सुरक्षा के कानूनी पहलू
(Legal Aspects of Safety — Factories Act 1948)
पूरी किताब के पेज 72 से 80 तक की जानकारी — आसान हिन्दी में, Point-wise और Bihar Board स्टूडेंट्स के लिए बिल्कुल सरल भाषा में।
👉 इस पोस्ट में फैक्ट्रीज एक्ट 1948 से जुड़े सभी नियम — स्वास्थ्य, सफाई, हवादारी, प्लांट-मशीनरी की सुरक्षा, होइस्ट-लिफ्ट, प्रेशर प्लांट, आग से बचाव, दुर्घटना रिपोर्टिंग, अन्य कानून और नेशनल पॉलिसी — सभी को बहुत ही आसान और सरल हिंदी में समझाया गया है। हर टॉपिक को छोटे-छोटे पॉइंट्स में लिखा गया है ताकि परीक्षा के लिए याद करना आसान हो।
📑 इस नोट्स में क्या-क्या है
- 6.1 फैक्ट्रीज एक्ट 1948
- 6.2 निरीक्षण व सर्टिफाइंग सर्जन
- 6.3 स्वास्थ्य और वातावरण
- 6.3.6 - 6.3.9 भीड़, लाइट, पानी, लैट्रिन
- 6.4 प्लांट व मशीनरी सुरक्षा
- 6.4.3 - 6.4.6 यंग वर्कर्स, होइस्ट-लिफ्ट
- 6.5.7 - 6.5.9 लिफ्टिंग मशीन व प्रेशर प्लांट
- 6.5.10 - 6.5.14 फ्लोर, वजन सीमा, आंखें
- 6.5.15 - 6.5.18 कन्फाइंड स्पेस, आग सुरक्षा
- 6.6 दुर्घटना रिपोर्टिंग
- 6.7 अन्य लागू कानून
- 6.8 नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क
- हल किया गया प्रश्न व अभ्यास प्रश्न
6.1 फैक्ट्रीज एक्ट, 19481
- फैक्ट्रीज एक्ट 1948 एक केंद्रीय कानून (Central Law) है जो फैक्ट्री में सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण (welfare) को नियंत्रित करता है।
- यह एक्ट सभी फैक्ट्रियों पर लागू होता है — 'मैनुफैक्चरिंग प्रोसेस' के तहत काम करने वाली फैक्ट्री, चाहे पावर की मदद से हो या बिना पावर के।
- यह एक्ट लागू होता है:
- (i) जहां पावर की मदद से 10 या ज्यादा वर्कर काम करते हैं, या
- (ii) जहां बिना पावर के 20 या ज्यादा वर्कर काम करते हैं।
6.2 निरीक्षण और सर्टिफाइंग सर्जन (Inspection and Certifying Surgeons)2
- फैक्ट्रीज एक्ट और नियमों को लागू करने का काम हर राज्य में चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज करते हैं, जिनकी मदद डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और अन्य इंस्पेक्टर्स करते हैं।
- कुछ खास मामलों में हेल्थ ऑफिसर की सहायता भी ली जाती है, जिन्हें राज्य सरकार 'एडिशनल इंस्पेक्टर' के रूप में नोटिफाई करती है।
- 18 साल से कम उम्र के सभी वर्कर्स को नौकरी पर रखने से पहले सर्टिफाइंग सर्जन द्वारा फिट सर्टिफिकेट लेना जरूरी है।
- फैक्ट्रीज रूल्स में यह भी बताया गया है कि कुछ विशेष ऑपरेशन में काम करने वाले वर्कर्स की समय-समय पर मेडिकल जांच होनी चाहिए, जिसे 'सर्टिफाइंग सर्जन' अपडेट करते रहते हैं।
- 18 साल से कम उम्र के सभी नए कर्मचारियों की जांच सर्टिफाइंग सर्जन द्वारा की जाती है ताकि पता चले कि उन्हें काम करने से स्वास्थ्य को कोई खतरा तो नहीं होगा।
6.3 स्वास्थ्य और वातावरण (Health and Environment)3
6.3.1 स्वास्थ्य और सफाई (Health and Cleanliness) — सेक्शन 11
- हर फैक्ट्री को गंदगी और बदबू से मुक्त (effluvia से free) रखना चाहिए।
- हर दीवार, फर्श, छत, बंटवारे (partitions) की सफाई हफ्ते में एक बार झाड़ू लगाकर या सही तरीके से करनी चाहिए।
- दीवार, छत और अन्य हिस्सों की सफेदी/पेंट भी समय-समय पर करानी चाहिए।
- सीढ़ियों और उनके किनारों को भी साफ रखा जाना चाहिए।
6.3.2 कचरे का निपटान (Disposal of Wastes) — सेक्शन 13
- फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे और गंदे पानी (effluents) के निपटान की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, जिसे स्थानीय अथॉरिटी से मंजूरी मिली हो।
6.3.3 हवादारी और तापमान (Ventilation and Temperature) — सेक्शन 13
- हर कार्यस्थल (workroom) में अच्छी हवादारी होनी चाहिए ताकि हवा स्वच्छ रहे।
- तापमान इतना उचित (reasonable) होना चाहिए कि कर्मचारियों को आराम मिले।
6.3.4 धूल और धुआं (Dust and Fumes) — सेक्शन 14
- ऐसे प्रोसेस जहां धूल, धुआं या हानिकारक चीजें निकलती हों, वहां उसे सांस के जरिए अंदर जाने या स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने से रोकने के प्रभावी उपाय अपनाने चाहिए।
6.3.5 आर्टिफिशियल ह्यूमिडिफिकेशन (Artificial Humidification) — सेक्शन 15
- जहां आर्टिफिशियल तरीके से नमी बढ़ाई जाती है, वहां तापमान और आराम की स्थिति के लिए नियम बनाए गए हैं ताकि कर्मचारियों को कोई नुकसान न हो।
6.3.6 - 6.3.9 भीड़, लाइटिंग, पानी और लैट्रिन4
6.3.6 अत्यधिक भीड़ (Over Crowding) — सेक्शन 16
- नई फैक्ट्रियों में हर वर्कर के लिए न्यूनतम 50 क्यूबिक मीटर जगह होनी जरूरी है।
- अत्यधिक भीड़ से बचाव के लिए हाइग्रोमीटर और गीले-सूखे बल्ब थर्मामीटर की स्थापना और रीडिंग रखने के भी नियम बनाए गए हैं।
6.3.7 लाइटिंग (Lighting) — सेक्शन 17
- वर्कर्स को अपना काम आराम से करने और आते-जाते समय जितनी भी रोशनी चाहिए, उतनी उचित और पर्याप्त लाइटिंग होनी चाहिए।
- ऐसी लाइटिंग से चकाचौंध (glare) और परछाई (shadows) न बने, जिससे वर्कर्स को आंखों में तकलीफ या दुर्घटना का खतरा हो।
- रोशनी का न्यूनतम स्तर:
जहां वर्कर नियमित रूप से काम करते हैं: 30 LUX (90 cms ऊपर फ्लोर लेवल से) अन्य जगहें जहां वर्कर आते-जाते हैं: 5 LUX (फ्लोर लेवल पर)
6.3.8 पीने का पानी (Drinking Water)
- सभी सुविधाजनक जगहों पर पीने योग्य साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
- 250 से ज्यादा वर्कर वाली फैक्ट्रियों में गर्मी के मौसम के लिए ठंडा पीने का पानी देने की व्यवस्था करनी चाहिए (नल या बर्तन में)।
6.3.9 लैट्रिन, यूरिनल और स्पिटून (Latrines, Urinals & Spittoons)
- हर फैक्ट्री में अप्रूव्ड टाइप के लैट्रिन और यूरिनल पर्याप्त संख्या में बनाए जाने चाहिए।
- पब्लिक हेल्थ अथॉरिटीज इनकी संख्या तय करते हैं और यह सभी समय साफ-सुथरी हालत में रखे जाने चाहिए।
- स्पिटून को साफ, स्वच्छ स्थिति में उचित संख्या में रखा जाना चाहिए।
6.4 प्लांट और मशीनरी से जुड़ी सुरक्षा5
सेक्शन 21 से 24 में इससे जुड़े कुछ जरूरी दायित्व (obligations) बताए गए हैं।
6.4.1 मशीनरी की फेंसिंग (Fencing of Machinery) — सेक्शन 21
- मशीन के सभी खतरनाक हिस्से — जैसे तेजी से घूमते पहिये, प्राइम मूवर, ट्रांसमिशन मशीनरी — को सुरक्षित और मजबूती से गार्ड लगाकर ढका जाना चाहिए।
- अत्यंत विशेष स्थितियों में ही राज्य सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार बिना गार्ड के काम की अनुमति दी जा सकती है।
6.4.2 चलती मशीनरी पर या पास काम (Work on/near Machinery in Motion) — सेक्शन 22
- चलती मशीन की जांच, चिकनाई (lubrication) या एडजस्टमेंट का काम सिर्फ विशेष रूप से प्रशिक्षित वयस्क पुरुष वर्कर द्वारा किया जाना चाहिए, जिसने टाइट-फिटिंग कपड़े पहने हों।
