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करूँ कभी #अभिषेक लाडली...🙏 आँखों से बहते झरनों का...😭 मुझे दे दो भरोसा चरणों का...🙇 ॐ स्वस्ति श्री नीलकंठाय नमः “श्रीरामचरितमानस” केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार है। भगवान श्रीराम के मर्यादित आचरण और अन्य पात्रों के माध्यम से यह मनुष्य को धर्मानुसार अनुशासित जीवन जीने का संदेश देता है ! बाबा तुलसी ने “श्रीरामचरितमानस” के रूप में भारतीय साहित्य को एक ऐसी मणि सौंपी है जिसकी एकल आभा जटिल सांसारिकता से लेकर गहन आध्यात्मिकता तक के समस्त पथ को प्रशस्त करने में सक्षम है ! रामकथा केवल पारलौकिक जगत में सहारा बनने वाले पुण्य-कर्मों का संचय ही सुनिश्चित नहीं करती बल्कि इस कथा-धारा में मनुष्यता का वह संजीवनी तत्व शामिल है, जिसके बल पर लौकिक जगत में एक अत्यंत सुंदर एवं सौहार्दपूर्ण समाज की परिकल्पना अत्यंत सरलता से साकार की जा सकती है। 🙏 भगवान कृष्ण मेरे आराध्य, विश्वास मेरी ऊर्जा, संस्कार मेरे शस्त्र, 🇮🇳 माँ, मातृभूमि, मातृभाषा मेरे लिए सर्वोपरि 🙏 For any Issues / Copyright discussions contact AbhishekVssct@gmail.com

"Chemical Hazards"

रासायनिक खतरे — Chemical Hazards (Hindi Notes)
SAFETY, HEALTH AND ENVIRONMENT — Chapter 13

रासायनिक खतरे
(Chemical Hazards)

पूरी किताब के पेज 205 से 233 तक की जानकारी — आसान हिन्दी में, Point-wise और Bihar Board स्टूडेंट्स के लिए बिल्कुल सरल भाषा में।

👉 इस पोस्ट में रासायनिक खतरे (Chemical Hazards) से जुड़ी हर बात — केमिकल के प्रकार, टॉक्सिकोलॉजी, TLV/STEL/Ceiling, प्लांट सेफ्टी, डस्ट एक्सप्लोजन, क्लोरीन-हाइड्रोजन-नैचुरल गैस के खतरे, स्टोरेज टैंक हैज़र्ड, MSDS, रिस्क रिडक्शन और हल किए गए प्रश्नों को — बहुत ही आसान और सरल हिंदी में समझाया गया है। हर टॉपिक को छोटे-छोटे पॉइंट्स में लिखा गया है ताकि परीक्षा के लिए याद करना आसान हो।

📑 इस नोट्स में क्या-क्या है

  1. 13.1 परिचय व रासायनिक खतरों की श्रेणियाँ
  2. 13.2 गैसों से खतरे (टेबल सहित)
  3. 13.3-13.4 इंडस्ट्रियल टॉक्सिकोलॉजी
  4. 13.5-13.6 हानिकारक प्रभाव व कारक
  5. 13.7-13.8 सांद्रता से जुड़े शब्द व यूनिट्स
  6. TLV/PEL सारणी — महत्वपूर्ण रसायन
  7. 13.9-13.10 भोपाल त्रासदी व सेफ्टी जोर
  8. 13.11-13.12 सेफ्टी एनालिसिस व नियंत्रण उपाय
  9. 13.13-13.15 वर्कप्लेस एक्सपोज़र मैनेजमेंट व प्लानिंग
  10. 13.16-13.18 डस्ट एक्सप्लोजन व टॉक्सिक रिलीज
  11. 13.19-13.21 फ्लेमेबल गैस, बल्क-फायर व हैज़र्ड मैनेजमेंट
  12. 13.22 स्टोरेज टैंक व पाइपलाइन हैज़र्ड
  13. क्लोरीन गैस — गुण, खतरे व हैंडलिंग
  14. हाइड्रोजन गैस व क्लोरीन एक्सीडेंट सिनेरियो
  15. टन कंटेनर — Do's and Don'ts
  16. 13.23 MSDS — मटेरियल सेफ्टी डेटा शीट
  17. 13.24 रिस्क रिडक्शन स्ट्रेटेजीज़
  18. हैज़र्ड आइडेंटिफिकेशन, JHA व मैन्युफैक्चरर्स की भूमिका
  19. केमिकल/फिज़िकल प्रॉपर्टीज़ व स्टेबिलिटी
  20. टॉक्सिकोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन — एक्यूट व क्रॉनिक डेटा
  21. हल किए गए प्रश्न
  22. रेफरेंस टेबल — कुछ खतरनाक रसायन
  23. अभ्यास प्रश्न

13.1 परिचय व रासायनिक खतरों की श्रेणियाँ1

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  • इंडस्ट्री में कई तरह के केमिकल और खतरनाक पदार्थों का उपयोग होता है, इसलिए सुरक्षा को लेकर सतर्कता बहुत ज़रूरी है।
  • कच्चा माल अपनी टॉक्सिसिटी (विषाक्तता) के कारण खतरनाक हो सकता है।
  • प्रोडक्ट, इंटरमीडिएट, फिनिश्ड माल और इंडस्ट्रियल वेस्ट — सभी केमिकल सेफ्टी की समस्या पैदा कर सकते हैं।
  • केमिकल के स्टोरेज, हैंडलिंग, निर्माण और उपयोग में मैनेजर, सुपरवाइज़र और कर्मचारी — सभी की कड़ी निगरानी ज़रूरी है।

रासायनिक खतरों की 3 मुख्य श्रेणियाँ

  1. ठोस (Solids): ज्वलनशील ठोस, टॉक्सिक व कोरोसिव ठोस (रेडियोएक्टिव पदार्थ सहित), पानी/हवा में अपने आप जलने वाले ठोस, विस्फोटक ठोस या डेटोनेटर।
  2. तरल (Liquids): ज्वलनशील तरल, टॉक्सिक व कोरोसिव तरल जो विस्फोट का कारण बन सकते हैं।
  3. गैस (Gases): ज्वलनशील गैस, टॉक्सिक व कोरोसिव गैस, विस्फोटक गैस या गैसों का मिश्रण।

तालिका 13.1 — रासायनिक खतरों के उदाहरण (ठोस)

पदार्थउदाहरणअसर
ज्वलनशील ठोसलकड़ी, ऊन, कागज़आसानी से आग पकड़ते व जलते हैं
टॉक्सिक ठोसलेड, मैंगनीज़, क्रोमियम, मरकरी, आर्सेनिक, कैडमियम के यौगिकलेड, मैंगनीज़, क्रोमियम, मरकरी, आर्सेनिक, कैडमियम पॉइज़निंग
कोरोसिव ठोसकॉस्टिक सोडा, कॉस्टिक पोटाशछाले या जलन (Burns)
रेडियोएक्टिव पदार्थयूरेनियम, प्लूटोनियम, थोरियमरेडिएशन हैज़र्ड
अपने आप जलने वालेसोडियम, लीथियम, फॉस्फोरसदुर्घटना
विस्फोटकबारूद, कोयले की धूलविस्फोट

तरल पदार्थों में उदाहरण: पेट्रोल, केरोसिन, मिथाइल अल्कोहल — ये आसानी से आग पकड़ते और जलते हैं।

13.2 केमिकल के कई प्रभाव (गैसों की टेबल)2

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पदार्थउदाहरणअसर
ज्वलनशील गैसऑक्सीजन, हाइड्रोजन, एसिटिलीनआसानी से जलती हैं
विस्फोटक (Liquid)नाइट्रोग्लिसरीन, TNTविस्फोट का कारण
टॉक्सिक गैसकार्बन मोनोऑक्साइड, मिथाइल आइसोसाइनेट, फॉस्जीनजानलेवा (Fatal) व इरिटेशन
कोरोसिव गैससल्फर डाइऑक्साइड, क्लोरीनइरिटेशन, कोरोज़न
मिक्सचर (हवा के साथ)हाइड्रोजन, प्रोपेनविस्फोट

केमिकल के मल्टीपल असर

  1. ऑक्युपेशनल डिज़ीज़: सिलिकोसिस, एस्बेस्टोसिस, साइडरोसिस जैसी बीमारियाँ।
  2. आग के खतरे: ज्वलनशील ठोस, तरल व गैस से आग लगने का खतरा।
  3. टॉक्सिक/कोरोसिव केमिकल का अचानक रिसाव: मैकेनिकल फेल्योर या गलत हैंडलिंग से हो सकता है।
  4. विस्फोट: गलत स्टोरेज या हैंडलिंग से हो सकता है।
  5. एनवायरनमेंटल पॉल्यूशन: गलत तरीके से वेस्ट डिस्पोज़ करने से होता है।

