SAFETY, HEALTH AND ENVIRONMENT — Chapter 7
सुरक्षित कार्य पद्धतियाँ
सुरक्षित कार्य पद्धतियाँ
(Safe Working Practices)
पूरी किताब के पेज 81 से 109 तक की जानकारी — आसान हिन्दी में, Point-wise और स्टूडेंट्स के लिए बिल्कुल सरल भाषा में।
👉 यह नोट्स फैक्ट्री/प्लांट में हाउसकीपिंग, हैज़र्ड, PPE, वेल्डिंग, क्रेन, इलेक्ट्रिसिटी, लैडर, गैस सिलेंडर, परमिट-टू-वर्क जैसे विषयों में अपनाई जाने वाली सुरक्षित कार्य पद्धतियों को समझाते हैं। हर टॉपिक को छोटे-छोटे पॉइंट्स में लिखा गया है ताकि परीक्षा के लिए याद करना आसान हो।
📑 इस नोट्स में क्या-क्या है
- 7.1 हाउस-कीपिंग
- 7.2 वर्कप्लेस सेफ्टी व दुर्घटना के कारण
- 7.3 सेफ वर्किंग एनवायरनमेंट
- 7.4–7.5 हैज़र्ड रिकॉग्निशन
- 7.6 फायर सेफ्टी इंस्ट्रक्शन
- 7.7–7.8 सेफ्टी डिवाइसेज़ व लैडर
- 7.9–7.11 मेंटेनेंस, इलेक्ट्रिसिटी, क्रेन
- 7.12–7.14 वेल्डिंग गैस, लिफ्टिंग, हैंड टूल्स
- 7.15–7.16 वर्कशॉप व ग्राइंडर
- 7.17–7.18 वेल्डिंग/कटिंग व पेंटिंग
- 7.19 कंप्रेस्ड सिस्टम व सिलेंडर
- 7.20 पर्सनल सेफ्टी (PPE डिटेल)
- 7.21–7.22 स्लिप्स, ट्रिप्स, फॉल्स
- 7.23 परमिट टू वर्क सिस्टम
- 7.24 PPE टेबल
- 7.25 VDT हेल्थ हैज़र्ड्स
- सॉल्व्ड क्वेश्चंस (Q1–10)
7.1 हाउस-कीपिंग (House-Keeping)1
- फैक्ट्री/प्लांट में सुरक्षित स्थिति बनाए रखने के लिए हाउसकीपिंग सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। प्रबंधन को जिम्मेदारियाँ तय करके और कर्मचारियों को जवाबदेह बनाकर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- समय-समय पर और अचानक (surprise) जाँच से हाउसकीपिंग की निगरानी होनी चाहिए। पोस्टर व डिस्प्ले तथा "क्लीनलीनेस वीक" जैसे आयोजनों से इसे बढ़ावा दिया जा सकता है।
🧹 सभी कर्मचारियों द्वारा अपनाई जाने वाली सावधानियाँ
- मटीरियल, टूल्स, इक्विपमेंट को उनकी तय जगह पर ही रखा जाए और इस्तेमाल के बाद वापस रखा जाए।
- कोई भी चीज़ ऐसी जगह न रखी जाए जहाँ से गिरकर नीचे किसी को चोट लग सके।
- सभी फ्लोर, पैसेज, सीढ़ियाँ साफ, सूखी और नॉन-स्लिपरी रखी जाएँ। गिरा हुआ तेल/केमिकल तुरंत साफ हो।
- सीढ़ियाँ, फायर एस्केप, पैसेज हमेशा अवरोध-मुक्त रखे जाएँ, वहाँ कोई सामान न रखा जाए।
- अलमारी, दरवाजे, डेस्क/कैबिनेट दराज खुले न छोड़े जाएँ; निजी सामान सिर्फ लॉकर में रखा जाए।
- उचित लाइटिंग सुनिश्चित हो, फ्यूज़ बल्ब/ट्यूब लाइट तुरंत बदली जाए।
- कीलें व नुकीली चीज़ें फर्श/सीढ़ी/पैसेज पर न छोड़ी जाएँ; मिलें तो डस्टबिन में डालें।
- चीथड़े (rags), तेल-लगा वेस्ट, टूटे बल्ब/काँच आदि तय मेटल कंटेनरों में डाले जाएँ।
- शटरिंग/पैकिंग जैसी जगहों की उभरी हुई कीलें हटाई/मोड़ी जाएँ ताकि चोट न लगे।
- पर्याप्त संख्या में स्क्रैप/वेस्ट डिस्पोज़ल बिन अलग-अलग जगह पर रखे जाएँ; स्क्रैप जमा न होने दिया जाए।
- ऊँचाई से सामान/स्क्रैप फेंकने की प्रथा सख्ती से मना है; उन्हें सुरक्षित तरीके से नीचे उतारा जाए।
- तेल लगे चीथड़े जल्द से जल्द अप्रूव्ड कंटेनर में डाले जाएँ ताकि आग का खतरा न हो।
- टूटे बल्ब, काँच, मेटल, स्क्रैप आदि खास तौर पर बनाई गई जगह/कंटेनर में डाले जाएँ।
- डिस्कार्डेड फ्लोरोसेंट व अन्य गैस-भरी ट्यूब सुरक्षित तरीके से डिस्पोज़ की जाएँ।
🏗️ प्लांट परिसर सम्बंधी अतिरिक्त सावधानियाँ
- पोर्टेबल इक्विपमेंट इस्तेमाल के बाद अपनी तय स्टोरेज जगह पर वापस रखे जाएँ।