- ऐसे वर्कर का नाम रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए और उसे प्रबंधन द्वारा एक प्रमाणपत्र (certificate) भी दिया जाना चाहिए।
- महिला या युवा वर्कर को चलती मशीनरी के किसी भी हिस्से की सफाई, चिकनाई या एडजस्टमेंट करने की अनुमति नहीं है, जिससे उन्हें चोट लगने का खतरा हो।
6.4.3 - 6.4.6 यंग वर्कर्स, होइस्ट व लिफ्ट6
6.4.3 खतरनाक मशीनों पर युवा व्यक्तियों की नौकरी — सेक्शन 23
- 18 साल से कम उम्र के व्यक्तियों को किसी खतरनाक मशीन पर तब तक काम पर नहीं रखा जा सकता, जब तक वे उसके संचालन में पूरी तरह प्रशिक्षित न हों या किसी अनुभवी व्यक्ति की निगरानी में काम न कर रहे हों।
6.4.4 स्ट्राइकिंग गियर और पावर बंद करने के उपकरण — सेक्शन 24
- हर फैक्ट्री में बेल्ट, पुली या ढीली पुली की स्ट्राइकिंग गियर या अन्य कारगर मैकेनिकल उपकरण से पावर को जल्दी बंद करने की सुविधा होनी चाहिए।
- ड्राइविंग बेल्ट को फास्ट और लूज पुली के बीच में डालने या हटाने के लिए उचित उपकरण दिए जाने चाहिए ताकि हाथों से यह काम न करना पड़े।
6.4.5 सेल्फ-एक्टिंग मशीनें — सेक्शन 25
- ऐसी सेल्फ-एक्टिंग मशीन जिसका ट्रैवर्सिंग हिस्सा फैक्ट्री के अंदर 45 सेमी से कम दूरी वाली किसी फिक्स्ड संरचना के पास आगे-पीछे चलता हो, को नहीं चलाया जा सकता, अगर उस हिस्से और संरचना के बीच के खाली स्थान में किसी वर्कर के प्रवेश करने की संभावना हो।
6.4.6 होइस्ट और लिफ्ट (Section 28)
- हर फैक्ट्री में हर होइस्ट और लिफ्ट—
- (a) अच्छी बनावट, ठोस सामग्री की और पर्याप्त मजबूती वाली हो; सही तरीके से मेंटेन की जाए और हर 6 महीने में पूरी जांच हो।
- (b) हर होइस्ट-वे और लिफ्ट-वे मजबूती से घेरा (enclosure) हो, ताकि उसमें कोई फंस न जाए।
- (c) हर हिस्से पर अधिकतम सुरक्षित भार (safe working load) साफ-साफ लिखा हो।
- ट्रांसपोर्टिंग के लिए इस्तेमाल हर गेट में इंटरलॉकिंग या अन्य उपकरण होना चाहिए, ताकि गेट खुलने पर केज ठीक जगह पर हो और तभी वो चले।
6.5.7 - 6.5.9 लिफ्टिंग मशीन, रिवॉल्विंग मशीनरी, प्रेशर प्लांट7
6.5.7 लिफ्टिंग मशीनें, चेन, रस्सी और लिफ्टिंग टैकल — सेक्शन 29
- हर होइस्ट, लिफ्ट (जिसमें उठाने-नीचे लाने के लिए चेन, रस्सी और लिफ्टिंग टैकल शामिल हो) — चाहे फिक्स्ड हो या मूवेबल, सभी अच्छी बनावट, ठोस सामग्री, पर्याप्त मजबूती की और दोषरहित होनी चाहिए।
- चेन, रस्सी या लिफ्टिंग टैकल का उपयोग तब तक न हो, जब तक कोई काबिल व्यक्ति उसकी जांच व टेस्ट करके यह न बताए कि उसकी सुरक्षित कार्यशील भार (safe working load) क्या है, इसे मशीन/चेन पर स्पष्ट लिखा जाए।
- क्रेन को जिस भी जगह पर वो व्यक्ति को चोट पहुंचा सकती है, वहां क्रेन के किसी हिस्से का प्रभावी ट्रैक 6 मीटर के भीतर आने पर टकराने से बचाव के उपाय करना जरूरी है।
6.5.8 रिवॉल्विंग मशीनरी — सेक्शन 30
- हर ग्राइंडिंग व्हील की घूमने की सुरक्षित अधिकतम गति (max working peripheral speed) दिखाते हुए एक नोटिस लगाना चाहिए, जिसमें निम्न शामिल हो:
- (a) शाफ्ट/स्पिंडल की अधिकतम सुरक्षित गति (peripheral speed)
- (b) व्हील की शाफ्ट/स्पिंडल की डायमीटर
- (c) ग्राइंडिंग व्हील की अधिकतम सुरक्षित गति
- वेसल, केसेस, बास्केट, फ्लाई-व्हील, पुली, डिस्क आदि की गति कभी भी उसकी सुरक्षित पेरिफेरल स्पीड से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
6.5.9 प्रेशर प्लांट — सेक्शन 31