13.3-13.4 इंडस्ट्रियल टॉक्सिकोलॉजी व टॉक्सिक केमिकल3

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13.3 इंडस्ट्रियल टॉक्सिकोलॉजी

  • इंडस्ट्रियल टॉक्सिकोलॉजी — ज़हरीले पदार्थों का वैज्ञानिक व सिस्टमैटिक अध्ययन है, जो इंडस्ट्री में उपयोग होते हैं।
  • किसी पदार्थ की टॉक्सिसिटी उसके एक्सपोज़र की मात्रा और मज़दूर की उस पदार्थ के प्रति संवेदनशीलता (Susceptibility) पर निर्भर करती है।
  • टॉक्सिन शरीर के ऊतकों (Human Tissues) में इन रास्तों से प्रवेश कर सकते हैं — (a) त्वचा से (b) साँस से (c) निगलने से (d) आँखों से।

13.4 टॉक्सिक केमिकल और उनके हानिकारक प्रभाव

केमिकल्स को मोटे तौर पर बांटा जा सकता है:

  1. एस्फिक्सिएंट (दम घुटाने वाले):
    • (a) सिंपल एस्फिक्सिएंट — कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन आदि।
    • (b) केमिकल एस्फिक्सिएंट — कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन साइनाइड आदि।

केमिकल शरीर में कैसे प्रवेश करते हैं

  1. (a) त्वचा से एब्ज़ॉर्प्शन के ज़रिए
  2. (b) साँस के ज़रिए (Inhalation)
  3. (c) निगलने से (By Swallowing)
  4. (d) आँखों के ज़रिए (By Eyes)

जहरीले या कोरोसिव केमिकल की बड़ी घटनाएँ किससे होती हैं

  1. मैकेनिकल फेल्योर के कारण अचानक रिसाव।
  2. फायर हैज़र्ड: ज्वलनशील ठोस, तरल व गैस मिलकर आग लगने के खतरे पैदा करते हैं।
  3. दुर्घटनावश एक्सिडेंटल रिलीज़ जो मैकेनिकल फेल्योर से हो सकती है।
  4. विस्फोट: गलत स्टोरेज या हैंडलिंग की वजह से विस्फोटक मिश्रण बन सकते हैं।
  5. एनवायरनमेंटल पॉल्यूशन: अपर्याप्त या गलत तरीके से वेस्ट डिस्पोज़ल या ट्रीटमेंट से होती है।

13.5-13.6 केमिकल के हानिकारक प्रभाव व कारक4

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13.5 केमिकल के हानिकारक प्रभाव

  1. इरिटेंट्स: प्राइमरी इरिटेंट्स — अमोनिया, हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन डाइसल्फाइड, क्लोरीन। सेकंडरी इरिटेंट्स — लिवर टॉक्सिसिटी वाले।
  2. एनेस्थेटिक्स: गैसोलीन, ईथर, अल्कोहल आदि।
  3. मिसलेनियस ग्रुप:
    • (a) इनऑर्गेनिक — लेड, आर्सेनिक, क्रोमियम, मैंगनीज़
    • (b) ऑर्गेनिक मेटैलिक — टेट्रा एथिल लेड (TEL)
    • (c) ऑर्गेनिक ग्रुप — एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन, एलिफेटिक हाइड्रोकार्बन, कोल टार डेरिवेटिव

13.6 टॉक्सिक मैटीरियल के असर को प्रभावित करने वाले कारक

  1. एब्जॉर्प्शन (अवशोषण): टॉक्सिक सब्सटेंस के असर, शरीर में उनके अवशोषण की दर पर निर्भर करते हैं। जितनी जल्दी अवशोषण होगा, मज़दूर पर उतना ज़्यादा जोखिम होगा।
  2. कॉन्सन्ट्रेशन व समय: जितनी ज़्यादा सांद्रता और एक्सपोज़र का समय, उतना ही ज़्यादा शरीर में टॉक्सिक पदार्थ के प्रवेश का खतरा।
  3. पर्सनल टॉलरेंस लेवल: हर व्यक्ति की टॉलरेंस अलग होती है — कुछ लोग विशेष टॉक्सिक पदार्थ को ज़्यादा सह सकते हैं जबकि कुछ नहीं।

13.7-13.8 सांद्रता से जुड़े शब्द व यूनिट्स5

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13.7 इंडस्ट्रियल हाईजीन के अनुसार सांद्रता स्तर शब्द

  1. MAC (Maximum Allowable Concentration): किसी टॉक्सिक पदार्थ की अधिकतम सांद्रता जिसे झेला जा सके।
  2. Ceiling Value (C): टॉक्सिक पदार्थ की सांद्रता जिसे किसी भी हालत में पार नहीं करना चाहिए, थोड़े समय के लिए भी नहीं।
  3. Threshold Limit Value (TLV): वह सांद्रता जिसे मज़दूर सहन या बर्दाश्त कर सकते हैं, 8 घंटे के काम के लिए बिना नुकसान के।

13.8 सांद्रता की यूनिट्स

  • हवा में मौजूद प्रदूषक की सांद्रता को p.p.m. (parts per million) में मापा जाता है — गैसों के लिए, साथ ही ठोस (सॉलिड) जैसे पार्टिकुलेट्स, साल्ट्स, डस्ट व फ्यूम्स के लिए mg/m³ में भी मापा जा सकता है।
  • ठोस की सांद्रता mg/M³ (मिलीग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) में एक्सप्रेस की जाती है।
  • MAC/TLV/STEL (Short Term Exposure Limit): सामान्य परिस्थितियों में स्वस्थ, गैर-संवेदनशील (Non-susceptible) वयस्कों और सभी संवेदनशील मामलों के लिए, बिना कोई प्रतिकूल असर हुए, 15 मिनट तक टॉलरेट की जाने वाली सांद्रता।

तालिका 13.2 — कार्य वातावरण में केमिकल पदार्थों के अनुमत स्तर

पदार्थTWA (8 hrs) ppm/mg-m³STEL (15 min) ppm/mg-m³
कैल्शियम ऑक्साइड2 mg/m³
कॉटन डस्ट रॉ
D.D.T.0.2 mg/m³ / 1 ppm0.6 mg/m³
लेड इनऑर्ग. फ्यूम्स एंड डस्ट (as Pb)0.15 mg/m³0.45 mg/m³
फॉस्फोरस (Yellow)0.1 mg/m³0.3 mg/m³

TLV डेटा से जुड़ी बातें

  • औद्योगिक हाईजीनिस्ट व लिटरेचर से इंडस्ट्रियल टॉक्सिकोलॉजी पर बहुत डेटा कंपाइल किया गया है।
  • ये डेटा USA, UK आदि देशों में TLV, STEL, TWA, MAC, C जैसे यूनिट्स स्टेट करते हैं — भारत में इन्हें फ्लेक्सिबल गाइड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
  • ये स्टडीज़ इन बातों पर आधारित होती हैं — (a) मानव पर टॉक्सिक मैटेरियल के प्रभाव के अवलोकन (b) जानवरों (गिनी पिग आदि) पर अवलोकन (c) कंटामिनेंट की सांद्रता निर्धारण (d) पेशेवर बीमारियों के ज्ञात मामलों की पुनर्रचना।

TLV/PEL सारणी — महत्वपूर्ण रसायन6

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Threshold Limit Value (TLV) — 8 घंटे की समय-भारित औसत सांद्रता (TWA) व 15 मिनट की शॉर्ट-टर्म एक्सपोज़र लिमिट (STEL) दिखाती है (ppm और mg/m³ दोनों में)।

पदार्थTWA (ppm)STEL (ppm)
अमोनिया2535
बेंज़ीन1025
कार्बन मोनोऑक्साइड50400
क्लोरीन13
कार्बोनिल क्लोराइड (फॉस्जीन)0.1
ऐथिल अल्कोहल1000
क्लोरोफॉर्म1050
फ्लोरीन12
फॉर्मिक एसिड510
गैसोलीन300500
मिथाइल आइसोसाइनेट0.020.05
मिथाइल अल्कोहल (त्वचा से भी खतरनाक)200250
नाइट्रिक एसिड24
नाइट्रिक ऑक्साइड25
फिनॉल (त्वचा से भी खतरनाक)510
फॉस्फीन0.30.4
सल्फर डाइऑक्साइड25
n-ब्यूटाइल अल्कोहल (त्वचा से भी खतरनाक)50
हाइड्रोजन क्लोराइड5
हाइड्रोजन सायनाइड (त्वचा से भी खतरनाक)10
आयोडीन0.1
Notes: "C" का मतलब — सीलिंग लिमिट है। "Not more than 4 times a day" — यानी दिन में 4 बार से ज़्यादा नहीं। ppm कैलकुलेशन का फॉर्मूला: mg/m³ = (Molecular weight ÷ 24.45) × p.p.m.