- ऊँचे प्लेटफॉर्म, एस्लि, सीढ़ी आदि पर गार्ड लगे हों ताकि मटेरियल नीचे न गिरे।
- निर्माण/इनफ्लेमेबल मटेरियल वेल्डिंग एरिया से दूर रखा जाए।
- सभी ड्रेन, सीवर, टनल/चैनल, बेसमेंट मानसून से पहले साफ किए जाएँ; जल-जमाव रोका जाए।
- मरम्मत वाली जगहें व खुले मैनहोल रेलिंग, चेतावनी संकेत और दूर से दिखने वाली रेड लाइट से घेरे जाएँ।
- एयर/वॉटर होज़, इलेक्ट्रिकल वायर फर्श पर न बिछाई जाएँ; दीवार के सहारे या कम से कम 7.5 मीटर ऊँचाई पर हों।
- गैस सिलेंडर अच्छी हवादार जगह में रखे जाएँ। टूटी फर्श/सीढ़ी तुरंत ठीक की जाए।
- डीग्रेडेबल व नॉन-डीग्रेडेबल वेस्ट के लिए अलग-अलग कंटेनर रखे जाएँ।
- लकड़ी के स्क्रैप में निकली कीलें मोड़ी/हटाई जाएँ। उपकरण/टूल्स/स्क्रैप अनअटेंडेड न छोड़े जाएँ।
- प्लांट क्षेत्र में हरियाली/वनस्पति बढ़ाई जाए; पेड़ों की कटाई पर रोक लगे।
7.2 वर्कप्लेस सेफ्टी व दुर्घटना के कारण2
- स्वयं व दूसरों की सुरक्षा हर कर्मचारी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। काम के दौरान हमेशा हेलमेट व सेफ्टी शूज़ पहनें।
- सुरक्षा सिद्धांत अच्छी वर्क कल्चर और हर कर्मचारी के रवैये पर आधारित होते हैं।
🗂️ काम की योजना बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें
- काम में शामिल विभिन्न गतिविधियों की पहचान करें।
- हर गतिविधि में संभावित हैज़र्ड (आग, गिरने, फिसलने, कटने, जलने आदि) व निवारक उपाय पहचानें।
- ऊँचाई, ग्राइंडिंग, गैस कटिंग, वेल्डिंग जैसे काम के लिए जरूरी सेफ्टी एप्रेल तय करें।
- स्क्रू ड्राइवर, हैमर, प्लायर, चिज़ल, ड्रिल मशीन जैसे हैंड टूल्स की स्थिति जाँचें।
- इंजीनियर-इंचार्ज/जॉब सुपरवाइज़र से वर्क प्रोसीजर पर चर्चा करें।
- ऊँचाई पर काम करते समय साइड रेल व टो बोर्ड सहित मजबूत स्कैफोल्ड/प्लेटफॉर्म दें।
⚠️ 7.2.1 दुर्घटनाएँ — जिम्मेदार कारक
- लगभग हर स्थिति दुर्घटना के लिए संवेदनशील हो सकती है। दुर्घटना पैदा करने वाले कारकों का विश्लेषण जरूरी है।
- दुर्घटनाएँ असुरक्षित कृत्य (Unsafe Acts), असुरक्षित परिस्थितियों (Unsafe Conditions), कर्मचारी की मानसिक/शारीरिक अवस्था और सुरक्षा जागरूकता की कमी से हो सकती हैं।
- दुर्घटनाएँ गिरने, फिसलने, टकराने, फँसने, विस्फोट, जलने, बिजली के झटके आदि रूप में हो सकती हैं।
- परिणाम: परेशानी, उत्पादन में देरी, गुणवत्ता में कमी, माल खराब होना, संपत्ति क्षति, चोट या मृत्यु।
💡 याद रखें: असुरक्षित आदतें जैसे PPE की उपेक्षा, गलत हैंडलिंग तरीके, हॉर्सप्ले आदि खतरनाक होती हैं; वहीं असुरक्षित परिस्थितियाँ जैसे खराब लाइटिंग/वेंटिलेशन, अस्त-व्यस्त हाउसकीपिंग, दोषपूर्ण टूल्स दुर्घटना का कारण बनती हैं।
7.3 सेफ वर्किंग एनवायरनमेंट3
💡 7.3.1 इल्युमिनेशन (रोशनी)
- जहाँ प्राकृतिक रोशनी कम है वहाँ IS:3646 (Part-II) अनुसार पर्याप्त आर्टिफिशियल लाइटिंग दी जाए।
- आर्टिफिशियल लाइटिंग से चकाचौंध (glare) या डिस्टर्बिंग शैडो नहीं होनी चाहिए। लैंप को गार्ड से सुरक्षित रखें।
- हैंड-हेल्ड लैंप 24 वोल्ट या ड्राई सेल बैटरी से चलें, मेन सप्लाई से नहीं।
- बल्ब/ट्यूब नियमित जाँचे जाएँ; खराबी की सूचना बिना देरी मेंटेनेंस को दी जाए।
🔊 7.3.2 नॉइज़ पॉल्यूशन
- वर्किंग जोन में नॉइज़ लेवल 85 dBA से ज्यादा नहीं होना चाहिए; 90 dBA से ज्यादा एक्सपोज़र किसी भी हाल में नहीं होने देना।
