स को अर्थ से कनेक्ट किया जाना चाहिए। रेगुलर इंटरवल्स पर अर्थ रेजिस्टेंस चेक करना चाहिए।
  • टेम्पररी पावर डिस्ट्रिब्यूशन बोर्ड्स में उपयुक्त पोर्टेबल फायर एक्सटिंग्विशर होने चाहिए। रबर मैट्स सभी इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन में रखनी चाहिए।
  • सभी इक्विपमेंट में सूटेबल ओवर-करंट प्रोटेक्टिव डिवाइस (फ्यूज़, सर्किट ब्रेकर्स) होने चाहिए।
  • 240 वोल्ट हैंड-हेल्ड टूल्स के लिए रेजिड्युअल करंट डिवाइस (ELCB) होने चाहिए।

पर्सनल के लिए गाइडलाइंस

  • ग्राउंडिंग करने से स्टैटिक चार्ज लगातार डिस्चार्ज होता रहता है।
  • रिस्ट स्ट्रैप्स को सॉलिडली ग्राउंडेड होना चाहिए, ताकि शॉर्ट सर्किट में यह शॉक हैज़र्ड न बने।
  • बॉन्डिंग से दो एडजेसेंट नॉन-करंट कैरींग मेटल पार्ट्स का पोटेंशियल इक्वलाइज़ होता है — सिर्फ अप्रूव्ड ग्राउंडिंग क्लैम्प्स का इस्तेमाल करें, एलिगेटर क्लैम्प्स नहीं।
  • इलेक्ट्रिकल-पावर्ड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट को कभी वेट नहीं होने देना चाहिए।
  • वार्निंग साइन एक्सपोज़्ड करंट-कैरींग पार्ट्स और हैज़र्डस एरिया के पास लगाने चाहिए।
  • आर्टिफिशियल रेस्पिरेशन के पोस्टर इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन के पास लगाने चाहिए।
  • ऑर्डिनरी ट्विस्टेड, हाउसहोल्ड लैंप कॉर्ड्स को एक्सटेंशन कॉर्ड के रूप में नहीं इस्तेमाल करना चाहिए।
  • मल्टी-वे एडाप्टर्स या डोमेस्टिक 15 amp प्लग्स इस्तेमाल न करें।
  • रेगुलर इंस्पेक्शन और मेंटेनेंस की योजना बनानी चाहिए।
  • सिर्फ ट्रेंड, क्वालिफाइड और ऑथराइज़्ड व्यक्ति ही इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट इंस्टॉल/रिपेयर करें।
  • इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट पर काम करने वाले व्यक्तियों को इलेक्ट्रिक सेफ्टी शूज़ और रबर हैंड ग्लव्स/एप्रन देने चाहिए।
  • टेम्पररी रिपेयर न करें। सही लीड्स और सॉकेट्स इस्तेमाल करें। फ्यूज़ सही रेटिंग के होने चाहिए।

11.23-11.25 इमरजेंसी असिस्टेंस, माइनर शॉक व सेफ्टी सिस्टम20

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11.23 इमरजेंसी असिस्टेंस व रेस्क्यू

गंभीर इलेक्ट्रिक शॉक जिसमें निम्न स्थितियाँ हों, उसे साइट सेफ्टी टीम को रिपोर्ट करना चाहिए और ट्रेंड फर्स्ट-एड स्टाफ से मेडिकल असिस्टेंस मंगानी चाहिए:

  1. ओबवियस सीरियस इंजरी (जैसे बेहोशी, गंभीर ट्रामा)
  2. ऑल्टर्ड मेंटल स्टेटस (कन्फ्यूज़न, धीमी बोली)
  3. दूसरी ओबवियस इंजरी (कट, मांसपेशी खिंचाव, जलन)
  • सुनिश्चित करें कि सभी संभावित एनर्जी सोर्स सुरक्षित और न्यूट्रल हैं।
  • इमरजेंसी में केवल ट्रेंड पर्सनल को ही CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना चाहिए।
  • शॉक की घटना विक्टिम के सुपरवाइज़र और सेफ्टी टीम को जल्द से जल्द बताई जानी चाहिए।

11.24 माइनर शॉक

  • जिन शॉक विक्टिम्स की ब्रीदिंग रुक जाए, उन्हें तुरंत मेडिकल एड (रेसुसिटेटर या माउथ-टू-माउथ रेस्पिरेशन) दिया जाना चाहिए।
  • जब तक व्यक्ति खुद सांस लेना शुरू न करे या डॉक्टर के पास न पहुंचे, आर्टिफिशियल रेस्पिरेशन जारी रखना चाहिए।