13.9-13.10 केमिकल हैज़र्ड एक्सपोज़र व सेफ्टी जोर7

पेज 210-211

13.9 केमिकल हैज़र्ड एक्सपोज़र

  • मॉडर्न सोसाइटी को कैमिस्ट्स की लैबोरेटरी से बहुत फायदे मिले हैं, लेकिन साथ ही कुछ सबसे भयानक आपदाओं (Disasters) का कारण भी बने हैं।
  • दुनिया की सबसे भयानक घटना — भोपाल त्रासदी (Bhopal) — मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस के रिसाव से हुई थी, जो थैलिडोमाइड (Thalidomide) दुर्घटना जितनी भयानक थी।
  • ऐसी घटनाओं का म्यूटेजेनिक असर (जेनेटिक बदलाव) हमेशा याद रहता है।
  • केमिकल एक्सपोज़र चिंता का बड़ा विषय हैं — केमिकल रिएक्टिव होते हैं, नए गुणों वाले पदार्थ बनाते हैं, कोरोज़न के ज़रिए पदार्थों को खराब कर सकते हैं, और कुछ हद तक कंट्रोल्ड ही होते हैं।
  • प्रोसेस में इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल हाई फ्लेमेबल, एक्सप्लोसिव या करोसिव होते हैं। इनके कंट्रोल न होने पर पर्यावरण को असली खतरा हो सकता है।

13.10 केमिकल हैज़र्ड पर सेफ्टी का ज़ोर

  • ज़्यादातर केमिकल प्लांट में सेफ्टी एफर्ट्स की ज़रूरत हर समय गहनता से पड़ती है — क्योंकि केमिकल ऑपरेशन में आग व टॉक्सिक एक्सपोज़र की संभावना ज़्यादा होती है।
  • पिछले दो दशकों में केमिकल इंडस्ट्री में इंटरेस्ट काफी बढ़ा है, जिसने टॉक्सिसिटी स्टडीज़ को एथिकल कारणों से आगे बढ़ाया — लोगों की भलाई के लिए।

13.11-13.12 सेफ्टी एनालिसिस व नियंत्रण उपाय8

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13.11 सेफ्टी एनालिसिस

  • सेफ्टी एनालिसिस — इमरजेंसी की तैयारी के लिए एक ज़बरदस्त तरीका है, ताकि यह पता चले कि इमरजेंसी कैसे हो सकती है और उसे कैसे संभालना है।
  • इस एनालिसिस में — फायर डिपार्टमेंट कितना ट्रेंड है, इक्विपमेंट कितना कैपेबल है — यह देखा जाता है।
  • प्लांट का लेआउट व डिज़ाइन कैपिटल खर्च को काफी हद तक प्रभावित करता है — जैसे 1-मील दायरे में हवा की दिशा की जानकारी।
  • इमरजेंसी पर्ज सिस्टम, वेंटिलेशन सिस्टम व टॉक्सिक पदार्थों के संपर्क को कम करने वाली व्यवस्थाओं को शुरुआत में ही डिज़ाइन में शामिल करना चाहिए — बाद में बदलना ज़्यादा महंगा पड़ता है।

13.12 नियंत्रण उपाय (Control Measures)

इंडस्ट्री में हैज़र्डस पदार्थों के हैंडलिंग की समस्याओं के लिए ध्यान में रखे जाने वाले उपाय:

  1. स्टोरेज: मैटेरियल की उचित स्टोरेज व हैंडलिंग सुनिश्चित करना चाहिए। बल्क में हैज़र्डस स्टोरेज के लिए सही देखभाल व ध्यान ज़रूरी है।
  2. टेम्परेचर और प्रेशर: कई प्रोसेस या ऑपरेशन उच्च तापमान वाले होते हैं। एक्सोथर्मिक (गर्मी छोड़ने वाली) रिएक्शन से अनियंत्रित हीट बन सकती है, जिससे उपकरण को नुकसान हो सकता है। प्रेशर पाइपलाइन में तापमान का अनुचित नियंत्रण बर्स्टिंग का कारण बन सकता है।
  3. ऑपरेशंस और प्रोसेसेस: प्रोसेस सिस्टम में कोई खराबी सीरियस परिणाम दे सकती है। इसलिए वाल्व का सही डिज़ाइन, पाइपलाइनों की उचित असेंबली सुनिश्चित की जानी चाहिए।

13.13-13.15 वर्कप्लेस एक्सपोज़र मैनेजमेंट व सेफ्टी प्लानिंग9

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13.13 वर्कप्लेस एक्सपोज़र का मैनेजमेंट

वर्कप्लेस एक्सपोज़र मैनेजमेंट में स्टेप-वाइज़ और सिस्टेमेटिक तरीके से एक्शन एरिया को कोऑर्डिनेट करना होता है:

  1. प्रिलिमिनरी इंफॉर्मेशन: टॉक्सिक मटेरियल, इंडस्ट्री की वर्कफोर्स, केमिकल की टॉक्सिसिटी, सेफ्टी प्रोविज़न, हैज़र्डस केमिकल के फ्लो-चार्ट का डेटा कलेक्शन।
  2. फील्ड-वर्क: रिकनैसन्स सर्वे — वर्किंग कंडीशन को समझना, हैज़र्ड्स की पहचान करना, कंट्रोल सिस्टम की स्टडी।
  3. रेमेडियल मेज़र्स: पॉल्यूटेंट के एनवायरनमेंट का असेसमेंट व अध्ययन।

वर्कप्लेस एक्सपोज़र मॉनिटरिंग के तरीके

  1. मिजेट इम्पिंजर्स
  2. इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर्स
  3. थर्मल प्रीसिपिटेटर्स
  4. सॉल्युबल एंड नॉन-सॉल्युबल कलेक्टर्स
एक और अहम स्टेप है — कॉन्टामिनेंट्स से वर्कफोर्स के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का जायज़ा लेना, जैसे बायोमेट्रिक चेकअप और डिटेक्शन — ब्लड टेस्ट, ब्रीदिंग कैपेसिटी टेस्ट आदि के ज़रिए।

13.13 (जारी) — इंफॉर्मेशन, ट्रेनिंग, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट

  1. एजुकेशन एंड ट्रेनिंग: सभी नए एंट्रेंट्स को प्रोसेस से जुड़ी सेफ्टी अवेयरनेस में शिक्षित व प्रशिक्षित होना चाहिए। मैनेजरों, सुपरवाइज़रों को हैज़र्डस केमिकल के स्टोरेज व हैंडलिंग के सही तरीके सिखाने ज़रूरी हैं।
  2. इंफॉर्मेशन, डेटा कलेक्शन एंड मॉनिटरिंग: हैज़र्डस सब्सटेंस की पहचान व हैंडलिंग की सूचना संग्रह अहम भूमिका निभाता है। सेफ्टी डेटा शीट में जानकारी रिकॉर्ड होनी चाहिए।
  3. रिपेयर एंड मेंटेनेंस: रेगुलर मेंटेनेंस से एक्सीडेंट का खतरा कम होता है — जैसे वाल्व, प्रेशर गॉज आदि।
  4. पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE): हैज़र्डस पदार्थों के एक्सपोज़र वाले सभी कर्मियों को PPE दिए जाने चाहिए।

13.14 सेफ्टी प्रैक्टिस की प्लानिंग (तालिका 13.13)

प्रोसेस सेफ्टी प्रैक्टिस के लिए जानकारी इन कैटेगरी में चाहिए:

प्लानिंग — शामिल केमिकल एडवाइज़ेबिलिटी — साइट लोकेशन कॉन्सेप्ट्स — यूनिट लेआउट, प्रोसेस फ्लो शीट डिस्क्रिप्टिव्स — फ्लो शीट, यूटिलिटीज़ डिज़ाइन — फाइनल फ्लो शीट, वेंडर डेटा
  • अंत में एक फाइनल रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसमें निष्कर्ष, इन्वेस्टिगेशन, सजेशन और रेमेडियल मेज़र्स शामिल होते हैं — जो पूरे मैनेजमेंट स्कीनैरियो को दर्शाते हैं।