- सभी मशीनों की समय पर लुब्रिकेशन, साइलेंसर/एकॉस्टिक लाइनिंग की जाँच और मेंटेनेंस जरूरी है।
- ज्यादा dB वाली जगह में कर्मचारियों को ईयरप्लग, ईयर मफ या ईयर सील दी जाए।
- घर्षण/वाइब्रेशन/असंतुलन से बढ़ा नॉइज़ लेवल समय पर रिपेयर व लुब्रिकेशन से कम किया जाए।
- नियमित ऑडियोमेट्री टेस्ट कराया जाए जहाँ ट्रायल नॉइज़ से हियरिंग लॉस की आशंका हो।
💨 7.3.3 डस्ट/फ्यूम्स/गैस
- चैंबर, टैंक, वैट, पिट, पाइप जैसी कन्फाइंड स्पेस में तब तक न घुसें जब तक:
- पर्याप्त आकार का मैनहोल या इफेक्टिव एग्रेस मौजूद न हो।
- गैस/फ्यूम/वेपर/डस्ट परमिसिबल लिमिट तक कम करने के सभी उपाय न किए गए हों।
- सक्षम व्यक्ति ने लिखित प्रमाण-पत्र न दिया हो कि जगह खतरनाक गैस से मुक्त है।
- हानिकारक केमिकल एयरटाइट उपकरण में बंद हो, ताकि कोई रिसाव न हो।
- काम के अनुसार उपयुक्त PPE, पर्याप्त वेंटिलेशन/टेम्परेचर कंट्रोल और अच्छी वाशिंग सुविधा दी जाए।
🔥 7.3.4 थर्मल रेडिएशन
- फर्नेस, हाई टेम्परेचर पाइपिंग की शील्डिंग व थर्मल इंसुलेशन जाँचने का प्रिवेंटिव मेंटेनेंस प्रोग्राम बनाएँ।
- हॉट मेटल पार्ट्स से बचाव किया जाए; कटिंग/वेल्डिंग करने वालों को उचित PPE दिया जाए।
🗑️ 7.3.5 वेस्ट डिस्पोज़ल
- वेस्ट को नियंत्रित तरीके से, न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव के साथ डिस्पोज़ करें। साइट पर वेस्ट दबाना प्रतिबंधित है।
- प्लास्टिक बैग, सीमेंट बैग, टिम्बर, केमिकल जैसा वेस्ट अप्रूव्ड जगह ले जाया जाए।
- ग्राउंड कंटेमिनेशन रोकने के लिए केमिकल/पेंट/सॉल्वेंट लेबल्ड कंटेनर में और वॉटर सोर्स/ड्रेन से दूर रखें।
- फ्यूल टैंक रिटेंशन एरिया में रखे जाएँ ताकि स्पिलेज कंटेन हो सके।
- तेल/ग्रीस को जमीन/ड्रेन में न बहाएँ, बल्कि टाइट कंटेनर में इकट्ठा कर हटाएँ।
- सेप्टिक टैंक व फिल्टर की देखरेख साइट प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी है; MOEF के नॉर्म्स का पालन हो।
- केमिकल वेस्ट डिस्पोज़ करने से पहले उपयुक्त केमिकल से ट्रीट/न्यूट्रलाइज़ किया जाए।
7.4–7.5 हैज़र्ड रिकॉग्निशन व स्पॉट अ हैज़र्ड4
- दुर्घटना रोकथाम के लिए दुर्घटना के कारणों को समझना जरूरी है। जोखिम असुरक्षित कृत्य व असुरक्षित परिस्थिति दोनों पर निर्भर करता है।
- असुरक्षित कृत्य नियम-उल्लंघन, गलत निर्णय, लापरवाही, सेफ्टी डिवाइस की उपेक्षा और अपर्याप्त ट्रेनिंग के कारण होते हैं।
- असुरक्षित परिस्थिति वह भौतिक स्थिति है जो सुधारी न जाए तो दुर्घटना का कारण बन सकती है।
- सेफ्टी बिहेवियर सैंपलिंग और क्रिटिकल टास्क एग्जामिनेशन से असुरक्षित परिस्थितियाँ हटाई जा सकती हैं।
🔍 सेफ्टी अप्रेज़ल किन बातों की पुष्टि करते हैं
- मशीनें, टूल्स, डिवाइस निर्धारित सेफ्टी स्टैंडर्ड के अनुरूप हैं।
- मशीन गार्ड, सेफ्टी डिवाइस व PPE पर्याप्त हैं।
- इल्युमिनेशन, वेंटिलेशन, नॉइज़ लेवल, रेडिएशन आदि तय प्रैक्टिस के अनुसार हैं।
- वर्किंग सरफेस, सीढ़ियाँ, रैंप, लैडर, फायर प्रोटेक्शन तय स्टैंडर्ड में हैं।
- हाउसकीपिंग, सैनिटेशन, वेस्ट डिस्पोज़ल व मटेरियल स्टोरेज सेफ प्रैक्टिस अनुसार हैं।
💡 हैज़र्ड इंडेक्स: चोट की गंभीरता, प्रभावित हो सकने वाले वर्कर्स की संख्या और "नियर मिस" दुर्घटनाओं की संख्या के आधार पर तैयार किया जाता है।
🚩 हैज़र्ड पहचानने के 3 प्रश्न
- (a) क्या नुकसान का कोई स्रोत है? (b) किसे/किसको नुकसान हो सकता है? (c) नुकसान कैसे हो सकता है?