- प्लांट या मशीनरी जो सामान्य वायुमंडलीय दबाव से ज्यादा दबाव पर संचालित की जाती है, अगर ठीक से नहीं बनाई गई, तो उसमें दोष आ सकते हैं।
- हर प्रेशर प्लांट पर सुरक्षा हेतु स्टॉप वाल्व, सेफ्टी वाल्व और सही प्रेशर गेज लगाया जाना चाहिए, ताकि अधिकतम कार्यशील दबाव से ज्यादा न बढ़े।
- हर प्रेशर वेसल पर लाल निशान (red mark) से सुरक्षित कार्यशील दबाव को अंकित करना चाहिए।
- थॉरो इंटरनल जांच (Thorough Internal Examination):
एक्सटर्नली: हर 6 महीने इंटरनली: हर 12 महीने हाइड्रॉलिकली: हर 4 साल
- अगर आंतरिक जांच संभव न हो, तो हर 2 साल में हाइड्रॉलिक टेस्ट कराया जा सकता है; निरंतर प्रक्रिया वाले प्लांट में सिजिंग सिलेंडर की जांच हर 4 साल में एक बार भी काफी है।
6.5.10 - 6.5.14 फ्लोर, वजन सीमा, आंखों की सुरक्षा8
6.5.10 फ्लोर, सीढ़ियां और आने-जाने के साधन — सेक्शन 32
- हर फ्लोर, सीढ़ी, पैसेज और गैंगवे मजबूत बनावट की और ठीक से मेंटेन की जानी चाहिए।
- जहां जरूरी हो, वहां सुरक्षित रेलिंग लगानी चाहिए ताकि कोई फिसले या गिरे नहीं।
6.5.11 पिट, पंप और फ्लोर में खुलापन — सेक्शन 33
- अगर फ्लोर में गड्ढा या खुलापन इतना गहरा हो कि वहां व्यक्ति को चोट या फिसलने का खतरा हो, तो उसे सुरक्षित रूप से ढकना या घेरना (fenced) चाहिए।
6.5.12 अत्यधिक वजन (Excessive Weights) — सेक्शन 34
- किसी भी व्यक्ति को इतना भारी सामान उठाने, ले जाने या हिलाने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए, जिससे उसे चोट लगने का खतरा हो।
- अधिकतम भार सीमा:
| श्रेणी | अधिकतम भार |
|---|---|
| वयस्क पुरुष (Adult Male) | 30 Kgs |
| वयस्क महिला (Adult Female) | 30 Kgs |
| किशोर पुरुष (Adolescent Male) | 20 Kgs |
| किशोर महिला (Adolescent Female) | 16 Kgs |
| बालक (Male Child) | 16 Kgs |
| बालिका (Female Child) | 13 Kgs |
6.5.13 आंखों की सुरक्षा (Protection of Eyes)
- ऐसे प्रोसेस जहां धातु के उड़ते कणों (flying particles) से आंखों को चोट लगने का खतरा हो, वहां वर्कर्स को उचित गॉगल्स दिए जाने चाहिए।
6.5.14 खतरनाक धुएं में प्रवेश की सावधानियां (Confined Space) — सेक्शन 36
- किसी भी चैंबर, टैंक, वैट, पिट, पाइप, फ्लू या अन्य कन्फाइंड जगह में, जहां जहरीले धुएं आने की संभावना हो, प्रवेश तब तक की अनुमति नहीं है जब तक:
- (a) टेस्ट सर्टिफिकेट के अनुसार वह जगह खतरनाक धुएं से मुक्त और प्रवेश के लिए सुरक्षित घोषित न हो जाए, या
- (b) वर्कर उचित ब्रीदिंग अपैरेटस पहने हो और उसकी रस्सी बाहर खड़े व्यक्ति के पास हो।
- ऐसे उपकरण (ब्रीदिंग अपैरेटस, रिवाइविंग अपैरेटस, बेल्ट, रस्सी) हमेशा तैयार अवस्था में रखे जाने चाहिए, और वर्कर्स को इनके इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
6.5.15 - 6.5.18 पोर्टेबल लाइट, विस्फोट, आग सुरक्षा9
पोर्टेबल इलेक्ट्रिक लाइट के इस्तेमाल की सावधानियां — सेक्शन 36A
- किसी चैंबर, टैंक, वैट, पिट, पाइप, फ्लू या कन्फाइंड स्पेस के अंदर 24 वोल्ट से ज्यादा के पोर्टेबल इलेक्ट्रिक लाइट या अन्य अप्लायंस के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है।
- अगर ऐसी जगह ज्वलनशील गैस या धूल मौजूद होने की संभावना हो, तो वहां फ्लेम-प्रूफ निर्माण वाली लाइट के अलावा कोई और लैंप या लाइट इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए।
6.5.16 ज्वलनशील धूल, गैस का विस्फोट — सेक्शन 37