13.15 प्लांट ऑपरेशंस

  • केमिकल प्लांट में सेफ्टी की कमी का बड़ा कारण अक्सर हाउसकीपिंग और मशीनरी की देखभाल में लापरवाही होती है, ख़ासकर टॉक्सिक व कोरोसिव केमिकल के मामले में।
  • 13.15.1 नॉर्मल प्रोग्राम: बड़े प्लांट्स में सेफ्टी स्पेशलिस्ट्स होते हैं जो प्रोसेस इंजीनियरों के साथ मिलकर सेफ्टी को शेयर करते हैं। ये स्पेशलिस्ट, इंजीनियरिंग डिज़ाइन टीम के साथ काम करते हैं और हैज़र्ड एनालिसिस, इंसीडेंट सर्वे आदि करते हैं।
  • बड़ी कंपनियों में यह जिम्मेदारी "प्लांट प्रोसेस सेफ्टी इंजीनियर्स" को सौंपी जाती है, जो सीनियर इंजीनियरों द्वारा गाइड किए जाते हैं।

13.16-13.18 डस्ट एक्सप्लोजन, इंसीडेंस एनालिसिस व टॉक्सिक रिलीज10

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13.16 डस्ट एक्सप्लोजन

  • डस्ट एक्सप्लोजन का बड़ा महत्व है — यह कई केमिकल ऑपरेशंस में प्रोड्यूस होने वाली डस्ट, मटेरियल-हैंडलिंग, स्टोरेज आदि से जुड़ा है।
  • यह जानना ज़रूरी है — क्या मटेरियल कंबस्टिबल है, क्या डस्ट सेल्फ-एग्नाइट (Autoignition) करती है, क्या डस्ट कम्बशन स्पॉन्टेनियस है, ऑटोइग्निशन का तापमान क्या है।
  • यह भी देखना ज़रूरी है कि क्या धूल विस्फोटक दबाव पैदा करती है (एक लेबोरेटरी बम टेस्ट व एक अनवेंटेड-वेंटेड टेस्ट में)।
  • डस्ट एक्सप्लोजन प्रिवेंशन में कई साधनों का इस्तेमाल किया जाता है — जैसे इनलेट-आउटलेट डैंपर, फास्ट-एक्टिंग सप्रेशन सिस्टम, बैगहाउस, रप्चर पैनल्स।
  • "गुड हाउसकीपिंग" डस्ट एक्युमुलेशन को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है — इनर्ट-गैस सप्रेशन सिस्टम भी उपयोगी है।

डस्ट कंट्रोल के लिए सिफारिशें

  • डस्ट कलेक्शन सिस्टम व फिल्टर का इस्तेमाल करें; डस्ट एक्युमुलेशन को कम करने वाली सतहें उपयोग करें।
  • छुपी हुई डस्ट रेसिड्यू की नियमित जांच व सफाई करें; बिना डस्ट क्लाउड बनाए साफ करने के तरीके अपनाएँ।
  • हैज़र्डस एरिया से दूर रिलीफ वाल्व लगाएँ; NFPA 654 वेंटिलेशन स्टैंडर्ड और OSHA 29 CFR 1910.94 का पालन करें।
  • स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी, स्मोकिंग, ओपन फ्लेम व स्पार्क को कंट्रोल करें; अप्रोप्रिएट इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट व वायरिंग का इस्तेमाल करें।

13.17 इंसीडेंस एनालिसेस

  • सेफ्टी की इंसीडेंस एनालिसेस उन घटनाओं का अध्ययन है, जिनमें ऑपरेटर एरर, इक्विपमेंट फेल्योर आदि शामिल होते हैं — चाहे नुकसान न भी हुआ हो।
  • ऐसी घटनाओं की एनालिसेस से अनुभव मिलता है और भविष्य के हैज़र्ड्स को रोकने में मदद मिलती है।
  • इंसीडेंस एनालिसेस असेसमेंट में मदद करती हैं और कॉम्प्लेसेंसी (लापरवाही) की भावनाओं पर काबू पाने में सहायक होती हैं।

13.18 टॉक्सिक रिलीज़ से जुड़े हैज़र्ड्स

  • टॉक्सिक गैस या वाष्प के रिलीज़ की संभावना कई प्रकार की हो सकती है — समय की एक निश्चित अवधि में स्पेस को क्रिएट कर सकती है।
  • बिखरे व घुले पदार्थों की सांद्रता उपलब्ध होती है, जो हवा की दिशा में अलग-अलग डिग्री में नुकसान पहुँचा सकती है।
  • कॉन्सन्ट्रेशन के आधार पर IDLH (Immediately Dangerous to Life or Health) व STEL (Short Term Exposure Limit) ज़ोन तय होते हैं — विंड डायरेक्शन में इनकी कॉन्टूर्स बनाई जाती हैं जिससे संभावित नुकसान का अंदाज़ा मिलता है।

13.19-13.21 फ्लेमेबल गैस, बल्क-फायर व हैज़र्ड मैनेजमेंट11

पेज 216-217

13.19 फ्लेमेबल गैस/वेपर रिलीज़ से खतरे

  • फ्लेमेबल गैस और वेपर हवा में फैलकर एक्सप्लोसिव मिश्रण के ज़ोन बनाते हैं — यह समय के साथ बदलता है, लेकिन कन्फाइन्ड या अनकन्फाइन्ड वेपर क्लाउड एक्सप्लोजन दोनों में फ्लैश फायर या पूल फायर से आग लग सकती है।
  • ऐसा जेट या पूल फायर, टैंकों से सटी संपत्ति को नुकसान पहुँचा सकता है, यहाँ तक कि आग टैंक से जुड़े जगहों तक फैल सकती है, जिससे BLEVE (Boiling Liquid Expanding Vapour Explosion) जैसी दुर्घटनाएँ हो सकती हैं।
  • कन्फाइन्ड वेपर क्लाउड एक्सप्लोजन — कन्फाइनमेंट की डिग्री और संरचना (Structure) की मज़बूती पर निर्भर करती है।
  • BLEVE की गंभीरता का पता लगाने के लिए टैंक में मौजूद पदार्थ की मास और ब्लास्ट इफेक्ट व हीट रेडिएशन की वैल्यू का कैलकुलेशन ज़रूरी है।
  • फायरबॉल से होने वाला डैमेज कॉम्प्लेक्स होता है और इसकी सटीक भविष्यवाणी करना संभव नहीं है।

13.20 बल्क-फायर से खतरे

  • ज्वलनशील तरल पदार्थों में लगी आग स्पिल्ड पूल के ऊपर फैल सकती है। अगर टैंक डाइक (Dyke) से घिरा हो, तो डाइक वॉल का साइज़ आग के तापमान और तीव्रता को प्रभावित करता है।
  • टॉक्सिक या फ्लेमेबल गैस/वेपर रिलीज़ के केस में जरूरी कैलकुलेशंस — रिलीज़ रेट, रिलीज़ टाइम, फ्लेमेबल कॉन्सन्ट्रेशन कॉन्टूर्स, टॉक्सिक कॉन्सन्ट्रेशन कॉन्टूर्स, मास व अपर-लोअर एक्सप्लोसिव लिमिट्स।
  • फायरबॉल केस में हीट रेडिएशन के असर के लिए — रिलीज़ रेट, इक्विवैलेंट कॉन्सन्ट्रेशन कॉन्टूर, ब्लास्ट का असर की कैलकुलेशन ज़रूरी है।

13.21 हैज़र्ड मैनेजमेंट

  • हैज़र्ड मैनेजमेंट में जोखिमों की स्टडी की जाती है — उन्हें कैसे पहचानें, कैसे कंट्रोल करें, और परिणामों को कैसे मिटिगेट/असेस करें।
  • टेक्नोलॉजी की डिप्लॉयमेंट, प्रोडक्ट/प्रोसेस डिज़ाइन में हैज़र्ड मैनेजमेंट को शामिल करना — इससे मानव जीवन, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था व समाज को होने वाले नुकसान से बचाव संभव है।
हैज़र्ड मैनेजमेंट फ्लो चार्ट (चित्र 13.1) — 4 मुख्य भाग:
1. हैज़र्ड असेसमेंट — हैज़र्ड पहचानना, प्राथमिकता तय करना, रिस्क का मूल्यांकन
2. कंट्रोल एनालिसिस — टॉलरेबिलिटी जज करना, कंट्रोल के तरीके पहचानना, कॉस्ट
3. स्ट्रेटेजी सिलेक्शन — रिस्क को स्वीकार करना, फैलाना, कम करना या मिटिगेट करना
4. इम्प्लीमेंटेशन एंड इवैल्यूएशन — कंट्रोल इंटरवेंशन लागू करना, आउटपुट स्टडी करना