📂 हैज़र्ड की व्यापक श्रेणियाँ
मैकेनिकल
इलेक्ट्रिकल
फायर एंड एक्सप्लोजन
टॉक्सिक रिलीज़
स्लिप्स/फॉल
ऊँचाई से गिरना
टूल्स/मटेरियल का गिरना
इलेक्ट्रिसिटी/हीट/नॉइज़
टॉक्सिक इनहेलेशन
असमान ग्राउंड/फिसलन
🛡️ हैज़र्ड कंट्रोल प्लान (Prepare Action Control Plan)
- यदि संभव हो तो हैज़र्ड को पूरी तरह खत्म करें।
- यदि खत्म करना संभव न हो, तो असर कम करने के जरूरी निवारक उपाय अपनाएँ।
🦺 पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) का इस्तेमाल
- जिस भी एक्टिविटी के लिए PPE की जरूरत हो, उसका इस्तेमाल कन्फर्म किया जाए।
- सेफ्टी हेलमेट, शूज़; हार्नेस-बेल्ट सही तरीके से एंकर किया जाना; सेफ्टी गॉगल्स/गॉगल्स; ईयर प्लग/मफ; डस्ट मास्क।
- Cl₂ टॉनर या क्लोरीनेशन प्लांट में कार्ट्रिज मास्क का इस्तेमाल।
7.6 फायर सेफ्टी इंस्ट्रक्शन5
- सभी आग को इग्निशन स्रोत की मौजूदगी में ज्वलनशील पदार्थ के संपर्क से रोका जा सकता है।
- PPE ऊपर बताए अनुसार (Work Permit में) इस्तेमाल किया जाए।
🔥 फायर की क्लासेस व एक्सटिंग्विशर
| फायर क्लास | मटेरियल | एक्सटिंग्विशर |
|---|---|---|
| A | लकड़ी, कागज, रबर, कपड़ा | वॉटरजेट/प्लेन वॉटर |
| B | पेट्रोल, केरोसिन, ग्रीस, वार्निश | फोम (AFFF) |
| C | LPG, हाइड्रोजन (ज्वलनशील गैस) | CO₂, CID |
| D | मेटल, सोडियम | DCP |
7.7 सेफ्टी डिवाइस व टूल्स, 7.8 लैडर की सावधानियाँ6
⚡ 7.7 सेफ्टी डिवाइस एंड टूल्स
- इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट रिपेयर के लिए सुरक्षा डिवाइस IS स्टैंडर्ड (डाइलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ, इंसुलेशन रेजिस्टेंस) के अनुसार हों।
- इंसुलेटिंग मैट्स 3000 वोल्ट से ज्यादा वाले सर्किट में जाँची व टेस्टेड होनी चाहिए।
- रबर ग्लव्स/गैंटलेट्स HT/EHT स्विचगियर पर मैकेनिकल प्रोटेक्शन के लिए इस्तेमाल हों; ऑयल/पेंट/एसिड से दूर रखें।
- लाइव उपकरण पर आग लगने पर CO₂/DCP एक्सटिंग्विशर की सूचना योग्य व्यक्ति को दी जाए।
- फ्यूज़/सर्किट ब्रेकर सही क्षमता के हों; मल्टी-सॉकेट कनेक्शन से बचें; रिपेयर सिर्फ क्वालिफाइड व्यक्ति करें।
🪜 7.8 लैडर के इस्तेमाल में सावधानियाँ
- लैडर तिरछी, तेलयुक्त, फिसलन भरी या हिलती सतह पर न रखें, जब तक कोई पकड़े न या ठीक से बांधी न हो।
- लैडर का आधार दीवार/सपोर्ट से उसकी लंबाई के 1/4वें हिस्से से ज्यादा दूर न हो।
- लैडर नियमित इंस्पेक्ट व मेंटेन की जाए; गिरने/टकराने के बाद नुकसान जाँचें।
- बाहरी उपयोग वाली लकड़ी की लैडर पर क्लियर वार्निश/लिनसीड ऑइल की कोटिंग हो; मेटैलिक पेंट न लगे।
- दोषपूर्ण लैडर का उपयोग निषिद्ध; टूटी/स्प्लिट लैडर नष्ट या छोटी की जाए।
- चढ़ते/उतरते समय हमेशा लैडर की ओर मुँह रखें और दोनों हाथों का इस्तेमाल करें।
7.9 मेंटेनेंस, 7.10 इलेक्ट्रिसिटी, 7.11 क्रेन ऑपरेशन7
🛠️ 7.9 मेंटेनेंस के दौरान सुरक्षा
- रिपेयर से पहले हैज़र्ड एनालाइज़ करें व जरूरी PPE लें।
- परमिट जारी होने और लाइन आइसोलेट होने तक पाइपलाइन/इलेक्ट्रिक लाइन पर काम शुरू न करें।
- बिना गार्ड लगे मशीन/इक्विपमेंट न शुरू करें; काम पूरा होने तक टूल्स इधर-उधर न छोड़ें।
🔌 7.10 इलेक्ट्रिसिटी इस्तेमाल की सुरक्षा
- इलेक्ट्रिक डिफेक्ट्स की जानकारी देते समय लाइन को मेन स्विच से आइसोलेट देखा जाए और परमिट लिया जाए।
- हर मशीन में सही ऐंपेरेज के फ्यूज़ तार का इस्तेमाल हो; लोड को अर्थ किया जाए।
- ढीले कनेक्शन/नंगे तार सॉकेट में न डालें; पोर्टेबल टूल्स की अर्थ कनेक्शन जाँचें।
- टूटे प्लग/सॉकेट/स्विच/केबल खुद ठीक करने की कोशिश न करें, इलेक्ट्रिशियन से ठीक कराएँ।
🏗️ 7.11 क्रेन ऑपरेशन के दौरान सेफ्टी
- क्रेन की सेफ वर्किंग लोड (SWL) जानना जरूरी है; क्रेन क्षमता से ज्यादा लोड न उठाएँ।
- लोडिंग हुक SWL के मार्क्ड लोड सेंटर पर हो; लोड को घसीटें नहीं, क्रेन की मदद से लोडिंग हुक के नीचे लाएँ।
- क्रेन सिग्नल: Hoist, Lower, Jib Slew, Travel, Stop, Emergency Stop, Up/Down, Inching (Clinch & Unclinch Fingers) — मानक साइन लैंग्वेज।