- जहां मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस से ऐसी धूल, गैस, धुआं या वाष्प निकले जो विस्फोट होने की संभावना रखती हो, वहां विस्फोट रोकने के लिए सभी व्यावहारिक उपाय अपनाए जाने चाहिए:
- (i) प्लांट या मशीनरी का प्रभावी बंद घेरा (enclosure)
- (ii) ऐसी ज्वलनशील धूल-गैस के जमाव को हटाना या रोकना
- (iii) ज्वलन (ignition) के सभी संभावित स्रोतों को हटाना या ढंकना
- किसी भी प्लांट, टैंक या वेसल में जिसमें विस्फोटक या ज्वलनशील पदार्थ रहा हो, वेल्डिंग, ब्रेजिंग, सोल्डरिंग या कटिंग का काम तब तक नहीं करना चाहिए, जब तक ऐसे पदार्थों और धुएं को हटा न दिया जाए या उसे गैर-विस्फोटक न बना दिया जाए, और धातु ठंडी न हो जाए।
6.5.17 आग लगने की स्थिति में सावधानियां — सेक्शन 38
- हर फैक्ट्री में कर्मचारियों के लिए पर्याप्त और उचित निकासी (escape) के साधन होने चाहिए।
- हर कमरे में इतने निकास द्वार हों कि सभी लोग अपनी कार्यस्थली से बिना रुकावट के निकास द्वार तक पहुंच सकें।
- कोई भी निकास द्वार 3 फीट × 6 फीट से छोटा नहीं होना चाहिए।
- निकास द्वार कभी बंद या ताला न लगे रहें और वे बाहर की ओर खुलें (जब तक स्लाइडिंग टाइप के न हों)।
6.5.18 बिल्डिंग और मशीनरी की सुरक्षा — सेक्शन 39 व 40
- इंस्पेक्टर को यह अधिकार है कि अगर किसी बिल्डिंग, प्लांट या मशीनरी की स्थिति खतरनाक लगे, तो वह मैनेजमेंट को उचित टेस्ट कराने के लिए कह सकता है।
- अगर मानव जीवन या सुरक्षा को तत्काल खतरा हो, तो इंस्पेक्टर उस बिल्डिंग/प्लांट/मशीनरी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा सकता है, जब तक उसकी सही मरम्मत न हो जाए।
- सेक्शन 40B: 1000 या ज्यादा वर्कर वाली फैक्ट्री में सेफ्टी ऑफिसर रखना अनिवार्य है। इसके अलावा, अगर मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में शारीरिक चोट, जहर या बीमारी का खतरा हो, तो 1000 से कम वर्कर वाली फैक्ट्री को भी राज्य सरकार की नोटिफिकेशन पर सेफ्टी ऑफिसर रखना पड़ सकता है।
6.6 दुर्घटना की रिपोर्टिंग (Reporting Accidents)10
- यह फैक्ट्रीज एक्ट 1948, रूल 88 के तहत आता है।
- अगर किसी फैक्ट्री में दुर्घटना होती है, जिसकी वजह से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए या किसी को शारीरिक चोट लगे जिससे वह 48 घंटे या उससे ज्यादा समय तक काम करने में असमर्थ रहे, तो —
- फैक्ट्री के मैनेजर को यह तुरंत उस फैक्ट्री के लिए तय अथॉरिटीज को निर्धारित फॉर्म में और तय समय के अंदर सूचित करना होगा।
- 6.7 सुरक्षा अधिकारियों के कर्तव्य, योग्यता आदि की सूचना — इसे भी आधिकारिक गजट में निर्धारित रूप और शर्तों में प्रकाशित किया जाता है।
6.7 फैक्ट्री प्लांट्स पर लागू अन्य कानून (Other Legislations)11
फैक्ट्री और उद्योगों पर लागू विभिन्न कानूनों की सूची, वर्ष सहित:
| S.No. | वर्ष | कानून (Legislations) |
|---|---|---|
| 1 | 1855 | The Fatal Accidents Act |
| 2 | 1884 | The Explosive Act |
| 3 | 1890 | Indian Railway Act |
| 4 | 1908 | The Explosive Substance Act |
| 5 | 1923 | Indian Boiler Act |
| 6 | 1934 | The petroleum Act (as amended till 1997) and Petroleum Rules 1976 |
| 7 | 1948/1952 | The Factories Act (as amended till 1987) |
| 8 | 1952 | The Inflammable Substances Act 1952, Boiler Regulations |