13.22 स्टोरेज टैंक व पाइपलाइन हैज़र्ड12

पेज 217-219

हैज़र्डस केमिकल्स एंड सब्सटांसेस

  • स्टोरेज हैज़र्ड — नॉर्मल स्टोरेज ऑपरेशंस में टैंक ज़्यादा रिस्क पैदा नहीं करते, जब तक एसिड टैंक व ओवरप्रेशर हैज़र्ड ऑपरेटिंग कंडीशन में मौजूद न हों।
  • मेंटेनेंस ऑपरेशंस के दौरान बाहरी क्षति और स्पिल का जोखिम रहता है — इसलिए तापमान, कंस्ट्रक्शन, इंस्पेक्शन और मेंटेनेंस में अच्छे डिज़ाइन का पालन ज़रूरी है (जैसे API-653 "टैंक इंस्पेक्शन, रिपेयर, ऑल्टरेशन और रिकंस्ट्रक्शन")।
  • लोडिंग लॉसेस: लोडिंग व अनलोडिंग ऑपरेशन में इवैपोरेटिव एमिशन एक प्रमुख कारण हैं। स्टोरेज टैंक में इनकमिंग व आउटगोइंग लिक्विड से वेपर बनते हैं।
  • स्टोरेज टैंक के फेल्योर के कारण: पुराने प्रोडक्ट से बचा वेपर, हैज़र्डस (टॉक्सिक/फ्लेमेबल) सब्सटेंस की मौजूदगी, वेक्यूम की स्थिति में टैंक कोलैप्स होना, बॉटम फेल्योर, शेल फेल्योर।
  • इग्नाइटेबल वेपर का बिल्ड-अप स्टोरेज टैंक की छत के अंदर हो सकता है (Flanging), जो मेंटेनेंस के दौरान विस्फोट का कारण बन सकता है।

पाइपलाइन फेल्योर मोड्स (Failure Modes)

फेल्योर मोडप्रोबेबल कारण
फ्लेंज/गैस्केट फेल्योरइंस्टॉलेशन में गलत ध्यान न देना
वेल्ड फेल्योरवेल्डिंग की खराब क्वालिटी
पाइप में कोरोज़न/इरोज़नफैब्रिकेशन में पाइप में स्ट्रेस रहना
ओवर-प्रेशराइज़ेशनवाल्व रेगुलेट न होना
डिफिशिएंट इंस्टॉलेशनडिज़ाइन व इंस्टॉलेशन में गलती
वाल्व से रिसावग्लैंड, बॉनेट, स्पिंडल की खराबी
इंस्ट्रूमेंट फेल्योरप्रोसेस पैरामीटर के लिए मल्टी इंस्ट्रूमेंट का उपयोग
प्रोटेक्टिव सिस्टम फेल्योरSRV, बर्स्टिंग डिस्क का चयन/मेंटेनेंस सही न होना
ऑपरेशनल एफर्टऑपरेटिंग पैरामीटर परमिसिबल लिमिट से बाहर

नैचुरल गैस ट्रांसपोर्टेशन रिस्क

  • नैचुरल गैस (मुख्यतः मीथेन प्लस हाइड्रोकार्बन) — अगर इग्निशन हो तो विस्फोट का सोर्स बन सकती है, पर खुद अपने आप विस्फोट नहीं करती।
  • नैचुरल गैस हवा से हल्की होती है, इसलिए विंडी कंडीशन में बिना कंफाइनमेंट के आसानी से फैल जाती है और घनत्व कम होने की वजह से फायर रिस्क को घटाती है।
  • यह नॉन-टॉक्सिक व कलरलेस होती है — इसलिए हेल्थ व सेफ्टी के लिए पर्याप्त हवा (4-15% ऑक्सीजन) होनी ज़रूरी है, वरना दम घुट सकता है।

क्लोरीन गैस — गुण, खतरे व हैंडलिंग13

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  • क्लोरीन पानी में घुलनशील है — क्लोरीन वाटर, क्लोरीन, हाइड्रोक्लोरिक एसिड व हाइपोक्लोरस एसिड का मिश्रण है।
  • क्लोरीन वाटर में मज़बूत ऑक्सीडाइज़िंग गुण होते हैं, जिससे यह पानी में मौजूद ऑक्सीजन को घटा देता है, जिससे अनस्टेबल हाइपोक्लोरस एसिड बनता है, जो डीकंपोज़ होकर रेयर गैसों (जीनॉन, नाइट्रोजन) को छोड़ता है।
  • क्लोरीन हैलोजन फैमिली के ग्रुप VIIA में आता है, और लगभग सभी तत्वों के साथ रासायनिक रूप से मिल जाता है।

क्लोरीन एक्सपोज़र के प्रभाव (सारणी)

सांद्रता (ppm)असर
0.2-0.4थ्रेशहोल्ड ऑडर परसेप्शन — गंध पता चलती है
1-3माइल्ड — श्लेष्मा झिल्ली में हल्की इरिटेशन
5-15मॉडरेट — चेस्ट पेन, वोमिटिंग, कफ
30इमिजिएट चेस्ट पेन
40-60टॉक्सिक न्यूमोनाइटिस, पल्मोनरी ओडेमा
43030 मिनट में जानलेवा
1000कुछ ही मिनटों में जानलेवा

क्लोरीन हैंडलिंग और डोज़िंग सिस्टम

  • क्लोरीन क्लाउड कंटेनमेंट से लीकेज, पाइप रप्चर, वेसल रप्चर, ओवरप्रेशर से लिक्विड क्लोरीन का लॉस, या मिक्सिंग-ट्रांसफर के दौरान इवैपोरेशन से बन सकता है।
  • ओवरहेड क्रेन, लीकेज कॉन्टेनमेंट सिस्टम, कॉज़-कॉन्सीक्वेंस डायग्राम व फेल्योर मोड्स की सिस्टेमेटिक आइडेंटिफिकेशन असेसमेंट में उपयोगी होते हैं।
  • ACGIH के अनुसार — TWA (8 घंटे) 0.5 ppm और STEL (15 मिनट) 1 ppm तय किया गया है।
  • चलती हुई क्रेन, लीकेज पॉइंट्स को कॉपर ट्यूब/हाइड्रोलिक गॉज से जोड़ने के लिए सीमलेस पाइप का उपयोग करें।

हाइड्रोजन गैस व क्लोरीन एक्सीडेंट सिनेरियो14

पेज 221

हाइड्रोजन (H₂) के गुण व खतरे

  • हाइड्रोजन कलरलेस, ओडरलेस, बेहद फ्लेमेबल गैस है। मॉलिक्यूल्स ऑर्थो-हाइड्रोजन और पैरा-हाइड्रोजन के इक्विलिब्रियम मिश्रण से बनी हैं — जिनके फिज़िकल गुण थोड़े अलग होते हैं पर केमिकल रूप से एक जैसी होती हैं।
  • हवा में हाइड्रोजन की फ्लेमेबल रेंज बहुत विस्तृत है — 4.0% से 75.0% तक — जो इसे बहुत तेज़ी से इग्नाइट होने लायक बनाती है।
  • हाइड्रोजन डिफ्यूज़न कोएफिशिएंट काफी हाई है, जिससे लीक होने पर यह तेज़ी से फैलती है व डिटेक्ट करना मुश्किल होता है — क्योंकि यह कलरलेस, ओडरलेस फ्लेम में जलती है, जो दिन के उजाले में मुश्किल से दिखती है।
  • हाइड्रोजन लीक — प्रेशर वेसल्स, पाइपिंग, कनेक्टिंग ज्वाइंट, वाल्व, फ्लैंज, ग्लैंड पैकिंग से हो सकती है।

हाइड्रोजन हैंडलिंग व स्टोरेज — सेफ वर्क प्रैक्टिस

  • सिस्टम को सेफ तरीके से पर्ज करें; एडिक्वेट वेंटिलेशन का इस्तेमाल करें।
  • हाइड्रोजन को ऑक्सीजन, क्लोरीन व अन्य ऑक्सीडाइज़र सिलिंडरों से अलग स्टोर करें — कम से कम 6.1 मीटर की दूरी पर।
  • स्टोर तापमान 52°C से ज़्यादा नहीं होना चाहिए; इग्निशन के सोर्स नहीं होने चाहिए।
  • सही रेगुलेटर कनेक्टर का इस्तेमाल करें — गलत कनेक्टर इनऐप्रोप्रिएट गैस सिलिंडर पर इंस्टॉल हो सकता है।
  • लीक टेस्ट करें; अगर लीक हो तो सिलिंडर वाल्व बंद करें।