7.12 गैस वेल्डिंग सेफ्टी, 7.13 लिफ्टिंग, 7.14 हैंड टूल्स8
🔥 7.12 गैस सिलेंडर व वेल्डिंग सेफ्टी इंस्ट्रक्शन
- सिलेंडर को कैरी करते समय वॉल्व बंद रखें; लीकेज होने पर तुरंत फोरमैन को सूचित करें।
- वेल्डिंग टॉर्च फ्लेम को माचिस/स्पार्क लाइटर से जलाएँ, नेकेड फ्लेम से नहीं।
- गॉगल्स, हैंड शील्ड, बॉडी व फीट प्रोटेक्शन पहनें; वेल्डर के हेल्पर भी साइड स्क्रीन/गॉगल्स इस्तेमाल करें।
- Fig 7.2 अनुसार क्रेन/हुक/शैकल में संभावित डिफेक्ट्स — Blow Holes, Opened Out Hooks, Crack at Neck, D-Shackle में डायमीटर की कमी — जाँची जाएँ।
🏋️ 7.13 मैनुअल लिफ्टिंग, स्टैकिंग, कैरींग सेफ्टी
- क्षमता से ज्यादा लोड न उठाएँ, मदद माँगें; नुकीली चीज़ें उठाते समय ग्लव्स पहनें।
- बैक न झुकाएँ, लोड शरीर के पास रखें; पैर आगे, घुटने मोड़ें, पीठ सीधी रखें और बाजू-टाँगों की मांसपेशियों से उठाएँ।
- ट्रॉली में: ओवरलोड न करें, पथ हमेशा दिखे इतना ही लोड करें, ट्रॉली को धकेलें (न खींचें), ढलान पर मदद लें।
- लोड समतल जमीन पर रखें; असमान हो तो लकड़ी के तख्तों पर रखें।
🔧 7.14 हैंड टूल्स इस्तेमाल की सुरक्षा
- हर काम के लिए सही टूल इस्तेमाल करें; टूटे/ढीले हैंडल वाले टूल्स न इस्तेमाल करें, बदलें।
- मशरूम्ड हेड वाले टूल्स रिकंडीशन न होने तक इस्तेमाल न करें।
- खराब/खुले स्पैनर फिसल सकते हैं, सही साइज़ का स्पैनर इस्तेमाल करें; रेंच में पुशिंग नहीं, पुलिंग इफर्ट लगाएँ।
- गलत इस्तेमाल न करें — स्पैनर की जगह हैमर, पुलर की जगह स्पैनर, चिज़ल की जगह स्क्रू ड्राइवर।
7.15 वर्कशॉप/गैरेज, 7.16 पोर्टेबल ग्राइंडर9
- वर्कशॉप/गैरेज में पर्याप्त लाइटिंग व हवा हो; मशीन के ऑपरेशन पॉइंट पर सूटेबल गार्ड लगे।
- पोर्टेबल इलेक्ट्रिकल टूल्स में 3-वायर एक्सटेंशन व 3-वे प्लग/आउटलेट हो; 2-वे आउटलेट पहले अर्थ किया जाए।
⚙️ 7.16 पोर्टेबल ग्राइंडर की सावधानियाँ
- बेंच/फ्लोर स्टैंड ग्राइंडर इस्तेमाल न करें अगर: गार्ड नहीं है, ग्राइंडर एंकर्ड नहीं है, वर्क रेस्ट 3mm से ज्यादा दूर है, व्हील डैमेज्ड है आदि।
- व्हील माउंट करने से पहले ग्राइंडर की रेटेड स्पीड जाँचें; व्हील रेस्ट/टंग गार्ड चलते हुए एडजस्ट न करें।
- व्हील को फुल स्पीड डेवलप करने दें; ग्राइंडर के सामने खड़े न हों जब वह पहली बार शुरू हो रहा हो।
- ग्राइंडिंग व्हील मशीनें अनअटेंडेड होने पर बंद कर दें।
7.17 वेल्डिंग/बर्निंग/कटिंग, 7.18 पेंटिंग10
🔩 7.17 वेल्डिंग, बर्निंग एंड कटिंग
- वेल्डिंग/कटिंग एलिवेटेड जगह पर करते समय ग्रीस, ऑइल, पेट्रोलियम से मुक्त क्षेत्र रखा जाए।
- वेल्डर व हेल्पर सूटेबल गॉगल्स/हेलमेट/गॉन्टलेट व क्लियर गॉगल्स पहनें।
- वेल्डिंग केबल अनब्रोकन इंसुलेशन वाली हो; कनेक्शन वॉटरप्रूफ हों।
- गैस वेल्डिंग में फ्लेमेबल स्टोरेज दूर रखें; कंटेनर सोडा/पानी से थोरो वॉश हों।
- वेल्डिंग करंट लो वोल्टेज पर भी खतरनाक हो सकता है — इलेक्ट्रोड/लाइव पार्ट्स से संपर्क से बचें।
🎨 7.18 पेंटिंग ऑफ इक्विपमेंट
- पेंट/वार्निश के पैकेज एक्सेसिव हीट, स्पार्क, फ्लेम या सूरज की रोशनी से दूर, कसकर बंद रखे जाएँ।
- फ्लेमेबल पेंट के पास CO₂/CTC एक्सटिंग्विशर उपलब्ध रहे; खाना पेंट फ्यूम से दूर हो।
- लाइव इलेक्ट्रिकल अपैरेटस के पास पेंटिंग सिर्फ परमिट-टू-वर्क के तहत सक्षम व्यक्ति करें।
- स्प्रे-पेंटिंग में इलेक्ट्रिकल अपैरेटस डेड रहे; 8 मी के अंदर धूम्रपान वर्जित; स्नग-फिट क्लोदिंग व गॉगल्स पहनें।
7.19 कंप्रेस्ड सिस्टम व सिलेंडर हैंडलिंग सेफ्टी11
- प्रेशर वेसल को डिज़ाइन प्रेशर से ज्यादा प्रेशराइज़ न करें; इस्तेमाल से पहले व मेजर रिपेयर के बाद इंस्पेक्ट करें।
- सिलेंडर वेल-वेंटिलेटेड जगह में स्टोर करें, एक्सट्रीम टेम्परेचर/फिजिकल डैमेज से बचाएँ।
- सभी सिलेंडर पर उनके कंटेंट का लेबल हो; बिना लेबल सिलेंडर इस्तेमाल न करें, कलर कोड फॉलो हो।
- फ्लेमेबल गैस/ऑक्सीजन स्टोरेज से 15 मीटर के अंदर धूम्रपान वर्जित।