| 9 | 1956 | Indian Electricity Rules |
| 10 | 1962 | The Emergency Risks (Factories) Insurance Act, 1962 |
| 11 | 1974 | The Water (Prevention and Control of Pollution) Act |
| 12 | 1975 | The Water (Prevention and Control of Pollution) Rules |
| 13 | 1976 | The Petroleum Rules (as amended till 1955) |
| 14 | 1977 | The Water (Prevention and Control of Pollution) Cess Act |
| 15 | 1978 | The Water (Prevention and Control of Pollution) Cess Rules |
| 16 | 1981 | The Air (Prevention and Control of Pollution) Act |
| 17 | 1981/1997 | The static and mobile pressure vessels (Unified) Rules as Amended till 1997 |
| 18 | 1982/1983 | The Air (Prevention and Control of Pollution) Rules |
| 19 | 1984 | Indian Explosives Act 1984 and Explosive Rules 1983 |
| 20 | 1986 | The Environment (Protection) Act |
| 21 | 1986 | The Environment (Protection) Rules |
| 22 | 1983/1989 | The Explosive Rules, including Amendment Rules |
| 23 | 1989 | The Central Motor Vehicle Rules (under Motor Vehicle Act, 1988) |
| 24 | 1989/2000 | The Hazardous Wastes (Management and Handling) Rules including Amendment 2000 |
| 25 | 1989/2000 | Manufacture, storage and import of hazardous chemicals rule 1989 including amendment of 2000 |
| 26 | 1991 | The Public Liability Insurance act |
| 27 | 1992/1993 | Environmental (Protection) Rules- "Environmental Statement" |
| 28 | 1993 | Environmental (Protection) Rules- "Environmental Standards" |
| 29 | 1984/1993 | Gas Cylinder Rules, including Amendment Rules |
| 30 | 1994 | Environmental (Protection) Rules- "Environmental Clearance" |
| 31 | 1995 | The National Environment Tribunal Act |
| 32 | 1996 | The Environment (Protection) Second Amendment Rules- "Chemical Accident (Emergency, planning, preparedness and response) Rules" |
| 33 | 1996 | Amendments in the Environment (Protection) Rules, 1994 "Environmental Standards" |
| 34 | 1997 | National Environmental Appellate Authority Act |
| 35 | 1998 | Environment (Protection) Second Amendment Rules |
| 36 | 1998 | Direction for use of fly ash and fly ash based products under Environmental Standards |
| 37 | 1999 | The Bio Medical Waste (Management and Handling) Rules |
| 38 | 2000 | The Noise Pollution (Regulation and Control) Rules |
| 39 | 2000 | The Ozone Depleting Substances (Regulation) Rules |
| 40 | 2000 | Battery Management and Handling Rules, 2000 |
| 41 | 2001 | The Noise Pollution (regulation and Control) Rules, 2000 |
| 42 | 2000 | Other (For Guideline purpose) |
| 43 | — | MOEF Guideline on Hazardous waste (Management and Handling) Rules, 1989 |
| 44 | 2001 | National Building code |
| 45 | 1996 | The Energy Conservation Act |
| 46 | — | The Building and Construction workers Act, 1996 |
| 47 | 1923 | Comprehensive list of MOEF authorized waste oil/waste Recyclers/Reprocesses |