हाइड्रोजन लीक डिटेक्शन सिस्टम

  • डिटेक्शन गोल — हाइड्रोजन के +/- 0.25% वॉल्यूम की सांद्रता को डिटेक्ट करना, 1 सेकंड के भीतर रिस्पॉन्स टाइम के साथ।
  • विज़ुअल अलार्म तब देना चाहिए जब हाइड्रोजन की मैक्सिमम एक्सेप्टेबल कंडीशन पार हो जाए।
  • हाइड्रोजन लीक की सोर्स लोकेट करने के लिए सिस्टम को फैसिलिटी में हर जगह होना चाहिए।

केमिकल एक्सीडेंट सिनेरियोज़ (क्लोरीन)

  • टॉक्सिक गैस रिलीज़ की मुख्य कैटेगरी — वेसल, प्रोसेस इक्विपमेंट या ट्रांसपोर्ट फेल्योर, या स्क्रबर उपकरण फेल्योर से कंटेनमेंट का लॉस होना।
  • क्लोरीन स्टोरेज एरिया में क्लोरीन कॉन्सन्ट्रेशन के बिल्ड-अप की संभावनाएँ 25 ppm से ऊपर हो सकती हैं — इसलिए एरिया को इवैक्युएट करना ज़रूरी हो जाता है।
  • अगर लोगों की जान को खतरा हो, तो PPE और बैक-अप उपकरण के बिना अप्रोच करना मना है।

टन कंटेनर — Do's and Don'ts15

पेज 229-230

करने योग्य बातें (Do's)

  • सिलिंडर अनलोड करने के लिए चेन पुली, क्रेन का इस्तेमाल करें।
  • भरा हुआ सिलिंडर उचित स्टोरेज शेड के नीचे रखें, सीधे धूप में एक्सपोज़ न करें।
  • खाली सिलिंडर हमेशा साफ रखें, सीमेंटेड और उठे हुए फ्लोर पर रखें।
  • क्लोरीन सिलिंडर से निकालने के लिए सीमलेस कॉपर पाइप का इस्तेमाल करें।
  • प्रॉपर की का इस्तेमाल करें; सेकंडरी आइसोलेटिंग वाल्व और प्रेशर गॉज का इस्तेमाल करें।
  • अमोनिया टॉर्च से लीकेज की जाँच करें।
  • सिलिंडर फर्स्ट-कम-फर्स्ट-सर्व बेसिस पर इस्तेमाल करें; विंड डायरेक्शन इंडिकेटर सही जगह लगाएँ।
  • इमरजेंसी के लिए एयर ब्रीदर व गैस मास्क तैयार रखें; कॉस्टिक सोल्यूशन सम्प भी बना कर रखें।

न करने योग्य बातें (Don'ts)

  • सिलिंडर फ्लोर पर या Type Directly अनलोड न करें।
  • अनट्रेंड व्यक्ति को सिलिंडर वाल्व ऑपरेट न करने दें।
  • लीकी पॉइंट्स पर पानी का स्प्रे न करें।
  • पाइप चेकिंग के बिना ऑपरेशन शुरू न करें।
  • बेबी सिलिंडर 3 महीने से ज़्यादा इस्तेमाल न करें।
  • वाल्व को बार-बार ऑपरेट न करें; कंटेनर को अत्यधिक गर्मी में एक्सपोज़ न करें।
  • कंटेनर को फ्यूज़िबल प्लग के साथ छेड़छाड़ न करें; 2 टन के कैपेसिटी से ज़्यादा में कंटेनर न मिलाएँ।

13.23 MSDS — मटेरियल सेफ्टी डेटा शीट16

पेज 223, 226-227
  • MSDS का मुख्य लक्ष्य — किसी भी काम/टास्क से जुड़े जोखिमों का सही आकलन व मैनेजमेंट करना है।
  • MSDS केमिकल या मिश्रण की सामग्री का सारांश देती है — मेल्टिंग पॉइंट, बॉयलिंग पॉइंट, फ्लैश पॉइंट, टॉक्सिसिटी, प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट, स्पिल/लीक प्रोसीजर आदि की जानकारी।
  • MSDS केवल हेल्थ, सेफ्टी व टॉक्सिकोलॉजिकल इंफॉर्मेशन देती है, ट्रेड नेम के प्रिस्क्रिप्शन नहीं — इसलिए फॉर्मेट स्टैंडर्ड नहीं है, पर 16 सेक्शन में जानकारी होनी चाहिए।

MSDS के 16 सेक्शन (मुख्य बिंदु)

  1. आइडेंटिफिकेशन: केमिकल नाम, ट्रेड नेम, मैन्युफैक्चरर का नाम-पता, इमरजेंसी फोन नंबर।
  2. हैज़र्डस इंग्रीडिएंट्स: हैज़र्डस कंपोनेंट्स की पहचान, TLV/ACGIH व PEL/OSHA दोनों की जानकारी।
  3. हैज़र्ड आइडेंटिफिकेशन: फिज़िकल व एनवायरनमेंटल हैज़र्ड, फर्स्ट एड प्रोसीज़र।
  4. फर्स्ट एड मेज़र्स: स्किन, इनहेलेशन, इंजेशन एक्सपोज़र में क्या करें।
  5. फायर-फाइटिंग मेज़र्स: फ्लैश पॉइंट, लोअर/अपर एक्सप्लोसिव लिमिट, एक्सटिंग्विशिंग मीडिया, PPE।
  6. एक्सीडेंटल रिलीज़ मेज़र्स: स्पिल की स्थिति में सफाई व कंटेनमेंट प्रोसीजर।
  7. हैंडलिंग एंड स्टोरेज: स्टोरेज टेम्परेचर रेंज।
  8. एक्सपोज़र कंट्रोल्स/PPE: इंजीनियरिंग कंट्रोल, रेस्पिरेटरी, स्किन व आई प्रोटेक्शन।
  9. फिज़िकल एंड केमिकल प्रॉपर्टीज़: कलर, ओडर, pH।
  10. स्टेबिलिटी एंड रिएक्टिविटी
  11. टॉक्सिकोलॉजिकल इंफॉर्मेशन
  12. इकोटॉक्सिकोलॉजिकल इंफॉर्मेशन
  13. डिस्पोज़ल कंसीडरेशन्स: डिस्पोज़ल, इनसिनरेशन के लिए गाइडेंस।
  14. ट्रांसपोर्ट इंफॉर्मेशन: पैकिंग ग्रुप, हैज़र्ड क्लास।
  15. रेगुलेटरी इंफॉर्मेशन: वर्कप्लेस क्लासिफिकेशन।
  16. अदर इंफॉर्मेशन: हैज़र्ड रेटिंग, इश्यू डेट, रिवाइज़्ड डेट।

MSDS का फ्यूचर व एंप्लॉयर की भूमिका

  • MSDS हज़ार्ड प्रिवेंशन के लिए इंटरनेशनली और भी इंटीग्रेट हो रही है — ग्लोबल कॉमर्स इश्यूज़ इसमें बड़ी भूमिका निभाएँगे।
  • एंप्लॉयर की भूमिका: प्रोडक्ट का सेफ्टी हैज़र्ड, मैन्युफैक्चरर द्वारा तय होता है। विशेष कंडीशन का रिस्क, एंप्लॉयर को वर्कप्लेस सेटिंग में तय करना है, और उसे कर्मचारियों तक पहुंचाना है।

हैज़र्ड मिटिगेशन फेज़ व JHA

  • हैज़र्ड मिटिगेशन — हैज़र्ड रिकग्निशन, आइडेंटिफिकेशन के बाद आता है। इवैल्यूएशन फेज़ में MSDS एनालिसिस और यह तय करना शामिल है कि कौन-कौन से एक्सपोज़र रिस्क मौजूद हैं।
  • JHA (Job Hazard Analysis): केमिकल हैज़र्ड से जुड़े एक्सपोज़र, रिस्क का मूल्यांकन करने की तकनीक है। इसका मकसद है — यूज़र को हैज़र्ड्स से कैसे बचाएँ, इसके लिए कदम तय करना।
  • हैज़र्ड आइडेंटिफिकेशन, स्टेप्स की पहचान करना, एप्रोप्रिएट प्रोटेक्टिव कंट्रोल्स जैसे इंजीनियरिंग कंट्रोल्स को हर स्टेप से जोड़ना — यह जॉब हैज़र्ड एनालिसिस के महत्वपूर्ण भाग हैं।