- ऑक्सीजन, एसीटिलीन व अन्य फ्यूल गैस सिलेंडर हमेशा सीधा (upright) रखें।
- सिलेंडर क्रेन/हॉइस्ट/डेरिक से ही ट्रांसपोर्ट हों, कभी स्लिंग/चेन/मैग्नेट से नहीं।
- कंप्रेस्ड एयर की जगह ऑक्सीजन का इस्तेमाल निषिद्ध; ऑक्सीजन सिलेंडर के पास तेल/ग्रीस न रखें।
7.20 पर्सनल सेफ्टी (हेड से लेकर फुट तक PPE)12
- पर्सनल सेफ्टी योजना बनाते समय दुर्घटनाओं को वर्गीकृत करना जरूरी है — गिरना, टकराना, फँसना, तापमान/रेडिएशन एक्सपोज़र।
🪖 7.20.1 हेड प्रोटेक्शन
- गिरती वस्तुओं के इम्पैक्ट व स्थिर चीज़ों से टकराने से बचाव के लिए हेड गियर के 2 मुख्य कार्य होते हैं।
- हेडगियर सिलेक्ट करते समय: पॉलिसी बनाएँ, सही टाइप चुनें, कर्मचारियों को अवेयर करें, मेंटेनेंस सुनिश्चित करें।
👓 7.20.2 आई प्रोटेक्शन
- उड़ते कण, ग्लेयर, फ्लैश, आर्क लाइट से बचाव के लिए स्पेक्टेकल्स, गॉगल्स (साइड शील्ड सहित), फेस शील्ड इस्तेमाल हों।
- वेल्डर्स को स्पेशल टाइप गॉगल्स इस्तेमाल करने चाहिए।
😷 7.20.3 फेस प्रोटेक्शन
- मेश शील्ड, फेस शील्ड, रेडिएशन शील्ड हीट व केमिकल स्प्लैश से चेहरे की सुरक्षा करते हैं।
😮💨 7.20.4 रेस्पिरेटरी प्रोटेक्शन
- तीन प्रकार: (i) ऑक्सीजन/एयर फेड (ii) फिल्टर रेस्पिरेटर (iii) डिस्पोज़ेबल रेस्पिरेटर।
- ऑक्सीजन कम होने पर सेल्फ-कंटेन्ड ब्रीदिंग अपैरेटस (SCBA) या फुल फेस मास्क इस्तेमाल करें।
👂 7.20.5 हियरिंग प्रोटेक्शन
- 85 dBA से ऊपर नॉइज़ पर हियरिंग प्रोटेक्शन जरूरी; इयर प्लग व डिफेंडर्स (ईयर मफ) प्रमुख प्रकार हैं।
🧤 7.20.6 हैंड प्रोटेक्शन
- केमिकल, हीट/फायर, कोल्ड, मैकेनिकल (अब्रेज़न/कट), इलेक्ट्रिकल व माइक्रो-ऑर्गैनिज़्म हैज़र्ड्स के अनुसार अलग-अलग ग्लव्स।
👢 7.20.7 फुट प्रोटेक्शन
- टो इम्पैक्ट स्टील प्रोटेक्शन, हीट रेज़िस्टेंट सोल, एसिड/अल्कली रेज़िस्टेंट सोल, एंटी-स्लिप, ऑइल रेज़िस्टेंट, इलेक्ट्रिकल शॉक रेज़िस्टेंट।
🥼 7.20.8 प्रोटेक्टिव क्लोदिंग
- हैज़र्ड के अनुसार स्पेसिफिक प्रोटेक्शन दे, वज़न में हल्की हो, मूवमेंट प्रतिबंधित न करे और खुद हैज़र्ड न पैदा करे।
🪢 7.20.9 फॉलिंग से प्रोटेक्शन
- दो प्रकार: (i) फुल बॉडी/चेस्ट हार्नेस (ii) बेल्ट (रेस्ट्रेनिंग/पोल बेल्ट)।
- एक मीटर के अंदर एज से काम न हो पाने पर लैन्यार्ड सहित फुल बॉडी हार्नेस अनिवार्य।
- हार्नेस प्रोटेक्टिव डिवाइस है, बेल्ट सिर्फ रेस्ट्रेनिंग डिवाइस — हार्नेस को हमेशा प्राथमिकता दें।
🧯 7.20.10 फायर सूट्स
- फायर फाइटिंग में उच्च मानकों वाले सूट इस्तेमाल हों; रेडिएशन प्रोटेक्शन के लिए प्रॉक्सिमिटी/एंट्री सूट इस्तेमाल हों।
7.21 स्लिप्स, ट्रिप्स एंड फॉल्स, 7.22 फॉल एक्सिडेंट कम करना13
- स्लिप, ट्रिप और फॉल इंडस्ट्री में गंभीर चोटों का प्रमुख कारण हैं; इनसे जुड़ी लागत भी बहुत ज्यादा होती है।
- प्रोटेक्शन को सेकंडरी विकल्प माना जाए — पहले हैज़र्ड को स्रोत पर ही खत्म करने की कोशिश हो।
- फॉल से फिजिकल व साइकोलॉजिकल दोनों तरह का नुकसान होता है — फ्रैक्चर, हॉस्पिटलाइज़ेशन के साथ-साथ फिर से गिरने का डर भी।
- फॉल का मूल कारण पोस्ट्यूरल कंट्रोल में गिरावट है, जो उम्र और नर्वस सिस्टम में बदलाव से जुड़ी है।
- सीढ़ी/कर्ब का रीडिज़ाइन, हैंड रेलिंग और वॉकिंग एड्स से फॉल रोके जा सकते हैं।
- स्लिप-रेज़िस्टेंट शूज़ व फ्लोरिंग, शू-फ्लोर फ्रिक्शन बढ़ाकर सुरक्षा बढ़ाते हैं। पोस्टर वॉर्निंग व वर्कर ट्रेनिंग भी जरूरी है।
7.23 परमिट टू वर्क (PTW) सिस्टम14
- PTW वहाँ लागू होता है जहाँ मशीनरी/प्लांट, वेसल या कन्फाइंड स्पेस में काम के दौरान अनधिकृत स्टार्टिंग, फ्लेमेबल/टॉक्सिक फ्यूम्स, ऑक्सीजन की कमी या इलेक्ट्रिक शॉक का जोखिम हो।
📋 जरूरी बातें
- सभी इक्विपमेंट, सर्विस में हों या उपलब्ध, ऑपरेशन सेक्शन की कस्टडी में रहते हैं।
- मेंटेनेंस सेक्शन को इक्विपमेंट/पाइपलाइन/वॉल्व पर काम के लिए ऑपरेशन सेक्शन से क्लियरेंस माँगनी होगी।
- ऑपरेशन सेक्शन इक्विपमेंट को आइसोलेट कर सही टैग लगाता है ताकि वर्कर किसी हैज़र्ड में न आएँ।