| 48 | — | The Workman's Compensation Act, Factory Rules of the State in which factory/plant is located, Industrial Employment (Standing Orders Act) |
6.8 पॉलिसी, कानूनी व सांविधिक ढांचा (Statutory Framework)12
- औद्योगिक सुरक्षा (occupational safety) सभी देशों में मानव अधिकारों में से एक मानी जाती है।
- भारतीय संविधान में: डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स ऑफ स्टेट पॉलिसी के अनुसार, राज्य नीतियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वर्कर्स के अधिकारों का शोषण न हो, और उन्हें उचित व मानवीय काम की परिस्थितियां मिलें।
- संविधान महिलाओं और बच्चों के लिए काम की परिस्थितियों में विशेष प्रावधान करने का निर्देश देता है, और 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी खतरनाक व्यवसाय (occupation) में काम पर रखने से रोकता है।
- ILO (International Labour Organisation) ने भी औद्योगिक सुरक्षा को लेकर एक स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क तैयार किया है, जिसमें कई कन्वेंशन और रिकमेंडेशन शामिल हैं।
- महत्वपूर्ण ILO कन्वेंशन:
Convention No. 187 — प्रमोशनल फ्रेमवर्क Convention No. 155 — ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ Convention No. 174 — इंडस्ट्रियल एक्सीडेंट रोकथाम Convention No. 170 — केमिकल्स सुरक्षा Convention No. 161 — ऑक्यूपेशनल हेल्थ सर्विसेज
- इन कन्वेंशंस के तहत सदस्य देशों को अपने राष्ट्रीय कानून, नीतियां और अभ्यास (practices) बनाने, लागू करने और समय-समय पर उनकी समीक्षा (review) करने की जरूरत होती है।
6.8.1 नेशनल पॉलिसी ऑन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड एनवायरनमेंट (OSHE)
- यह नेशनल पॉलिसी MOLE (Ministry of Labour and Employment) द्वारा तैयार की गई है।
- इस पॉलिसी का उद्देश्य है — कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण में लगातार सुधार करना, और वर्क-रिलेटेड चोटों, बीमारियों व उनसे जुड़ी लागत को कम करना।
- यह पॉलिसी अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 9 प्रमुख रणनीतियां (Key Strategies) बताती है:
- Enforcement (लागू करना)
- Development of national standards (राष्ट्रीय मानक विकसित करना)
- Compliance (अनुपालन)
- Awareness (जागरूकता)
- Research and development (शोध और विकास)
- Skills development (कौशल विकास)
- Data collection (डेटा संग्रहण)
- Practical guidance (व्यावहारिक मार्गदर्शन)
- Incentives (प्रोत्साहन)
- संवैधानिक ढांचा: लेबर (labour) संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आता है, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें इस पर कानून बना सकती हैं।
- MOLE केंद्र और राज्य सरकारों के लेबर डिपार्टमेंट्स के साथ मिलकर काम करता है और इसने वर्कप्लेस सेफ्टी व हेल्थ से जुड़े कानून बनाए हैं।
- मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के अलावा माइंस, पोर्ट्स और डॉक्स के लिए भी भारत सरकार के मंत्रालयों ने विशेष कानून बनाए हैं।
फैक्ट्रीज एक्ट 1948 का दायरा और मुख्य नियम
- फैक्ट्रीज एक्ट 1948 मैनुफैक्चरिंग सेक्टर पर लागू है, जहां:
- (i) पावर की मदद से 10 या ज्यादा व्यक्ति काम करते हों, या
- (ii) बिना पावर के 20 या ज्यादा व्यक्ति काम करते हों।
- MOLE ही Factories Act, 1948 के प्रशासन (administration) के लिए नोडल मंत्रालय है।