इलेक्ट्रिकल इंसिडेंट्स का विश्लेषण

  • एरिया को सिक्योर करें, आइटम्स की ओरिजिनल पोजिशन याद रखने की कोशिश करें।
  • टाइम, डेट, लोकेशन, विक्टिम का नाम, विटनेस, वोल्टेज-करंट, कॉन्टैक्ट बॉडी पार्ट्स रिकॉर्ड करें।

11.25 सेफ्टी सिस्टम्स

  • सिर्फ क्वालिफाइड और ऑथराइज़्ड व्यक्ति ही सभी इलेक्ट्रिकल काम कर सकते हैं।
  • सभी सर्किट/इक्विपमेंट को काम शुरू करने से पहले डी-एनर्जाइज़ किया जाना चाहिए (जहां संभव हो)।
  • वर्कर्स को प्रॉपर डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, इंस्टॉलेशन, डॉक्युमेंटेशन तकनीक, प्रॉपर ऑपरेशनल व मेंटेनेंस प्रोसीजर और IS स्टैंडर्ड-अप्रूव्ड इक्विपमेंट उपयोग करने चाहिए।

11.26 ट्रेनिंग21

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  • PPE (Personal Protective Equipment) प्रोएक्टिव रूप से रूट कॉज़ पर ध्यान देना चाहिए — नियर-मिस, इंसिडेंट्स को इग्नोर न करें।
  • कंस्ट्रक्शन/रिपेयर/मेंटेनेंस काम सिर्फ सेफ वर्किंग कंडीशन में और प्रॉपर ऑथराइज़ेशन के बाद होना चाहिए।
  • सुपरवाइज़र को कर्मचारियों की क्वालिफिकेशन और ट्रेनिंग वेरिफाई करनी चाहिए।

सभी इलेक्ट्रिकल वर्कर्स को इन विषयों में ट्रेनिंग चाहिए

BIS स्टैंडर्ड सेफ्टी प्रैक्टिस डी-एनर्जाइज़ करने की तकनीक लॉकिंग-आउट, टैगिंग सेफ्टी वर्कप्लेस रिक्वायरमेंट्स टेस्टिंग-मेजरिंग इक्विपमेंट सेफ्टी प्लान/वर्क ऑथराइज़ेशन PPE का उपयोग व देखभाल हैज़र्ड कैटेगरी व पर्सनल रिक्वायरमेंट

नॉन-इलेक्ट्रिकल वर्कर्स (50 V+ के पास काम करने वालों) के लिए अतिरिक्त ट्रेनिंग

  • पोर्टेबल टूल्स व अप्लायंस कॉर्ड्स की सही हैंडलिंग
  • ओवर-करंट प्रोटेक्टिव डिवाइस रीसेट करने की प्रक्रिया
  • ओवरहेड कंडक्टर्स के पास एप्रोचिंग डिस्टेंस की तकनीक
  • इलेक्ट्रिकल सेफ्टी वार्निंग व बैरियर्स का मतलब
  • पानी से जुड़े इलेक्ट्रिकल हैज़र्ड्स
  • इलेक्ट्रिक शॉक पर सही प्रतिक्रिया

हल किए गए प्रश्न (Solved Questions)Q

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प्रश्न 11.1: इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के लिए थ्री-स्टेज सेफ्टी मॉडल (Recognize, Evaluate, Control) बताएं।

उत्तर: सेफ्टी के लिए सोचना और खतरों की योजना बनानी होती है। सेफ्टी स्टैंडर्ड्स की जानकारी ज़रूरी है।

  • रिकॉग्नाइज़: पहला कदम खतरे पहचानना है — इनएडिक्वेट वायरिंग, एक्सपोज्ड इलेक्ट्रिकल पार्ट्स, ग्राउंड न होना, अनग्राउंडेड टूल्स।
  • इवैल्युएट: अगला कदम खतरों का आकलन करना है — एक्सपोज्ड वायर छूना, वेट कंडीशन में जोखिम ज़्यादा। ग्राउंड फॉल्ट सर्किट इंटरप्टर बार-बार ट्रिप हो तो समस्या समझनी चाहिए।
  • कंट्रोल: आखिरी कदम खतरों को कंट्रोल करना है — सुरक्षित माहौल बनाना, इंसुलेटेड/एनर्जाइज़्ड कंडक्टर्स को लॉक-आउट/टैग करना, ओवरलोडेड वायरिंग रोकना, ओवर-करंट प्रोटेक्शन डिवाइस लगाना।

प्रश्न 11.2: बिजली के प्राथमिक और द्वितीयक हैज़र्ड्स क्या हैं?