- स्टीम/एयर/वॉटर लाइन या वेसल के आइसोलेशन की पुष्टि क्लियरेंस देने से पहले जरूर की जाए।
📝 7.23.1 PTW जारी करने के चरण
- इमरजेंसी को छोड़कर, PTW सिर्फ मेंटेनेंस डिपार्टमेंट से आइसोलेशन रिक्वेस्ट पर जारी हो।
- सभी कॉपी रिसीट व क्लियरेंस पर शिफ्ट चार्ज इंजीनियर/यूनिट इंचार्ज की मौजूदगी में साइन हों।
- कॉलम टैग्स जिस व्यक्ति ने आइसोलेशन व टैगिंग की है वह "as applied" के तहत साइन व समय दर्ज करे।
- इलेक्ट्रिकल ब्लॉकिंग जरूरी हो तो लोकल परमिट इलेक्ट्रिकल साइड को दिया जाए।
- जब भी काम स्थायी रूप से एक व्यक्ति से दूसरे को ट्रांसफर हो, परमिट कैंसिल कर दोबारा जारी हो; PTW में संशोधन (amendment) निषिद्ध है।
- मीडियम/लो वोल्टेज इक्विपमेंट पर काम तभी हो जब वे डेड हों; इलेक्ट्रिकल परमिट में कम से कम दो आइसोलेशन जरूरी।
- "Do Not Operate" कॉशन बोर्ड PTW के तहत आइटम्स पर लगाया जाए।
✅ 7.23.2 PTW क्लियर करना
- मेंटेनेंस से PTW वापस आने पर यूनिट/शिफ्ट चार्ज परमिट को असिस्टेंट कंट्रोलर/ऑपरेटर को टैग हटाने व ट्रायल के लिए सौंपे।
- ट्रायल मेंटेनेंस के प्रतिनिधि की उपस्थिति में हो; यूनिट/शिफ्ट चार्ज अंत में परमिट क्लोज़ कर ऑपरेशन सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर भेजे।
- टैग तालिबद्ध कर नष्ट किए जाएँ; हर टैग सिर्फ एक बार इस्तेमाल हो। बिना नंबर/गलत नंबर वाले टैग दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
👤 7.23.3 प्राप्तकर्ता (Recipient) की जिम्मेदारी
- PTW जारी होने तक किसी भी इक्विपमेंट पर काम शुरू न करें; PTW को ध्यान से पढ़ें और समझें कि प्लान सुरक्षित घोषित है।
- हर शिफ्ट/नए काम की शुरुआत से पहले सुनिश्चित हो कि व्यक्ति उसी काम के लिए अलॉट PTW ड्रा करे।
- इलेक्ट्रिकल परमिट में सुपरवाइज़र खुद काम करें या लगातार निगरानी करें, तभी परमिट ड्रा कर सकते हैं।
7.24 पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (PPE) — Table 7.115
- PPE का प्रभावी इस्तेमाल निर्भर करता है: (i) हैज़र्ड की पहचान (ii) सही कॉन्फिगरेशन चुनना (iii) उसे साफ व अच्छी स्थिति में रखना (iv) वर्कर को ट्रेनिंग देना (v) इस्तेमाल कड़ाई से लागू करना।
| प्रोटेक्शन | PPE | IS स्टैंडर्ड | किससे सुरक्षा |
|---|---|---|---|
| बॉडी | कॉटन यूनिफॉर्म | IS:5915 | भाप, गर्म तेल, केमिकल, अल्कली |
| बॉडी | रबर एप्रन | IS:4501 | एसिड/अल्कली/सॉल्वेंट स्प्लैश |
| हेड | सेफ्टी हेलमेट | IS:2925 | गिरती वस्तु, टकराव |
| आँखें | आई प्रोटेक्टर | IS:5983 | उड़ती वस्तु, स्प्लैश |
| आँखें | सेफ्टी गॉगल्स | IS:7524 | वेल्डिंग, कटिंग, ग्राइंडिंग |
| फेस | फेस शील्ड | IS:8521 | केमिकल स्प्लैश |
| फेस | वेल्डिंग शील्ड | — | हॉट रेज़, UV रेज़, ग्राइंडिंग स्पार्क |
| हाथ | इलेक्ट्रिक शॉक-प्रूफ ग्लव्स | IS:4770 | इलेक्ट्रिक शॉक, अब्रेज़न |
| हाथ | PVC/रबर ग्लव्स | IS:6110/2573 | एसिड-अल्कली/ऑइल-सॉल्वेंट |
| हाथ | क्रोम लेदर ग्लव्स | — | अब्रेज़न (रोप/चेन/स्पैनर) |
| पैर | सेफ्टी शूज़/गम बूट्स | IS:5677/3738 | गिरती वस्तु, मडी लैंड |
| रेस्पिरेटरी | कैनिस्टर/डस्ट मास्क/SCBA | IS:8523/9473/10245 | टॉक्सिक गैस, डस्ट |
| कान | ईयर प्लग/मफ/कैनाल कैप | IS:9167/6229 | हाई नॉइज़ एरिया |
| गिरना | सेफ्टी हार्नेस बेल्ट | IS:3521 | ऊँचाई से गिरना (1.5मी से ऊपर) |
7.25 VDT से जुड़े हेल्थ हैज़र्ड्स16
- वीडियो डिस्प्ले टर्मिनल (VDT) पर लगातार काम करना कई तरह से हानिकारक हो सकता है:
- इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड का हेल्थ इफेक्ट (LCD, CRT जितने खतरनाक नहीं)।
- क्रॉनिक आई प्रॉब्लम्स, रिपिटिटिव स्ट्रेन इंजरी, प्रिंटर नॉइज़।
- फिजिकल इनएक्टिविटी से जुड़ी हेल्थ समस्याएँ और लगातार काम से जुड़ा स्ट्रेस।
- सही रिकमेंडेशन का पालन कर लंबे समय CRT पर काम करने के दुष्प्रभावों को दूर किया जा सकता है।
❓ सॉल्व्ड क्वेश्चंस (Solved Questions)
- अच्छी हाउसकीपिंग सुनिश्चित करने के लिए क्या सावधानियाँ रखें?