- राज्य सरकारें फैक्ट्रीज एक्ट के तहत नियम बनाने के लिए सशक्त (empowered) हैं और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैक्ट्रीज के इंस्पेक्टोरेट इसे लागू करते हैं।
- महत्वपूर्ण नियम:
- (i) The Factories Act, 1948 and State Factories Rules
- (ii) The Manufacture, Storage and Import of Hazardous Chemicals Rules (MSIHC), 1989
- (iii) The Static and Mobile Pressure Vessels (Unfired) Rules
- अलग-अलग निर्माण सेक्टर (construction sectors) से जुड़े वर्कर्स की सुरक्षा के लिए भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों (श्रम, खान, बंदरगाह, डॉक आदि) ने भी कुछ खास कानून बनाए हैं।
- वर्कप्लेस सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कानून लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालयों/डिपार्टमेंट्स की भी है।
- एन्फोर्समेंट में एकरूपता (uniformity) के लिए राज्य सरकारें फैक्ट्रीज के इंस्पेक्टर्स की नियुक्ति करती हैं और चीफ इंस्पेक्टर की सालाना कॉन्फ्रेंस (Annual Conference) के जरिए भी समन्वय होता है।
📝 सारांश (Summary)
फैक्ट्रीज एक्ट 1948, फैक्ट्री में सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा मुख्य कानून है। इसमें सफाई, हवादारी, लाइटिंग, पीने का पानी, मशीनरी की फेंसिंग, होइस्ट-लिफ्ट, प्रेशर प्लांट, आग से बचाव, वजन सीमा जैसे कई नियम शामिल हैं। इसके अलावा भारत में कई अन्य कानून (पर्यावरण, विस्फोटक, बॉयलर आदि) और ILO के कन्वेंशन भी वर्कप्लेस सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं। MOLE द्वारा बनाई गई नेशनल पॉलिसी इन सभी को एक साझा दिशा देती है ताकि वर्क-रिलेटेड दुर्घटनाओं और बीमारियों को कम किया जा सके।
हल किया गया प्रश्न (Solved Question)Q
प्रश्न: फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के तहत वर्कर की जिम्मेदारियों तथा फैक्ट्री में उसकी सुरक्षा के लिए किए गए प्रावधानों को संक्षेप में समझाएं।
उत्तर:
- (a) 18 साल से कम उम्र के वर्कर को खतरनाक मशीन पर तब तक काम नहीं दिया जा सकता, जब तक वह प्रशिक्षित न हो या निगरानी में काम न कर रहा हो।
- (b) चलती मशीन की सफाई-चिकनाई सिर्फ प्रशिक्षित वयस्क पुरुष वर्कर ही कर सकता है, महिला या युवा वर्कर को इसकी अनुमति नहीं है।
- (c) किसी भी वर्कर से इतना भारी वजन नहीं उठवाना चाहिए जिससे उसे चोट लगने का खतरा हो; इसके लिए श्रेणीवार अधिकतम भार सीमा तय की गई है।
❓ अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
- फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 का दायरा और उद्देश्य संक्षेप में समझाएं।
- फैक्ट्री में स्वास्थ्य और वातावरण से जुड़े प्रावधानों (सफाई, हवादारी, लाइटिंग) का वर्णन करें।
- प्लांट व मशीनरी की सुरक्षा हेतु फेंसिंग और चलती मशीनरी पर काम से जुड़े नियम समझाएं।
- होइस्ट, लिफ्ट और लिफ्टिंग मशीनों से जुड़ी सुरक्षा आवश्यकताओं पर चर्चा करें।
- प्रेशर प्लांट की जांच (internal examination) से जुड़े नियम और समय-सीमा बताएं।
- फैक्ट्री में आग से बचाव और दुर्घटना रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को समझाएं।
- नेशनल पॉलिसी ऑन OSHE के 9 प्रमुख रणनीतियों (Key Strategies) की सूची बनाएं।
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