13.24 रिस्क रिडक्शन स्ट्रेटेजीज़17

पेज 227

शॉर्ट-टर्म उपाय

  1. फायर प्रोटेक्शन स्ट्रेटेजी में इम्प्रूव्ड वॉटर स्प्रे कवरेज शामिल करें — फ्लैंज, वाल्व, फिटिंग्स व लिक्विड पाइपिंग जो स्फीयर/टैंक के नीचे से जुड़े हों।
  2. रिमोटली एक्चुएटेड कंट्रोल वाल्व की इंस्टॉलेशन को ध्यान में रखते हुए, मौजूदा वॉटर स्प्रे सिस्टम के इस्तेमाल को ऑप्टिमाइज़ करने की स्ट्रेटेजी अपनाएँ।

लॉन्ग-टर्म उपाय

  1. सैंपलिंग व वॉटर ड्रा-ऑफ ऑपरेशंस के लिए ह्यूमन एरर फैक्टर पर विचार करते हुए रिस्क रिडक्शन शामिल करें।
  2. टैंक के बॉटम में एक्सीडेंटल रिलीज़ होने पर वॉटर फ्लडिंग कनेक्शन का प्रावधान रखें, जो चेमिकल को आइसोलेट कर सके।

स्टोरेज टैंक्स के लिए ज़रूरी कदम

  • टैंकों के मैन्युफैक्चरर्स की पहचान करें; टैंक निर्माता कंपनी को कॉन्टैक्ट में रखें।
  • प्रॉपर्टी पर मौजूद टैंकों की पहचान करें, अलर्ट में बताई कंपनियों से टैंक बिल्ट होने की जानकारी लें।
  • लीक, कोरोज़न या किसी भी विसंगति के लिए क्लोज़ एक्सटर्नल इंस्पेक्शन करें।
  • डस्ट या क्लॉगिंग जैसे फॉरेन मटेरियल के लिए वेंट्स की जाँच करें।
  • मेंटेनेंस के दौरान बचा हुआ मटेरियल चेक व ड्रेन करें।
  • क्वालिफाइड इंस्पेक्शन एजेंसी द्वारा सालाना इंटरनल व एक्सटर्नल इवैल्यूएशन की व्यवस्था करें।
  • कर्मचारियों को टैंक फेल्योर से जुड़े हैज़र्ड की जानकारी दें; स्टोरेज टैंक को ओवरफिल न करें।
  • पहचानी गई समस्याओं की रिपेयर/रिप्लेसमेंट पर फॉलो-अप करें; बेकार इंस्पेक्शन न होने दें।

केमिकल/फिज़िकल प्रॉपर्टीज़ व स्टेबिलिटी18

पेज 224-225

फिज़िकल एंड केमिकल प्रॉपर्टीज़

  • कलर: केमिकल की फिज़िकल अपीयरेंस।
  • ओडर कैरेक्टरिस्टिक: प्रोडक्ट की गंध का विवरण।
  • pH: 0 से 2 और 12 से 14 वैल्यू आमतौर पर स्किन व आँखों के लिए कोरोसिव मानी जाती हैं।
  • स्पेसिफिक ग्रेविटी (Water=1): केमिकल के वज़न की समान वॉल्यूम के पानी के वज़न से तुलना।
  • वेपर डेंसिटी (Air=1): केमिकल के वेपर वेट की हवा से तुलना — 1 से कम वज़न वाले वेपर ऊपर उठते हैं, ज़्यादा वेट वाले नीचे बैठकर कंसंट्रेट होते हैं।
  • वेपर प्रेशर: केमिकल के गैसीय रूप में बदलने की पोटेंशियल क्षमता का माप।
  • बॉयलिंग पॉइंट: जिस तापमान पर लिक्विड, गैसीय रूप में बदलता है।
  • सॉल्युबिलिटी इन वाटर: 100 ppm से कम वैल्यू वाले मटेरियल अघुलनशील (Insoluble) माने जाते हैं, जबकि 1000 ppm से ज़्यादा वैल्यू वाले हाईली सॉल्युबल माने जाते हैं।

स्टेबिलिटी एंड रिएक्टिविटी

  • केमिकल स्टेबिलिटी: नॉर्मल टेम्परेचर व स्टोरेज कंडीशन में स्टेबिलिटी की जानकारी — जैसे हैज़र्डस गैसों का इवोल्यूशन, हीट प्रोडक्शन आदि।
  • कंडीशंस टु अवॉइड: जिन परिस्थितियों में प्रोडक्ट हैज़र्डस बन सकता है।
  • केमिकल इनकंपैटिबिलिटी: जिन मटेरियलों के साथ यह रिएक्ट कर सकता है।
  • हैज़र्डस डीकंपोज़िशन प्रोडक्ट्स: बाय-प्रोडक्ट्स की लिस्ट जो कुछ कंडीशन में बनते हैं।

इकोटॉक्सिकोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन

  • इकोटॉक्सिसिटी: केमिकल एक्सपोज़र से इंडिकेटर स्पीशीज़ पर प्रभाव।
  • एनवायरनमेंटल फेट: केमिकल के ब्रेकडाउन प्रोसेसेस — फोटोलिसिस (सूरज की रोशनी में) व हाइड्रोलिसिस (पानी में)।

टॉक्सिकोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन — एक्यूट व क्रॉनिक डेटा19

पेज 225

एक्यूट डेटा (Acute Data)

  • आई इरिटेशन: आँखों में शॉर्ट-टर्म एक्सपोज़र के परिणाम।
  • स्किन इरिटेशन: त्वचा पर शॉर्ट-टर्म एक्सपोज़र के परिणाम।
  • ओरल LD50: मुँह से निगलने पर शॉर्ट-टर्म टॉक्सिसिटी — जो डोज़ 50% टेस्ट एनिमल्स को मार दे।
  • डर्मल LD50: त्वचा से एब्ज़ॉर्प्शन से टॉक्सिसिटी।
  • इनहेलेशन LC50: डस्ट, फ्यूम या मिस्ट से टॉक्सिसिटी — जो कॉन्सन्ट्रेशन 50% टेस्ट एनिमल्स को मार दे।
  • स्किन सेंसिटाइज़ेशन: बार-बार एक्सपोज़र के बाद टिशू पर एलर्जिक रिएक्शन।

क्रॉनिक डेटा (Chronic Data)

  • क्रॉनिक टॉक्सिसिटी स्टडीज़: शॉर्ट टर्म रिपीट एक्सपोज़र से जुड़े प्रतिकूल हेल्थ इफेक्ट्स।
  • म्यूटाजेनिसिटी डेटा: लिविंग सेल में केमिकल पदार्थ के एक्सपोज़र से जीनेटिक बदलाव के असर।
  • रिप्रोडक्टिव डेटा: पैदा होने वाले बच्चे में जन्म दोष पैदा करने की क्षमता से जुड़े इफेक्ट्स।
  • कार्सिनोजेनिसिटी डेटा: कैंसर पैदा करने की क्षमता।

इकोटॉक्सिकोलॉजिकल इन्फॉर्मेशन

रिलीज़ होने पर मटेरियल की इको-एक्यूट टॉक्सिसिटी — इंडिकेटर स्पीशीज़ बताई जाती हैं जिन्हें टॉक्सिसिटी टेस्टिंग में इस्तेमाल किया गया था।

हल किए गए प्रश्न (Solved Questions)Q

पेज 231-233

प्रश्न 13.1: थ्रेशहोल्ड लिमिट वैल्यू (TLV) की 3 कैटेगरी क्या हैं?

उत्तर: TLV वे नंबर हैं जो सुरक्षित या टॉलरेबल एक्सपोज़र लेवल दिखाते हैं, जिसे PEL (Permissible Exposure Levels), REL (Recommended Exposure Levels), और MAC (Maximum Allowable Concentrations) भी कहा जाता है। 3 कैटेगरी हैं —

  1. TLV-TWA (Time Weighted Average): 8 घंटे या 40 घंटे प्रति सप्ताह के लिए, बिना किसी बुरे असर के एक्सपोज़र का समय-भारित औसत।
  2. TLV-STEL (Short-term Exposure Limit): 15 मिनट तक लगातार, दिन में 4 बार से ज़्यादा नहीं, बिना असर।
  3. TLV-C (Ceiling): यह सीमा है जिसे किसी भी हालत में पार नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 13.2: हैज़र्ड्स को कैसे मॉनिटर किया जाता है?