वॉकवे/एस्लि/फायर एस्केप बाधामुक्त रखें, तेल-पानी की फिसलन तुरंत साफ करें, टूल्स-मटेरियल सही जगह रखें, कीलों वाले बोर्ड सावधानी से रखें।
- स्टोरिंग व पाइलिंग मटेरियल में ध्यान रखने योग्य बातें क्या हैं?
स्टैक/पाइल पलटने से सुरक्षित हों, वज़न समान रूप से बंटा हो, बैरल/ड्रम सुरक्षित ब्लॉक कर स्टोर हों।
- लिफ्टिंग, कैरींग व होइस्टिंग के दौरान क्या सावधानियाँ जरूरी हैं?
सही लिफ्टिंग मेथड अपनाएँ (लेग/आर्म मसल्स से, बैक से नहीं); चेन/स्लिंग इस्तेमाल से पहले जाँचें; सस्पेंडेड लोड के नीचे कोई न खड़ा हो।
- टूल्स के गलत/दोषपूर्ण इस्तेमाल से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए क्या सावधानियाँ चाहिए?
मशरूम्ड हेड टूल्स रिकंडीशन बिना इस्तेमाल न करें; दोषपूर्ण रेंच/स्पैनर हटाएँ; पोर्टेबल टूल्स में 3-वायर ग्राउंडिंग हो।
- वर्कशॉप में मेटल के साथ काम करते समय क्या सावधानियाँ जरूरी हैं?
फ्लोर एरिया ग्रीस/तेल/स्क्रैप से मुक्त रखें; मशीनरी को टूल्स/रैग्स/स्क्रैप से मुक्त रखें।
- वेल्डिंग व कटिंग ऑपरेशन के दौरान सामान्य सावधानियाँ क्या हैं?
सिर्फ अधिकृत व्यक्ति ही ऑपरेशन करें; ड्रम/बैरल/कन्फाइंड स्पेस में बिना वेंटिंग-टेस्टिंग वेल्डिंग न करें; शर्ट कॉलर बंद व स्लीव्स रोल्ड-फास्टेंड हों।
- AC वेल्डिंग व कटिंग के दौरान जरूरी सावधानियाँ क्या हैं?
वेल्डिंग जनरेटर के टर्मिनल फ्रेम से बॉन्डेड/ग्राउंडेड न हों; प्रेशराइज़्ड/फ्लेमेबल पाइपलाइन को ग्राउंड रिटर्न सर्किट के लिए इस्तेमाल न करें।
- गैस वेल्डिंग व कटिंग ऑपरेशन के दौरान क्या सेफ्टी उपाय जरूरी हैं?
लंच ब्रेक व शिफ्ट खत्म होने पर टॉर्च-होज़ हटाएँ, वॉल्व बंद करें, रेगुलेटर बैक-ऑफ करें; कंप्रेस्ड सिलेंडर स्पार्क/हॉट स्लैग से दूर रखें।
- कंप्रेस्ड एयर, एब्रेसिव ब्लास्टिंग व लैबोरेटरी में जनरल केयर के लिए कौन सी सेफ्टी फीचर बताएँ?
(a) कंप्रेस्ड एयर (b) एक्सकेवेशन (c) एब्रेसिव ब्लास्टिंग (d) जनरल केयर इन लैबोरेटरीज़ — चारों के अलग-अलग स्पेसिफिक उपाय दिए गए हैं (जैसे 2 एटमॉस्फियर से ज्यादा प्रेशर पर क्लीनिंग न करें, 8 मीटर से ज्यादा गहरी एक्सकेवेशन को शोर/ब्रेस्ड करें आदि)।
- टास्क सेफली व कम्फर्टेबली परफॉर्म करने की वर्कर की क्षमता किन फैक्टर्स पर निर्भर करती है?
(i) वर्कर कैरेक्टरिस्टिक्स — बॉडी स्ट्रक्चर, कार्डियोवैस्कुलर/रेस्पिरेटरी सिस्टम, विज़ुअल एक्युटी, डाइट व मेटाबॉलिज़्म। (ii) टास्क कैरेक्टरिस्टिक्स — वर्क एलिमेंट्स की कॉम्प्लेक्सिटी। (iii) टास्क एनवायरनमेंट — टेम्परेचर, ह्यूमिडिटी, नॉइज़, वाइब्रेशन। (iv) मशीन साइकल टाइम। (v) टूल्स व एक्सेसरीज़ का डिज़ाइन। (vi) वर्कप्लेस की अरेंजमेंट।
📝 सारांश (Summary)
सुरक्षित कार्य पद्धतियाँ हाउसकीपिंग, वर्कप्लेस सेफ्टी, हैज़र्ड रिकॉग्निशन, फायर सेफ्टी, PPE, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, क्रेन-वेल्डिंग-गैस सिलेंडर हैंडलिंग, परमिट टू वर्क सिस्टम और पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट को मिलाकर बनती हैं। इनका उद्देश्य दुर्घटनाओं को रोकना और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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