उत्तर:

प्राइमरी हैज़र्ड्स: (i) इलेक्ट्रिक शॉक (ii) इलेक्ट्रिक फायर व विस्फोट (iii) इलेक्ट्रिक फ्लैश (iv) इलेक्ट्रिक बर्न्स।

सेकेंडरी हैज़र्ड्स: (i) व्यक्ति का ऊँचाई से गिरना (ii) टूल्स/ऑब्जेक्ट्स का गिरना।

प्रश्न 11.3: इलेक्ट्रिक शॉक कैसे होता है?

उत्तर: शॉक तब होता है जब शरीर सर्किट का हिस्सा बन जाता है और सर्किट कंप्लीट करता है:

  • (a) एक साथ फेज़ व न्यूट्रल कंडक्टर छूना
  • (b) फेज़ कंडक्टर छूना और ग्राउंड पर खड़े होना
  • (c) किसी मेटैलिक पार्ट को छूना जो एनर्जाइज़्ड वायर के संपर्क में आकर खुद लाइव हो गया हो

प्रश्न 11.4: इलेक्ट्रिक करंट के ह्यूमन बॉडी पर क्या प्रभाव होते हैं?

उत्तर: फिजियोलॉजिकल प्रभाव करंट की मैग्नीट्यूड, बॉडी के कौन से पार्ट से गुज़रा, और ड्यूरेशन पर निर्भर करते हैं।

  • 1-5 mA: केवल परसेप्शन
  • 10-15 mA: दर्द व मांसपेशी संकुचन
  • 25-30 mA: थोरेसिक कैविटी तक संकुचन, एस्फीक्सिएशन से मौत हो सकती है
  • 50 mA से ज़्यादा: वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन या हार्ट का अनियंत्रित कंपन

प्रश्न 11.5: इलेक्ट्रिक शॉक को कैसे रोका जा सकता है?

उत्तर: ये प्रोटेक्शन मेथड अपनाने चाहिए:

  1. इक्विपमेंट को बैरिकेड्स व ग्रीन फ्लैग्स से एक्सीडेंटल कॉन्टैक्ट और अनऑथराइज़्ड एक्सेस से आइसोलेट करना।
  2. अर्थ लीकेज सर्किट ब्रेकर लगाकर शॉक इंटेंसिटी को लिमिट करना।
  3. इक्विपमेंट को लो वोल्टेज (सेफ वोल्टेज 24 V) से सप्लाई देना।
  4. नॉर्मल इंसुलेशन के अलावा डबल (प्रोटेक्टिव) इंसुलेशन देना।
  5. मोटर के फ्रेम को दो अलग कनेक्शन से अर्थ करना।
  6. ट्रेनिंग देना और सही प्रोसीजर व सावधानियाँ अपनाना।

❓ अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

  1. इलेक्ट्रिक शॉक की परिघटना (Phenomenon) समझाएँ।
  2. वोल्टेज और इलेक्ट्रिक शॉक करंट के बीच संबंध क्या है? त्वचा (Skin) के रेजिस्टेंस का महत्व क्या है?
  3. सबस्टेशन में बिजली के झटकों को रोकने के दस निवारक उपाय लिखें।
  4. हार्ट और फेफड़ों (Lungs) पर इलेक्ट्रिक करंट का प्रभाव समझाएँ।
  5. आइसोलेटर्स और अर्थिंग स्विच का कार्य समझाएँ। कंडक्टर को छूने से पहले डिस्चार्ज करने की ज़रूरत क्यों है?
  6. फ्लैशओवर कैसे होता है, और मेंटेनेंस वर्क में फ्लैशओवर रोकने की सावधानियाँ क्या हैं?
  7. इलेक्ट्रिक करंट के कारण फिब्रिलेशन और रेस्पिरेटरी टिटेनी की प्रक्रिया समझाएँ।
  8. AC शॉक, DC शॉक से ज़्यादा गंभीर क्यों होता है?
  9. लाइव इलेक्ट्रिक कंडक्टर से चिपके व्यक्ति को कैसे अलग किया जाना चाहिए?
  10. बिजली के झटके रोकने में अर्थिंग कैसे उपयोगी है, समझाएँ।
⚡ Notes prepared for easy Hindi-medium exam revision — Chapter 11: Electrical Safety, Electric Shocks and Their Prevention (Page 152–182)

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