उत्तर: हैज़र्ड मॉनिटरिंग ज़रूरी है ताकि पोटेंशियल हेल्थ हैज़र्ड को पहचाना जा सके और उसका आकलन किया जा सके। 3 बेसिक इंडस्ट्रियल हाईजीन सैंपल कलेक्शन तकनीक हैं —

  1. पर्सनल सैंपलिंग: किसी खास कर्मचारी के एक्सपोज़र का मापन। डिवाइस डोसीमीटर पोर्टल में शरीर के जितना करीब हो सके, रखा जाता है।
  2. ब्रीदिंग ज़ोन: जहाँ कर्मचारी सबसे ज़्यादा सांस लेता है, वहाँ सैंपलिंग डिवाइस रखी जाती है।
  3. जनरल एरिया: फिक्स्ड लोकेशन पर सैंपलिंग डिवाइस रखी जाती है — जिसे एनवायरनमेंटल सैंपलिंग भी कहते हैं।

प्रश्न 13.3: वर्कप्लेस में हैज़र्ड्स को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है?

उत्तर: हैज़र्ड को इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज़ में कंट्रोल किया जा सकता है व वर्क एनवायरनमेंट प्रमोशन प्रोग्राम को रिवैलिडेट किया जा सकता है — सब्सटीट्यूशन विद लेस हार्मफुल मटेरियल, प्रोसेस चेंज।

प्रश्न 13.4: गैस सिलिंडर हैंडलिंग में हैज़र्ड्स क्या हैं?

उत्तर:

  1. गैस अंडर प्रेशर से हैज़र्ड — जैसे रप्चर व एक्सप्लोजन।
  2. फ्लेमेबल या कंबस्शन-सपोर्टिंग गैसों से हैज़र्ड — इग्निशन या एक्सप्लोजन।
  3. टॉक्सिक या एस्फिक्सिएंट गैसों से हैज़र्ड — पॉइज़निंग या एस्फिक्सिएशन।
  4. बहुत हाई या लो टेम्परेचर की गैसों से हैज़र्ड — फ्रॉस्टबाइट या बर्न।
  5. हैवी सिलिंडर हैंडलिंग/ट्रांसपोर्टिंग से हैज़र्ड — क्रश इंजरी।
  6. इंप्रोपर गैस के इस्तेमाल से हैज़र्ड।

प्रश्न 13.5: गैस सिलिंडर हैंडल करते समय ज़रूरी सावधानियाँ क्या हैं?

उत्तर: सिलिंडरों को हैंडल करते समय एडिक्वेट केयर लेना चाहिए ताकि वे ड्रॉप न हों या हिंसक तरीके से एक-दूसरे से न टकराएँ। हॉरिज़ॉन्टल पोज़िशन में इस्तेमाल के दौरान सिलिंडरों को प्रॉपर्ली सुरक्षित किया जाना चाहिए ताकि वे रोल न कर सकें। ट्रॉलियों व क्रेडल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

प्रश्न 13.6: क्लोरीन रिलीज़ के दौरान क्या कदम उठाए जाने चाहिए?

उत्तर: कंटेनर या फिक्स्ड फैसिलिटी के पास पोटेंशियल रूप से एक्सपोज़्ड लोगों को हैज़र्ड एरिया से इवैक्युएट या शेल्टर किया जाना चाहिए। रिलीज़ की दिशा में विंड, बिल्डिंग के अंदर शेल्टर लेते समय दरवाज़े-खिड़कियां बंद करें, एयर कंडीशनर बंद कर दें।

रेफरेंस टेबल — कुछ खतरनाक रसायनR

पेज 222-223

कुछ आम इस्तेमाल होने वाले रसायनों की स्टेबिलिटी व टॉक्सिकोलॉजी की जानकारी:

सल्फ्यूरिक एसिड

  • स्टेबिलिटी: बहुत एक्सोथर्मिकली रिएक्ट करता है, ऑक्सीडाइज़िंग एजेंट के रूप में काम करता है, धातु के साथ रिएक्ट कर हाइड्रोजन गैस बनाता है (फ्लेमेबल/एक्सप्लोसिव हैज़र्ड)।
  • टॉक्सिकोलॉजी: एक्स्ट्रीमली कोरोसिव, हाइली टॉक्सिक। इनहेलेशन, स्किन कॉन्टैक्ट, इंजेशन से सीरियस बर्न।

क्लोरीन

  • स्टेबिलिटी: रिड्यूसिंग एजेंट के साथ इनकंपैटिबल; मेटल के साथ रिएक्ट करके हाइड्रोजन बनाता है (फ्लेमेबल हैज़र्ड)।
  • टॉक्सिकोलॉजी: इनहेलेशन, इंजेशन व स्किन कॉन्टैक्ट से टॉक्सिक व हार्मफुल — सीरियस लंग डैमेज कर सकता है।

मिथाइल एथिल कीटोन (MEK)

  • स्टेबिलिटी: कंबस्टिबल, स्ट्रॉन्ग ऑक्सीडाइज़िंग एजेंट के साथ इनकंपैटिबल, स्ट्रॉन्ग एसिड के साथ रिएक्ट कर एक्सप्लोज़िव मिश्रण बना सकता है।
  • टॉक्सिकोलॉजी: निगलने पर हार्मफुल, इनहेलेशन से इरिटेंट।

अमोनिया

  • स्टेबिलिटी: हाइग्रोस्कोपिक, फ्लेमेबल, कई मटेरियल जैसे हैलोजन, क्लोरीन मोनोऑक्साइड, कैल्शियम आदि के साथ इनकंपैटिबल।
  • टॉक्सिकोलॉजी: टॉक्सिक बाय इनहेलेशन, स्किन कॉन्टैक्ट से डेंजरस, इरिटेंट। रेस्पिरेटरी OEL (8hr TWA) 25 ppm, ऐक्यूट रिस्क लेवल 0.3 ppm।

ट्राई-सोडियम फॉस्फेट

  • स्टेबिलिटी: ड्राई रखें, स्ट्रॉन्ग एसिड के साथ इनकंपैटिबल।
  • टॉक्सिकोलॉजी: कोरोसिव — बर्न व आई कॉन्टैक्ट से नुकसान। PPE में सेफ्टी ग्लासेस शामिल करें।

सोडियम हाइड्रोऑक्साइड

  • स्टेबिलिटी: वाइड वैरायटी ऑफ मटेरियल के साथ इनकंपैटिबल, हवा से नमी सोखता है।
  • टॉक्सिकोलॉजी: वेरी कोरोसिव — सीरियस बर्न, लिक्विड से स्किन और आँखों को गंभीर नुकसान।

बल्क एसिड (30% HCL)

  • स्टेबिलिटी: मोस्ट कॉमन मेटल के साथ इनकंपैटिबल, वॉटर के साथ हीट लगती है।
  • टॉक्सिकोलॉजी: एक्स्ट्रीमली कोरोसिव, हाइली टॉक्सिक, वेपर से सीरियस इंजरी। TLV 5 ppm। PPE में सेफ्टी ग्लासेस, गॉगल्स, फेस मास्क, ग्लव्स ज़रूरी।

❓ अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

  1. इंडस्ट्रियल केमिकल पदार्थों का उल्लेख करें जो केमिकल हैज़र्ड पैदा करते हैं।
  2. केमिकल्स के सामान्य हानिकारक प्रभाव क्या हैं?
  3. इंडस्ट्रियल टॉक्सिकोलॉजी पर चर्चा करें।
  4. टॉक्सिक मटेरियल के प्रभाव को प्रभावित करने वाले कारकों की चर्चा करें।
  5. हैज़र्डस पदार्थों को हैंडल करने वाली इंडस्ट्री में लिए जाने वाले नियंत्रण उपायों का उल्लेख करें।
  6. संक्षिप्त टिप्पणी लिखें — (a) डस्ट एक्सप्लोजन (b) इंसीडेंस एनालिसिस (c) वर्कप्लेस मैनेजमेंट (d) कॉन्सन्ट्रेशन की यूनिट्स।
  7. क्लोरीन गैस सिलिंडर व टन कंटेनर हैंडल करते समय Do's and Don'ts बताएँ।
  8. MSDS क्या है और इसमें कौन-कौन से सेक्शन होते हैं?
  9. स्टोरेज टैंक के लिए रिस्क रिडक्शन स्ट्रेटेजीज़ बताएँ।
  10. TLV की 3 कैटेगरी और उनकी परिभाषा लिखें।
⚗️ Notes prepared for easy Hindi-medium exam revision — Chapter 13: Chemical Hazards (Page 205–233)

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